भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

खोल खोल माये खोल मंदरा दे बूहे खोल भजन इन हिंदी

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खोल खोल माये खोल मंदरा दे बूहे खोल भजन: एक आध्यात्मिक विवेचन

"खोल खोल माये खोल मंदरा दे बूहे खोल" उत्तर भारत की पावन संकीर्तन परंपरा का एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी भजन है। यह भजन मुख्य रूप से आदिशक्ति माँ दुर्गा, माँ वैष्णो देवी और शेरावाली माता के प्रति समर्पित है। इस भजन में एक व्याकुल भक्त की पुकार है, जो संसार के समस्त द्वारों से निराश होकर अंततः जगज्जननी के पावन दरबार में उपस्थित हुआ है। इस भजन का मुख्य स्वर 'आर्त भाव' और 'पूर्ण शरणागति' का है। जब एक जीवात्मा सांसारिक मोह-माया और कष्टों से थक जाती है, तब वह अपनी परम माता से अपने हृदय और मंदिर के द्वार खोलने की प्रार्थना करती है। नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण और दैनिक संध्या आरती के समय इस भजन का गायन भक्तों को एक अलौकिक शांति और दिव्य ऊर्जा से भर देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

|| खोल खोल माये खोल मंदरा दे बूहे खोल ||

|| खोल खोल माये खोल मंदरा दे बूहे खोल ||
|| खोल खोल माये खोल मंदरा दे बूहे खोल ||
थक गईया संगता जय कारे तेरे बोल बोल
|| खोल खोल माये खोल मंदरा दे बूहे खोल ||

सारा जग घुमेया तसली कितो होई न,
सारे दरा उते जाके किती अरजोई माँ,
पावा तरले माये हंजू ढोल ढोल,
|| खोल खोल माये खोल मंदरा दे बूहे खोल ||

होया ना कोई होना तेरा जग ते कोई सानी माँ,
तेरे नालो बड़ा कोई दिसेया न दानी माँ,
मेनू माये रख तू चरना दे कोल कोल,
|| खोल खोल माये खोल मंदरा दे बूहे खोल ||

रोवे गल पल्ला पा सुनिदर सयोड़े दा
दुखा वाला रोग कट जन्मा दे रोले दा
आखे सिमरन तेनु माये हंजू ढोल ढोल
|| खोल खोल माये खोल मंदरा दे बूहे खोल ||

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन जीवात्मा और परमात्मा (आदिशक्ति) के बीच के अनन्य संबंध को दर्शाता है। यहाँ भक्त अपनी आराध्य देवी से प्रार्थना कर रहा है कि हे माता! अब अपने मंदिर के द्वार खोल दीजिए। यहाँ 'मंदिर के द्वार' केवल भौतिक कपाट नहीं हैं, बल्कि यह ज्ञान, करुणा और मोक्ष के द्वार हैं। भक्त कहता है कि आपकी संगत (भक्तगण) आपके नाम के जयकारे लगाते-लगाते थक गई है, उनकी व्याकुलता अब चरम पर है, इसलिए हे माँ, अब और प्रतीक्षा मत करवाओ।

भजन के अगले भाग में भक्त अपनी सांसारिक यात्रा की विफलता को स्वीकार करता है। वह कहता है कि उसने संपूर्ण संसार का भ्रमण कर लिया है, सुख-सुविधाओं के पीछे भाग लिया है, परंतु उसे कहीं भी सच्ची शांति और संतोष (तसल्ली) प्राप्त नहीं हुई। उसने दुनिया के हर दर पर जाकर मन्नतें मांगीं, प्रार्थनाएं कीं, लेकिन हर जगह से उसे केवल निराशा ही हाथ लगी। अंत में हारकर वह माँ के चरणों में आया है और अश्रु बहाते हुए विनती कर रहा है।

भक्त माँ की महिमा गाते हुए कहता है कि इस संपूर्ण ब्रह्मांड में माँ के समान कोई दूसरा दानी और कृपालु नहीं है। माँ अपने भक्तों को बिना किसी भेदभाव के अपनी शरण में लेती हैं। अंत में, भक्त अपने दुखों, रोगों और जन्म-जन्मांतर के बंधनों से मुक्ति की याचना करता है। वह प्रार्थना करता है कि माँ उसे अपने चरणों के समीप स्थान दें, जिससे उसका जीवन धन्य हो सके।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • अनन्य शरणागति (Surrender): यह भजन सिखाता है कि जब तक मनुष्य सांसारिक आश्रयों को छोड़कर पूरी तरह से ईश्वर के प्रति समर्पित नहीं होता, तब तक उसे वास्तविक शांति नहीं मिलती।
  • अश्रु-अभिषेक (Tears of Devotion): भजन में 'हंजू ढोल ढोल' (आँसू बहाना) शब्द का प्रयोग हुआ है। भक्ति मार्ग में आंसुओं को सबसे पवित्र माना गया है, जो हृदय के मैल को धो देते हैं।
  • कल्याणकारी भावना: यह केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरी 'संगत' (समूह) की सामूहिक पुकार है, जो वसुधैव कुटुंबकम् और सामूहिक प्रार्थना की शक्ति को दर्शाती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गायन वैसे तो किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु निम्नलिखित अवसरों पर इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है:

  • नवरात्रि महोत्सव: आश्विन और चैत्र नवरात्रि के पावन नौ दिनों में देवी दुर्गा की आराधना के समय इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • माता की चौकी और जागरण: उत्तर भारत में आयोजित होने वाले माता के जागरणों में इस भजन को गाकर भक्त झूम उठते हैं।
  • दैनिक संध्या आरती: घर के मंदिर में संध्या काल के समय इस भजन को सुनने या गाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से माँ दुर्गा और उनके सौम्य व करुणामयी रूप माँ वैष्णो देवी को समर्पित है। सनातन धर्म में माँ वैष्णो देवी को त्रिशक्ति (महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती) का एकीकृत रूप माना गया है। यह भजन भक्तों को जम्मू स्थित पावन वैष्णो देवी यात्रा और माँ के भवन की याद दिलाता है, जहाँ भक्त इसी प्रकार जयकारे लगाते हुए चढ़ाई पूरी करते हैं और माँ के दर्शनों के लिए 'बूहे' (द्वार) खुलने की प्रतीक्षा करते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पंजाब और जम्मू क्षेत्र की लोक-भक्ति संस्कृति से प्रेरित है। इस भजन की रचना पारंपरिक लोक शैली में की गई है, जिसमें स्थानीय कवियों और भक्तों के नाम (जैसे सुनिदर सयोड़े और सिमरन) का उल्लेख मिलता है। यह दर्शाता है कि कैसे एक साधारण भक्त अपनी स्थानीय भाषा में ईश्वर से सीधा संवाद स्थापित करता है। इस प्रकार के भजन किसी शास्त्रीय बंधन में न बंधकर सीधे हृदय से निकलते हैं और जन-जन के कंठ का हार बन जाते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा पंजाबी मिश्रित हिंदी है, जिसे 'खड़ी बोली' और पंजाबी लोक भाषा का सुंदर मिश्रण कहा जा सकता है। इसकी काव्य शैली अत्यंत सरल, सुबोध और लयात्मक है। इसमें प्रयुक्त शब्द जैसे 'बूहे' (दरवाजे), 'अरजोई' (प्रार्थना), 'तरले' (मिन्नतें), और 'हंजू' (आँसू) सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करते हैं। इसमें 'करुण रस' और 'भक्ति रस' का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पाठ सिखाता है:

  1. संसार की नश्वरता: 'सारा जग घुमेया तसली कितो होई न' पंक्ति हमें याद दिलाती है कि भौतिक संसार में पूर्ण संतोष असंभव है। सच्चा आनंद केवल परमात्मा की शरण में ही है।
  2. अहंकार का त्याग: जब भक्त 'पावा तरले' (मिन्नतें करना) कहता है, तो वह अपने अहंकार को पूरी तरह से मिटा देता है। ईश्वर की प्राप्ति के लिए निरहंकारी होना पहली शर्त है।
  3. धैर्य और विश्वास: जयकारे लगाते हुए द्वार खुलने की प्रतीक्षा करना भक्त के अटूट विश्वास और धैर्य (सबूरी) को दर्शाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
माये (Maye) हे माता / जगज्जननी सृष्टि की आदि शक्ति, माँ दुर्गा।
मंदरा दे (Mandira de) मंदिरों के हृदय रूपी मंदिर या दिव्य धाम।
बूहे (Buhe) द्वार / दरवाजे कृपा, ज्ञान और मोक्ष के द्वार।
संगता (Sangata) भक्तगण / साधक समूह सत्संग में एकत्रित हुए पुण्यात्मा।
अरजोई (Arjoi) प्रार्थना / विनती ईश्वर के समक्ष की गई आर्त पुकार।
तरले (Tarle) अत्यंत विनम्र प्रार्थना / मिन्नतें अहंकार शून्य होकर की गई याचना।
हंजू ढोल ढोल (Hanju Dhol) आँसू बहा-बहाकर भक्ति के अश्रु, जो हृदय को शुद्ध करते हैं।
सानी (Sani) समान / बराबरी करने वाला माँ के समान ब्रह्मांड में कोई दूसरा नहीं है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. "खोल खोल माये खोल मंदरा दे बूहे खोल..."
हे ममतामयी माता! अब अपने मंदिर के कपाट खोल दीजिए। आपकी संगत आपके दर्शनों के लिए व्याकुल है और आपके नाम का जयघोष करते-करते उनके कंठ भर आए हैं। अब अपनी करुणा की वर्षा कीजिए।

2. "सारा जग घुमेया तसली कितो होई न..."
मैंने इस संसार के कोने-कोने की खाक छानी, हर भौतिक सुख को प्राप्त करने का प्रयास किया, परंतु मेरे मन को कहीं भी तृप्ति और शांति नहीं मिली। मैंने हर किसी के आगे हाथ फैलाए, लेकिन आपकी शरण में आने के बाद ही मुझे समझ आया कि वास्तविक सुख कहाँ है।

3. "होया ना कोई होना तेरा जग ते कोई सानी माँ..."
हे माँ! इस चराचर जगत में आपके समान न तो कोई दयालु है और न ही कोई दानी। आप बिना मांगे ही अपने बच्चों की झोली भर देती हैं। मुझे संसार के किसी वैभव की चाह नहीं है, मुझे बस अपने चरणों के समीप रख लीजिए।

4. "रोवे गल पल्ला पा सुनिदर सयोड़े दा..."
भक्त अपने गले में पल्ला (आंचल) डालकर, अत्यंत दीन-हीन भाव से रोते हुए प्रार्थना कर रहा है कि हे माँ! मेरे जन्म-जन्मांतर के पापों और दुखों के रोगों को काट दीजिए। मुझे इस भवसागर के चक्रव्यूह से मुक्ति प्रदान कीजिए।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ माँ दुर्गा के इस परम कल्याणकारी श्लोक का स्मरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है:

"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥"

अर्थ: हे नारायणी! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हैं। आप कल्याणकारिणी, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी हैं। आपको नमस्कार है।

इसके अतिरिक्त, माँ के नवार्ण मंत्र का जाप भी भक्तों के लिए परम कल्याणकारी है:

"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम खोल खोल माये खोल मंदरा दे बूहे खोल
मुख्य आराध्य माँ दुर्गा / माँ वैष्णो देवी / शेरावाली माता
भजन का भाव करुणा, समर्पण, आर्त पुकार, अनन्य भक्ति
भाषा पंजाबी मिश्रित हिंदी (लोक शैली)
गायन का सर्वोत्तम समय नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी, संध्या काल
मुख्य संदेश सांसारिक मोह का त्याग और ईश्वरीय शरण की प्राप्ति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से माँ दुर्गा, माँ वैष्णो देवी और शेरावाली माता को समर्पित है। यह माँ के प्रति एक भक्त की आर्त पुकार है।

इस भजन की भाषा पंजाबी मिश्रित हिंदी (खड़ी बोली) है। यह उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और जम्मू क्षेत्र में बहुत लोकप्रिय है।

इसका आध्यात्मिक अर्थ है कि हे माँ! हमारे हृदय रूपी मंदिर के द्वार खोल दीजिए ताकि उसमें ज्ञान और भक्ति का प्रकाश फैल सके, और हमारे अज्ञान का अंधकार दूर हो सके।

इस भजन के श्रद्धापूर्वक गायन और श्रवण से मन को असीम शांति मिलती है, मानसिक तनाव दूर होता है, और साधक के भीतर समर्पण एवं भक्ति का भाव जाग्रत होता है।

नहीं, यद्यपि नवरात्रि में इसका विशेष महत्व है, परंतु इसे किसी भी शुभ अवसर जैसे माता की चौकी, जागरण, मुंडन संस्कार या दैनिक संध्या पूजा में गाया जा सकता है।

'हंजू ढोल ढोल' का अर्थ है 'आँसू बहा-बहाकर'। यह भक्त की उस पराकाष्ठा को दर्शाता है जहाँ वह अपने सारे दुखों और भावनाओं को अश्रुओं के माध्यम से माँ के चरणों में समर्पित कर देता है।

इस भजन का मुख्य रस 'करुण रस' और 'भक्ति रस' है। यह भक्त की व्याकुलता और ईश्वर के प्रति अगाध प्रेम को प्रदर्शित करता है।

यह भजन हमें सिखाता है कि संसार की वस्तुएं क्षणभंगुर हैं। सच्ची शांति केवल ईश्वर की शरण में ही मिल सकती है। हमें अपने जीवन में विनम्रता और समर्पण का भाव अपनाना चाहिए।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ, अर्थ और आध्यात्मिक विवेचन को सनातन धर्म की संकीर्तन परंपरा और प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर संकलित किया गया है। इसका उद्देश्य भक्तों तक शुद्ध और प्रेरणादायक सामग्री पहुंचाना है ताकि वे भजन के अंतर्निहित भाव को समझकर अपनी साधना को और अधिक सुदृढ़ बना सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण (आदिशक्ति महिमा प्रसंग)
  • पारंपरिक उत्तर भारतीय भजन एवं संकीर्तन संग्रह
  • वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के पारंपरिक आरती संग्रह

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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