पावन आरती संग्रह · स्तुति पाठ
श्री भगवान नरसिंह आरती
8 पाठ

श्री नरसिंह भगवान की पावन आरती - ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

सम्पूर्ण आरती लिरिक्स हिंदी में, सरल भावार्थ, शास्त्रीय विधि, गायन नियम एवं नित्य पाठ के आध्यात्मिक लाभ।

राग कल्याण / यमन शास्त्रीय राग / ताल
5 पठन अवधि
Hindi आरती भाषा
Vivek.Kumar रचनाकार / स्रोत
अक्षर आकार:

॥ श्री नरसिंह भगवान की पावन आरती - ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि ॥

★ नित्य पाठ व संकीर्तन ★

भगवान नरसिंह, भगवान विष्णु के चौथे अवतार हैं, जो अपने भक्तों की रक्षा के लिए खंभे से प्रकट हुए थे। उनकी आरती करना न केवल नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश करता है, बल्कि साधक को अभय प्रदान करता है। इस लेख में हम नरसिंह देव की आरती के संपूर्ण बोल, उनके अर्थ और पूजा की शास्त्रीय विधि पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण आरती मूल बोल (Lyrics in Hindi)

ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।
स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन-रक्षक हरे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

गोपी-जन-वल्लभ, दास-प्रण-पालक।
भक्त-प्रह्लाद-रक्षक, असुर-कुल-नाशक॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

त्रिभुवन-व्यापक स्वामी, भक्त-वत्सल प्रभु।
दुष्ट-दलन-कारी, तुम हो सुख-सिंधु॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

नर-केसरी रूप धरि, हिरण्यकश्यप मारा।
भक्त-वत्सल प्रभु, जग-कल्याण-कारा॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

आरती नरसिंह की, जो कोई गावे।
भक्ति-मुक्ति-पावे, सब सुख पावे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥

आरती का सरल हिंदी भावार्थ एवं प्रत्येक पंक्ति का अर्थ

नरसिंह आरती की प्रत्येक पंक्ति में भगवान के उस उग्र और करुणामयी स्वरूप का वर्णन है, जिसने अधर्म का नाश किया। 'ॐ जय नरसिंह हरे' का अर्थ है कि हे नरसिंह देव, आपकी जय हो, आप सभी दुखों को हरने वाले हैं। 'स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे' उस पौराणिक घटना को दर्शाता है जहाँ भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान खंभे से प्रकट हुए। 'भक्त-प्रह्लाद-रक्षक' यह स्पष्ट करता है कि भगवान अपने अनन्य भक्तों के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। 'असुर-कुल-नाशक' का तात्पर्य है कि भगवान अहंकार और अधर्म का समूल नाश करते हैं। यह आरती केवल स्तुति नहीं, बल्कि एक प्रार्थना है कि प्रभु हमारे भीतर के अहंकार रूपी हिरण्यकश्यप का वध करें और हमें भक्ति का मार्ग दिखाएं।

आरती का धार्मिक एवं पौराणिक महत्व

नरसिंह अवतार का मुख्य उद्देश्य धर्म की स्थापना और भक्त की रक्षा था। शास्त्रों के अनुसार, नरसिंह देव का स्मरण करने मात्र से ही व्यक्ति के सभी भय समाप्त हो जाते हैं। नरसिंह चतुर्दशी के दिन इनकी पूजा का विशेष महत्व है। यह अवतार हमें सिखाता है कि सत्य और भक्ति के सामने कोई भी शक्ति टिक नहीं सकती।

आरती करने की सही विधि एवं नियम

आरती के समय शुद्धता का विशेष ध्यान रखें। सर्वप्रथम भगवान नरसिंह की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से स्नान कराएं। उन्हें पीले वस्त्र और तुलसी दल अर्पित करें। धूप, दीप और नैवेद्य (विशेषकर गुड़ और चने का भोग) अर्पित करने के बाद, घी के दीपक से आरती करें। आरती के दौरान घंटी और शंख का नाद करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

आरती के समय आवश्यक सामग्री

  • शुद्ध घी का दीपक (पंचमुखी दीपक श्रेष्ठ है)
  • कपूर की आरती
  • ताजे पुष्प (विशेषकर गेंदा या कमल)
  • नैवेद्य (गुड़-चना या पंचामृत)
  • शंख और घंटी
  • धूप-अगरबत्ती

