"प्रभु संग लगन लगी है मोरी" एक अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी भजन है, जो जीवात्मा की परमात्मा के प्रति अनन्य निष्ठा और समर्पण को व्यक्त करता है। यह भजन कलयुग में नाम-संकीर्तन के महत्व को रेखांकित करता है। जब साधक का मन सांसारिक मोह-माया से विरक्त होकर प्रभु के चरणों में लग जाता है, तब उसे अलौकिक आनंद की अनुभूति होती है। यह भजन न केवल ईश्वर के प्रति प्रेम को दर्शाता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि कैसे निरंतर स्मरण के माध्यम से हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं। भक्ति रस से ओत-प्रोत यह रचना भक्तों को आत्म-साक्षात्कार और प्रभु मिलन की दिशा में प्रेरित करती है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
(मुखड़ा)
प्रभु संग लगन लगी है मोरी, अब तो न छूटेगी,
दुनिया से नाता तोड़ा है, अब तो न टूटेगी।
प्रभु संग लगन लगी है मोरी...
(अंतरा 1)
लोग कहें मुझे पागल-दीवानी, सुध-बुध खो बैठी,
मैं तो अपने सांवरिया की, गलियों में जा बैठी।
प्रेम की डोर बंधी है ऐसी, अब तो न छूटेगी,
प्रभु संग लगन लगी है मोरी...
(अंतरा 2)
विष का प्याला मीरा ने पीया, हँसकर सह लिया,
मैंने भी प्रभु के चरणों में, अपना सब कुछ दे दिया।
भक्ति की राह कठिन है थोड़ी, पर अब न छूटेगी,
प्रभु संग लगन लगी है मोरी...
(अंतरा 3)
कलयुग में प्रभु नाम ही सहारा, भव-सागर तरने को,
आया हूँ मैं द्वार तुम्हारे, अपना दुख हरने को।
कृपा की दृष्टि डालो स्वामी, अब तो न छूटेगी,
प्रभु संग लगन लगी है मोरी...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। "प्रभु संग लगन लगी है मोरी" का अर्थ है कि भक्त का मन अब पूरी तरह से ईश्वर के चिंतन में डूब चुका है। जिस प्रकार एक प्रेमी अपने प्रियतम के बिना नहीं रह सकता, उसी प्रकार भक्त का मन संसार के भौतिक सुखों को त्याग कर केवल प्रभु के नाम का आश्रय लेता है।
भजन में मीरा बाई का उदाहरण दिया गया है, जो यह दर्शाता है कि ईश्वर की भक्ति में आने वाली बाधाएं, चाहे वे समाज की आलोचना हो या शारीरिक कष्ट, भक्त के संकल्प को डिगा नहीं सकतीं। "दुनिया से नाता तोड़ा है" का अर्थ भौतिक संबंधों का त्याग नहीं, बल्कि उन संबंधों के प्रति आसक्ति का त्याग है। यह भजन हमें सिखाता है कि यदि हम सच्चे मन से प्रभु को पुकारें, तो वे अवश्य ही हमारी पुकार सुनते हैं और हमें इस भव-सागर से पार उतारते हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- भक्ति भाव: यह भजन 'अनन्य भक्ति' और 'शरणागति' के भाव को समर्पित है।
- नाम-संकीर्तन: कलयुग में ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग 'नाम-जप' बताया गया है, जिसे यह भजन प्रोत्साहित करता है।
- मानसिक शांति: इस भजन का नियमित श्रवण मन की चंचलता को कम करता है और एकाग्रता बढ़ाता है।
- सांस्कृतिक महत्व: यह भजन सत्संग, कीर्तन और व्यक्तिगत पूजा के समय अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) या संध्या काल में इसका गायन विशेष फलदायी होता है। इसे गाते समय मन में प्रभु की छवि का ध्यान करना चाहिए। यदि आप इसे सामूहिक रूप से गाते हैं, तो ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम के साथ इसका आनंद और भी बढ़ जाता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | सरल अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| लगन | गहरा प्रेम/अनुराग | ईश्वर के प्रति अटूट निष्ठा |
| सुध-बुध | होश-हवास | सांसारिक मोह से मुक्ति |
| भव-सागर | संसार रूपी समुद्र | जन्म-मरण का चक्र |
| सांवरिया | श्री कृष्ण | भक्त का आराध्य |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | प्रभु संग लगन लगी है मोरी |
|---|---|
| मुख्य भाव | अनन्य प्रेम और समर्पण |
| आराध्य | श्री कृष्ण / परमात्मा |
| उपयुक्त अवसर | सत्संग, कीर्तन, दैनिक पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?
जी हाँ, इस भजन को आप अपने घर में दैनिक पूजा या कीर्तन के समय श्रद्धापूर्वक गा सकते हैं।
इस भजन को गाने से क्या लाभ होता है?
यह भजन मन को शांत करता है और ईश्वर के प्रति प्रेम भाव को जागृत करता है।
क्या इसके लिए किसी विशेष वाद्य यंत्र की आवश्यकता है?
नहीं, भक्ति भाव ही सबसे महत्वपूर्ण है। आप इसे बिना किसी वाद्य यंत्र के भी गा सकते हैं।
क्या यह भजन किसी विशेष देवता के लिए है?
यह मुख्य रूप से श्री कृष्ण भक्ति से प्रेरित है, परंतु इसे किसी भी इष्ट देव के लिए गाया जा सकता है।
कलयुग में नाम-संकीर्तन का क्या महत्व है?
शास्त्रों के अनुसार, कलयुग में केवल प्रभु का नाम लेने मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
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