॥ श्री नर्मदा माता की आरती - ॐ जय नर्मदा मैया: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि ॥
★ नित्य पाठ व संकीर्तन ★सनातन धर्म में माँ नर्मदा केवल एक पवित्र नदी नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष फल प्रदान करने वाली साक्षात चैतन्य देवी और भगवान सदाशिव की दिव्यात्मजा पुत्री हैं। अमरकंटक के पावन शिखरों से उद्गमित होकर पश्चिम दिशा की ओर प्रवाहित होने वाली माँ रेवा (नर्मदा) संपूर्ण विश्व की एकमात्र ऐसी नदी हैं जिसकी परिक्रमा की जाती है। जहाँ माँ गंगा में स्नान करने से पापों का क्षय होता है, वहीं शास्त्रों का उद्घोष है कि माँ नर्मदा के केवल 'दर्शन मात्र' से जीव जन्म-जन्मांतर के पाप-ताप से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त कर लेता है। 'ॐ जय नर्मदा मैया' आरती माँ रेवा के वात्सल्य, करुणा, शिव-तत्व की महिमा और उनके पावन स्वरूप की संगीतमय स्तुति है। इस आरती का नियमित और श्रद्धापूर्वक गायन करने से साधक के घर में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक चेतना का अखंड प्रकाश प्रज्वलित होता है।
सम्पूर्ण आरती मूल बोल (Lyrics in Hindi)
॥ श्री नर्मदा जी की आरती ॥
ॐ जय नर्मदा मैया, मैया जय नर्मदा मैया।
ध्यावत तुमको निसदिन, ध्यावत तुमको निसदिन,
शिव ब्रह्मा हरिया॥ ॐ जय नर्मदा मैया...॥
अमरकंटक से निकली, तुम रेवा कहाई।
मैया तुम रेवा कहाई।
जनहित हेतु धरा पर, जनहित हेतु धरा पर,
पावन जल लाई॥ ॐ जय नर्मदा मैया...॥
कंकर-कंकर में शिव जी, तेरा बासा है।
मैया तेरा बासा है।
जो ध्यावे मन से, जो ध्यावे मन से,
पूर्ण हो आशा है॥ ॐ जय नर्मदा मैया...॥
सर्व पाप हरणी तुम, सब दुख मिटाती।
मैया सब दुख मिटाती।
दर्शन मात्र से मैया, दर्शन मात्र से मैया,
परम गति पाती॥ ॐ जय नर्मदा मैया...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, गुण गावें तेरा।
मैया गुण गावें तेरा।
मैया कृपा कर दो, मैया दया कर दो,
मिटे मोह अंधेरा॥ ॐ जय नर्मदा मैया...॥
धूप दीप फल नैवेद्य, आरती जो गावे।
मैया आरती जो गावे।
भक्त जनों को मैया, भक्त जनों को मैया,
सुख संपत्ति पावे॥ ॐ जय नर्मदा मैया...॥
नर्मदा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
मैया जो कोई नर गावे।
भणत शिवानंद स्वामी, भणत शिवानंद स्वामी,
मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय नर्मदा मैया...॥
आरती का सरल हिंदी भावार्थ एवं प्रत्येक पंक्ति का अर्थ
माँ नर्मदा की आरती के प्रत्येक पद में अगाध आध्यात्मिक रहस्य और शिव-शक्ति का पावन सम्मिश्रण निहित है। इसका विस्तृत भावार्थ निम्नलिखित है:
१. प्रथम पद: