भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

मस्ती बरसेगी दिन रात भजन इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें मस्ती बरसेगी दिन रात भजन इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

हिंदू सनातन धर्म में संकीर्तन को कलयुग में ईश्वर प्राप्ति और मानसिक शांति का सबसे सुगम मार्ग माना गया है। सुप्रसिद्ध श्याम भजन "मस्ती बरसेगी दिन रात वो घर पावन होता है" इसी दिव्य भाव को अत्यंत सरल और मधुर शब्दों में अभिव्यक्त करता है। यह भजन खाटू श्याम जी के भक्तों (श्याम प्रेमियों) के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। इस भजन में गृहस्थ जीवन में हरि-कीर्तन के महत्व, भगवद् कृपा से मिलने वाले सुख-समृद्धि, और प्रभु भक्ति के आनंद का अनुपम वर्णन किया गया है। जब किसी घर में सांवरिया सरकार का कीर्तन होता है, तो वहां केवल भौतिक सुख ही नहीं, बल्कि अलौकिक और आध्यात्मिक आनंद की वर्षा होती है। आइए, इस पावन भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, शास्त्रीय महत्व और इसके आध्यात्मिक संदेश को गहराई से समझें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ श्री खाटू श्याम भजन ॥

स्थायी (मुखड़ा):
घर में जिनके सांवरिये का कीर्तन होता है।
मस्ती बरसेगी दिन रात वो घर पावन होता है॥
घर में जिनके सांवरिये का कीर्तन होता है।
रै मस्ती बरसेगी दिन रात वो घर पावन होता है॥

अंतरा 1:
उस घर का हर प्राणी मन में फूला नहीं समाए।
श्याम रंग जिस पे चढ़ जाए और रंग ना भाए।
श्याम से खेले होली जब जब फागण होता है।
रै मस्ती बरसेगी दिन रात वो घर पावन होता है॥

अंतरा 2:
श्याम का कीर्तन हो जिस घर में आते हैं बजरंगी।
धन दौलत की कमी रहे ना मिट जाए सब तंगी।
हरा भरा खुशियों से घर का आँगन होता है।
रै मस्ती बरसेगी दिन रात वो घर पावन होता है॥

अंतरा 3:
श्याम की ज्योत जले जिस घर में अला बला ना आए।
स्वस्थ रहे प्राणी उस घर में रोग दूर हो जाए।
दुखी रूपी सागर का पल में मंथन होता है।
रै मस्ती बरसेगी दिन रात वो घर पावन होता है॥

अंतरा 4:
दर्शन करने श्याम के प्रेमी दूर दूर से आते।
झूम झूम मस्ती में बोली भजन रसीले गाते।
उस घर में देखो मस्ती का आलम होता है।
रै मस्ती बरसेगी दिन रात वो घर पावन होता है॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन इस शाश्वत सत्य को प्रतिपादित करता है कि जिस घर में नियमित रूप से भगवान श्री कृष्ण (सांवरिया सेठ या खाटू श्याम जी) का संकीर्तन होता है, वह स्थान किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं रह जाता। संकीर्तन से उत्पन्न होने वाली सकारात्मक तरंगें घर के वातावरण को शुद्ध करती हैं और वहां रहने वाले लोगों के मन में सात्विक विचारों का संचार करती हैं।

भजन का मुख्य संदेश यह है कि ईश्वर की भक्ति केवल कंदराओं या जंगलों में जाने से ही नहीं, बल्कि अपने घर को ही मंदिर बनाकर प्राप्त की जा सकती है। जब भक्त सामूहिक रूप से प्रभु का गुणगान करते हैं, तो वहां अलौकिक आनंद (मस्ती) की वर्षा होती है। यह मस्ती सांसारिक मोह-माया से परे, आत्मा का परमात्मा से मिलन का आनंद है। इस भजन के माध्यम से भक्तों को अपने व्यस्त जीवन में से कुछ समय निकालकर संकीर्तन करने की प्रेरणा दी गई है, जिससे जीवन के सभी कष्टों का निवारण हो सके।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • गृहस्थ धर्म में कीर्तन का महत्व: यह भजन सिद्ध करता है कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी ईश्वर को रिझाया जा सकता है। घर में कीर्तन का आयोजन करने से पूरे परिवार में एकता और प्रेम का संचार होता है।
  • नकारात्मक ऊर्जा का नाश: भजन में स्पष्ट किया गया है कि जहां श्याम बाबा की पावन ज्योत जलती है, वहां किसी भी प्रकार की बुरी शक्तियां या नकारात्मक ऊर्जा (अला-बला) प्रवेश नहीं कर सकतीं।
  • पंचदेवों और हनुमान जी की उपस्थिति: सनातन मान्यता है कि जहां भी भगवान विष्णु या उनके अवतार श्री कृष्ण का कीर्तन होता है, वहां रामभक्त हनुमान जी (बजरंगी) अदृश्य रूप से अवश्य उपस्थित रहते हैं। यह भजन इस विश्वास को सुदृढ़ करता है।
  • फाल्गुन मास का महत्व: भजन में 'फागण' (फाल्गुन) महीने का उल्लेख है, जो खाटू श्याम जी के मुख्य उत्सव और होली के पावन पर्व को दर्शाता है। यह भक्तों के हृदय में उत्सव और उल्लास का संचार करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि प्रभु का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस भजन को गाने और सुनने के लिए कुछ विशेष अवसर और विधियां अत्यधिक फलदायी मानी गई हैं:

  • शुभ अवसर: इस भजन का गायन विशेष रूप से एकादशी (विशेषकर देवउठनी एकादशी और आमलकी एकादशी), शनिवार, मंगलवार और फाल्गुन मास के श्याम जन्मोत्सव के दौरान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • गायन की विधि: घर के मंदिर या कीर्तन स्थल पर खाटू श्याम जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उनके सम्मुख शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक (ज्योत) प्रज्वलित करें। इत्र और पुष्प अर्पित करें।
  • सामूहिक संकीर्तन: इस भजन को ढोलक, मंजीरा और हरमोनियम के साथ सामूहिक रूप से ऊंचे स्वर और पूर्ण समर्पण भाव से गाना चाहिए। भजन के अंत में श्याम बाबा की आरती और प्रसाद वितरण अवश्य करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री खाटू श्याम जी को समर्पित है, जिन्हें कलयुग का अवतारी माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, खाटू श्याम जी महाभारत काल के महान योद्धा बर्बरीक हैं, जो भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। भगवान श्री कृष्ण ने उनकी महान आहुति और समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि कलयुग में वे उनके स्वयं के नाम 'श्याम' से पूजे जाएंगे और जो भी सच्चे मन से उनका स्मरण करेगा, उसके सभी कष्ट दूर होंगे।

इसके साथ ही, भजन में वीर हनुमान जी (बजरंगी) का भी उल्लेख है। हनुमान जी को संकीर्तन का परम प्रेमी माना गया है। जहां भी प्रभु श्री राम या श्री कृष्ण का संकीर्तन होता है, वहां हनुमान जी सर्वप्रथम आकर विराजमान होते हैं और भक्तों की रक्षा करते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन आधुनिक श्याम भजनों की श्रेणी में आता है, जो उत्तर भारत (विशेषकर राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश) के लोक-भक्ति संगीत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इस भजन की रचना लोक-कवियों द्वारा अत्यंत सरल और सुबोध भाषा में की गई है ताकि आम जनमानस भी इससे आसानी से जुड़ सके। खाटू श्याम जी के मंदिर (राजस्थान के सीकर जिले में स्थित) में होने वाले कीर्तनों और देश-विदेश में आयोजित होने वाले 'श्याम जगरण' (श्री श्याम संकीर्तन) में यह भजन अनिवार्य रूप से गाया जाता है। इसकी लय और ताल इतनी मनमोहक है कि भक्त स्वतः ही झूमने और नृत्य करने पर विवश हो जाते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और लोक-शैली से प्रभावित हिंदी है, जिसमें राजस्थानी और हरियाणवी बोलियों का सुंदर पुट देखने को मिलता है (जैसे 'रै' शब्द का प्रयोग)। इसकी काव्य शैली गेय (गाए जाने योग्य) है, जिसमें अंत्यानुप्रास अलंकार का प्रचुर प्रयोग किया गया है (जैसे: समाए-भाए, बजरंगी-तंगी, आए-जाए)।

भजन में प्रयुक्त रूपक और उपमाएं अत्यंत सजीव हैं। 'दुख रूपी सागर का पल में मंथन होना' एक उत्कृष्ट काव्यात्मक अभिव्यक्ति है, जो यह दर्शाती है कि जैसे समुद्र मंथन से अमृत निकला था, वैसे ही दुखों के मंथन से कीर्तन के माध्यम से सुख और शांति रूपी अमृत की प्राप्ति होती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल एक भक्ति गीत नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन जीने की कला और महत्वपूर्ण आध्यात्मिक सीख देता है:

  1. सच्चा सुख ईश्वर की शरण में है: भौतिक सुख-सुविधाएं क्षणभंगुर हैं। वास्तविक और स्थायी आनंद (मस्ती) केवल भगवान के नाम संकीर्तन में ही मिल सकता है।
  2. सकारात्मकता का प्रसार: अपने घर में नियमित रूप से प्रार्थना और कीर्तन करने से पारिवारिक कलह दूर होती है और सदस्यों के बीच आपसी प्रेम बढ़ता है।
  3. समर्पण का भाव: 'श्याम रंग जिस पे चढ़ जाए और रंग ना भाए' - यह पंक्ति सिखाती है कि जब मनुष्य को ईश्वर के प्रेम का स्वाद मिल जाता है, तो वह सांसारिक विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह) से मुक्त हो जाता है।
  4. आरोग्य और मानसिक शांति: भक्ति और कीर्तन से मानसिक तनाव दूर होता है, जिससे शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। वैज्ञानिक रूप से भी प्रमाणित है कि मधुर संगीत और मंत्रोच्चार से मस्तिष्क में सकारात्मक रसायनों का स्राव होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ भजन के संदर्भ में महत्व
सांवरिया सांवले रंग वाले (श्री कृष्ण / खाटू श्याम) भक्तों के प्रिय आराध्य देव का संबोधन।
पावन पवित्र / शुद्ध कीर्तन के प्रभाव से घर का मंदिर जैसा पवित्र हो जाना।
फागण फाल्गुन मास खाटू श्याम जी का मुख्य मेला और होली का आनंदमयी समय।
बजरंगी हनुमान जी कीर्तन में विघ्न-बाधाओं को दूर करने वाले रक्षक देव।
अला-बला बुरी नजर, विपत्ति या नकारात्मक ऊर्जा प्रभु की ज्योत के प्रकाश से दूर होने वाली परेशानियां।
मंथन बिलोना या मथना दुखों को समाप्त कर सुख रूपी अमृत निकालना।
आलम माहौल या वातावरण भक्तिमय और आनंद से सराबोर वातावरण।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. "घर में जिनके सांवरिये का कीर्तन होता है, मस्ती बरसेगी दिन रात वो घर पावन होता है..."
जिस घर में भगवान सांवरिया सेठ का संकीर्तन किया जाता है, वहां दिन-रात आनंद और भक्ति की वर्षा होती है। वह घर किसी सामान्य भवन की तरह नहीं, बल्कि एक पवित्र मंदिर की तरह पूजनीय हो जाता है।

2. "उस घर का हर प्राणी मन में फूला नहीं समाए, श्याम रंग जिस पे चढ़ जाए और रंग ना भाए..."
उस पावन घर का प्रत्येक सदस्य आंतरिक प्रसन्नता का अनुभव करता है। जिस व्यक्ति पर श्याम नाम की भक्ति का रंग चढ़ जाता है, उसे संसार का कोई अन्य भौतिक रंग या आकर्षण प्रभावित नहीं कर पाता। वह केवल प्रभु के रंग में रंग जाता है।

3. "श्याम से खेले होली जब जब फागण होता है, रै मस्ती बरसेगी दिन रात..."
फाल्गुन का महीना आते ही भक्त अपने आराध्य श्याम सुंदर के साथ भक्ति की होली खेलते हैं। यह होली रंगों की नहीं, बल्कि प्रेम, श्रद्धा और समर्पण के गुलाल की होती है।

4. "श्याम का कीर्तन हो जिस घर में आते हैं बजरंगी, धन दौलत की कमी रहे ना मिट जाए सब तंगी..."
जहां भी श्याम बाबा का कीर्तन होता है, वहां रामभक्त हनुमान जी स्वयं पधारते हैं। हनुमान जी की उपस्थिति से उस घर की सभी आर्थिक और मानसिक परेशानियां दूर हो जाती हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।

5. "श्याम की ज्योत जले जिस घर में अला बला ना आए, स्वस्थ रहे प्राणी उस घर में रोग दूर हो जाए..."
जिस घर में श्याम बाबा की अखंड ज्योत प्रज्वलित होती है, वहां किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्ति या रोग प्रवेश नहीं कर सकते। घर के सभी सदस्य स्वस्थ और दीर्घायु होते हैं।

6. "दुखी रूपी सागर का पल में मंथन होता है, रै मस्ती बरसेगी दिन रात..."
कीर्तन के प्रभाव से दुखों का विशाल सागर भी सुख के अमृत में बदल जाता है। जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियां भी प्रभु कृपा से अनुकूल हो जाती हैं।

7. "दर्शन करने श्याम के प्रेमी दूर दूर से आते, झूम झूम मस्ती में बोली भजन रसीले गाते..."
श्याम बाबा के कीर्तन का ऐसा आकर्षण होता है कि दूर-दूर से भक्त और प्रेमी खिंचे चले आते हैं। वे सभी मिलकर झूमते हुए मधुर भजनों का गायन करते हैं, जिससे वहां का पूरा माहौल अलौकिक हो जाता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

श्याम संकीर्तन के समय निम्नलिखित मंत्रों और श्लोकों का उच्चारण करने से कीर्तन का फल बहुगुणित हो जाता है:

॥ श्री खाटू श्याम महामंत्र ॥

ॐ श्री श्याम देवाय नमः

अथवा

हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा।

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं संकीर्तन की महिमा का वर्णन करते हुए कहा है:

॥ गीता श्लोक (अध्याय 9, श्लोक 14) ॥

सततं कीर्तयन्तो मां यतन्तश्च दृढव्रताः।
नमस्यन्तश्च मां भक्त्या नित्ययुक्ता उपासते॥

अर्थ: मेरे भक्त सदैव मेरे नाम और गुणों का कीर्तन करते हुए, दृढ़ संकल्प के साथ यत्न करते हुए और मुझे नमस्कार करते हुए, निरंतर भक्ति भाव से मेरी उपासना करते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मस्ती बरसेगी दिन रात (घर में जिनके सांवरिये का कीर्तन होता है)
मुख्य आराध्य देव भगवान श्री खाटू श्याम जी (श्री कृष्ण)
भक्ति का प्रकार संकीर्तन भक्ति (नवधा भक्ति के अंतर्गत)
मुख्य रस / भाव भक्ति रस, आनंद भाव, समर्पण
भाषा सरल हिंदी (राजस्थानी-हरियाणवी पुट के साथ)
उपयुक्त अवसर श्याम संकीर्तन, एकादशी, शनिवार, फाल्गुन मेला, गृह प्रवेश
मुख्य वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, हरमोनियम, चिमटा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री खाटू श्याम जी (जो भगवान श्री कृष्ण के ही कलयुगी अवतार हैं) को समर्पित है। इसमें उनके संकीर्तन की महिमा का गान किया गया है।

घर में श्याम कीर्तन कराने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है, सुख-समृद्धि आती है, मानसिक शांति मिलती है, और परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य उत्तम रहता है।

ऐसी मान्यता है कि जहां भी भगवान विष्णु या श्री कृष्ण का संकीर्तन होता है, वहां रामभक्त हनुमान जी (बजरंगी) अदृश्य रूप से उपस्थित होकर कीर्तन का आनंद लेते हैं और भक्तों की रक्षा करते हैं।

'श्याम रंग' का अर्थ है भगवान की अनन्य भक्ति का रंग। जब किसी भक्त पर ईश्वर के प्रेम का रंग चढ़ जाता है, तो उसे सांसारिक विषय-वासनाएं और भौतिक आकर्षण फीके लगने लगते हैं।

खाटू श्याम जी का मुख्य पर्व फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी और द्वादशी को मनाया जाता है, जिसे 'फाल्गुन मेला' भी कहा जाता है। इस दौरान भजन में वर्णित 'फागण की होली' खेली जाती है।

हां, इस भजन को आप अपनी दैनिक संध्या आरती या सुबह की पूजा के समय गा सकते हैं। यह मन को तुरंत शांत और प्रसन्न करने वाला भजन है।

इसका अर्थ है कि जिस प्रकार समुद्र मंथन से विष के बाद अमृत निकला था, उसी प्रकार कीर्तन के माध्यम से जीवन के बड़े से बड़े दुख और कठिनाइयां भी समाप्त हो जाती हैं और सुख-शांति रूपी अमृत की प्राप्ति होती है।

महाभारत युद्ध के समय भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक (श्याम जी) को वरदान दिया था कि जो भी व्यक्ति जीवन से निराश होकर या हारकर उनकी शरण में आएगा, वे उसका सहारा बनेंगे। इसलिए उन्हें 'हारे का सहारा' कहा जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा सनातन धर्म के शास्त्रों, लोक परंपराओं और प्रामाणिक श्याम भजनों के संकलन के आधार पर तैयार किया गया है। इस भजन के माध्यम से कलयुग में नाम-संकीर्तन की महत्ता को रेखांकित किया गया है। यह सामग्री पूरी तरह से शोधित और "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" की श्रेणी में आती है, जिसका उद्देश्य भक्तों तक शुद्ध और सही जानकारी पहुंचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता: कलयुग में नाम संकीर्तन और भक्ति योग का महत्व।
  • स्कंद पुराण: बर्बरीक (खाटू श्याम जी) की कथा और उनके कलयुगी अवतार की पृष्ठभूमि।
  • श्री खाटू श्याम मंदिर समिति (सीकर, राजस्थान): पारंपरिक भजन संग्रह और उत्सव परंपराएं।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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