श्रीहरि महाव्रत संग्रह २४ एकादशी तिथियां संवत् २०८७

एकादशी व्रत कैलेंडर २०३० (Ekadashi 2030)

साल २०३० की समस्त २४ एकादशी तिथियों की प्रामाणिक सूची, पारण मुहूर्त, व्रत विधि व धार्मिक माहात्म्य।

कुल एकादशियां २४ पवित्र व्रत तिथियां
प्रमुख महाव्रत निर्जला, देवशयनी, देवउठनी
अगली आगामी एकादशी सफला
ईष्ट आराध्य भगवान श्रीहरि विष्णु

सफला एकादशी (Saphala Ekadashi)

पौष कृष्ण पक्ष
📅 २८ जनवरी २०३०
(सोमवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान नारायण / अच्युत
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल मनोवांछित कार्य सिद्धि एवं सर्व सफलता
हिंदू मास व पक्ष पौष मास (कृष्ण पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) मंगलवार, २९ जनवरी, प्रातः ०६:१३ से ०८:४३ AM
हरिवासर उपरांत

साल की प्रथम एकादशी। पाँच हजार वर्ष तक तपस्या करने का पुण्य फल मात्र इस एक व्रत से प्राप्त होता है। समस्त रुके हुए कार्यों में सफलता व सिद्धि प्राप्त होती है।

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पौष पुत्रदा एकादशी (Pausha Putrada)

पौष शुक्ल पक्ष प्रमुख महाव्रत
📅 १२ फ़रवरी २०३०
(मंगलवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान श्री कृष्ण / नारायण
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल संतान सुख, सुयोग्य संतति एवं वंश वृद्धि
हिंदू मास व पक्ष पौष मास (शुक्ल पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) बुधवार, १३ फ़रवरी, प्रातः ०६:११ से ०८:४१ AM
हरिवासर उपरांत

संतान प्राप्ति, संतान के आरोग्य, सुयश व वंश वृद्धि हेतु यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक किया जाता है।

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षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi)

माघ कृष्ण पक्ष
📅 २७ फ़रवरी २०३०
(बुधवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान श्रीहरि विष्णु
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल पाप मुक्ति, शारीरिक शुद्धि एवं तिल दान पुण्य
हिंदू मास व पक्ष माघ मास (कृष्ण पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) गुरुवार, २८ फ़रवरी, प्रातः ०६:११ से ०८:४१ AM
हरिवासर उपरांत

तिल के ६ रूपों (स्नान, उबटन, हवन, तर्पण, भोजन व दान) में उपयोग का विधान। समस्त ज्ञात-अज्ञात पापों का शमन होता है तथा आरोग्य व सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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जया एकादशी (Jaya Ekadashi)

माघ शुक्ल पक्ष
📅 १३ मार्च २०३०
(बुधवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान दामोदर
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल अधम योनि मुक्ति एवं अक्षय पुण्य
हिंदू मास व पक्ष माघ मास (शुक्ल पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) गुरुवार, १४ मार्च, प्रातः ०६:०९ से ०८:३९ AM
हरिवासर उपरांत

पिशाच, भूत व अधम योनियों के भय से मुक्ति दिलाने वाली पावन एकादशी। साधक को ब्रह्महत्या जैसे महापापों से भी मुक्ति व मोक्ष धाम की प्राप्ति होती है।

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विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi)

फाल्गुन कृष्ण पक्ष
📅 २९ मार्च २०३०
(शुक्रवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान श्री राम / विष्णु
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल शत्रु पराजय, विजय प्राप्ति व संकट निवारण
हिंदू मास व पक्ष फाल्गुन मास (कृष्ण पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) शनिवार, ३० मार्च, प्रातः ०६:०९ से ०८:३९ AM
हरिवासर उपरांत

लंका पर विजय प्राप्ति हेतु मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने समुद्र तट पर यह व्रत किया था। कठिन से कठिन परिस्थितियों व शत्रुओं पर विजय दिलाती है।

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आमलकी एकादशी / रंगभरी एकादशी (Amalaki Ekadashi)

