शिरडी के परम पूज्य संत सद्गुरु साईं बाबा को समर्पित भजन "मैं आन पड़ी तेरे द्वार साईं सुन लो मेरी पुकार" भक्ति, समर्पण और पूर्ण शरणागति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह भजन भक्त के हृदय की उस व्याकुलता और करुण पुकार को अभिव्यक्त करता है, जब वह संसार के समस्त द्वारों से निराश होकर अंततः ईश्वर के परम पावन चरणों में शरण लेता है। इस भजन में निहित 'श्रद्धा' और 'सबुरी' (धैर्य) के भाव साईं बाबा के मूल दर्शन को दर्शाते हैं। जब कोई साधक अपने अहंकार को त्यागकर दीन-हीन भाव से साईं के द्वार पर उपस्थित होता है, तब बाबा की असीम अनुकंपा और कृपा का मार्ग प्रशस्त होता है। यह भजन विशेष रूप से गुरुवार की पूजा, साईं संध्या, सत्संग और दैनिक प्रार्थना के समय गाया जाता है, जो साधक के मन को असीम शांति और संबल प्रदान करता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मंगलाचरण / स्थाई
मैं आन पड़ी तेरे द्वार साईं सुन लो मेरी पुकार।
मेरे दुःख सब दूर करो बाबा मेरी झोली भरो,
मेरा सुखी वसे परिवार,
मैं आन पड़ी तेरे द्वार साईं सुन लो मेरी पुकार॥
अंतरा - 1
चमत्कार दिखा दो कोई दुनिया की ठुकराई हूँ,
कष्ट मिटा दो मेरे बाबा आशा लेकर आई हूँ।
रेहम की एक नजर तुम कर दो बाबा मुझको ऐसा वर दो,
साईं मेरे तारन हार,
मैं आन पड़ी तेरे द्वार साईं सुन लो मेरी पुकार॥
अंतरा - 2
दर दर पे मैं भटक रही हूँ पकड़ो मेरा हाथ बाबा,
धुल न जाऊँ इस दुनिया में देदो मेरा साथ बाबा।
देदो मुझको सबर सबुरी रहे न कोई बात अधूरी,
बस मिल जाए तेरा प्यार,
मैं आन पड़ी तेरे द्वार साईं सुन लो मेरी पुकार॥
अंतरा - 3
बड़ी दूर से चल कर बाबा द्वार तेरे मैं आई हूँ,
करदो पूरी साईं दिल में जो भी उमीदें लाई हूँ।
एक बार मेरी ओर निहारो जीवन मेरा आन सवारो,
मेरी नैया करदो पार,
मैं आन पड़ी तेरे द्वार साईं सुन लो मेरी पुकार॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस पावन भजन का केंद्रीय भाव पूर्ण आत्मसमर्पण (प्रपत्ति) है। हिंदू दर्शन और भक्ति परंपरा में शरणागति को मोक्ष और ईश्वर प्राप्ति का सबसे सुगम मार्ग माना गया है। इस भजन में भक्त अपनी सांसारिक और आध्यात्मिक पीड़ाओं को साईं बाबा के चरणों में अर्पित कर रहा है।
प्रथम भाग (स्थाई) का भावार्थ: भक्त कहता है कि हे साईं! मैं सब ओर से निराश होकर अंततः आपके द्वार पर आ खड़ी हुई हूँ। मेरी करुण पुकार को सुनिए। मेरे जीवन के समस्त दुखों, संतापों और कष्टों का निवारण कीजिए और मेरी सूनी झोली को अपनी कृपा से भर दीजिए। मेरी केवल यही कामना है कि मेरा परिवार सुखी और समृद्ध रहे। यहाँ 'झोली भरना' केवल भौतिक समृद्धि का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक संतोष, शांति और भक्ति रूपी धन की याचना है।
द्वितीय भाग (अंतरा) का भावार्थ: भक्त संसार की निष्ठुरता से आहत है। वह कहता है कि दुनिया ने मुझे ठुकरा दिया है, अब केवल आपका ही सहारा है। हे बाबा! मेरे कष्टों का निवारण कर मुझे अपनी शरण में लीजिए। आपकी एक कृपादृष्टि (रेहम की नजर) मेरे जीवन को बदल सकती है। आप ही मेरे तारनहार (भवसागर से पार उतारने वाले) हैं।
तृतीय भाग का भावार्थ: भक्त अपनी व्याकुलता प्रकट करते हुए कहता है कि मैं इस संसार रूपी चक्रव्यूह में भटक रही हूँ। यदि आपने मेरा हाथ नहीं पकड़ा, तो मैं इस मायावी दुनिया की धूल में विलीन हो जाऊँगी। मुझे 'सबर' और 'सबुरी' का वरदान दीजिए, ताकि मैं जीवन के संघर्षों में विचलित न हूँ। मुझे केवल आपका निश्छल प्रेम चाहिए। अंत में, भक्त अपनी नैया (जीवन रूपी नौका) को पार लगाने की प्रार्थना करता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि यह साईं भक्तों के लिए एक साधना मार्ग है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- शरणागति का संदेश: यह भजन सिखाता है कि जब मनुष्य अपने कर्तापन के अहंकार को छोड़ देता है, तभी ईश्वर का अनुग्रह सक्रिय होता है।
- श्रद्धा और सबुरी का समन्वय: भजन की पंक्तियों में 'सबर सबुरी' की मांग की गई है, जो साईं बाबा के दो मुख्य उपदेशों—श्रद्धा (विश्वास) और सबुरी (धैर्य)—को रेखांकित करती है।
- करुण रस की प्रधानता: इस भजन का स्वर अत्यंत करुण और विनीत है, जो गाते समय भक्त के हृदय को पिघला देता है और अश्रुधारा प्रवाहित कर देता है।
- सार्वभौमिक अपील: साईं बाबा का दर्शन किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है। यह भजन भी जाति, वर्ग और संप्रदाय की सीमाओं से परे सभी मानव मात्र के कल्याण की कामना करता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि ईश्वर का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष परिस्थितियां और समय अत्यंत फलदायी माने गए हैं:
- गुरुवार का विशेष दिन: गुरुवार को गुरुदेव साईं बाबा का विशेष दिन माना जाता है। इस दिन सुबह या संध्याकाल में बाबा की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाकर इस भजन का गायन करना अत्यंत शुभ होता है।
- साईं संध्या और सत्संग: सामूहिक रूप से जब साईं भक्त एकत्रित होते हैं, तब इस भजन को सामूहिक रूप से गाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- संकट काल में संबल: जब जीवन में अत्यधिक मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह या निराशा का दौर हो, तब एकांत में बैठकर इस भजन को सुनने से मन को अपूर्व शांति और धैर्य प्राप्त होता है।
- गायन विधि: इसे अत्यंत शांत मन से, आंखें बंद करके, बाबा के विग्रह का ध्यान करते हुए गाना चाहिए। स्वर में तीव्रता के स्थान पर करुणा और विनय का भाव होना आवश्यक है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन शिरडी के साईं बाबा को समर्पित है। साईं बाबा 19वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी के प्रारंभ के एक महान भारतीय संत, फकीर और सद्गुरु थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के लोगों को एकता, प्रेम, करुणा और भाईचारे का संदेश दिया।
बाबा का मूल मंत्र था—"सबका मालिक एक"। वे शिरडी की एक जीर्ण-शीर्ण मस्जिद में रहते थे, जिसे वे 'द्वारकामाई' कहते थे। द्वारकामाई का द्वार सभी के लिए हमेशा खुला रहता था, चाहे वह अमीर हो या गरीब, राजा हो या रंक। यह भजन उसी 'द्वारकामाई' के द्वार पर आकर पुकार लगाने की भावना को जीवंत करता है। बाबा ने अपने भक्तों को ग्यारह वचन दिए थे, जिनमें से एक वचन है—"जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा।" यह भजन इसी विश्वास को सुदृढ़ करता है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस भजन की रचना आधुनिक काल के साईं भक्तों द्वारा की गई है। यद्यपि इसके मूल रचयिता का नाम अज्ञात है, परंतु यह भजन लोक-परंपरा का हिस्सा बन चुका है। शिरडी साईं बाबा के मंदिर और विश्वभर के साईं मंदिरों में इस भजन को अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
इसकी पृष्ठभूमि उस लोक-संस्कृति से जुड़ी है जहाँ भक्त अपने आराध्य को एक माता, पिता, सखा और रक्षक के रूप में देखता है। जब शिरडी में बाबा सशरीर उपस्थित थे, तब भी देश के कोने-कोने से लोग अपनी व्याकुलता लेकर उनके पास आते थे और बाबा उनकी झोली खुशियों से भर देते थे। यह भजन उसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक सत्य की संगीतमय अभिव्यक्ति है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी है, जिसमें खड़ी बोली के साथ-साथ उर्दू और सूफी शब्दावली का सुंदर मिश्रण है।
- शब्दावली: 'रेहम', 'सबर', 'सबुरी', 'नैया', 'तारनहार' जैसे शब्दों का प्रयोग इसे एक सूफी और भक्तिमय रंग प्रदान करता है। यह साईं बाबा के व्यक्तित्व के अनुरूप है, जो स्वयं एक फकीर के रूप में रहते थे।
- काव्य शैली: यह एक गेय पद (गीत) है, जिसमें तुकबंदी (Rhyme Scheme) का विशेष ध्यान रखा गया है (जैसे: पुकार-परिवार-तारनहार-पार)। इसकी लयबद्धता के कारण इसे संगीत के विभिन्न रागों में आसानी से ढाला जा सकता है।
- प्रतीकात्मकता: 'झोली भरना' आंतरिक रिक्तता को ईश्वरीय प्रेम से भरने का प्रतीक है। 'नैया पार करना' जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति और सांसारिक कठिनाइयों से उबरने का रूपक है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन मूल्य और आध्यात्मिक सीख प्रदान करता है:
- अहंकार का विसर्जन: जब तक मनुष्य को अपनी शक्ति, धन या बुद्धि का घमंड रहता है, वह ईश्वर की शरण में नहीं जा पाता। भजन की पहली पंक्ति ही अहंकार को मिटाकर शरण में आने की सीख देती है।
- धैर्य (सबुरी) का महत्व: जीवन में कठिनाइयां आने पर विचलित होने के बजाय धैर्य रखना चाहिए। बाबा से 'सबर सबुरी' की मांग करना यह दर्शाता है कि हमें परिस्थितियों को स्वीकार करने की शक्ति मांगनी चाहिए।
- संसार की नश्वरता: "दुनिया की ठुकराई हूँ" और "धूल न जाऊँ इस दुनिया में" पंक्तियां हमें याद दिलाती हैं कि सांसारिक संबंध और भौतिक वस्तुएं अस्थायी हैं। केवल ईश्वर का प्रेम ही शाश्वत है।
- आशावादी दृष्टिकोण: "आशा लेकर आई हूँ" पंक्ति निराशा के घोर अंधकार में भी आशा की किरण को बनाए रखने का संदेश देती है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| आन पड़ी | आकर उपस्थित हो गई हूँ | पूर्ण आत्मसमर्पण और शरणागति का भाव। |
| पुकार | करुण प्रार्थना / आर्तनाद | हृदय की गहराई से निकली सच्ची प्रार्थना। |
| रेहम | दया / करुणा / अनुकंपा | ईश्वर की अकारण दया जो पापी-पुण्यात्मा सब पर बरसती है। |
| तारनहार | पार लगाने वाले / उद्धारक | सद्गुरु जो भवसागर से मुक्ति दिलाते हैं। |
| सबर सबुरी | धैर्य और संतोष | साईं बाबा का मुख्य उपदेश, जो साधना का आधार है। |
| नैया पार करना | नाव को किनारे लगाना | जीवन रूपी नौका को मोक्ष या संकटों से पार ले जाना। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
1. "मैं आन पड़ी तेरे द्वार साईं सुन लो मेरी पुकार..."
हे साईं बाबा! मैं अपने सभी प्रयासों में थककर, अपने अहंकार को आपके चरणों में समर्पित करके आपके द्वार पर आ गई हूँ। अब मेरी इस करुण पुकार को अनसुना न करें।
2. "मेरे दुःख सब दूर करो बाबा मेरी झोली भरो, मेरा सुखी वसे परिवार..."
मेरे जीवन के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कष्टों का हरण करें। मेरी झोली को सुख, शांति और संतोष से भर दें ताकि मेरा परिवार सदैव सुखी और धर्म के मार्ग पर अग्रसर रहे।
3. "चमत्कार दिखा दो कोई दुनिया की ठुकराई हूँ, कष्ट मिटा दो मेरे बाबा आशा लेकर आई हूँ..."
संसार के लोगों ने मुझे असमर्थ जानकर त्याग दिया है। अब मुझे आपकी अलौकिक कृपा (चमत्कार) की आवश्यकता है। मैं घोर निराशा के बीच भी आपके प्रति पूर्ण विश्वास और आशा लेकर आई हूँ।
4. "रेहम की एक नजर तुम कर दो बाबा मुझको ऐसा वर दो, साईं मेरे तारन हार..."
हे दयालु बाबा! अपनी करुणा की एक दृष्टि मुझ पर डाल दीजिए। मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि मेरा मन सदा आपके चरणों में लगा रहे, क्योंकि आप ही मेरे सच्चे उद्धारक हैं।
5. "दर दर पे मैं भटक रही हूँ पकड़ो मेरा हाथ बाबा, धूल न जाऊँ इस दुनिया में देदो मेरा साथ बाबा..."
मैं इस संसार की भूलभुलैया में भटक रही हूँ। यदि आपने मेरा हाथ नहीं थामा, तो मैं माया-मोह के इस बवंडर में नष्ट हो जाऊँगी। मुझे सन्मार्ग पर ले चलने के लिए अपना साथ प्रदान करें।
6. "देदो मुझको सबर सबुरी रहे न कोई बात अधूरी, बस मिल जाए तेरा प्यार..."
मुझे वह धैर्य (सबुरी) प्रदान करें जिससे मैं सुख-दुख में सम रह सकूँ। जब मुझे आपका पावन प्रेम मिल जाएगा, तो मेरी कोई भी इच्छा अधूरी नहीं रहेगी।
7. "बड़ी दूर से चल कर बाबा द्वार तेरे मैं आई हूँ, करदो पूरी साईं दिल में जो भी उमीदें लाई हूँ..."
मैं अनेक जन्मों की यात्रा करके, अत्यंत व्याकुलता के साथ आपके इस पावन दरबार में उपस्थित हुई हूँ। मेरे अंतःकरण की सभी सात्विक कामनाओं को पूर्ण करें।
8. "एक बार मेरी ओर निहारो जीवन मेरा आन सवारो, मेरी नैया करदो पार..."
हे सद्गुरु! केवल एक बार स्नेहपूर्वक मेरी ओर देख लीजिए। आपकी एक ही दृष्टि मेरे संपूर्ण जीवन को संवारने और इस संसार रूपी सागर से मेरी नैया को पार लगाने के लिए पर्याप्त है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के साथ साईं बाबा के निम्नलिखित मंत्रों का जाप करने से भजन का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है:
"ॐ साईं रामाय नमः"
"ॐ शिरडी वासाय विद्महे, सचिदानंदाय धीमहि, तन्नो साईं प्रचोदयात्॥"
साईं बाबा के ग्यारह वचनों में से यह वचन इस भजन के भाव को पूर्णतः पुष्ट करता है:
"मुझमें रखकर अचल विश्वास, जो भी आया शरण मेरी।
उसका संकट टल गया सारा, मिट गई दुविधा पल में तेरी॥"
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण कुंजी | विवरण मान |
|---|---|
| भजन का नाम | मैं आन पड़ी तेरे द्वार साईं सुन लो मेरी पुकार |
| समर्पित देवता | शिरडी के साईं बाबा (सद्गुरु) |
| भक्ति का भाव | शरणागति, दीनता, करुणा, पूर्ण समर्पण (प्रपत्ति भाव) |
| मुख्य विषय | श्रद्धा और सबुरी (धैर्य), कष्ट निवारण की प्रार्थना |
| उपयुक्त अवसर | गुरुवार पूजा, साईं संध्या, दैनिक प्रार्थना, सत्संग |
| भाषा | सरल हिंदी (सूफी शब्दावली युक्त) |
| काव्य विधा | भक्ति पद / प्रार्थना गीत |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इस भजन के पाठ और भावार्थ को तैयार करने में पारंपरिक साईं भक्ति साहित्य, श्री साईं सच्चरित्र के उपदेशों और लोक-परंपराओं का विशेष ध्यान रखा गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, प्रामाणिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध जानकारी पहुंचाना है ताकि उनकी साधना और श्रद्धा को बल मिल सके।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्री साईं सच्चरित्र: साईं बाबा के जीवन और उपदेशों का मुख्य ग्रंथ।
- शिरडी साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट: पारंपरिक आरती और भजनों के आधिकारिक संदर्भ।
- भारतीय भक्ति काव्य परंपरा: शरणागति और प्रपत्ति भाव के शास्त्रीय सिद्धांत।
संबंधित भजन एवं लेख
साईं बाबा की भक्ति और आराधना को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के लिए आप निम्नलिखित पावन भजनों और लेखों को भी पढ़ सकते हैं:
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें