श्री तारा अष्टोत्तर शतनामावली पौराणिक परिचय एवं आध्यात्मिक रहस्य
सनातन धर्म में माँ तारा दस महाविद्याओं में से द्वितीय महाविद्या हैं। माँ तारा को 'तारिणी' कहा गया है, जो साधक को भवसागर से पार उतारती हैं। तंत्र शास्त्रों, विशेषकर बृहन्नील तंत्र और कालिका पुराण में माँ तारा की महिमा का विस्तृत वर्णन है। भगवान अक्षोभ्य माँ तारा के अधिष्ठाता देव माने जाते हैं। माँ तारा का स्वरूप अत्यंत करुणामयी और कल्याणकारी है। उनकी अष्टोत्तर शतनामावली का जप करने से साधक के जीवन के समस्त दोष, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जाएं नष्ट हो जाती हैं। यह नामावली न केवल मोक्ष प्रदान करने वाली है, बल्कि सांसारिक दुखों से मुक्ति दिलाने में भी सक्षम है। माँ तारा के 108 नाम उनके विभिन्न गुणों, शक्तियों और स्वरूपों का बोध कराते हैं।
विनियोग, ध्यान एवं नामावली जप संकल्प
विनियोग: ॐ अस्य श्रीताराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रमन्त्रस्य अक्षोभ्य ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीतारा देवता, मम सकलपापक्षयार्थं धर्मार्थकाममोक्षसिद्धये जपे विनियोगः।
ध्यान: प्रत्युदीढापदां घोरां मुण्डमालाप्रलम्बिताम्। खड्गकर्त्रीसमायुक्तां तां तारां प्रणमाम्यहम्॥
माँ तारा के सम्पूर्ण 108 पावन नाम
| क्र.सं. | दिव्य नाम (मंत्र रूप) | प्रमुख भावार्थ |
|---|---|---|
| १ | ॐ तारिण्यै नमः | भवसागर से तारने वाली |
| २ | ॐ तरणायै नमः | पार लगाने वाली |
| ३ | ॐ तन्व्यै नमः | सूक्ष्म स्वरूप वाली |
| ४ | ॐ तारायै नमः | तारक शक्ति |
| ५ | ॐ ताररूपिण्यै नमः | तारा रूप धारण करने वाली |
| ६ | ॐ उग्रतारायै नमः | उग्र स्वरूप वाली |
| ७ | ॐ नीलतारायै नमः | नीले वर्ण वाली |
| ८ | ॐ महोग्रातारायै नमः | अत्यंत उग्र |
| ९ | ॐ कामदायै नमः | कामना पूरी करने वाली |
| १० | ॐ मोक्षदायै नमः | मोक्ष देने वाली |
| ११ | ॐ विद्यायै नमः | ज्ञान स्वरूपा |
| १२ | ॐ महाविद्यायै नमः | सर्वोच्च विद्या |
| १३ | ॐ सिद्धविद्यायै नमः | सिद्धि देने वाली |
| १४ | ॐ गुह्यविद्यायै नमः | रहस्यमयी विद्या |
| १५ | ॐ योगिन्यै नमः | योगिनी स्वरूप |
| १६ | ॐ महायोगिन्यै नमः | महान योगिनी |
| १७ | ॐ सिद्धयोगिन्यै नमः | सिद्ध योगिनी |
| १८ | ॐ योगरूपिण्यै नमः | योग स्वरूप |
| १९ | ॐ भद्रकाल्यै नमः | कल्याणकारी काली |
| २० | ॐ महाकाल्यै नमः | समय की स्वामिनी |
| २१ | ॐ कालरात्र्यै नमः | काल की रात्रि |
| २२ | ॐ भयङ्कर्यै नमः | भय का नाश करने वाली |
| २३ | ॐ श्मशानवासिन्यै नमः | श्मशान में वास करने वाली |
| २४ | ॐ घोरायै नमः | भयानक स्वरूप |
| २५ | ॐ अघोररूपिण्यै नमः | अघोर स्वरूप |
| २६ | ॐ मुण्डमालिन्यै नमः | मुण्डों की माला पहनने वाली |
| २७ | ॐ खड्गहस्तायै नमः | हाथ में खड्ग धारण करने वाली |
| २८ | ॐ कर्तृधरायै नमः | कर्तरी धारण करने वाली |
| २९ | ॐ रक्तवर्णायै नमः | रक्त वर्ण वाली |
| ३० | ॐ नीलवर्णायै नमः | नील वर्ण वाली |
| ३१ | ॐ पीतवर्णायै नमः | पीत वर्ण वाली |
