पावन आरती संग्रह · स्तुति पाठ
श्री माँ नर्मदा / देवी आरती
12 पाठ

श्री नर्मदा माता की आरती - ॐ जय नर्मदा मैया: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

सम्पूर्ण आरती लिरिक्स हिंदी में, सरल भावार्थ, शास्त्रीय विधि, गायन नियम एवं नित्य पाठ के आध्यात्मिक लाभ।

पारंपरिक शास्त्रीय राग / ताल
5 पठन अवधि
Hindi आरती भाषा
Suraj.Kumar.Bind रचनाकार / स्रोत
अक्षर आकार:

॥ श्री नर्मदा माता की आरती - ॐ जय नर्मदा मैया: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि ॥

★ नित्य पाठ व संकीर्तन ★

सनातन धर्म में माँ नर्मदा केवल एक पवित्र नदी नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष फल प्रदान करने वाली साक्षात चैतन्य देवी और भगवान सदाशिव की दिव्यात्मजा पुत्री हैं। अमरकंटक के पावन शिखरों से उद्गमित होकर पश्चिम दिशा की ओर प्रवाहित होने वाली माँ रेवा (नर्मदा) संपूर्ण विश्व की एकमात्र ऐसी नदी हैं जिसकी परिक्रमा की जाती है। जहाँ माँ गंगा में स्नान करने से पापों का क्षय होता है, वहीं शास्त्रों का उद्घोष है कि माँ नर्मदा के केवल 'दर्शन मात्र' से जीव जन्म-जन्मांतर के पाप-ताप से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त कर लेता है। 'ॐ जय नर्मदा मैया' आरती माँ रेवा के वात्सल्य, करुणा, शिव-तत्व की महिमा और उनके पावन स्वरूप की संगीतमय स्तुति है। इस आरती का नियमित और श्रद्धापूर्वक गायन करने से साधक के घर में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक चेतना का अखंड प्रकाश प्रज्वलित होता है।

सम्पूर्ण आरती मूल बोल (Lyrics in Hindi)

॥ श्री नर्मदा जी की आरती ॥

ॐ जय नर्मदा मैया, मैया जय नर्मदा मैया।
ध्यावत तुमको निसदिन, ध्यावत तुमको निसदिन,
शिव ब्रह्मा हरिया॥ ॐ जय नर्मदा मैया...॥

अमरकंटक से निकली, तुम रेवा कहाई।
मैया तुम रेवा कहाई।
जनहित हेतु धरा पर, जनहित हेतु धरा पर,
पावन जल लाई॥ ॐ जय नर्मदा मैया...॥

कंकर-कंकर में शिव जी, तेरा बासा है।
मैया तेरा बासा है।
जो ध्यावे मन से, जो ध्यावे मन से,
पूर्ण हो आशा है॥ ॐ जय नर्मदा मैया...॥

सर्व पाप हरणी तुम, सब दुख मिटाती।
मैया सब दुख मिटाती।
दर्शन मात्र से मैया, दर्शन मात्र से मैया,
परम गति पाती॥ ॐ जय नर्मदा मैया...॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, गुण गावें तेरा।
मैया गुण गावें तेरा।
मैया कृपा कर दो, मैया दया कर दो,
मिटे मोह अंधेरा॥ ॐ जय नर्मदा मैया...॥

धूप दीप फल नैवेद्य, आरती जो गावे।
मैया आरती जो गावे।
भक्त जनों को मैया, भक्त जनों को मैया,
सुख संपत्ति पावे॥ ॐ जय नर्मदा मैया...॥

नर्मदा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
मैया जो कोई नर गावे।
भणत शिवानंद स्वामी, भणत शिवानंद स्वामी,
मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय नर्मदा मैया...॥

आरती का सरल हिंदी भावार्थ एवं प्रत्येक पंक्ति का अर्थ

माँ नर्मदा की आरती के प्रत्येक पद में अगाध आध्यात्मिक रहस्य और शिव-शक्ति का पावन सम्मिश्रण निहित है। इसका विस्तृत भावार्थ निम्नलिखित है:

१. प्रथम पद:

१. श्री नर्मदा माता की आरती - ॐ जय नर्मदा मैया: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि का सरल भावार्थ

यह पावन आरती भगवान श्री माँ नर्मदा / देवी के दिव्य स्वरूप, उनकी अलौकिक लीलाओं और भक्तों पर उनकी अहैतुकी कृपा का गुणगान करती है। जब भक्त पूर्ण निष्ठा, भक्ति और एकाग्रता के साथ इस आरती का गायन करते हैं, तो उनके हृदय में ईश्वरीय चेतना, सात्विक भाव और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।

"कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥"
अर्थात्: जो कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के साक्षात् अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, उन भगवान शिव और माता भवानी को मैं अपने हृदय कमल में नमन करता हूँ।

२. आरती की शास्त्रीय पूजा विधि एवं थाली घुमाने के नियम

आरती सदैव शुद्ध, पवित्र और एकाग्र चित्त होकर करनी चाहिए। शास्त्रों में आरती की थाली घुमाने का विशेष वैज्ञानिक व आध्यात्मिक नियम निर्धारित किया गया है:

  • चरणों में ४ बार: भगवान के श्री चरणों में ४ बार आरती की थाली घुमाकर प्रणाम करें।
  • नाभि मंडल में २ बार: भगवान की नाभि में २ बार घुमाकर समस्त सृष्टि के पालनकर्ता को नमन करें।
  • मुखारविंद पर १ बार: भगवान के दिव्य मुख के सम्मुख १ बार घुमाकर उनके दर्शन करें।
  • सम्पूर्ण विग्रह पर ७ बार: सम्पूर्ण श्री विग्रह पर ७ बार 'ॐ' की आकृति बनाते हुए दक्षिणावर्त (Clockwise) घुमाएं।

३. नित्य आरती गायन के आध्यात्मिक एवं भौतिक लाभ

प्रतिदिन प्रातःकाल एवं सायंकाल आरती करने से घर के वातावरण में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। शंख, घंटी और कपूर की दिव्य सुगंध से मन शांत होता है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और समस्त प्रकार के अनिष्ट व कष्ट दूर होते हैं।

४. आरती से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

हाँ, भगवान के प्रति पूर्ण आदर, सत्कार और विनम्रता प्रकट करने के लिए आरती खड़े होकर दोनों हाथों से थाली पकड़कर ही करनी चाहिए। अस्वस्थ होने की स्थिति में बैठकर भी आरती की जा सकती है।
आरती संपन्न होने पर थाली के चारों ओर जल का एक घेरा बनाकर अग्नि को शांत किया जाता है, जिसके पश्चात सभी भक्त दोनों हाथों से ज्योति की ऊष्मा (आशीर्वाद व तेज) ग्रहण करते हैं।
कपूर जलते समय कोई अवशेष नहीं छोड़ता, जो अहंकार के पूर्ण विसर्जन का प्रतीक है। साथ ही कपूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध, पवित्र और जीवाणुरहित बनाती है।

संबंधित पावन आरतियाँ

समस्त आरतियाँ देखें →

भक्त विचार एवं टिप्पणियां (0)

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। सर्वप्रथम अपने भक्ति विचार साझा करें!

भगवान श्री माँ नर्मदा / देवी जी की नित्य वंदना और आरती पाठ से मन की चंचलता शांत होती है, एकाग्रता बढ़ती है एवं जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं नष्ट होती हैं।

श्री माँ नर्मदा / देवी की समस्त आरतियाँ
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!