Parvati Stotram

भगवान शिव का सुपरहिट भजन - भागीरथ करे पुकार भोले बाबा भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

98 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भगवान शिव का यह सुपरहिट भजन "भागीरथ करे पुकार" देवादिदेव महादेव की अनंत कृपा और उनके कल्याणकारी स्वरूप का एक अद्भुत संगम है। यह भजन न केवल शिव की स्तुति है, बल्कि एक भक्त की उस व्याकुलता को भी दर्शाता है जो सांसारिक दुखों से मुक्ति पाकर शिव के चरणों में आश्रय ढूंढती है। पौराणिक संदर्भों में राजा भागीरथ द्वारा गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए की गई कठोर तपस्या और शिव द्वारा गंगा को अपनी जटाओं में धारण करने की कथा इस भजन का मूल आधार है। यह भजन साधक को वैराग्य, समर्पण और शिव के प्रति अटूट विश्वास की प्रेरणा देता है। शिव का अर्थ ही 'कल्याण' है, और इस भजन का श्रवण मन को शांति और आत्मा को शिवत्व की ओर ले जाने वाला है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

भागीरथ करे पुकार, ओ भोले बाबा आ जाओ,
जटाओं से गंगा की धारा, तुम धरती पर ले आओ।
भागीरथ करे पुकार, ओ भोले बाबा आ जाओ॥

भस्म रमाए बैठे हो तुम, कैलाश पर्वत की चोटी पर,
डमरू की गूँज सुनाओ प्रभु, इस सूखी हुई धरती पर।
प्यासी है ये धरा तुम्हारी, अमृत रस बरसाओ,
भागीरथ करे पुकार, ओ भोले बाबा आ जाओ॥

विष का प्याला पीकर तुमने, नीलकंठ नाम पाया है,
सृष्टि के रक्षक हो तुम, ये जग सारा जानता है।
दुखियों के तुम दुख हरो, अब तो दर्शन दिखाओ,
भागीरथ करे पुकार, ओ भोले बाबा आ जाओ॥

नंदी की सवारी तुम्हारी, त्रिशूल हाथ में सोहे है,
तुम्हारी एक झलक पाने को, ये मन व्याकुल होए है।
भक्ति में डूबे हम सब, अब तो गले लगाओ,
भागीरथ करे पुकार, ओ भोले बाबा आ जाओ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन में भक्त राजा भागीरथ के माध्यम से भगवान शिव से प्रार्थना कर रहा है। जिस प्रकार भागीरथ ने अपनी तपस्या से गंगा को पृथ्वी पर लाने का संकल्प लिया था, उसी प्रकार भक्त भी अपने जीवन के दुखों को मिटाने के लिए शिव की कृपा रूपी गंगा की धारा चाहता है। भजन का भावार्थ यह है कि शिव ही वह परम शक्ति हैं जो विष (सांसारिक कष्ट) को पीकर अमृत (शांति) प्रदान कर सकते हैं। 'भस्म' का प्रतीक यह दर्शाता है कि अंततः सब कुछ शिव में विलीन हो जाना है। यह भजन साधक को अहंकार त्यागकर शिव के शरणागत होने का संदेश देता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन शिव के 'गंगाधर' स्वरूप को समर्पित है। शिव पुराण के अनुसार, शिव की भक्ति से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस भजन का गायन विशेष रूप से सावन मास, महाशिवरात्रि और सोमवार के व्रत के दौरान अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह भजन मन की एकाग्रता बढ़ाने और ध्यान की अवस्था में प्रवेश करने में सहायक है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को ब्रह्म मुहूर्त में या प्रदोष काल के समय गाना सर्वोत्तम है। इसे गाते समय मन में शिव के ध्यानमग्न स्वरूप की कल्पना करें। यदि संभव हो, तो शिवलिंग पर जल या बेलपत्र अर्पित करते समय इसका संकीर्तन करें। यह भजन सत्संग, मंदिर के कार्यक्रमों और व्यक्तिगत साधना के लिए उपयुक्त है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
भागीरथ सूर्यवंशी राजा गंगा को पृथ्वी पर लाने वाले तपस्वी
भस्म राख शिव का वैराग्य और नश्वरता का प्रतीक
नीलकंठ नीले गले वाले विषपान करने के कारण शिव का नाम
त्रिशूल तीन शूल सत्व, रज, तम गुणों का नियंत्रण

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"भागीरथ करे पुकार...": भक्त अपनी प्रार्थना को राजा भागीरथ के संकल्प से जोड़ रहा है, जो असंभव को संभव करने का प्रतीक है।
"विष का प्याला पीकर...": यह शिव की करुणा को दर्शाता है कि वे जगत के कल्याण के लिए स्वयं कष्ट सहते हैं।
"नंदी की सवारी...": यह शिव के सौम्य और शक्तिशाली स्वरूप का वर्णन है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करना अत्यंत प्रभावशाली होता है। साथ ही, शिव पंचाक्षरी स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम भागीरथ करे पुकार
आराध्य देव भगवान शिव
मुख्य भाव समर्पण एवं विनय
उपयुक्त अवसर सोमवार व्रत, महाशिवरात्रि, सावन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • प्रश्न: इस भजन को गाने से क्या लाभ होता है?
    उत्तर: मन की शांति और शिव की कृपा की प्राप्ति होती है।
  • प्रश्न: क्या इसे घर पर गाया जा सकता है?
    उत्तर: हाँ, इसे घर पर पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।
  • प्रश्न: भागीरथ कौन थे?
    उत्तर: भागीरथ एक महान राजा थे जिन्होंने गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए तपस्या की थी।
  • प्रश्न: शिव को भोले बाबा क्यों कहते हैं?
    उत्तर: क्योंकि वे बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले और सरल हृदय वाले हैं।
  • प्रश्न: क्या इस भजन के लिए किसी विशेष वाद्य यंत्र की आवश्यकता है?
    उत्तर: नहीं, भाव ही सबसे बड़ा वाद्य है, लेकिन ढोलक या मंजीरे का प्रयोग किया जा सकता है।
  • प्रश्न: क्या यह भजन बच्चों को सिखाया जा सकता है?
    उत्तर: हाँ, यह बच्चों में भक्ति संस्कार डालने के लिए उत्तम है।
  • प्रश्न: शिव भक्ति का मुख्य संदेश क्या है?
    उत्तर: अहंकार का त्याग और ईश्वर में पूर्ण समर्पण।
  • प्रश्न: क्या सोमवार को विशेष पूजा करनी चाहिए?
    उत्तर: हाँ, सोमवार शिव का प्रिय दिन है, इस दिन जल और बेलपत्र अवश्य चढ़ाएं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह भजन शिव भक्ति परंपरा के लोक गीतों पर आधारित है। संदर्भ हेतु शिव पुराण एवं विभिन्न भक्ति संकीर्तन ग्रंथों का सहारा लिया गया है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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