पौराणिक परिचय, उत्पत्ति एवं आध्यात्मिक महत्व
सनातन धर्म में हनुमान जी को संकटमोचन कहा गया है। जब मनुष्य सांसारिक जीवन में आर्थिक तंगी, कर्ज के बोझ या दरिद्रता से घिर जाता है, तो हनुमान जी की शरण ही एकमात्र मार्ग दिखाई देता है। ऋणहर्ता हनुमान मंत्र एक अत्यंत शक्तिशाली सिद्ध मंत्र है, जो साधक के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा और ऋण के भार को समाप्त करने की क्षमता रखता है। यह मंत्र न केवल धन प्रदान करता है, बल्कि व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और साहस का भी संचार करता है। हनुमान जी को 'अष्ट सिद्धि और नवनिधि के दाता' माना गया है, इसलिए उनकी उपासना से धन की कमी कभी नहीं रहती।
सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक
मंत्र का शुद्ध उच्चारण ही उसकी सिद्धि का आधार है। ऋणहर्ता मंत्र इस प्रकार है: ॐ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा। इसका उच्चारण करते समय 'आवेशाय' शब्द पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यह मंत्र हनुमान जी की उस ऊर्जा का आह्वान करता है जो बाधाओं को नष्ट करने में सक्षम है। इसे प्रतिदिन 108 बार लाल चंदन की माला पर जपने से विशेष लाभ मिलता है।
पौराणिक परिचय, उत्पत्ति एवं आध्यात्मिक महत्व
इस मंत्र की सिद्धि के लिए मंगलवार का दिन सर्वोत्तम माना गया है। साधक को लाल वस्त्र धारण कर हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष बैठना चाहिए। सर्वप्रथम गणेश जी का स्मरण करें, तत्पश्चात हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। मंत्र का जाप करते समय मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। हवन विधि के लिए गाय के घी, गुग्गुल और काले तिल का उपयोग करना चाहिए। 108 आहुतियां देने से मंत्र की ऊर्जा जागृत होती है और ऋण मुक्ति के मार्ग खुलने लगते हैं।
आध्यात्मिक अनुभव और सावधानियां
अनेक साधकों ने इस मंत्र के जाप से चमत्कारिक अनुभव प्राप्त किए हैं। कर्ज के पुराने मामले सुलझना, अचानक धन के नए स्रोत मिलना और मानसिक शांति का अनुभव होना इसके प्रमुख परिणाम हैं। सावधानी के रूप में, साधक को पूर्ण सात्विकता का पालन करना चाहिए। मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का त्याग अनिवार्य है। हनुमान जी की उपासना में अनुशासन ही सबसे बड़ा बल है। यदि आप पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस मंत्र का अनुष्ठान करते हैं, तो हनुमान जी निश्चित रूप से आपके संकटों का निवारण करेंगे।