राग, ताल एवं गायन समय

नरसिंह आरती को 'राग कल्याण' या 'यमन' में गाना अत्यंत प्रभावी माना जाता है। यह राग भक्ति और शांति का संचार करता है। इसे संध्या काल में या नरसिंह चतुर्दशी के अवसर पर सामूहिक रूप से गाना चाहिए।

दैनिक जीवन में आध्यात्मिक लाभ एवं फलश्रुति

नियमित रूप से नरसिंह आरती करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, शत्रुओं पर विजय और भय से मुक्ति मिलती है। यह नकारात्मक ऊर्जाओं को घर से दूर रखता है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।

१. श्री नरसिंह भगवान की पावन आरती - ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि का सरल भावार्थ

यह पावन आरती भगवान श्री भगवान नरसिंह के दिव्य स्वरूप, उनकी अलौकिक लीलाओं और भक्तों पर उनकी अहैतुकी कृपा का गुणगान करती है। जब भक्त पूर्ण निष्ठा, भक्ति और एकाग्रता के साथ इस आरती का गायन करते हैं, तो उनके हृदय में ईश्वरीय चेतना, सात्विक भाव और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।

"कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥"
अर्थात्: जो कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के साक्षात् अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, उन भगवान शिव और माता भवानी को मैं अपने हृदय कमल में नमन करता हूँ।

२. आरती की शास्त्रीय पूजा विधि एवं थाली घुमाने के नियम

आरती सदैव शुद्ध, पवित्र और एकाग्र चित्त होकर करनी चाहिए। शास्त्रों में आरती की थाली घुमाने का विशेष वैज्ञानिक व आध्यात्मिक नियम निर्धारित किया गया है:

  • चरणों में ४ बार: भगवान के श्री चरणों में ४ बार आरती की थाली घुमाकर प्रणाम करें।
  • नाभि मंडल में २ बार: भगवान की नाभि में २ बार घुमाकर समस्त सृष्टि के पालनकर्ता को नमन करें।
  • मुखारविंद पर १ बार: भगवान के दिव्य मुख के सम्मुख १ बार घुमाकर उनके दर्शन करें।
  • सम्पूर्ण विग्रह पर ७ बार: सम्पूर्ण श्री विग्रह पर ७ बार 'ॐ' की आकृति बनाते हुए दक्षिणावर्त (Clockwise) घुमाएं।

३. नित्य आरती गायन के आध्यात्मिक एवं भौतिक लाभ

प्रतिदिन प्रातःकाल एवं सायंकाल आरती करने से घर के वातावरण में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। शंख, घंटी और कपूर की दिव्य सुगंध से मन शांत होता है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और समस्त प्रकार के अनिष्ट व कष्ट दूर होते हैं।

४. आरती से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

हाँ, भगवान के प्रति पूर्ण आदर, सत्कार और विनम्रता प्रकट करने के लिए आरती खड़े होकर दोनों हाथों से थाली पकड़कर ही करनी चाहिए। अस्वस्थ होने की स्थिति में बैठकर भी आरती की जा सकती है।
आरती संपन्न होने पर थाली के चारों ओर जल का एक घेरा बनाकर अग्नि को शांत किया जाता है, जिसके पश्चात सभी भक्त दोनों हाथों से ज्योति की ऊष्मा (आशीर्वाद व तेज) ग्रहण करते हैं।
कपूर जलते समय कोई अवशेष नहीं छोड़ता, जो अहंकार के पूर्ण विसर्जन का प्रतीक है। साथ ही कपूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध, पवित्र और जीवाणुरहित बनाती है।

संबंधित पावन आरतियाँ

समस्त आरतियाँ देखें →

भक्त विचार एवं टिप्पणियां (0)

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। सर्वप्रथम अपने भक्ति विचार साझा करें!

भगवान श्री भगवान नरसिंह जी की नित्य वंदना और आरती पाठ से मन की चंचलता शांत होती है, एकाग्रता बढ़ती है एवं जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं नष्ट होती हैं।

श्री भगवान नरसिंह की समस्त आरतियाँ
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!