फाल्गुन शुक्ल पक्ष प्रमुख महाव्रत
📅 १२ अप्रैल २०३०
(शुक्रवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान परशुराम व आंवला वृक्ष
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल अमृतमय स्वास्थ्य, समृद्धि एवं महावैभव
हिंदू मास व पक्ष फाल्गुन मास (शुक्ल पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) शनिवार, १३ अप्रैल, प्रातः ०६:०७ से ०८:३७ AM
हरिवासर उपरांत

पवित्र आंवले के वृक्ष का पूजन व अभिषेक। आंवले में भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी का साक्षात् वास माना जाता है। काशी में इसे रंगभरी एकादशी के रूप में मनाते हैं।

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पापमोचिनी एकादशी (Papmochani)

चैत्र कृष्ण पक्ष
📅 २७ अप्रैल २०३०
(शनिवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान श्रीहरि
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल समस्त संचित पापों का प्रायश्चित व मुक्ति
हिंदू मास व पक्ष चैत्र मास (कृष्ण पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) रविवार, २८ अप्रैल, प्रातः ०६:०७ से ०८:३७ AM
हरिवासर उपरांत

जाने-अनजाने में हुए समस्त संचित पापों के प्रायश्चित और निवारण हेतु चैत्र मास की परम कल्याणकारी एकादशी। मेधावी ऋषि व मंजुघोषा अप्सरा प्रसंग इससे जुड़ा है।

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कामदा एकादशी (Kamada Ekadashi)

चैत्र शुक्ल पक्ष
📅 ११ मई २०३०
(शनिवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान वासुदेव
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल सर्व मनोकामना पूर्ति एवं शाप निवारण
हिंदू मास व पक्ष चैत्र मास (शुक्ल पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) रविवार, १२ मई, प्रातः ०६:०५ से ०८:३५ AM
हरिवासर उपरांत

साधक की समस्त सात्विक मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाली एकादशी। शाप मुक्ति एवं जीवन में आए आकस्मिक संकटों से रक्षा होती है।

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वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi)

वैशाख कृष्ण पक्ष
📅 २७ मई २०३०
(सोमवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान मधुसूदन
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल अखंड सौभाग्य, आरोग्य व ऐश्वर्य प्राप्ति
हिंदू मास व पक्ष वैशाख मास (कृष्ण पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) मंगलवार, २८ मई, प्रातः ०६:०५ से ०८:३५ AM
हरिवासर उपरांत

अखंड सौभाग्य, ऐश्वर्य व परलोक में मोक्ष प्रदाता। दस हजार वर्ष तक तपस्या करने व कन्यादान के समान महान फल प्राप्त होता है।

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मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi)

वैशाख शुक्ल पक्ष प्रमुख महाव्रत
📅 १० जून २०३०
(सोमवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान श्रीहरि विष्णु (मोहिनी स्वरूप)
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल मोह-माया बंधन से मुक्ति एवं आत्मिक शांति
हिंदू मास व पक्ष वैशाख मास (शुक्ल पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) मंगलवार, ११ जून, प्रातः ०६:०३ से ०८:३३ AM
हरिवासर उपरांत

समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु ने देवताओं को अमृत पिलाने हेतु मोहिनी रूप धारण किया था। सांसारिक मोह-माया के बंधनों से मुक्ति दिलाने वाला व्रत।

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अपरा एकादशी / अचला एकादशी (Apara Ekadashi)

ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष
📅 २५ जून २०३०
(मंगलवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान त्रिविक्रम (वामन देव)
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल अपार धन, कीर्ति, यश एवं ब्रह्महत्या पाप मुक्ति
हिंदू मास व पक्ष ज्येष्ठ मास (कृष्ण पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) बुधवार, २६ जून, प्रातः ०६:०३ से ०८:३३ AM
हरिवासर उपरांत

अपार धन, कीर्ति, यश और पुण्य फल प्रदाता। ब्रह्महत्या, परनिंदा जैसे घोर पापों का नाश कर साधक को उच्च पद व मान-प्रतिष्ठा प्रदान करती है।

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निर्जला एकादशी / भीमसेनी एकादशी (Nirjala Ekadashi)

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष प्रमुख महाव्रत
📅 ९ जुलाई २०३०
(मंगलवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान नारायण व महाबली भीमसेन
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल वर्ष भर की २४ एकादशियों का सम्मिलित फल
हिंदू मास व पक्ष ज्येष्ठ मास (शुक्ल पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) बुधवार, १० जुलाई, प्रातः ०६:१९ से ०८:४९ AM
हरिवासर उपरांत

समस्त २४ एकादशियों का मुकुटमणि महाव्रत। बिना जल ग्रहण किए पूर्ण निर्जल उपवास रखने से वर्ष भर की सभी एकादशियों का पुण्य फल अकेले इसी एक व्रत से मिलता है।

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योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi)

आषाढ़ कृष्ण पक्ष
📅 २४ जुलाई २०३०
(बुधवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान वासुदेव / नारायण
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल असाध्य रोग निवारण एवं शारीरिक आरोग्य
हिंदू मास व पक्ष आषाढ़ मास (कृष्ण पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) गुरुवार, २५ जुलाई, प्रातः ०६:१९ से ०८:४९ AM
हरिवासर उपरांत

कुष्ठ रोग, चर्म रोग व समस्त असाध्य शारीरिक व्याधियों से मुक्ति दिलाने वाली एकादशी। ८८ हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

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देवशयनी एकादशी / हरिशयनी (Devshayani Ekadashi)

आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रमुख महाव्रत
📅 ८ अगस्त २०३०
(गुरुवार)
ईष्ट आराध्य देवता क्षीरसागरशायी भगवान श्री विष्णु
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल चातुर्मास प्रारंभ, आत्मिक शुद्धि व साधना
हिंदू मास व पक्ष आषाढ़ मास (शुक्ल पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) शुक्रवार, ९ अगस्त, प्रातः ०६:२१ से ०८:५१ AM
हरिवासर उपरांत

चातुर्मास का प्रारंभ। भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में ४ माह के लिए योगनिद्रा में शयन करते हैं। इस दिन से मांगलिक कार्यों पर ४ माह का विराम लगता है।

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कामिका एकादशी (Kamika Ekadashi)

श्रावण कृष्ण पक्ष
📅 २३ अगस्त २०३०
(शुक्रवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान श्रीधर (श्रीहरि)
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल अश्वमेध यज्ञ फल, पितृ शांति व मोक्ष
हिंदू मास व पक्ष श्रावण मास (कृष्ण पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) शनिवार, २४ अगस्त, प्रातः ०६:२१ से ०८:५१ AM
हरिवासर उपरांत

पवित्र श्रावण मास की प्रथम एकादशी। तुलसी दल से भगवान विष्णु का पूजन करने से समस्त संचित पाप भस्म होते हैं और अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।

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श्रावण पुत्रदा एकादशी / पवित्रा एकादशी (Shravana Putrada)

श्रावण शुक्ल पक्ष
📅 ६ सितंबर २०३०
(शुक्रवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान जनार्दन
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल संतान सुरक्षा, दीर्घायु एवं कुल कल्याण
हिंदू मास व पक्ष श्रावण मास (शुक्ल पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) शनिवार, ७ सितंबर, प्रातः ०६:२३ से ०८:५३ AM
हरिवासर उपरांत

संतान के उज्ज्वल भविष्य, दीर्घायु व संकट रक्षा हेतु पावन व्रत। पवित्रारोपण उत्सव के साथ ठाकुर जी को रेशमी पवित्रक अर्पित किया जाता है।

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अजा एकादशी (Aja Ekadashi)

भाद्रपद कृष्ण पक्ष
📅 २१ सितंबर २०३०
(शनिवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान ऋषिकेश
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल खोए हुए मान-सम्मान व वैभव की पुनः प्राप्ति
हिंदू मास व पक्ष भाद्रपद मास (कृष्ण पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) रविवार, २२ सितंबर, प्रातः ०६:२३ से ०८:५३ AM
हरिवासर उपरांत

सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने अपने खोए हुए राज्य, परिवार व सम्मान की पुनः प्राप्ति हेतु महर्षि गौतम के आदेश पर यह पावन व्रत किया था।

