भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

मेरे दिल का मयूरा भागे भजन इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें मेरे दिल का मयूरा भागे भजन इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

सनातन धर्म की पावन संकीर्तन परंपरा में खाटू श्याम बाबा की महिमा अत्यंत निराली है। "मेरे दिल का मयूरा भागे खाटू धाम" भजन श्याम भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण भजनों में से एक है। यह भजन भक्त के हृदय की उस व्याकुलता, उमंग और अनन्य प्रेम को दर्शाता है जो हर एकादशी (ग्यारस) के पावन अवसर पर बाबा श्याम के दर्शन के लिए जागृत होती है। इस भजन में 'मयूर' (मोर) को मन का प्रतीक माना गया है, जो वर्षा ऋतु में बादलों को देखकर नृत्य करने लगता है; ठीक उसी प्रकार भक्त का मन रूपी मयूर भी ग्यारस की तिथि आते ही खाटू धाम की ओर दौड़ने लगता है। इस विस्तृत लेख में हम इस भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, उसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, काव्य सौंदर्य, और खाटू श्याम जी की भक्ति से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ मेरे दिल का मयूरा भागे खाटू धाम ॥


ओ मेरे दिल का मयूरा भागे खाटू धाम,
जब जब ग्यारस आती है।
साँवरा, जब जब ग्यारस आती है॥

करता बातें हवाओं से मेरा निसान,
जब जब ग्यारस आती है।
साँवरा, जब जब ग्यारस आती है॥

ओ मेरी डोर तू बैठा खींचे बाबा श्याम,
जब जब ग्यारस आती है।
साँवरा, जब जब ग्यारस आती है॥

ओ मेरी डोर काठा खींचे बाबा श्याम,
ओ मेरी डोर तू बैठा खींचे बाबा श्याम,
जब जब ग्यारस आती है।
साँवरा, जब जब ग्यारस आती है॥

तुझको देख कलेजा पाए आराम,
जब जब ग्यारस आती है।
साँवरा, जब जब ग्यारस आती है॥

ओ तुझको देख कलेजा पाए आराम,
जब जब ग्यारस आती है।
साँवरा, जब जब ग्यारस आती है॥

ओ तेरे भजनों से खूब मचावे रै धमाल,
जब जब ग्यारस आती है।
साँवरा, जब जब ग्यारस आती है॥

यूँ ही राघव को बुलाते रहना बाबा श्याम,
जब जब ग्यारस आती है।
साँवरा, जब जब ग्यारस आती है॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन खाटू श्याम जी के प्रति पूर्ण समर्पण और अनन्य भक्ति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें भक्त अपने हृदय की स्थिति का वर्णन करते हुए कहता है कि जैसे ही शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की एकादशी (ग्यारस) तिथि आती है, उसका मन रूपी मोर (मयूरा) बेकाबू होकर खाटू धाम की ओर दौड़ने लगता है। यहाँ 'मयूरा' शब्द का प्रयोग अत्यंत प्रतीकात्मक है। भारतीय संस्कृति में मोर को सौंदर्य, हर्ष और वर्षा का प्रतीक माना जाता है। जब आसमान में काले बादल घिरते हैं, तो मोर आनंदित होकर नृत्य करने लगता है। भक्त के लिए बाबा श्याम ही वे घनश्याम (काले बादल) हैं, जिन्हें देखकर भक्त का मन रूपी मोर झूम उठता है।

भजन में आगे कहा गया है कि भक्त के हाथ में जो 'निसान' (धर्म ध्वजा) है, वह हवाओं से बातें करने लगता है। इसका अर्थ है कि भक्त का उत्साह और उसकी श्रद्धा इतनी तीव्र है कि वह बिना किसी बाधा के बाबा के दरबार की ओर अग्रसर होती है। भक्त स्वीकार करता है कि उसके जीवन की डोर स्वयं बाबा श्याम के हाथों में है। जैसे पतंग की डोर उड़ाने वाले के हाथ में होती है, वैसे ही भक्त के जीवन का नियंत्रण और उसकी दिशा बाबा श्याम तय करते हैं। जब भक्त खाटू धाम पहुंचकर बाबा के विग्रह के दर्शन करता है, तो उसके तप्त हृदय को असीम शांति और 'कलेजे को आराम' मिलता है। अंत में, भक्त प्रार्थना करता है कि बाबा की यह कृपा और उनका यह बुलावा जीवन भर बना रहे।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे हर श्याम भक्त के कंठ का हार बनाती हैं:

  • एकादशी (ग्यारस) का महत्व: खाटू श्याम जी की पूजा में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इसी दिन बर्बरीक जी ने अपना शीश दान किया था। यह भजन इसी पावन तिथि के प्रति भक्तों के उत्साह को दर्शाता है।
  • समर्पण का भाव: "मेरी डोर तू बैठा खींचे" पंक्ति भक्त के पूर्ण शरणागति भाव को प्रदर्शित करती है, जहाँ वह अपने जीवन का सारा भार ईश्वर पर छोड़ देता है।
  • निसान यात्रा का वर्णन: भजन में "करता बातें हवाओं से मेरा निसान" पंक्ति खाटू धाम की प्रसिद्ध निसान यात्रा का सजीव चित्रण करती है, जिसमें भक्त मीलों पैदल चलकर बाबा को ध्वजा अर्पित करते हैं।
  • मानसिक शांति: "तुझको देख कलेजा पाए आराम" यह पंक्ति दर्शाती है कि संसार के कष्टों से थका-हारा मनुष्य जब बाबा के दर्शन करता है, तो उसे परम शांति की अनुभूति होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • एकादशी (ग्यारस) के दिन: प्रत्येक माह की दोनों एकादशियों (विशेषकर कार्तिक और फाल्गुन मास की ग्यारस) पर इस भजन का गायन अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • श्याम संकीर्तन (Satsang): जब भी घरों या मंदिरों में श्री श्याम बाबा का संकीर्तन आयोजित हो, तब इस भजन को गाकर भक्त झूम उठते हैं।
  • निसान यात्रा के समय: खाटू धाम की पैदल यात्रा या निसान यात्रा के दौरान इस भजन को सामूहिक रूप से गाने से मार्ग की थकान दूर होती है और उत्साह का संचार होता है।
  • दैनिक पूजा: संध्या आरती के समय या सुबह की पूजा के बाद शांत मन से इस भजन को सुनने से मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन महाभारत कालीन महान योद्धा और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक, जिन्हें कलयुग में श्री खाटू श्याम जी के नाम से पूजा जाता है, को समर्पित है। भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक के महान बलिदान (शीश दान) से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि कलयुग में वे उनके स्वयं के नाम 'श्याम' से पूजे जाएंगे। खाटू श्याम जी को 'हारे का सहारा' और 'लखदातार' भी कहा जाता है। इस भजन के माध्यम से भक्त उसी दयालु और कृपालु देव की आराधना करते हैं जो अपने भक्तों की पुकार सुनकर दौड़े चले आते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना आधुनिक श्याम भजन गायकों और लेखकों की सुंदर कल्पनाशक्ति का परिणाम है। भजन में "राघव" शब्द का उल्लेख आता है, जो संभवतः भजन के रचयिता या गायक के नाम को इंगित करता है। राजस्थान की पावन भूमि, जहाँ खाटू धाम स्थित है, वहाँ की लोक संस्कृति और भक्ति रस इस भजन के कण-कण में समाया हुआ है। खाटू श्याम जी के भजनों की यह विशेषता होती है कि वे शास्त्रीय जटिलताओं से दूर, अत्यंत सरल और सीधे हृदय को छूने वाले होते हैं। यही कारण है कि यह भजन बहुत ही कम समय में देश-विदेश के श्याम भक्तों के बीच लोकप्रिय हो गया।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और लोकभाषा (खड़ी बोली और राजस्थानी पुट युक्त हिंदी) है। इसमें प्रयुक्त अलंकार और रूपक अत्यंत प्रभावशाली हैं:

  • रूपक अलंकार: 'दिल का मयूरा' में रूपक अलंकार है, जहाँ दिल की तुलना मयूर (मोर) से की गई है।
  • अनुप्रास अलंकार: "जब जब ग्यारस आती है" में शब्दों की पुनरावृत्ति से एक सुंदर संगीतमय प्रवाह (Rhythm) उत्पन्न होता है।
  • बिंब विधान: "करता बातें हवाओं से मेरा निसान" पंक्ति में एक सुंदर दृश्य बिंब (Visual Imagery) उभरता है, जिससे भक्त के मन में खाटू की यात्रा का चित्र सजीव हो उठता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल मनोरंजन या सामान्य गायन के लिए नहीं है, बल्कि यह हमें गहरे आध्यात्मिक संदेश देता है:

  1. पूर्ण विश्वास और समर्पण: जब हम अपनी जीवन रूपी डोर भगवान के हाथ में सौंप देते हैं, तो हमारी चिंताएं समाप्त हो जाती हैं। यही निष्काम कर्म और भक्ति का मार्ग है।
  2. सांसारिक मोह से मुक्ति: ग्यारस आने पर भक्त का मन संसार से हटकर खाटू धाम की ओर भागता है। यह दर्शाता है कि हमें अपने दैनिक जीवन में से कुछ समय निकालकर ईश्वर की आराधना में अवश्य लगाना चाहिए।
  3. धैर्य और सांत्वना: "कलेजा पाए आराम" हमें सिखाता है कि जीवन के कठिन समय में जब हम ईश्वर की शरण में जाते हैं, तो हमें आंतरिक शक्ति और शांति मिलती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
मयूरा मोर (Peacock) भक्त का चंचल और आनंदित मन जो ईश्वर दर्शन के लिए लालायित है।
ग्यारस एकादशी तिथि (Eleventh Day) बाबा श्याम की प्रिय तिथि, जिस दिन भक्त उपवास रखते हैं और दर्शन करते हैं।
निसान धर्म ध्वजा / झंडा (Holy Flag) श्रद्धा और विजय का प्रतीक जिसे भक्त पैदल यात्रा में उठाते हैं।
डोर धागा / जीवन की बागडोर भक्त के जीवन का नियंत्रण जो भगवान के हाथों में सुरक्षित है।
कलेजा हृदय / मन (Heart) भक्त का अंतःकरण जो दर्शन पाकर शीतल हो जाता है।
धमाल आनंदोत्सव / उत्सव (Celebration) भक्ति रस में डूबकर किया जाने वाला कीर्तन और नृत्य।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: "ओ मेरे दिल का मयूरा भागे खाटू धाम, जब जब ग्यारस आती है।"
भावार्थ: जैसे ही एकादशी की पावन तिथि आती है, भक्त का मन रूपी मोर आनंद से भरकर खाटू धाम की ओर प्रस्थान करने के लिए व्याकुल हो उठता है।

पंक्ति: "करता बातें हवाओं से मेरा निसान, जब जब ग्यारस आती है।"
भावार्थ: भक्त के हाथ में जो पवित्र निसान (ध्वजा) है, वह हवा के झोंकों के साथ इस तरह लहराता है मानो वह हवाओं से बातें कर रहा हो और बाबा के पास जल्दी पहुँचने की होड़ में हो।

पंक्ति: "ओ मेरी डोर तू बैठा खींचे बाबा श्याम, जब जब ग्यारस आती है।"
भावार्थ: भक्त कहता है कि हे बाबा श्याम! मेरे जीवन की डोर आपके हाथों में है। आप ही मुझे अपनी ओर खींचते हैं, तभी मैं खिंचा चला आता हूँ।

पंक्ति: "तुझको देख कलेजा पाए आराम, जब जब ग्यारस आती है।"
भावार्थ: हे प्रभु! आपके इस मनमोहक और मुस्कुराते हुए मुखड़े को देखकर मेरे दुखी और अशांत हृदय को परम शांति और आराम मिलता है।

पंक्ति: "ओ तेरे भजनों से खूब मचावे रै धमाल, जब जब ग्यारस आती है।"
भावार्थ: ग्यारस के दिन भक्त बाबा के सुंदर भजनों पर झूमते हैं, गाते हैं और भक्ति का अद्भुत उत्सव (धमाल) मनाते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

खाटू श्याम जी की आराधना करते समय इस पावन मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

॥ ॐ श्री श्याम देवाय नमः ॥

॥ हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा ॥

इसके साथ ही, महाभारत के इस प्रसिद्ध श्लोक का स्मरण भी किया जाता है जो दानवीर बर्बरीक की महिमा को दर्शाता है:

"सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामी मा शुचः॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण का क्षेत्र महत्वपूर्ण जानकारी
भजन का नाम मेरे दिल का मयूरा भागे खाटू धाम
समर्पित देवता श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक / श्री कृष्ण)
मुख्य विषय एकादशी (ग्यारस) महिमा और अनन्य भक्ति
भक्ति का भाव माधुर्य भाव, सख्य भाव, पूर्ण शरणागति
मुख्य अवसर एकादशी व्रत, श्याम संकीर्तन, फाल्गुन मेला
प्रतीक चिन्ह मयूर (मन), निसान (ध्वजा), डोर (जीवन)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन कलयुग के अवतारी देव भगवान श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक) को समर्पित है।

यहाँ 'मयूरा' भक्त के चंचल और हर्षित मन का प्रतीक है, जो बाबा श्याम के दर्शन की आस में मोर की तरह नृत्य करने लगता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बर्बरीक जी ने फाल्गुन मास की द्वादशी को अपना शीश दान किया था, और एकादशी के दिन उन्होंने भगवान श्री कृष्ण से कलयुग में पूजे जाने का वरदान प्राप्त किया था। इसलिए ग्यारस का दिन श्याम भक्तों के लिए सबसे पवित्र होता है।

'निसान' एक पवित्र केसरिया, लाल या बहुरंगी ध्वजा (झंडा) होती है जिसे भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर या श्रद्धापूर्वक पैदल यात्रा कर खाटू धाम में बाबा श्याम को अर्पित करते हैं।

इस भजन के गायन से मन को असीम शांति मिलती है, तनाव दूर होता है और भक्त का भगवान श्याम के प्रति विश्वास और अधिक सुदृढ़ होता है।

श्री खाटू श्याम जी का मुख्य और ऐतिहासिक मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के सीकर जिले के 'खाटू' नामक कस्बे में स्थित है।

हाँ, इस भजन को आप अपनी दैनिक सुबह या संध्या कालीन पूजा के समय अत्यंत श्रद्धा के साथ गा या सुन सकते हैं।

इसका अर्थ है कि भक्त स्वयं को असमर्थ मानकर अपने जीवन का पूरा नियंत्रण (डोर) ईश्वर को सौंप देता है, और मानता है कि ईश्वर ही उसे सही राह पर ले जा रहे हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के बोल और भावार्थ को विभिन्न प्रामाणिक वैष्णव संकीर्तन ग्रंथों, खाटू धाम की स्थानीय लोक परंपराओं और प्रतिष्ठित श्याम भक्तों के अनुभवों के आधार पर संकलित और विश्लेषित किया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, त्रुटिहीन और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध सामग्री पहुँचाना है ताकि उनकी भक्ति यात्रा और अधिक सुगम हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण एवं महाभारत (बर्बरीक प्रसंग)
  • श्री खाटू श्याम मंदिर ट्रस्ट, सीकर (राजस्थान) की आधिकारिक संकीर्तन नियमावली
  • पारंपरिक राजस्थानी भजन संग्रह एवं लोक साहित्य

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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