Parvati Stotram

Pahile Pahil Chhathi Maiya | Sharda Sinha | Chhath Song

72 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

शीर्षक एवं परिचय | Title & Overview

"पहिले पहल छथि मइया" (Pahile Pahil Chhathi Maiya) भारतीय संगीत जगत की स्वर कोकिला, भारत रत्न पद्म विभूषण से सम्मानित शर्दा सिन्हा (Sharda Sinha) द्वारा गाया गया एक अत्यंत लोकप्रिय, भावपूर्ण और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध लोकगीत है। यह गीत केवल एक भजन नहीं है, बल्कि यह बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के महाव्रत छठ पूजा (Chhath Puja) की आत्मा और जीवंत पहचान बन चुका है। इस गीत के माध्यम से माता छठी की महिमा, सूर्य उपासना के महाव्रत की पवित्रता और एक व्रतधारी की मनोभावनाओं का ऐसा सजीव चित्रण किया गया है, जो हर सनातन धर्मी के हृदय को झंकृत कर देता है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले इस महापर्व पर जब यह गीत गूंजता है, तो पूरा वातावरण छठी मइया की भक्ति और लोक आस्था के रंगों में सराबोर हो जाता है।

छठ महापर्व स्वच्छता, अनुशासन, प्रकृति प्रेम और अटूट संकल्प का प्रतीक है। शारदा सिन्हा की सुरीली और अनूठी आवाज में यह गीत इस पर्व की दिव्यता को कई गुना बढ़ा देता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय गीत के संपूर्ण बोल, इसके गहरे अर्थ, सांस्कृतिक महत्व, लोक परंपराओं और इससे जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

स्थाई (मुखड़ा):

पहिले पहल छथि मइया, कइली तोहर बरतिया,
करिहें माफ गलती मोरा मइया, भूलचुक गलती तोहरा से भेलओ मइया...
सुनू सुनू अर्जी हमार हे छथि मइया!

अंतरा 1:

बाट जोहेँ घाट जोहेँ, दीया धइले सासु मइया,
दीननाथ के अउरी दुलार, सभे मिली करतिया...
पहिले पहल छथि मइया, कइली तोहर बरतिया...

अंतरा 2:

सोनवा के सुरजमल, बांहि में खोटवा मइया,
केकरा हाथ सोभे लाउआ रे मइया, केकरा हाथ दउरवा...
सुनू सुनू अर्जी हमार हे छथि मइया!

अंतरा 3:

उगे ना सुरजमल, झुकि झुकि अरघिया लेहम,
केरवे के पात पर उगलन सुरजमल, झांझी रे फलवा...
पहिले पहल छथि मइया, कइली तोहर बरतिया...

अंतिम चरण / समापन:

घाट सजे नटखट बालू, दीप जले झिलमिल,
शारदा गावे गीत मइया, चरनन में मन मिल...
जय छठी मइया! जय सूर्य देव!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

शारदा सिन्हा द्वारा गाए गए इस पारंपरिक मैथिली-भोजपुरी गीत का भाव अत्यंत कोमल और मार्मिक है। आइए इस गीत के विभिन्न चरणों का विस्तृत अर्थ समझते हैं:

मुखड़ा का भाव:

व्रतधारी महिला या साधक छठी मइया को संबोधित करते हुए अत्यंत विनम्र भाव से कहती है कि हे मइया! मैंने जीवन में पहली बार आपका यह अत्यंत कठिन और पवित्र व्रत आरंभ किया है। यदि पूजा-पाठ या अनुष्ठान के दौरान मुझसे कोई अज्ञानतावश भूल या त्रुटि हो गई हो, तो एक माता की तरह मेरी उन गलतियों को क्षमा कर देना। मेरी इस प्रार्थना को स्वीकार करो।

अन्तरियों का भाव:

गीत में आगे परिवार और समाज की सहभागिता का सुंदर चित्रण है। परिवार के बुजुर्ग, सासु-मइया और सभी सगे-सम्बंदी नदी के घाट पर सूर्य देव (दीननाथ) और छठी मइया की आराधना के लिए उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं। सोने या चांदी के सूर्य देव की प्रतिमा, बांस की टोकरी (दउरा) में सजे ठेकुआ, फल और कंदमूल की सजावट का वर्णन लोक संस्कृति की जीवंत झांकी प्रस्तुत करता है। नदी के जल में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने का विधान इस गीत को आध्यात्मिक गहराई प्रदान करता है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना शरणागति, विनय, पारिवारिक समरसता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता है। छठ महापर्व भारतीय सनातन संस्कृति का वह अनोखा पर्व है जिसमें उगते ही नहीं, बल्कि डूबते सूर्य की भी पूजा की जाती है। यह गीत मनुष्य को सिखाता है कि जीवन की शुरुआत चाहे जितनी कठिन हो, यदि माता (प्रकृति और परम चेतना) का आशीर्वाद प्राप्त हो जाए, तो सभी कठिनाइयां स्वतः दूर हो जाती हैं। इसमें नारी शक्ति, पारिवारिक मूल्यों और लोक आस्था का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम (Song Name) Pahile Pahil Chhathi Maiya (पहिले पहल छथि मइया)
गायिका (Singer) पद्म विभूषण डॉ. शर्दा सिन्हा (Dr. Sharda Sinha)
शैली / विधा (Genre) पारंपरिक लोकगीत / छठ गीत (Folk Devotional Song)
भाषा (Language) मैथिली / भोजपुरी / अंगिका (Regional Folk Dialect)
संबंधित पर्व (Related Festival) छठ महापर्व (Chhath Puja / Surya Sashti)
मुख्य विषय (Main Theme) सूर्य उपासना, छठी मइया की महिमा और क्षमा प्रार्थना

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस अमर गीत को अपनी सुरीली और मर्मस्पर्शी आवाज से जीवंत करने वाली शारदा सिन्हा जी को बिहार की स्वर कोकिला कहा जाता है। उनके बिना छठ पर्व की कल्पना भी अधूरी मानी जाती है। उन्होंने लोकगीतों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। उनके द्वारा गाए गए विवाह गीत, सोहर और विशेष रूप से छठ गीत आज हर घर की पहचान बन चुके हैं। उनकी गायकी में एक मां की ममता, पूर्वांचल की माटी की सोंधी खुशबू और ईश्वर के प्रति अगाध श्रद्धा स्पष्ट झलकती है।

संबंधित पर्व और भक्ति के अन्य रूपों के बारे में जानने के लिए आप हमारे अन्य लेख जैसे श्री कृष्ण स्तोत्र और ओम जय जगदीश हरे आरती भी पढ़ सकते हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Simple Meaning) संदर्भ (Context)
छथि मइया षष्ठी माता / छठी मईया छठ पर्व की अधिष्ठात्री देवी
बरतिया व्रत / अनुष्ठान छठ का कठिन उपवास
दीननाथ सूर्य भगवान समस्त जगत के पालनहार सूर्य देव
दउरवा / दउरा बांस की बनी टोकरी पूजा की सामग्री सजाने का पात्र
अरघिया अर्घ्य देना सूर्य देव को जल और दूध अर्पित करना
केरवे के पात केले का पत्ता जिस पर प्रसाद रखकर भगवान को अर्पित किया जाता है

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, सूर्य और जल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महान उत्सव है। "पहिले पहल छथि मइया" गीत इस सांस्कृतिक धरोहर का सबसे मजबूत स्तंभ है। यह गीत नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति और पारंपरिक संस्कारों से जोड़ता है। जब महिलाएं नदी के तट पर इस गीत को गाती हैं, तो यह सामूहिक चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है। सूर्य उपासना से आरोग्यता, तेज और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है, जिसका वर्णन इस गीत की पंक्तियों में निहित है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

इस पावन गीत और छठ पर्व की परंपरा से हमें जीवन के कई मूल्यवान पाठ सीखने को मिलते हैं:

  • विनम्रता और क्षमाशीलता: प्रथम बार व्रत करने पर भगवान से अपनी त्रुटियों के लिए क्षमा मांगना यह सिखाता है कि साधक को हमेशा अहंरहित और विनम्र रहना चाहिए।
  • पारिवारिक सहयोग: छठ महापर्व अकेले संभव नहीं है; इसमें पूरे परिवार का सहयोग और प्रेम झलकता है।
  • प्रकृति के प्रति सम्मान: सूर्य, जल, नदी और पेड़-पौधों को ईश्वर मानकर उनकी पूजा करना पर्यावरण संरक्षण का सबसे बड़ा संदेश है।
  • कठिन परिस्थितियों में दृढ़ता: 36 घंटे का निर्जला व्रत मनुष्य की मानसिक और आत्मिक शक्ति को मजबूत करता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक यानी नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के दौरान घर-घर, गलियों और छठी घाटों पर बजाया जाता है। इसके अलावा, लोक उत्सवों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रवासी भारतीयों द्वारा अपने गृह राज्य से दूर विदेशों में भी छठ पर्व के आयोजन के समय इस गीत को विशेष रूप से सुना और गाया जाता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

गीत शीर्षक Pahile Pahil Chhathi Maiya
प्रसिद्ध गायिका डॉ. शारदा सिन्हा
मुख्य पर्व छठ पूजा (सूर्य षष्ठी व्रत)
सांस्कृतिक क्षेत्र बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश
मुख्य संदेश भक्ति, मातृत्व, प्रकृति वंदना और क्षमा
संगीत शैली लोक संगीत / भक्ति रस

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

"पहिले पहल छथि मइया" गीत किसने गाया है?

यह प्रसिद्ध गीत भारत रत्न से सम्मानित स्वर कोकिला पद्म विभूषण डॉ. शारदा सिन्हा जी ने गाया है।

यह गीत किस अवसर पर गाया जाता है?

यह गीत मुख्य रूप से महाव्रत छठ पूजा के दौरान संध्या और सुबह के अर्घ्य के समय तथा घरों में पूजा की तैयारियों के दौरान गाया जाता है।

छठी मइया कौन हैं?

सनातन संस्कृति में छठी मइया को सूर्य देव की बहन तथा प्रकृति और संतान की रक्षा करने वाली देवी माना गया है।

छठ महापर्व मुख्य रूप से कहां मनाया जाता है?

यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, साथ ही अब यह वैश्विक स्तर पर मनाया जाने लगा है।

इस गीत का मुख्य संदेश क्या है?

इस गीत का मुख्य संदेश छठी मइया के प्रति अनन्य भक्ति, प्रथम बार व्रत रखने पर अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा प्रार्थना और पारिवारिक सहयोग है।

छठ पूजा में सूर्य देव की पूजा क्यों की जाती है?

सूर्य देव ऊर्जा, आरोग्यता और जीवन के प्रत्यक्ष देवता हैं। उनकी कृपा से समस्त संसार का जीवन संचालित होता है, इसलिए उन्हें अर्घ्य दिया जाता है।

क्या यह गीत अन्य गायकों ने भी गाया है?

हां, कई अन्य कलाकारों ने भी इसे गाया है, लेकिन शारदा सिन्हा जी की आवाज में जो दिव्यता और लोक संवेदना है, वह अद्वितीय है।

छठ पूजा कितने दिनों तक चलती है?

छठ पूजा कुल चार दिनों की होती है—नहाय-खाय, खरना, लोहंडा/संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य (पारण)।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख लोक आस्था, संस्कृति और पारंपरिक संगीत के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसमें शारदा सिन्हा जी के गायन की महत्ता और छठ पर्व की परंपराओं का प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • भारतीय लोक संगीत परंपरा और छठ पर्व के सांस्कृतिक आयाम
  • शारदा सिन्हा के प्रतिष्ठित लोकगीत एल्बम एवं साक्षात्कार
  • पूर्वांचल की लोक संस्कृति और व्रत कथाएं

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!