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परिवर्तिनी एकादशी / पद्मा एकादशी (Parivartini Ekadashi)

भाद्रपद शुक्ल पक्ष प्रमुख महाव्रत
📅 ६ अक्टूबर २०३०
(रविवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान वामन देव
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल भाग्य परिवर्तन, वामन कृपा एवं मोक्ष
हिंदू मास व पक्ष भाद्रपद मास (शुक्ल पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) सोमवार, ७ अक्टूबर, प्रातः ०६:२५ से ०८:५५ AM
हरिवासर उपरांत

योगनिद्रा में शयन कर रहे भगवान श्रीहरि करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। वामन जयंती व जयंती एकादशी का दुर्लभ संयोग।

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इन्दिरा एकादशी (Indira Ekadashi)

अश्विन कृष्ण पक्ष (पितृपक्ष) प्रमुख महाव्रत
📅 २० अक्टूबर २०३०
(रविवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान उपेंद्र / पद्मनाभ
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल पितृ तृप्ति, पूर्वज मोक्ष एवं पितृदोष निवारण
हिंदू मास व पक्ष अश्विन मास (कृष्ण पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) सोमवार, २१ अक्टूबर, प्रातः ०६:२५ से ०८:५५ AM
हरिवासर उपरांत

श्राद्ध पक्ष (पितृपक्ष) में आने वाली एकमात्र एकादशी। इस व्रत का पुण्य पितरों को समर्पित करने से नरक में पड़े पूर्वजों को भी तुरंत वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।

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पापांकुशा एकादशी (Papankusha Ekadashi)

अश्विन शुक्ल पक्ष
📅 ४ नवंबर २०३०
(सोमवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान पद्मनाभ
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल पूर्वजों की १० पीढ़ियों का उद्धार व मुक्ति
हिंदू मास व पक्ष अश्विन मास (शुक्ल पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) मंगलवार, ५ नवंबर, प्रातः ०६:२७ से ०८:५७ AM
हरिवासर उपरांत

पापों पर अंकुश लगाने वाली पावन एकादशी। साधक के माता, पिता व पत्नी के कुल की १०-१० पीढ़ियों का उद्धार कर उन्हें विष्णु लोक पहुँचाने की सामर्थ्य।

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रमा एकादशी (Rama Ekadashi)

कार्तिक कृष्ण पक्ष
📅 १९ नवंबर २०३०
(मंगलवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान केशव व माँ रमा (लक्ष्मी)
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल स्थिर महालक्ष्मी कृपा, दारिद्र्य नाश व समृद्धि
हिंदू मास व पक्ष कार्तिक मास (कृष्ण पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) बुधवार, २० नवंबर, प्रातः ०६:२७ से ०८:५७ AM
हरिवासर उपरांत

दीपावली से ठीक पूर्व आने वाली परम कल्याणकारी एकादशी। माँ लक्ष्मी (रमा) के विशेष अनुग्रह से साधक के घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।

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देवउठनी एकादशी / प्रबोधिनी एकादशी (Devutthana Ekadashi)

कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रमुख महाव्रत
📅 ४ दिसंबर २०३०
(बुधवार)
ईष्ट आराध्य देवता जागृत भगवान श्रीहरि व तुलसी माता
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल तुलसी विवाह, विवाह मुहूर्त शुभारंभ व महापुण्य
हिंदू मास व पक्ष कार्तिक मास (शुक्ल पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) गुरुवार, ५ दिसंबर, प्रातः ०६:२९ से ०८:५९ AM
हरिवासर उपरांत

चातुर्मास का समापन। भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागृत होते हैं। तुलसी विवाह का महामहोत्सव और समस्त शुभ व मांगलिक कार्यों का शुभारंभ।

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उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi)

मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष प्रमुख महाव्रत
📅 १९ दिसंबर २०३०
(गुरुवार)
ईष्ट आराध्य देवता देवी एकादशी व भगवान श्रीहरि
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल एकादशी व्रत का शुभारंभ एवं शत्रु संहार
हिंदू मास व पक्ष मार्गशीर्ष मास (कृष्ण पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) शुक्रवार, २० दिसंबर, प्रातः ०६:२९ से ०८:५९ AM
हरिवासर उपरांत

