मंत्र का उद्गम एवं ऋषि-छंद-देवता
सनातन धर्म में दस महाविद्याओं का विशेष स्थान है, जो आदि शक्ति महात्रिपुरसुरी के ही विभिन्न स्वरूप हैं। इन दसों महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या का नाम माँ बगलामुखी है। इन्हें 'पीताम्बरा देवी' के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है और इनके पूजन में पीले वस्त्र, पीले फूल, पीला आसन और पीले नैवेद्य का ही प्रयोग किया जाता है। माँ बगलामुखी स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं। ब्रह्मांड में जब भी अधर्म, अहंकार और दुष्टता की अति होती है, तब माँ बगलामुखी अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होती हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सत्य युग में एक बार महाविनाशक ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ, जिससे संपूर्ण सृष्टि नष्ट होने की कगार पर पहुँच गई थी। इस भयंकर संकट से चराचर जगत को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने हरिद्रा सरोवर (हल्दी की झील) के तट पर कठोर तपस्या की। भगवान विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवती त्रिपुरसुरी ने हरिद्रा सरोवर के मध्य से पीताम्बरा देवी के रूप में प्रकट हुईं। माँ बगलामुखी के इस प्राकट्य दिवस को 'बगलामुखी जयंती' के रूप में मनाया जाता है।
इस दिव्य मंत्र के ऋषि नारद मुनि हैं, इसका छंद त्रिष्टुप है, और इसकी अधिष्ठात्री देवी स्वयं पीताम्बरा माँ बगलामुखी हैं। भगवान विष्णु ने इसी विद्या को प्राप्त करके असुरों का संहार किया था और सृष्टि की पुनर्स्थापना की थी। यह मंत्र तांत्रिक एवं वैदिक दोनों दृष्टियों से अत्यधिक शक्तिशाली माना जाता है।
मूल शुद्ध मंत्र एवं लिपि
साधना के मार्ग में मंत्र की शुद्धता और उसका सही उच्चारण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। माँ बगलामुखी का यह मूल षडक्षर या विशेष मंत्र संपूर्ण ब्रह्मांड की स्तम्भन ऊर्जा को संकेंद्रित करता है:
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय शत्रु स्तम्भन जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा
इस मंत्र में 'ह्लीं' बीज मंत्र का विशेष महत्व है, जिसे ब्रह्मांड की सर्वोच्च आकर्षण और स्तम्भन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस बीज मंत्र के स्मरण मात्र से बड़े से बड़ा विरोधी भी शांत हो जाता है और साधকের साधना स्वतः सिद्ध होने लगती है।
पद-दर-पद अर्थ एवं भावार्थ
इस महान मंत्र के प्रत्येक शब्द का गहरा आध्यात्मिक और दार्शनिक अर्थ है:
- ॐ: यह संपूर्ण ब्रह्मांड का मूल नाद और प्रणव मंत्र है, जो परम ब्रह्म का प्रतीक है।
- ह्लीं: यह महामाया बगलामुखी का मूल बीज मंत्र है, जो स्तम्भन, आकर्षण और चेतना को केंद्रित करता है।
- बगलामुखि: हे बगलामुखी माँ! (जिनका मुख बगुले के समान ध्यानमग्न और शत्रु को स्थिर करने वाला है)।
- सर्वदुष्टानां: समस्त दुष्ट, विरोधी, और नकारात्मक प्रवृत्तियों वाले व्यक्तियों के।
- वाचं: उनकी वाणी को (ताकि वे अन्यायपूर्ण बातें न बोल सकें)।
- मुखं: उनके मुख को (जिज्ञासा या कुप्रचार रोकने के लिए)।
- पदं: उनके पैरों या गति को (ताकि वे अधर्म की ओर आगे न बढ़ सकें)।
- स्तम्भय: पूरी तरह स्तम्भित (जड़ या स्थिर) कर दीजिए।
- शत्रु स्तम्भन: शत्रुओं के सभी प्रकार के षड्यंत्रों और चालों को रोक दीजिए।
- जिह्वां कीलय: उनकी जीभ को कीलित (बांध) दीजिए ताकि वे असत्य या हानिकारक वचन न कह सकें।
- बुद्धिं विनाशय: उनकी दुर्बुद्धि और शत्रुतापूर्ण विचारों का नाश कीजिए।
- स्वाहा: इस आहुति को देवी को समर्पित करते हुए मेरा पूर्ण समर्पण स्वीकार हो।
विनियोग, न्यास एवं ध्यान श्लोक
किसी भी मंत्र के अनुष्ठान से पूर्व उसका विनियोग करना अनिवार्य माना जाता है ताकि मंत्र की ऊर्जा सही दिशा में प्रवाहित हो:
विनियोग: अस्य श्री बगलामुखी महामंत्रस्य नारद ऋषिः, त्रिष्टुप छन्दः, बगलामुखी देवता, ह्लीं बीजम्, स्वाहा शक्तिः, मम सर्वापद्व्यसन मुक्तिपूर्वकम्सर्वशत्रु स्तम्भनार्थे जपे विनियोगः।
