भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

प्रथम पूज्य है सब देवो में हिंदी में अंग्रेज़ी में भजन इन हिंदी लिरिक्स

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अपडेटेड: २०२६ श्रेणी: गणेश भजन, स्तुति भाषा: हिंदी एवं अंग्रेजी लिरिक्स

सनातन संस्कृति में भगवान श्री गणेश को 'प्रथम पूज्य' का स्थान प्राप्त है। किसी भी मांगलिक कार्य, अनुष्ठान, यज्ञ, विवाह, अथवा नए कार्य के शुभारंभ से पहले विघ्नहर्ता गणेश का स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। यह अत्यंत पावन भजन "प्रथम पूज्य है सब देवो में" भगवान गजानन की महिमा, उनके स्वरूप और उनके आशीर्वाद को समर्पित एक अद्भुत संकीर्तन है। इस भजन के माध्यम से साधक अपने जीवन के समस्त विघ्नों और बाधाओं को दूर करने के लिए गजानन की शरण में जाता है। इस लेख में आपको इस मधुर भजन के संपूर्ण हिंदी और अंग्रेजी लिरिक्स, सरल भावार्थ, गायन की विधि, तथा इसके आध्यात्मिक महत्व की विस्तृत जानकारी प्राप्त होगी।


सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics (Hindi & English)

हिंदी लिरिक्स (Devanagari Lyrics)

प्रथम पूज्य है सब देवो में, विघ्नहर्ता मेरे भगवान,
तुम्हारी महिमा गाऊं मैं, तुम हो सब के प्राण।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा..

सिंदूर सुहावन ललाट विराजे, मोदक भोग लगैया,
सकंट हरन मंगल करन, तुम हो दुख हर भैया।
चरणों में तेरे झुकता संसार सारा,
तू ही तो है स्वामी भक्तन का रखवारा..

रिद्धि सिद्धि के दाता तुम हो, ज्ञान के भंडार,
मस्तक मूँगेश्वर साजे, भृंग वाहन सुखसार।
जो कोई ध्यावे तुमको फल पावे मनभाया,
चरण शरण में तेरी मैंने शीश झुकाया..

लम्बे चूर्ण सुंड तुम्हारी, रूप निराला सोहे,
भक्तन के मन को प्रभुजी, सदा ही तुम हो मोहे।
'भक्तिलोक' गावे गुण तेरे निसदिन ध्यावे,
जो जन ध्यावे तुमको वो मुक्ति पावे..
प्रथम पूज्य है सब देवो में, विघ्नहर्ता मेरे भगवान...


अंग्रेजी लिरिक्स (English Transliteration)

Pratham Poojya Hai Sab Devo Me, Vighnaharta Mere Bhagwan,
Tumhari Mahima Gaun Main, Tum ho Sab Ke Praan.
Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva,
Mata Jaki Parvati Pita Mahadeva..

Sindoor Suhawan Lalat Viraje, Modak Bhog Lagaiya,
Sankat Haran Mangal Karan, Tum Ho Dukh Har Bhaiya.
Charon Me Tere Jhukta Sansar Sara,
Tu Hi To Hai Swami Bhaktan Ka Rakhwara..

Riddhi Siddhi Ke Data Tum Ho, Gyan Ke Bhandar,
Mastak Moongeshwar Saje, Bhrang Vahan Sukhsar.
Jo Koi Dhyave Tumko Phal Pave Manbhaya,
Charan Sharan Me Teri Maine Sheesh Jhukaya..