| ३२ | ॐ श्वेतवर्णायै नमः | श्वेत वर्ण वाली |
| ३३ | ॐ विश्वरूपायै नमः | विश्व स्वरूप |
| ३४ | ॐ विश्वमातृकायै नमः | विश्व की माता |
| ३५ | ॐ जगद्धात्र्यै नमः | जगत को धारण करने वाली |
| ३६ | ॐ जगत्प्रियायै नमः | जगत को प्रिय |
| ३७ | ॐ जगत्पूज्यायै नमः | जगत द्वारा पूजित |
| ३८ | ॐ जगद्वन्द्यायै नमः | जगत द्वारा वंदित |
| ३९ | ॐ जगन्मय्यै नमः | जगत में व्याप्त |
| ४० | ॐ पराशक्त्यै नमः | सर्वोच्च शक्ति |
| ४१ | ॐ पराविद्यायै नमः | सर्वोच्च ज्ञान |
| ४२ | ॐ परायै नमः | सर्वश्रेष्ठ |
| ४३ | ॐ परमानन्ददायिन्यै नमः | परमानंद देने वाली |
| ४४ | ॐ सुखदायै नमः | सुख देने वाली |
| ४५ | ॐ दुःखनाशिन्यै नमः | दुःख का नाश करने वाली |
| ४६ | ॐ पापनाशिन्यै नमः | पाप का नाश करने वाली |
| ४७ | ॐ रोगनाशिन्यै नमः | रोग का नाश करने वाली |
| ४८ | ॐ शोकनाशिन्यै नमः | शोक का नाश करने वाली |
| ४९ | ॐ मोहनाशिन्यै नमः | मोह का नाश करने वाली |
| ५० | ॐ भयनाशिन्यै नमः | भय का नाश करने वाली |
| ५१ | ॐ सर्वसिद्धिप्रदायै नमः | सर्व सिद्धि देने वाली |
| ५२ | ॐ सर्वकामप्रदायै नमः | सर्व कामना पूरी करने वाली |
| ५३ | ॐ सर्वमङ्गलदायै नमः | सर्व मंगल करने वाली |
| ५४ | ॐ सर्वसौभाग्यदायै नमः | सौभाग्य देने वाली |
| ५५ | ॐ सर्वैश्वर्यप्रदायै नमः | ऐश्वर्य देने वाली |
| ५६ | ॐ सर्वज्ञानप्रदायै नमः | ज्ञान देने वाली |
| ५७ | ॐ सर्वशक्तिप्रदायै नमः | शक्ति देने वाली |
| ५८ | ॐ सर्वभयहारिण्यै नमः | सब भय हरने वाली |
| ५९ | ॐ सर्वव्याधिनाशिन्यै नमः | सब व्याधि नाश करने वाली |
| ६० | ॐ सर्वदुःखविनाशिन्यै नमः | सब दुःख नाश करने वाली |
| ६१ | ॐ सर्वपापविनाशिन्यै नमः | सब पाप नाश करने वाली |
| ६२ | ॐ सर्वविघ्नविनाशिन्यै नमः | सब विघ्न नाश करने वाली |
| ६३ | ॐ सर्वशत्रुविनाशिन्यै नमः | सब शत्रु नाश करने वाली |
| ६४ | ॐ सर्वभयविनाशिन्यै नमः | सब भय नाश करने वाली |
| ६५ | ॐ सर्वमोहविनाशिन्यै नमः | सब मोह नाश करने वाली |
| ६६ | ॐ सर्वकामविनाशिन्यै नमः | सब काम नाश करने वाली |
| ६७ | ॐ सर्वक्रोधविनाशिन्यै नमः | सब क्रोध नाश करने वाली |
| ६८ | ॐ सर्वलोभविनाशिन्यै नमः | सब लोभ नाश करने वाली |
| ६९ | ॐ सर्वमदविनाशिन्यै नमः | सब मद नाश करने वाली |
| ७० | ॐ सर्वमात्सर्यनाशिन्यै नमः | सब मात्सर्य नाश करने वाली |
| ७१ | ॐ सर्वचिन्ताविनाशिन्यै नमः | सब चिंता नाश करने वाली |
| ७२ | ॐ सर्वभयविनाशिन्यै नमः | सब भय नाश करने वाली |
| ७३ | ॐ सर्वसंसारतारिण्यै नमः | संसार से तारने वाली |
| ७४ | ॐ सर्वभवतारिण्यै नमः | भव से तारने वाली |
| ७५ | ॐ सर्वदुःखतारिण्यै नमः | दुःख से तारने वाली |
| ७६ | ॐ सर्वपापतारिण्यै नमः | पाप से तारने वाली |
| ७७ | ॐ सर्वभयतारिण्यै नमः | भय से तारने वाली |
| ७८ | ॐ सर्वमोहतारिण्यै नमः | मोह से तारने वाली |
| ७९ | ॐ सर्वकामतारिण्यै नमः | काम से तारने वाली |
| ८० | ॐ सर्वक्रोधतारिण्यै नमः | क्रोध से तारने वाली |
| ८१ | ॐ सर्वलोभतारिण्यै नमः | लोभ से तारने वाली |
