"तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है" एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदय को स्पर्श करने वाला श्याम भजन है, जो भगवान श्री कृष्ण के कलयुगी अवतार श्री खाटू श्याम जी को समर्पित है। यह भजन भक्त और भगवान के बीच के अटूट संबंध, पूर्ण समर्पण (शरणागति) और असीम कृतज्ञता को अभिव्यक्त करता है। जब एक जीवात्मा सांसारिक मोह-माया और दुखों से थककर परमात्मा की शरण में जाती है, तब उसे इस बात का आभास होता है कि ईश्वर का साथ ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। इस भजन का मुख्य स्वर 'समर्पण भाव' (शरणागति रस) है, जो भक्त को यह विश्वास दिलाता है कि यदि प्रभु का हाथ उसके सिर पर है, तो उसे संसार की किसी भी वस्तु या परिस्थिति की कमी नहीं हो सकती। इस लेख में हम इस पावन भजन के लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे मिलने वाली जीवन की अमूल्य सीखों का गहराई से विश्लेषण करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है ॥
(स्थायी - मुखड़ा)
तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है,
मज़े में मेरी कट रही ज़िन्दगी है।
तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है...
मेरे सर पे हर पल मोरछड़ी है,
मज़े में मेरी कट रही ज़िन्दगी है।
तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है...
(अंतरा - 1)
मैंने पुकारा या ना पुकारा,
तूने दिया है मुझे हर पल सहारा।
पग डगमगाए मेरे जो कहीं हैं,
थामा मुझे तेरे हाथों ने ही है।
तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है...
(अंतरा - 2)
तेरी कृपा हो तेरी मेहर हो,
शीश पे तेरी तिरछी नज़र हो।
मुझको ज़माने की परवाह नहीं है,
तू जो करे बस वही तो सही है।
मज़े में मेरी कट रही ज़िन्दगी है।
तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का सरल अर्थ भक्त की उस परम शांति और संतोष को दर्शाता है जो उसे भगवान की शरण में जाने के बाद प्राप्त होती है। भक्त कहता है कि हे प्रभु! जब आपका साथ मेरे साथ है, तो मुझे इस संसार में किसी भी भौतिक या आध्यात्मिक वस्तु की कोई कमी नहीं है। मेरी जिंदगी बहुत ही आनंदपूर्वक और मजे में व्यतीत हो रही है। मेरे सिर पर हमेशा आपकी मोरछड़ी (आशीर्वाद का प्रतीक) का साया रहता है, जो मुझे हर संकट से बचाता है।
भजन के पहले अंतरे में भक्त अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहता है कि चाहे मैंने संकट के समय आपको पुकारा हो या न पुकारा हो, आपने हमेशा अंतर्यामी रूप में मेरे दिल की बात सुनी और मुझे सहारा दिया। जब भी मेरे कदम लड़खड़ाए या मैं मार्ग से विचलित हुआ, तब आपके कृपालु हाथों ने मुझे थाम लिया। दूसरे अंतरे में भक्त कहता है कि मुझे केवल आपकी कृपा और मेहरबानी की आवश्यकता है। यदि आपकी तिरछी और करुणामयी दृष्टि मेरे ऊपर बनी रहे, तो मुझे इस मतलबी दुनिया की कोई परवाह नहीं है। आप जो भी करते हैं, वही मेरे लिए परम सत्य और कल्याणकारी है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भक्त के हृदय की पुकार और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का दस्तावेज है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- अनन्य शरणागति: यह भजन भगवद्गीता के 'सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज' के सिद्धांत को चरितार्थ करता है, जहाँ भक्त स्वयं को पूरी तरह से भगवान के चरणों में सौंप देता है।
- मोरछड़ी की महिमा: खाटू श्याम जी की मोरछड़ी को भक्तों के कष्टों को हरने वाला और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना जाता है। भजन में इसका उल्लेख भक्त के सुरक्षित होने के भाव को सुदृढ़ करता है।
- परम संतोष (Contentment): "मुझे क्या कमी है" की भावना मनुष्य को तृष्णा और लालच से मुक्त कर परम संतोष की ओर ले जाती है।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: इस भजन को गाने या सुनने से मन में निराशा के भाव दूर होते हैं और एक नई आशा व सकारात्मकता का संचार होता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि ईश्वर की भक्ति के लिए कोई समय निश्चित नहीं होता, फिर भी इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर और विधियां अत्यधिक फलदायी मानी गई हैं:
- एकादशी व्रत के दिन: खाटू श्याम जी की आराधना में एकादशी (विशेषकर शुक्ल पक्ष की एकादशी) का विशेष महत्व है। इस दिन इस भजन का कीर्तन करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- संध्या आरती के समय: शाम के समय घर के मंदिर में घी का दीपक जलाकर परिवार के साथ इस भजन को गाने से घर का वातावरण शुद्ध और शांतिपूर्ण बनता है।
- सत्संग और जागरण: श्याम बाबा के संकीर्तन और श्री श्याम जन्मोत्सव (कार्तिक शुक्ल देवउठनी एकादशी और फाल्गुन मेले) के अवसर पर इस भजन का सामूहिक गायन भक्तों को भाव-विभोर कर देता है।
- मानसिक तनाव के समय: जब भी जीवन में असमंजस या निराशा की स्थिति हो, तब एकांत में बैठकर इस भजन को सुनने से मानसिक शांति और संबल मिलता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से श्री खाटू श्याम जी को समर्पित है, जिन्हें कलयुग का सबसे जाग्रत देव माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, खाटू श्याम जी महाभारत काल के महान योद्धा बर्बरीक हैं, जो भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण को अपना शीश दान कर दिया था। श्री कृष्ण ने उनकी इस महान आहुति से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि कलयुग में वे उनके स्वयं के नाम 'श्याम' से पूजे जाएंगे और जो भी सच्चे मन से उनका स्मरण करेगा, उसके सभी कष्ट दूर होंगे।
इस भजन के भावों में राजस्थान और हरियाणा की समृद्ध संकीर्तन परंपरा की झलक मिलती है, जहाँ अनेक संतों और आधुनिक भजन गायकों ने श्याम भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
यह भजन आधुनिक श्याम भजनों की श्रेणी में आता है। खाटू श्याम मंदिर (राजस्थान के सीकर जिले में स्थित) के विकास और वहां उमड़ने वाले लाखों भक्तों के साथ ही इस भजन की लोकप्रियता पूरे भारत और विदेशों में फैली। इस भजन की पृष्ठभूमि भक्त की उस व्यक्तिगत अनुभूति पर आधारित है, जब वह जीवन के झंझावातों से हारकर खाटू धाम पहुंचता है और बाबा श्याम के दर्शन मात्र से उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं। अनेक प्रसिद्ध भजन गायकों ने अपनी मधुर आवाज में इसे गाकर अमर बना दिया है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें राजस्थानी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली संवादात्मक और आत्मनिवेदन प्रधान है।
- सरलता: कठिन संस्कृतनिष्ठ शब्दों के स्थान पर आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग किया गया है, जिससे यह सीधे हृदय को छूता है।
- रूपक अलंकार: 'मोरछड़ी' को सुरक्षा कवच के रूप में और 'तिरछी नज़र' को कृपा दृष्टि के रूप में रूपक की तरह प्रस्तुत किया गया है।
- लयबद्धता: भजन का संगीत और इसकी लय इतनी मनमोहक है कि कोई भी व्यक्ति बिना प्रयास के इसके साथ झूमने लगता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें केवल भक्ति का मार्ग ही नहीं दिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए भी कई महत्वपूर्ण संदेश देता है:
- कृतज्ञता का भाव (Gratitude): जीवन में जो कुछ भी मिला है, उसके लिए ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए। शिकायत करने के बजाय प्रभु की कृपा को महसूस करना ही सच्ची भक्ति है।
- पूर्ण विश्वास (Absolute Faith): "तू जो करे बस वही तो सही है" - यह पंक्ति हमें सिखाती है कि ईश्वर की योजना हमारी योजना से बेहतर होती है। हमें उनकी मर्जी को सहर्ष स्वीकार करना चाहिए।
- संसार की परवाह न करना: जब हम धर्म और सत्य के मार्ग पर चलते हैं, तो हमें दुनिया के तानों या आलोचनाओं की परवाह नहीं करनी चाहिए।
- अहंकार का त्याग: यह स्वीकार करना कि "थामा मुझे तेरे हाथों ने ही है", हमारे भीतर के अहंकार को नष्ट करता है और नम्रता का विकास करता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक संदर्भ |
|---|---|---|
| मोरछड़ी | मोर के पंखों से बनी झाड़ू/चंवर | खाटू श्याम जी का पवित्र प्रतीक जो भक्तों को आशीर्वाद देने और कष्ट दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। |
| पग डगमगाए | कदमों का लड़खड़ाना | जीवन में आने वाली कठिनाइयां, भ्रम या नैतिक पतन की स्थिति। |
| मेहर | कृपा, दया, अनुकंपा | ईश्वर की वह असीम दया जो भक्त को बिना किसी योग्यता के भी प्राप्त होती है। |
| तिरछी नज़र | कृपा दृष्टि, तिरछी चितवन | भगवान श्री कृष्ण की वह मनमोहक दृष्टि जो भक्तों के दुखों को पल भर में दूर कर देती है। |
| ज़माना | संसार, समाज, दुनिया | भौतिकवादी दुनिया जो अक्सर व्यक्ति को भ्रमित या हतोत्साहित करती है। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
1. "तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है, मज़े में मेरी कट रही ज़िन्दगी है।"
भक्त कहता है कि हे श्याम सुंदर! जब तक आपका दिव्य सानिध्य मेरे साथ है, तब तक मुझे किसी भी प्रकार के अभाव का अनुभव नहीं होता। सांसारिक सुख-दुख आते-जाते रहते हैं, लेकिन आपके साथ के कारण मेरा जीवन अत्यंत आनंदमय और निश्चिंतता से बीत रहा है।
2. "मेरे सर पे हर पल मोरछड़ी है, मज़े में मेरी कट रही ज़िन्दगी है।"
यहाँ 'मोरछड़ी' का अर्थ भगवान की सुरक्षात्मक छत्रछाया से है। भक्त को पूरा विश्वास है कि बाबा श्याम की मोरछड़ी हर पल उसके सिर पर घूम रही है, जो उसे बुरी शक्तियों, नजर दोष और जीवन के संकटों से बचा रही है।
3. "मैंने पुकारा या ना पुकारा, तूने दिया है मुझे हर पल सहारा।"
यह पंक्ति भगवान की सर्वज्ञता (सब कुछ जानने की क्षमता) को दर्शाती है। भक्त कहता है कि कई बार मैं संकोचवश या अज्ञानतावश आपको पुकार भी नहीं पाता, लेकिन आप मेरे बिना पुकारे ही मेरी सहायता के लिए दौड़े चले आते हैं।
4. "पग डगमगाए मेरे जो कहीं हैं, थामा मुझे तेरे हाथों ने ही है।"
जब भी जीवन के कठिन मोड़ों पर मेरा विश्वास डगमगाया या मैं गलत रास्ते पर जाने लगा, तब आपने अदृश्य रूप से आकर मेरा हाथ थाम लिया और मुझे सही राह दिखाई।
5. "तेरी कृपा हो तेरी मेहर हो, शीश पे तेरी तिरछी नज़र हो।"
भक्त की केवल एक ही अभिलाषा है कि प्रभु की कृपा और दया हमेशा बनी रहे। उनकी वह तिरछी और प्रेममयी चितवन भक्त के हृदय को हमेशा भक्ति रस से सराबोर रखे।
6. "मुझको ज़माने की परवाह नहीं है, तू जो करे बस वही तो सही है।"
जब भक्त को भगवान पर पूर्ण विश्वास हो जाता है, तो वह लोक-लाज और दुनिया के डर से मुक्त हो जाता है। वह मानता है कि ईश्वर द्वारा लिया गया हर निर्णय उसके परम कल्याण के लिए ही है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के भावों को और अधिक प्रगाढ़ करने के लिए निम्नलिखित मंत्रों और श्लोकों का संपुट लगाया जा सकता है:
श्री श्याम मंत्र:
"ॐ श्री श्याम देवाय नमः"
"हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा।"
श्रीमद्भगवद्गीता का यह श्लोक भी इसी शरणागति के भाव को पुष्ट करता है:
"अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥" (अध्याय 9, श्लोक 22)
अर्थ: जो अनन्य प्रेमी भक्त मुझ परमेश्वर को निरंतर चिंतन करते हुए निष्काम भाव से भजते हैं, उन नित्य-निरंतर मेरा चिंतन करने वाले पुरुषों का योगक्षेम (आवश्यकताओं की पूर्ति और सुरक्षा) मैं स्वयं वहन करता हूँ।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है (Tera Sath Hai To Mujhe Kya Kami Hai) |
| समर्पित देव | श्री खाटू श्याम जी (भगवान श्री कृष्ण) |
| मुख्य भाव | शरणागति, कृतज्ञता, अनन्य भक्ति (Surrender & Gratitude) |
| भाषा | सरल हिंदी (खड़ी बोली) |
| मुख्य प्रतीक | मोरछड़ी (Morchhad), तिरछी नज़र (Divine Glance) |
| उपयुक्त अवसर | श्याम संकीर्तन, एकादशी, दैनिक संध्या प्रार्थना, जागरण |
| प्राप्त होने वाला फल | मानसिक शांति, भय से मुक्ति, अटूट विश्वास की प्राप्ति |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ, भावार्थ और ऐतिहासिक संदर्भों को सनातन धर्म की प्रामाणिक संकीर्तन परंपरा, श्रीमद्भगवद्गीता के शरणागति सिद्धांतों और खाटू श्याम जी के महात्म्य के आधार पर संकलित और विश्लेषित किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध और प्रेरणादायक आध्यात्मिक जानकारी पहुँचाना है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय 9 एवं 18 - शरणागति योग)
- श्री श्याम महात्म्य एवं पौराणिक कथाएं
- पारंपरिक श्याम भजन संग्रह एवं संकीर्तन साहित्य
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