ध्यान श्लोक:
सौवर्णाम्भसनस्थितां त्रिनयनां पीताम्बरालंकृताम्,
देवानामार्तिहन्त्रीमरिगणदलनीं रत्नदीपोज्ज्वलाम्।
भक्तानां कामपूरों करकलितमुद्गरै पाशवैरिणां,
ध्यायेद्बगलामुखीं त्रिजगतामीशां त्रिलोचनपुताम्॥
इस ध्यान श्लोक का अर्थ है कि जो देवी सोने के सिंहासन पर विराजमान हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो पीले वस्त्रों और आभूषणों से सुसज्जित हैं, जो देवताओं के दुखों को हरने वाली और शत्रुओं का नाश करने वाली हैं, जो भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं और जिनके हाथ में मुद्गर (गदा) है, ऐसी त्रिलोकी की स्वामिनी माँ बगलामुखी का हम ध्यान करते हैं।
जप विधि व नियम
माँ बगलामुखी की साधना अत्यंत गोपनीय और सख्त नियमों के अधीन होती है। इस मंत्र के जाप के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
- समय: इस मंत्र का सर्वोत्तम समय मध्य रात्रि (निशीथ काल) या ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः ३ से ६ बजे के बीच) माना जाता है।
- दिशा: साधक को पूर्व दिशा या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पीरे आसन पर बैठना चाहिए।
- वस्त्र एवं सामग्री: साधक के वस्त्र पीले रंग के होने चाहिए। पूजा में हल्दी की माला (हरिद्रा माला) या स्फटिक माला का प्रयोग करना श्रेष्ठ रहता है।
- नैवेद्य: माँ को पीले नींबू, पीले फूल, हल्दी की गाँठ और चने की दाल का भोग अर्पित किया जाता है।
- जाप संख्या: प्रतिदिन कम से कम १०८ बार (एक माला) का जाप करें। अनुष्ठान के दौरान सवा लाख मंत्रों का जप पूर्ण किया जाता है।
विशिष्ट लाभ एवं फलश्रुति
इस अद्भुत मंत्र के नियमित और विधि-विधान से जप करने पर साधक को निम्नलिखित अलौकिक लाभ प्राप्त होते हैं:
- शत्रु विजय: गुप्त और प्रकट शत्रुओं से रक्षा होती है और विरोधी स्वतः शांत हो जाते हैं।
- वाक् सिद्धि: साधक की वाणी में तीव्र प्रभाव उत्पन्न होता है, उसकी कही हुई बातें सत्य होने लगती हैं।
- कोर्ट-कचहरी में विजय: कानूनी मुकदमों, मुकदमों और भूमि-विवादों में सफलता मिलती है।
- नकारात्मक ऊर्जा का नाश: बुरी नजर, तंत्र-मंत्र बाधा, भूत-प्रेत बाधा और काले जादू का प्रभाव समाप्त होता है।
- आत्मबल में वृद्धि: साधक के भीतर अपूर्व साहस, आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता का विकास होता है।
सावधानियां एवं नियम
बगलामुखी साधना उग्र देवियों की श्रेणी में आती है, इसलिए इसमें कुछ विशेष सावधानियां बरतना अत्यंत आवश्यक है:
- साधना काल में पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- सात्विक भोजन ग्रहण करें और लहसुन-प्याज, मांस-मदिरा का पूरी तरह त्याग करें।
- क्रोध, अहंकार और ईर्ष्या से दूर रहें; इस मंत्र का प्रयोग कभी भी किसी का अहित करने या बदला लेने के लिए नहीं करना चाहिए।
- मंत्र का जाप हमेशा गुरु के मार्गदर्शन में ही करना उत्तम होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- प्रश्न: क्या महिलाएँ श्री बगलामुखी मंत्र का जाप कर सकती हैं?
उत्तर: हाँ, महिलाएँ भी इस मंत्र का पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से जाप कर सकती हैं। बस उन्हें मासिक धर्म के दिनों में साधना से विराम रखना चाहिए। - प्रश्न: क्या इस मंत्र के जाप के लिए दीक्षा आवश्यक है?
उत्तर: सामान्य नित्य जाप (जैसे १०८ बार) के लिए गुरु दीक्षा अनिवार्य नहीं है, किंतु यदि आप सवा लाख का अनुष्ठान कर रहे हैं, तो किसी योग्य गुरु से मार्गदर्शन अवश्य लें। - प्रश्न: हल्दी की माला का ही प्रयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर: चूँकि माँ बगलामुखी को पीताम्बरा देवी कहा जाता है और हल्दी उनका प्रिय द्रव्य है, इसलिए उनकी ऊर्जा को आकर्षित करने के लिए हरिद्रा माला सर्वोत्कृष्ट मानी गई है। - प्रश्न: क्या यह मंत्र हर प्रकार के शत्रु का नाश कर सकता है?
उत्तर: यह मंत्र धार्मिक, मानसिक और बाहरी बाधाओं और शत्रुओं (जो आपके जीवन को संकट में डाल रहे हैं) के स्तम्भन के लिए अचूक है, बशर्ते आपकी नीयत शुद्ध हो।