| ८२ | ॐ सर्वमदतारिण्यै नमः | मद से तारने वाली |
| ८३ | ॐ सर्वमात्सर्यतारिण्यै नमः | मात्सर्य से तारने वाली |
| ८४ | ॐ सर्वचिन्तातारिण्यै नमः | चिंता से तारने वाली |
| ८५ | ॐ सर्वव्याधितारिण्यै नमः | व्याधि से तारने वाली |
| ८६ | ॐ सर्वविघ्नतारिण्यै नमः | विघ्न से तारने वाली |
| ८७ | ॐ सर्वशत्रुतारिण्यै नमः | शत्रु से तारने वाली |
| ८८ | ॐ सर्वपापतारिण्यै नमः | पाप से तारने वाली |
| ८९ | ॐ सर्वदुःखतारिण्यै नमः | दुःख से तारने वाली |
| ९० | ॐ सर्वभयतारिण्यै नमः | भय से तारने वाली |
| ९१ | ॐ सर्वमोहतारिण्यै नमः | मोह से तारने वाली |
| ९२ | ॐ सर्वकामतारिण्यै नमः | काम से तारने वाली |
| ९३ | ॐ सर्वक्रोधतारिण्यै नमः | क्रोध से तारने वाली |
| ९४ | ॐ सर्वलोभतारिण्यै नमः | लोभ से तारने वाली |
| ९५ | ॐ सर्वमदतारिण्यै नमः | मद से तारने वाली |
| ९६ | ॐ सर्वमात्सर्यतारिण्यै नमः | मात्सर्य से तारने वाली |
| ९७ | ॐ सर्वचिन्तातारिण्यै नमः | चिंता से तारने वाली |
| ९८ | ॐ सर्वव्याधितारिण्यै नमः | व्याधि से तारने वाली |
| ९९ | ॐ सर्वविघ्नतारिण्यै नमः | विघ्न से तारने वाली |
| १०० | ॐ सर्वशत्रुतारिण्यै नमः | शत्रु से तारने वाली |
| १०१ | ॐ सर्वपापतारिण्यै नमः | पाप से तारने वाली |
| १०२ | ॐ सर्वदुःखतारिण्यै नमः | दुःख से तारने वाली |
| १०३ | ॐ सर्वभयतारिण्यै नमः | भय से तारने वाली |
| १०४ | ॐ सर्वमोहतारिण्यै नमः | मोह से तारने वाली |
| १०५ | ॐ सर्वकामतारिण्यै नमः | काम से तारने वाली |
| १०६ | ॐ सर्वक्रोधतारिण्यै नमः | क्रोध से तारने वाली |
| १०७ | ॐ सर्वलोभतारिण्यै नमः | लोभ से तारने वाली |
| १०८ | ॐ सर्वमदतारिण्यै नमः | मद से तारने वाली |
108 नाम जप की प्रामाणिक विधि एवं नियम
माँ तारा के 108 नामों का जप करने के लिए शांत स्थान का चयन करें। जप के लिए रुद्राक्ष या स्फटिक की माला का प्रयोग करना उत्तम माना जाता है। प्रातःकाल या रात्रि के समय माँ तारा का ध्यान करते हुए 'ॐ' के साथ प्रत्येक नाम का उच्चारण करें। जप से पूर्व संकल्प लें और माँ तारा के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। यह साधना पूर्णतः सात्विक भाव से की जानी चाहिए।
सम्पूर्ण फलश्रुति
जो साधक श्रद्धापूर्वक माँ तारा के इन 108 पावन नामों का पाठ करता है, उसे समस्त सिद्धियों की प्राप्ति होती है। यह नामावली शत्रुओं का नाश करने वाली, रोगों को दूर करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली है। इसके नित्य पाठ से साधक के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
माँ तारा के 108 पावन नामों का आध्यात्मिक विज्ञान और तांत्रिक रहस्य
माँ तारा, जो दश महाविद्याओं में द्वितीय स्थान पर विराजमान हैं, साक्षात भवतारिणी हैं। उनके 108 नामों का जप केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ तादात्म्य स्थापित करने की एक सूक्ष्म प्रक्रिया है। अक्षोभ्य शिव द्वारा पूजित माँ तारा का प्रत्येक नाम एक विशिष्ट आवृत्ति (Frequency) उत्पन्न करता है, जो साधक के अंतःकरण में स्थित अज्ञान के अंधकार को भेदने में सक्षम है। जब हम 'तारा' नाम का जप करते हैं, तो हम उस परम चेतना का आह्वान करते हैं जो संसार रूपी सागर से जीव को पार उतारने के लिए नौका के समान कार्य करती है।