Lambe Churn Sund Tumhari, Roop Nirala Sohe,
Bhaktan Ke Man Ko Prabhuji, Sada Hi Tum Ho Mohe.
'Bhaktilok' Gave Gun Tere Nisdin Dhyave,
Jo Jan Dhyave Tumko Wo Mukti Pave..
Pratham Poojya Hai Sab Devo Me, Vighnaharta Mere Bhagwan...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान श्री गणेश की सर्वोच्च सत्ता और उनकी कृपाशीलता का सुंदर बखान करता है। भजन की पहली पंक्ति "प्रथम पूज्य है सब देवो में" इस सनातन सत्य को रेखांकित करती है कि देवताओं की पदानुक्रम व्यवस्था में गणेश जी को सबसे पहले पूजे जाने का वरदान प्राप्त है। भगवान शिव और माता पार्वती के नंदन गजानन अपने भक्तों के सभी संकटों को हरने वाले हैं।

भावार्थ के अनुसार, जो भी साधक सच्चे मन से मोदक प्रिय भगवान गणेश का स्मरण करता है, उसके जीवन से अज्ञानता और बाधाओं का अंधकार दूर हो जाता है। उनके ललाट पर सुशोभित सिंदूर और उनका गजमुख रूप भक्तों को यह संदेश देता है कि भगवान का हर अंग हमें ज्ञान, संयम और विवेक की शिक्षा देता है। रिद्धि और सिद्धि के दाता होने के कारण वे न केवल भौतिक सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं, बल्कि साधक को आध्यात्मिक उन्नति की ओर भी अग्रसर करते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • विघ्नहर्ता स्वरूप: यह भजन भगवान गणेश के उस रूप को उजागर करता है जो जीवन की समस्त बाधाओं को चुटकियों में दूर कर देता है।
  • मानसिक शांति: इस भजन के निरंतर गायन और श्रवण से मन को असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
  • मांगलिक प्रसंग: किसी भी नए कार्य, गृह प्रवेश, या पूजा-पाठ के आरंभ में इस भजन का विशेष महत्व है।
  • पारिवारिक सामंजस्य: यह भजन शिव परिवार की महिमा को दर्शाता है, जिससे घर में पारिवारिक प्रेम और एकता बढ़ती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भगवान गणेश के इस भजन को प्रातःकालीन वेला में स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा कक्ष में दीपक प्रज्वलित करने के पश्चात गाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके अतिरिक्त बुधवार के दिन विशेष रूप से गणेश जी की आराधना करते समय इस भजन का संकीर्तन करना चाहिए। आप इसे श्री गणेश चालीसा के पाठ के साथ भी सम्मिलित कर सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश हैं, जिन्हें विनायक, गजानन, एकदंत और वक्रतुंड नाम से भी संबोधित किया जाता है। सनातन परंपरा में यह माना गया है कि गणेश जी की कृपा के बिना भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, या महादेव की पूर्ण कृपा प्राप्त नहीं हो सकती। संत-महात्माओं ने भी अपनी रचनाओं में गणेश वंदना को सर्वोपरि स्थान दिया है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भक्तजन विभिन्न उत्सवों और संकीर्तनों में इस प्रकार के भजनों का गान करते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भक्ति संगीत की इस विधा में पारंपरिक लोक धुनों और शास्त्रीय संकीर्तन शैलियों का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है। इस भजन की रचना सरल और सुबोध हिंदी भाषा में की गई है ताकि आम जनमानस भी इसे आसानी से गा सके। गणेश चतुर्थी, संकट चौथ, और साप्ताहिक बुधवार व्रत के अवसरों पर देश के विभिन्न मंदिरों और घरों में इस भजन की गूंज सुनाई देती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा शुद्ध हिंदी और ब्रज-अवधि के मिले-जुले सांस्कृतिक स्वरूप पर आधारित है। इसमें अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे 'विघ्नहर्ता', 'सिंदूर सुहावन', और 'ज्ञान के भंडार'। इसकी तुकबंदी इतनी मधुर है कि एक बार सुनने के बाद कोई भी इसे आसानी से दोहरा सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें यह सिखाता है कि जीवन की किसी भी बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना करने से पहले हमें अपने भीतर के अहंकार का त्याग कर बुद्धि और विवेक के देवता गणेश का स्मरण करना चाहिए। सच्चा भक्त वही है जो सुख और दुःख दोनों स्थितियों में ईश्वर के चरणों में अपनी निष्ठा बनाए रखे।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
प्रथम पूज्य सबसे पहले पूजे जाने योग्य देवताओं में गणेश जी का स्थान
विघ्नहर्ता बाधाओं को हरने वाला जीवन के संकटों का निवारण
मोदक लड्डू (प्रिय भोग) गणेश जी का प्रिय प्रसाद
रिद्धि-सिद्धि सफलता और समृद्धि गणेश जी की दोनों पत्नियां/शक्तियां
भ्रंग वाहन मूषक (चूहा) भगवान गणेश की सवारी