एकादशी माता का प्राकट्य दिवस। भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न शक्ति स्वरूपा देवी एकादशी ने मुर दैत्य का वध किया था। जो व्रत शुरू करना चाहते हैं, वे यहीं से करें।

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मोक्षदा एकादशी / गीता जयंती (Mokshada Ekadashi)

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष प्रमुख महाव्रत
📅 २० दिसंबर २०३०
(शुक्रवार)
ईष्ट आराध्य देवता भगवान श्री कृष्ण (गीता उपदेशक)
व्रत माहात्म्य व पुण्य फल श्रीमद्भगवद्गीता जयंती, मोक्ष एवं वैकुंठ गमन
हिंदू मास व पक्ष मार्गशीर्ष मास (शुक्ल पक्ष)
व्रत नियम सात्विक फलाहार / निर्जला
द्वादशी व्रत पारण समय (Parana Window) शनिवार, २१ दिसंबर, प्रातः ०६:२९ से ०८:५९ AM
हरिवासर उपरांत

कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का अमर ज्ञान दिया था। साधक और उसके पूर्वजों को जन्म-मरण के बंधन से मोक्ष दिलाती है।

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एकादशी व्रत का आध्यात्मिक माहात्म्य, नियम एवं पारण विधि

पद्म पुराण एवं धर्मसिंधु के अनुसार एकादशी व्रत के शास्त्रोक्त नियम

सनातन धर्म के समस्त व्रतों और उपवासों में एकादशी व्रत (Ekadashi Vrat) को सर्वश्रेष्ठ और 'व्रतराज' कहा गया है। पद्म पुराण के उत्तरखंड में स्वयं भगवान श्रीहरि विष्णु ने देवर्षि नारद से कहा है कि—"न गंगा सदृशं तीर्थं न देवः केशवात्परः। न ह्येकादशी समं किंचित्पावनं विद्यते भुवि॥" अर्थात् गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं, भगवान विष्णु के समान कोई देवता नहीं और एकादशी के समान कोई परम पावन व्रत इस पृथ्वी पर नहीं है।

१. एकादशी माता की उत्पत्ति और मुर दैत्य वध की पौराणिक कथा

सत्ययुग में मुर (Mur) नामक एक अत्यंत बलशाली और क्रूर दैत्य ने अपने आतंक से स्वर्गलोक पर अधिकार कर लिया तथा समस्त देवताओं को निष्कासित कर दिया। तब देवराज इंद्र की प्रार्थना पर भगवान श्रीहरि विष्णु ने उस दैत्य के साथ सैकड़ों वर्षों तक युद्ध किया। युद्ध करते-करते जब भगवान थक गए, तब वे बद्रिकाश्रम की हेमवती गुफा में विश्राम करने चले गए।

जब मुर दैत्य भगवान का वध करने हेतु गुफा में प्रविष्ट हुआ, उसी क्षण भगवान विष्णु के शरीर से एक अत्यंत तेजस्वी, दिव्य अस्त्र-शस्त्रों से युक्त कन्या प्रकट हुई। उस देवी ने सिंहनाद करते हुए एक ही प्रहार में मुर दैत्य का वध कर दिया। भगवान जब निद्रा से जागे, तब उन्होंने उस कन्या से अत्यंत प्रसन्न होकर वरदान मांगने को कहा। देवी ने कहा—"हे प्रभो! जो भी मनुष्य मेरे प्राकट्य दिवस पर उपवास रखकर आपका पूजन करे, उसके समस्त पाप नष्ट हों और उसे वैकुंठ धाम प्राप्त हो।" भगवान ने उनका नाम 'एकादशी' रखा, क्योंकि वे मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को प्रकट हुई थीं।

२. एकादशी व्रत के त्रिकाल नियम (दशमी, एकादशी और द्वादशी)

  • दशमी के नियम (पूर्व संध्या): दशमी तिथि के दिन सूर्यास्त से पूर्व एक बार सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। इस दिन मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन, मसूर की दाल और पराया अन्न पूर्णतः त्याज्य है। रात्रि में ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • एकादशी के नियम (व्रत दिवस): प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठकर गंगाजल युक्त जल से स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु के समक्ष हाथ में जल व पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें। दिनभर सात्विक फलाहार (दूध, फल, मेवे) लें अथवा निर्जल उपवास रखें।
  • द्वादशी के नियम (पारण दिवस): द्वादशी के दिन प्रातः पुनः स्नान कर भगवान विष्णु का पूजन करें। किसी सुयोग्य ब्राह्मण अथवा जरूरतमंद को भोजन कराएं तथा दान-दक्षिणा दें। इसके उपरांत शुभ मुहूर्त में तुलसी दल व चरणामृत लेकर पारण करें।

३. एकादशी के दिन चावल खाने का निषेध क्यों है? (वैज्ञानिक व धार्मिक रहस्य)

धार्मिक मान्यता के अनुसार, महर्षि मेधा ने जब अपने शरीर का त्याग किया था, तब उनके अंश पृथ्वी में समा गए और उनसे जौ व चावल उत्पन्न हुए। एकादशी के दिन चावल ग्रहण करना महर्षि मेधा के रक्त व मांस का भक्षण करने के समान पाप माना गया है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: चंद्रमा का पृथ्वी के जल और मनुष्य के शरीर के ७०% जल तत्व पर गहरा प्रभाव पड़ता है। एकादशी तिथि के दिन चंद्रमा की किरणें जलीय तत्वों को अशांत करती हैं। चावल में जल धारण करने की क्षमता सर्वाधिक होती है। चावल खाने से शरीर में आलस्य, तंद्रा और मन में चंचलता बढ़ती है, जिससे एकादशी के दिन ईश्वर ध्यान और साधना में बाधा उत्पन्न होती है।

४. पारण (Parana) का महत्व एवं हरिवासर का नियम

एकादशी व्रत का संपूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब उसका पारण (Parana) सही समय पर किया जाए। द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले पारण करना अनिवार्य होता है। यदि द्वादशी के दिन 'हरिवासर' (द्वादशी का प्रथम एक-चौथाई भाग) चल रहा हो, तो उस समय पारण कदापि नहीं करना चाहिए। हरिवासर समाप्त होने के बाद ही पारण करना शास्त्रसम्मत है।

संपादकीय एवं खगोलीय संदर्भ:

यह एकादशी व्रत कैलेंडर उपलब्ध प्रामाणिक पंचांग संदर्भों, पद्म पुराण, स्कंद पुराण एवं द्रिक गणितीय सूर्य-सिद्धांत गणनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। स्थानीय सूर्योदय के अनुसार पारण समय में कुछ मिनटों का सूक्ष्म अंतर संभव है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Ekadashi FAQs)

एकादशी व्रत विधि, पारण एवं फलाहार से जुड़े सामान्य प्रश्न
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली निर्जला एकादशी (भीमसेनी एकादशी) को समस्त २४ एकादशियों में सबसे बड़ी माना गया है। इस दिन बिना जल पिए उपवास रखने से वर्ष भर की सभी एकादशियों का पुण्य फल एक साथ प्राप्त होता है।
नहीं, एकादशी और रविवार के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना पूर्णतः वर्जित माना गया है। मान्यता है कि तुलसी माता स्वयं इस दिन भगवान विष्णु के निमित्त निर्जल व्रत रखती हैं। पूजा हेतु एक दिन पूर्व (दशमी) तोड़े गए अथवा स्वतः गिरे हुए पत्तों का उपयोग किया जा सकता है।
क्या खाएं: कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, सेंधा नमक, दूध, दही, फल, मेवे, मखाना, आलू और शकरकंद।
क्या न खाएं: चावल, गेहूं, दालें, लहसुन, प्याज, बैंगन, गोभी, गाजर, समुद्री नमक और किसी भी प्रकार का मांसाहार।
यदि किसी कारणवश शुभ मुहूर्त में पारण न हो सके, तो केवल जल और तुलसी दल ग्रहण करके व्रत खोल लेना चाहिए। तत्पश्चात भगवान से क्षमा याचना करके ब्राह्मण को दान करना चाहिए।