पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका (गुजरात)

185 दर्शनार्थी
द्वारका, गुजरात
प्रकाशित: 01 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
भगवान श्री कृष्ण (द्वारकाधीश)
दर्शन समय सारिणी
प्रातः 06:30 AM से दोपहर 01:00 PM और अपराह्न 05:00 PM से रात्रि 09:30 PM तक
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 07:00 AM | श्रृंगार आरती: 10:30 AM | संध्या आरती: 07:30 PM | शयन आरती: 08:30 PM
स्थान / नगर
द्वारका, गुजरात
आराध्य देव
भगवान श्री कृष्ण (द्वारकाधीश)
दर्शन समय
प्रातः 06:30 AM से दोपहर 01:00 PM और अपराह्न 05:00 PM से रात्रि 09:30 PM तक
आरती समय
मंगला आरती: 07:00 AM | श्रृंगार आरती: 10:30 AM | संध्या आरती: 07:30 PM | शयन आरती: 08:30 PM
स्थान / धाम
द्वारकाधीश मंदिर मार्ग, द्वारका, देवभूमि द्वारका जिला, गुजरात - 361335
अक्षर आकार:
पठन थीम:

श्री द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर) - परिचय

गुजरात के पश्चिमी छोर पर अरब सागर के तट पर स्थित श्री द्वारकाधीश मंदिर, जिसे 'जगत मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है, सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। यह पावन स्थल आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख धामों (बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी, रामेश्वरम) में से एक और सप्तपुरियों में शुमार है। मान्यता है कि यदुवंश के नष्ट होने के बाद भगवान श्री कृष्ण द्वारा बसाई गई यह स्वर्ण नगरी समुद्र में विलीन हो गई थी, जिसके अवशेषों और वर्तमान स्वरूप के दर्शन आज भी लाखों श्रद्धालु करते हैं।

पौराणिक पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक महत्व

स्कंद पुराण और महाभारत के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण ने मथुरा छोड़ने के बाद गोमती नदी के तट पर इस दिव्य नगरी का निर्माण किया था और इसे 'द्वारवती' नाम दिया था। यहाँ द्वारकाधीश के रूप में भगवान कृष्ण की पूजा होती है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो इस मंदिर का मूल निर्माण श्री कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ द्वारा कराए जाने की बात कही जाती है। समय के साथ, आक्रांताओं द्वारा इसे कई बार क्षति पहुंचाई गई, किंतु हिंदू राजाओं और पुष्टिमार्क के आचार्यों द्वारा इसका जीर्णोद्धार कराया गया। वर्तमान मंदिर लगभग 15वीं-16वीं शताब्दी का माना जाता है, जो नागर वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है।

वास्तुकला और गर्भ गृह (Architectural Splendor)

द्वारकाधीश मंदिर प्राचीन नागर वास्तुकला शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह भव्य संरचना चूना पत्थर और बलुआ पत्थर से निर्मित है, जिस पर अद्भुत नक्काशी की गई है।

  • शिखर और ध्वजदंडा: मंदिर का मुख्य शिखर लगभग 78 मीटर (255 फीट) ऊंचा है। इस पर लहराती हुई चतुष्कोणीय ध्वजा (ध्वजदंडा) सूर्य और चंद्रमा के प्रतीकों से सुसज्जित है। यह ध्वज दिन में कम से कम पांच बार बदला जाता है, जिसे देखना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • गर्भ गृह: मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्री कृष्ण की श्यामल (काले पाषाण) रंग की चतुर्भुज मूर्ति विराजमान है, जिसे 'द्वारकाधीश' या 'रणछोड़ जी' कहा जाता है। विग्रह को विभिन्न उत्सवों और ऋतुओं के अनुसार अत्यंत मनमोहक वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाता है।
  • स्वर्ग द्वार और मोक्ष द्वार: मंदिर में प्रवेश के लिए दो मुख्य द्वार हैं - उत्तर दिशा में स्थित द्वार को 'स्वर्ग द्वार' कहा जाता है, जिसके बाहर गोमती नदी में स्नान के लिए 56 सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं; वहीं दक्षिण दिशा के द्वार को 'मोक्ष द्वार' कहा जाता है।