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"प्रथम पूज्य है सब देवो में, विघ्नहर्ता मेरे भगवान" - इस पंक्ति का अर्थ है कि ब्रह्मांड के तमाम देवी-देवताओं में गणेश जी को अग्र पूज्य होने का गौरव प्राप्त है और वे हमारे सभी कष्टों का शमन करने वाले हैं।
"सिंदूर सुहावन ललाट विराजे, मोदक भोग लगैया" - इसका तात्पर्य है कि उनके मस्तक पर लाल सिंदूर शोभायमान है और उन्हें मोदक का भोग अति प्रिय है।
"रिद्धि सिद्धि के दाता तुम हो, ज्ञान के भंडार" - इस पंक्ति में साधक गजानन से प्रार्थना करता है कि वे उन्हें बुद्धि, विवेक और समृद्धि प्रदान करें।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

हे विशाल शरीर वाले, करोड़ सूर्यों के समान कांतिवान भगवान गणेश! मेरे सभी कार्यों को बिना किसी बाधा के, हमेशा के लिए पूर्ण करें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम प्रथम पूज्य है सब देवो में (Pratham Poojya Hai Sab Devo Me)
समर्पित देवता भगवान श्री गणेश (विघ्नहर्ता)
भाषा हिंदी एवं अंग्रेजी (Transliteration)
मुख्य भाव भक्ति, शरणागति और विघ्न निवारण
उपयुक्त अवसर बुधवार पूजा, गणेश चतुर्थी, नया कार्य आरंभ, सत्संग
संबंधित पाठ श्री गणेश आरती, गणेश चालीसा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन सनातन धर्म के प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश को समर्पित है।

इस भजन को बुधवार के दिन, गणेश चतुर्थी पर, या किसी भी नए कार्य के शुभारंभ के समय गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

हाँ, इस लेख में हमने पाठकों की सुविधा के लिए हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी (Roman Transliteration) में भी लिरिक्स उपलब्ध कराए हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता-पिता (शिव-पार्वती) की परिक्रमा को ब्रह्मांड की परिक्रमा मानकर सबसे पहले पूर्ण करने के कारण भगवान गणेश को सभी देवताओं में प्रथम पूज्य होने का वरदान मिला था।

भगवान गणेश को मोदक और लड्डू का भोग अति प्रिय है।

इस भजन के गायन से मानसिक शांति मिलती है, जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और बुद्धि तथा विवेक में वृद्धि होती है।

हाँ, इसकी सरल शब्दावली के कारण बच्चे इसे बहुत आसानी से याद करके गा सकते हैं, जिससे उनमें संस्कार आते हैं।

भगवान गणेश का वाहन मूषक (चूहा) है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन धर्म की परंपराओं, पौराणिक कथाओं और लोक भजनों के संकलन पर आधारित है। प्रस्तुत सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसका उद्देश्य पाठकों को सटीक, शुद्ध और भक्तिमय जानकारी प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • - नारद पुराण एवं शिव पुराण के गणेश प्रसंग
  • - पारंपरिक लोक भजन एवं संकीर्तन संग्रह
  • - सनातन पंचांग एवं व्रत कथा मार्गदर्शिका

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 09 Oct 2026

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