दिव्य भक्ति नाद कैप्सूल
पूजन व ध्यान के समय पवित्र वातावरण निर्माण हेतु स्पर्श करें:
मकर संक्रांति का परिचय एवं महात्म्य
मकर संक्रांति सनातन धर्म का प्रमुख खगोलीय एवं आध्यात्मिक महापर्व है। इस दिन भगवान भुवन भास्कर दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर गमन करते हैं, जिसे देवताओं का दिन कहा जाता है। गंगा, यमुना और संगम में पावन स्नान, तिल-गुड़ का दान, और सूर्योपासना से मोक्ष व आरोग्य की प्राप्ति होती है।
मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के राशि परिवर्तन का प्रतीक है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने तक ही शरशय्या पर प्राण त्याग की प्रतीक्षा की थी। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर अपने पुत्र शनिदेव की मकर राशि में प्रवेश करते हैं। यह पिता-पुत्र के सौहार्द और अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का संदेश देता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल, असम में माघ बिहू, और उत्तर भारत में खिचड़ी पर्व के रूप में उल्लासपूर्वक मनाया जाता है।
मकर संक्रांति २०२५: शास्त्रसम्मत शुभ मुहूर्त
द्रिक गणित पंचांग एवं सूर्य-सिद्धांत गणना के अनुसार वर्ष २०२५ (विक्रम संवत २०८२) में पूजन एवं अनुष्ठान के अत्यंत फलदायी मुहूर्त:
संपूर्ण पूजा सामग्री सूची (Checklist)
शास्त्रोक्त पूजन हेतु आवश्यक समस्त सामग्रियों का संग्रह पूर्व में ही कर लें:
चरणबद्ध एवं शास्त्रीय पूजा विधि
शास्त्रों में वर्णित प्रामाणिक विधि के अनुसार निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
पौराणिक व्रत कथा एवं धार्मिक इतिहास
श्रीमद्भागवत एवं भविष्य पुराण के अनुसार, सूर्य देव का अपने पुत्र शनिदेव के प्रति पूर्व में कुछ मतभेद था। किंतु मकर संक्रांति के पावन दिन सूर्य देव स्वयं अपने पुत्र शनि की राशि मकर में पधारकर सारे द्वेष मिटा देते हैं। शनिदेव ने काले तिल से अपने पिता सूर्य देव का विधिवत सत्कार किया था, जिससे प्रसन्न होकर सूर्य देव ने वरदान दिया कि जो भी इस दिन तिल और गुड़ से पूजन-दान करेगा, उसे शनिदेव व सूर्य देव दोनों की कृपा प्राप्त होगी और उसके घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होगी।
प्रमुख मंत्र, स्तुति व श्लोक
सूर्य गायत्री महामंत्र
सूर्य अर्घ्य मंत्र
क्या करें और क्या न करें (नियम व सावधानियां)
क्या करें (करणीय कार्य)
- प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठकर तिलयुक्त जल से स्नान करें।
- सूर्य देव को अर्घ्य देते समय तांबे के पात्र का ही प्रयोग करें।
- काले तिल, गुड़, खिचड़ी व गर्म वस्त्रों का यथाशक्ति दान अवश्य करें।
- दिनभर ॐ सूर्याय नमः व गायत्री मंत्र का मानसिक जप करें।
क्या न करें (वर्जित कार्य)
- संक्रांति के दिन तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज) का पूर्णतः त्याग रखें।
- सूर्योदय के बाद देर तक सोने से बचें।
- घर आए किसी भी भिक्षुक अथवा निर्धन को खाली हाथ न लौटाएं।
- कटु वचन, क्रोध और पारिवारिक कलह से दूर रहें।