दैनिक दर्शन एवं आरती का समय (Timings & Rituals)

मंदिर के कपाट दर्शनार्थियों के लिए सुबह से लेकर रात तक निर्धारित समय पर खुलते हैं। विशेष अवसरों पर समय में बदलाव किया जा सकता है:

आरती / दर्शन का नाम समय (प्रातः / सायं)
मंगला दर्शन एवं आरती 07:00 AM से 07:30 AM
शृंगार दर्शन 08:00 AM से 10:30 AM
उत्थापन दर्शन एवं भोग 12:00 PM से 01:00 PM (मंदिर दोपहर में बंद रहता है)
संध्या दर्शन एवं आरती 05:00 PM से 07:30 PM
शयन दर्शन एवं आरती 08:30 PM से 09:30 PM

प्रमुख उत्सव और पर्व (Major Festivals)

द्वारका में हर दिन उत्सव जैसा माहौल रहता है, परंतु कुछ विशेष पर्वों पर यहाँ का वैभव देखते ही बनता है:

  • जन्माष्टमी: भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर यहाँ मध्य रात्रि को भव्य महाआरती होती है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं।
  • दिवाली और अन्नकूट: दीपावली के पावन अवसर पर मंदिर को दीपों और फूलों से सजाया जाता है, और अन्नकूट का भव्य भोग लगाया जाता है।
  • गोपाष्टमी और होली: ब्रज की तरह द्वारका में भी होली और गोपाष्टमी का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

संपूर्ण यात्रा मार्ग (How to Reach Dwarka)

द्वारका देश के सभी प्रमुख शहरों से सड़क, रेल और वायु मार्ग द्वारा भली-भांति जुड़ा हुआ है:

  1. वायु मार्ग (By Air): निकटतम घरेलू हवाई अड्डा जामनगर (Jamnagar Airport) है, जो द्वारका से लगभग 137 किमी दूर है। इसके अलावा राजकोट और अहमदाबाद (Sardar Vallabhbhai Patel International Airport) से भी टैक्सी व बस सेवा उपलब्ध है।
  2. रेल मार्ग (By Train): 'द्वारका रेलवे स्टेशन' (DWK) पश्चिमी रेलवे नेटवर्क के अंतर्गत आता है। यह स्टेशन राजकोट, जामनगर, अहमदाबाद, मुंबई और दिल्ली जैसे प्रमुख शहरों से सीधी ट्रेनों से जुड़ा हुआ है।
  3. सड़क मार्ग (By Road): गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम (GSRTC) की बसें तथा निजी डीलक्स बसें अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा और सोमनाथ से नियमित रूप से द्वारका के लिए संचालित होती हैं।

यात्री सुविधाएं और आवास (Accommodation & Facilities)

द्वारका आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए मंदिर ट्रस्ट और निजी संस्थाओं द्वारा उत्कृष्ट व्यवस्थाएं की गई हैं:

  • धर्मशाला और गेस्ट हाउस: मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित सुदामा विश्राम गृह, श्री द्वारकाधीश धर्मशाला और कई आधुनिक होटल्स व रिसॉर्ट्स किफायती दरों पर उपलब्ध हैं।
  • भोजन प्रसादम: मंदिर के समीप कई भक्त निवासों और ट्रस्ट द्वारा संचालित अन्नक्षेत्रों में शुद्ध शाकाहारी भोजन प्रसादम की निःशुल्क अथवा न्यूनतम शुल्क पर व्यवस्था है।
  • लॉकर सुविधा: सुरक्षा कारणों से मंदिर के भीतर मोबाइल, कैमरा और चमड़े की वस्तुएं ले जाना वर्जित है। इसके लिए मंदिर परिसर के बाहर निःशुल्क लॉकर सुविधा उपलब्ध है।
तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

दर्शनार्थियों के अनुभव व समीक्षाएँ (0)

मंदिर दर्शन की अपनी आध्यात्मिक अनुभूति साझा करें

मंदिर विवरण कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!