इन 108 नामों में माँ के सौम्य और उग्र दोनों रूपों का समावेश है। 'नीलसरस्वती' के रूप में वे ज्ञान की अधिष्ठात्री हैं, तो 'उग्रा' के रूप में वे शत्रुओं और आंतरिक विकारों का संहार करने वाली हैं। इन नामों का जप करने से साधक के चक्रों में स्पंदन उत्पन्न होता है। विशेष रूप से विशुद्धि चक्र, जो वाणी और अभिव्यक्ति का केंद्र है, माँ तारा की कृपा से जागृत होता है। अक्षोभ्य शिव ने स्वयं कहा है कि जो साधक श्रद्धापूर्वक इन नामों का स्मरण करता है, उसके लिए काल भी भय का कारण नहीं रहता, क्योंकि वह स्वयं काल की स्वामिनी के संरक्षण में आ जाता है।
नाम जप की प्रक्रिया में 'बीज' और 'शक्ति' का मिलन होता है। प्रत्येक नाम के पीछे एक विशिष्ट मंत्र-शक्ति छिपी है। उदाहरण के लिए, 'भवतारिणी' नाम का जप करने से साधक के सांसारिक मोह-पाश ढीले होने लगते हैं। 'महाभीमा' नाम का जप करने से साधक के भीतर का भय समाप्त होकर साहस का संचार होता है। यह नाम जप एक कवच की भांति कार्य करता है, जो साधक को नकारात्मक ऊर्जाओं, तंत्र-मंत्र के दुष्प्रभावों और मानसिक अशांति से सुरक्षित रखता है।
श्री तारा अष्टोत्तर शतनामावली: साधना विधि और नियम
माँ तारा की साधना में पवित्रता और अनुशासन का विशेष महत्व है। 108 नामों के जप के लिए सबसे उपयुक्त समय ब्रह्ममुहूर्त या अर्धरात्रि का काल माना गया है। साधना के लिए नीले रंग के आसन का प्रयोग करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है, क्योंकि नीला रंग माँ तारा का प्रिय वर्ण है। जप के लिए रुद्राक्ष या स्फटिक की माला का उपयोग किया जा सकता है। जप से पूर्व माँ तारा के ध्यान मंत्र का पाठ करना अनिवार्य है, जिससे साधक का मन एकाग्र हो सके और वह माँ की ऊर्जा के साथ जुड़ सके।
जप विधि के अंतर्गत सर्वप्रथम अपने इष्ट देव और भगवान अक्षोभ्य शिव का स्मरण करें। इसके बाद संकल्प लें कि आप यह जप आत्म-कल्याण और भवसागर से मुक्ति हेतु कर रहे हैं। 108 नामों का पाठ करते समय प्रत्येक नाम के अंत में 'नमः' का उच्चारण करें। यदि संभव हो, तो प्रत्येक नाम के साथ एक नील कमल या नीले पुष्प की पंखुड़ी माँ के चरणों में अर्पित करें। यह क्रिया साधक को माँ के सान्निध्य का अनुभव कराती है और मानसिक एकाग्रता को चरम सीमा तक ले जाती है।
साधना के दौरान आहार-विहार में सात्विकता का पालन करना आवश्यक है। माँ तारा की कृपा प्राप्ति के लिए वाणी पर संयम और विचारों की शुद्धता अनिवार्य है। जप पूर्ण होने के पश्चात 'तारा कवच' का पाठ करना चाहिए, जिससे जप से उत्पन्न ऊर्जा साधक के सूक्ष्म शरीर में स्थिर हो सके। अंत में, क्षमा प्रार्थना करते हुए अपनी भूल-चूक के लिए माँ से क्षमा मांगें। यह प्रक्रिया न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती है, बल्कि भौतिक जीवन की बाधाओं को भी दूर करती है।
