पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री नाथद्वारा श्रीनाथजी मंदिर, राजसमंद (राजस्थान)

27 दर्शनार्थी
नाथद्वारा, राजस्थान
प्रकाशित: 26 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
श्रीनाथजी (बालकृष्ण)
दर्शन समय सारिणी
सुबह 05:15 बजे से रात्रि 08:30 बजे तक (विभिन्न झांकियों के अनुसार)
नित्य आरती समय
मंगला: 05:15 AM | श्रृंगार: 07:15 AM | ग्वाल: 09:15 AM | राजभोग: 11:15 AM | उत्थापन: 03:30 PM | भोग: 04:45 PM | संध्या आरती: 05:15 PM | शयन: 08:15 PM
स्थान / नगर
नाथद्वारा, राजस्थान
आराध्य देव
श्रीनाथजी (बालकृष्ण)
दर्शन समय
सुबह 05:15 बजे से रात्रि 08:30 बजे तक (विभिन्न झांकियों के अनुसार)
आरती समय
मंगला: 05:15 AM | श्रृंगार: 07:15 AM | ग्वाल: 09:15 AM | राजभोग: 11:15 AM | उत्थापन: 03:30 PM | भोग: 04:45 PM | संध्या आरती: 05:15 PM | शयन: 08:15 PM
स्थान / धाम
श्रीनाथजी मंदिर, मंदिर मार्ग, नाथद्वारा, जिला राजसमंद, राजस्थान - 313301
अक्षर आकार:
पठन थीम:

श्रीनाथजी मंदिर: पुष्टिमार्ग का दिव्य धाम

राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित नाथद्वारा का श्रीनाथजी मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह पुष्टिमार्ग संप्रदाय का हृदय स्थल है। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण अपने सात वर्ष के बाल स्वरूप 'श्रीनाथजी' के रूप में विराजमान हैं। यह मंदिर 'हवेली' शैली की वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण है।

पौराणिक पृष्ठभूमि और इतिहास

श्रीनाथजी का विग्रह मूल रूप से गोवर्धन पर्वत (मथुरा) पर स्थित था। 17वीं शताब्दी में औरंगजेब के आक्रमणों से रक्षा करने हेतु, श्रीनाथजी की प्रतिमा को मेवाड़ ले जाया गया। किवदंती है कि जब प्रतिमा को ले जाया जा रहा था, तो जिस स्थान पर बैलगाड़ी का पहिया धंस गया, उसे भगवान की इच्छा मानकर वहीं मंदिर की स्थापना की गई। यही स्थान आज 'नाथद्वारा' (नाथ का द्वार) के नाम से प्रसिद्ध है।

वास्तुकला और गर्भगृह

यह मंदिर किसी पारंपरिक मंदिर की तरह नहीं, बल्कि एक भव्य 'हवेली' की तरह निर्मित है। यहाँ की वास्तुकला में राजस्थानी और मुगल शैलियों का सुंदर मिश्रण दिखता है। गर्भगृह को 'निज मंदिर' कहा जाता है, जहाँ प्रभु श्रीनाथजी की काले संगमरमर की प्रतिमा है। प्रभु का बायां हाथ ऊपर उठा हुआ है, जो गोवर्धन पर्वत को धारण करने का प्रतीक है।

दैनिक झांकियां और दर्शन

श्रीनाथजी के दर्शन 'झांकी' के रूप में होते हैं। दिन भर में आठ बार प्रभु के दर्शन खुलते हैं, जिन्हें 'अष्टयाम' कहा जाता है। प्रत्येक झांकी का अपना विशेष महत्व, श्रृंगार और भोग होता है।

झांकी का नामसमय
मंगला05:15 AM
श्रृंगार07:15 AM
ग्वाल09:15 AM
राजभोग11:15 AM
उत्थापन03:30 PM
भोग04:45 PM
संध्या आरती05:15 PM
शयन08:15 PM

प्रमुख उत्सव

यहाँ मनाए जाने वाले उत्सवों में 'अन्नकूट' महोत्सव विश्व प्रसिद्ध है। इसके अलावा जन्माष्टमी, होली (धुलंडी), और शरद पूर्णिमा पर मंदिर का अलौकिक श्रृंगार देखने योग्य होता है।

यात्रा निर्देश

हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा उदयपुर (महाराणा प्रताप हवाई अड्डा) है, जो लगभग 50 किमी दूर है। रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन मावली जंक्शन है, लेकिन उदयपुर स्टेशन से बेहतर कनेक्टिविटी मिलती है। सड़क मार्ग: नाथद्वारा उदयपुर-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है और राजस्थान रोडवेज की बसों द्वारा अच्छी तरह जुड़ा है।

आवास और सुविधाएं

मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित कई धर्मशालाएं उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, नाथद्वारा में निजी होटल और गेस्ट हाउस भी प्रचुर मात्रा में हैं। मंदिर में दर्शनार्थियों के लिए कतार प्रबंधन और सुरक्षा की उत्तम व्यवस्था है।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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