तारा नाम जप के फलश्रुति और आध्यात्मिक लाभ
| लाभ का प्रकार | आध्यात्मिक प्रभाव | भौतिक प्रभाव |
|---|---|---|
| मानसिक शांति | अहंकार का नाश और आत्म-साक्षात्कार | तनाव, चिंता और अनिद्रा से मुक्ति |
| वाक सिद्धि | वाणी में ओज और सत्य का वास | समाज में मान-सम्मान और प्रभाव |
| शत्रु बाधा निवारण | आंतरिक शत्रुओं (काम, क्रोध) पर विजय | बाहरी विरोधियों और तंत्र बाधाओं का शमन |
| मोक्ष प्राप्ति | भवसागर से मुक्ति और अक्षोभ्य पद की प्राप्ति | जीवन में स्थिरता और सौभाग्य का आगमन |
शास्त्रों में वर्णित है कि जो साधक नित्य प्रति माँ तारा के इन 108 नामों का पाठ करता है, उसे किसी भी अन्य साधना की आवश्यकता नहीं रहती। यह नाम जप स्वयं में एक पूर्ण अनुष्ठान है। माँ तारा की कृपा से साधक की बुद्धि प्रखर होती है और उसे गुप्त विद्याओं का ज्ञान स्वतः प्राप्त होने लगता है। यह साधना साधक को एक ऐसे मार्ग पर ले जाती है जहाँ उसे न तो मृत्यु का भय रहता है और न ही पुनर्जन्म का बंधन।
अक्षोभ्य पूजिता माँ तारा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए केवल बाहरी कर्मकांड ही पर्याप्त नहीं हैं, अपितु हृदय में अटूट विश्वास का होना आवश्यक है। जब साधक का प्रत्येक नाम जप एक पुकार बन जाता है, तब माँ स्वयं साधक की रक्षा के लिए तत्पर हो जाती हैं। यह 108 नामों की माला साधक के जीवन के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाती है, जिससे वह स्वयं 'तारा' (तारने वाली) के स्वरूप को प्राप्त कर लेता है।
विशेष निर्देश: माँ तारा की साधना अत्यंत शक्तिशाली है। इसे सदैव किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही प्रारंभ करना चाहिए। जप के समय मन को शांत रखें और माँ के नील वर्ण स्वरूप का ध्यान करें। यदि आप किसी विशेष संकट से गुजर रहे हैं, तो इन 108 नामों का पाठ प्रतिदिन तीन बार करने से शीघ्र ही सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।
भवतारण का मार्ग: नाम जप से आत्म-रूपांतरण
भवतारण का अर्थ है संसार के दुखों से मुक्ति। माँ तारा का नाम जप हमें यह सिखाता है कि हम इस संसार में रहते हुए भी इससे अनासक्त कैसे रहें। जैसे कमल का फूल कीचड़ में रहकर भी उससे अछूता रहता है, वैसे ही माँ तारा की कृपा से साधक सांसारिक माया के बीच रहकर भी मुक्त रहता है। 108 नामों का जप हमारे कर्मों के संचित संस्कारों को शुद्ध करता है, जिससे भविष्य के दुखों का बीज ही नष्ट हो जाता है।
यह साधना केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि लोक कल्याण के लिए भी की जा सकती है। जब हम माँ के नामों का जप करते हैं, तो हमारे आसपास का वातावरण भी शुद्ध और पवित्र हो जाता है। यह ऊर्जा साधक के परिवार और समाज में सकारात्मकता का संचार करती है। माँ तारा की करुणा असीम है; वे अपने भक्त की एक छोटी सी पुकार पर भी दौड़ी चली आती हैं। अतः, इन 108 नामों को अपने जीवन का आधार बनाएं और भवसागर को पार करने की अपनी यात्रा को सुगम बनाएं।
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