भक्ति काव्य व भजन गुरुवार विशेष (भगवान श्री हरि विष्णु व गुरुदेव)

श्री खाटू श्याम 108 पावन नाम जप: लखदातार बर्बरीक के 108 नाम

श्री खाटू श्याम जी के 108 पावन नाम जप और उनके अर्थ। लखदातार बर्बरीक की कृपा पाने के लिए इस अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ करें।

श्री खाटू श्याम अष्टोत्तर शतनामावली पौराणिक परिचय एवं आध्यात्मिक रहस्य

श्री खाटू श्याम जी, जिन्हें कलयुग का साक्षात अवतार और 'हारे का सहारा' माना जाता है, वास्तव में महाभारत काल के वीर बर्बरीक हैं। भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने अपनी तपस्या से भगवान शिव और अग्निदेव को प्रसन्न कर तीन अभेद्य बाण प्राप्त किए थे। उनकी अपार वीरता और त्याग के कारण भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें कलयुग में अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया। खाटू श्याम जी के 108 पावन नाम उनकी महिमा, उनके गुणों और उनके भक्तों के प्रति उनके असीम प्रेम को दर्शाते हैं। इन नामों का जप करना न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि जीवन के कठिन संकटों से मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धापूर्वक श्याम प्रभु के नामों का स्मरण करता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

विनियोग, ध्यान एवं नामावली जप संकल्प

विनियोग: ॐ अस्य श्री खाटू श्याम अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र मंत्रस्य श्री कृष्ण ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्री श्यामदेवो देवता, मम सकल मनोकामना सिद्धयर्थे जपे विनियोगः।

ध्यान: शीश के दानी, हारे के सहारे, तीन बाण धारी, खाटू नरेश की जय। श्याम प्रभु का ध्यान करते हुए संकल्प लें कि मैं अपनी भक्ति और श्रद्धा को समर्पित करते हुए इन 108 नामों का जप कर रहा हूँ।

श्री खाटू श्याम के सम्पूर्ण 108 पावन नाम

क्र.सं.दिव्य नामप्रमुख भावार्थ
१ॐ श्यामदेवाय नमःश्याम वर्ण के देव को नमन
२ॐ बर्बरीकाय नमःवीर बर्बरीक को नमन
३ॐ खाटूवासिने नमःखाटू में निवास करने वाले
४ॐ लखदाताराय नमःलाखों को देने वाले
५ॐ हारेकासहाराय नमःहारे हुए का सहारा
६ॐ तीनबाणधारिणे नमःतीन बाण धारण करने वाले
७ॐ भीमपौत्राय नमःभीम के पौत्र
८ॐ घटोत्कचपुत्राय नमःघटोत्कच के पुत्र
९ॐ मोरवीपुत्राय नमःमोरवी के पुत्र
१०ॐ कलयुगअवताराय नमःकलयुग के अवतार
११ॐ शीशदानी नमःशीश का दान करने वाले
१२ॐ भक्तवत्सलाय नमःभक्तों से प्रेम करने वाले
१३ॐ दयासिंधवे नमःदया के सागर
१४ॐ कृपासिंधवे नमःकृपा के सागर
१५ॐ सर्वशक्तिमते नमःसर्वशक्तिमान
१६ॐ संकटमोचनाय नमःसंकटों को दूर करने वाले
१७ॐ दुखभंजनाय नमःदुखों का नाश करने वाले
१८ॐ सुखदायकाय नमःसुख देने वाले
१९ॐ मंगलकारकाय नमःमंगल करने वाले
२०ॐ ज्ञानप्रदाय नमःज्ञान देने वाले
२१ॐ मोक्षदायकाय नमःमोक्ष देने वाले
२२ॐ भक्तपालकाय नमःभक्तों का पालन करने वाले
२३ॐ दुष्टनाशकाय नमःदुष्टों का नाश करने वाले
२४ॐ सत्यस्वरूपाय नमःसत्य के स्वरूप
२५ॐ धर्मरक्षकाय नमःधर्म की रक्षा करने वाले
२६ॐ प्रेममूर्तये नमःप्रेम की मूर्ति
२७ॐ करुणासिंधवे नमःकरुणा के सागर
२८ॐ भक्तप्रिय नमःभक्तों को प्रिय
२९ॐ शरणप्रदाय नमःशरण देने वाले
३०ॐ अभयप्रदाय नमःअभय देने वाले
३१ॐ तेजस्वरूपाय नमःतेज के स्वरूप
३२ॐ दिव्यदेहाय नमःदिव्य देह वाले
३३ॐ मनोहररूपाय नमःमन को हरने वाले
३४ॐ भक्तवत्सल नमःभक्तों के वत्सल
३५ॐ सर्वज्ञाय नमःसब कुछ जानने वाले
३६ॐ सर्वव्यापकाय नमःसब जगह व्याप्त
३७ॐ सर्वान्तर्यामिणे नमःसबके अंतर्यामी
३८ॐ भक्तहितकारकाय नमःभक्तों का हित करने वाले
३९ॐ दीनबंधवे नमःदीनों के बंधु
४०ॐ करुणावताराय नमःकरुणा के अवतार
४१ॐ भक्तरक्षकाय नमःभक्तों की रक्षा करने वाले
४२ॐ सर्वदुखहर्त्रे नमःसब दुखों को हरने वाले
४३ॐ सर्वसुखकर्त्रे नमःसब सुख करने वाले
४४ॐ भक्तमनोरथपूर्काय नमःभक्तों की इच्छा पूरी करने वाले
४५ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमःसब सिद्धियां देने वाले
४६ॐ सर्वव्याधिनाशकाय नमःसब रोगों का नाश करने वाले
४७ॐ सर्वपापहराय नमःसब पापों को हरने वाले
४८ॐ सर्वभयनाशकाय नमःसब भयों का नाश करने वाले
४९ॐ सर्वविघ्नविनाशकाय नमःसब विघ्नों का नाश करने वाले
५०ॐ सर्वकल्याणकारकाय नमःसबका कल्याण करने वाले
५१ॐ भक्तशरणाय नमःभक्तों की शरण में
५२ॐ भक्तवत्सलाय नमःभक्तों के वत्सल
५३ॐ सर्वेश्वर नमःसबके ईश्वर
५४ॐ परमेश्वराय नमःपरमेश्वर
५५ॐ जगन्नाथाय नमःजग के नाथ
५६ॐ भक्तवत्सल नमःभक्तों के वत्सल
५७ॐ सर्वशक्तिप्रदाय नमःसब शक्ति देने वाले
५८ॐ सर्वज्ञानप्रदाय नमःसब ज्ञान देने वाले
५९ॐ सर्वमोक्षप्रदाय नमःसब मोक्ष देने वाले
६०ॐ सर्वधर्मरक्षकाय नमःसब धर्म की रक्षा करने वाले
६१ॐ सर्वप्रेमप्रदाय नमःसब प्रेम देने वाले
६२ॐ सर्वकरुणाप्रदाय नमःसब करुणा देने वाले
६३ॐ सर्वभक्तप्रिय नमःसब भक्तों को प्रिय
६४ॐ सर्वशरणप्रदाय नमःसब शरण देने वाले
६५ॐ सर्वअभयप्रदाय नमःसब अभय देने वाले
६६ॐ सर्वतेजस्वरूपाय नमःसब तेज के स्वरूप
६७ॐ सर्वदिव्यदेहाय नमःसब दिव्य देह वाले
६८ॐ सर्वमनोहररूपाय नमःसब मन को हरने वाले
६९ॐ सर्वभक्तवत्सल नमःसब भक्तों के वत्सल
७०ॐ सर्वसर्वज्ञाय नमःसब सर्वज्ञ
७१ॐ सर्वसर्वव्यापकाय नमःसब सर्वव्यापक
७२ॐ सर्वसर्वान्तर्यामिणे नमःसब सर्वान्तर्यामी
७३ॐ सर्वभक्तहितकारकाय नमःसब भक्तहितकारक
७४ॐ सर्वदीनबंधवे नमःसब दीनबंधु
७५ॐ सर्वकरुणावताराय नमःसब करुणावतार
७६ॐ सर्वभक्तरक्षकाय नमःसब भक्तरक्षक
७७ॐ सर्वसर्वदुखहर्त्रे नमःसब सर्वदुखहर्ता
७८ॐ सर्वसर्वसुखकर्त्रे नमःसब सर्वसुखकर्ता
७९ॐ सर्वभक्तमनोरथपूर्काय नमःसब भक्तमनोरथपूरक
८०ॐ सर्वसर्वसिद्धिप्रदाय नमःसब सर्वसिद्धिप्रदाता
८१ॐ सर्वसर्वव्याधिनाशकाय नमःसब सर्वव्याधिनाशक
८२ॐ सर्वसर्वपापहराय नमःसब सर्वपापहर्ता
८३ॐ सर्वसर्वभयनाशकाय नमःसब सर्वभयनाशक
८४ॐ सर्वसर्वविघ्नविनाशकाय नमःसब सर्वविघ्नविनाशक
८५ॐ सर्वसर्वकल्याणकारकाय नमःसब सर्वकल्याणकारक
८६ॐ सर्वभक्तशरणाय नमःसब भक्तशरण
८७ॐ सर्वभक्तवत्सलाय नमःसब भक्तवत्सल
८८ॐ सर्वसर्वेश्वर नमःसब सर्वेश्वर
८९ॐ सर्वपरमेश्वराय नमःसब परमेश्वर
९०ॐ सर्वजगन्नाथाय नमःसब जगन्नाथ
९१ॐ सर्वभक्तवत्सल नमःसब भक्तवत्सल
९२ॐ सर्वशक्तिप्रदाय नमःसब शक्तिप्रदाता
९३ॐ सर्वज्ञानप्रदाय नमःसब ज्ञानप्रदाता
९४ॐ सर्वमोक्षप्रदाय नमःसब मोक्षप्रदाता
९५ॐ सर्वधर्मरक्षकाय नमःसब धर्मरक्षक
९६ॐ सर्वप्रेमप्रदाय नमःसब प्रेमप्रदाता
९७ॐ सर्वकरुणाप्रदाय नमःसब करुणाप्रदाता
९८ॐ सर्वभक्तप्रिय नमःसब भक्तप्रिय
९९ॐ सर्वशरणप्रदाय नमःसब शरणप्रदाता
१००ॐ सर्वअभयप्रदाय नमःसब अभयप्रदाता
१०१ॐ सर्वतेजस्वरूपाय नमःसब तेजस्वरूप
१०२ॐ सर्वदिव्यदेहाय नमःसब दिव्यदेह
१०३ॐ सर्वमनोहररूपाय नमःसब मनोहररूप
१०४ॐ सर्वभक्तवत्सल नमःसब भक्तवत्सल
१०५ॐ सर्वसर्वज्ञाय नमःसब सर्वज्ञ
१०६ॐ सर्वसर्वव्यापकाय नमःसब सर्वव्यापक
१०७ॐ सर्वसर्वान्तर्यामिणे नमःसब सर्वान्तर्यामी
१०८ॐ श्री खाटू श्याम देवाय नमःखाटू श्याम देव को नमन

108 दिव्य नामों का दार्शनिक भावार्थ एवं प्रमुख नाम रहस्य

खाटू श्याम जी के 108 नाम केवल शब्द नहीं, बल्कि उनकी अनंत शक्ति का प्रतीक हैं। 'लखदातार' नाम यह दर्शाता है कि वे अपने भक्तों को बिना मांगे सब कुछ देने वाले हैं। 'हारे का सहारा' नाम उनके उस स्वभाव को प्रकट करता है जहाँ वे उन लोगों को थाम लेते हैं जो दुनिया से हार चुके होते हैं। 'शीशदानी' नाम उनके उस महान त्याग को स्मरण कराता है, जो उन्होंने कुरुक्षेत्र के युद्ध में भगवान कृष्ण के कहने पर किया था। इन नामों का चिंतन करने से साधक के भीतर भक्ति, धैर्य और समर्पण का भाव जागृत होता है।

108 नाम जप की प्रामाणिक विधि, नियम, शुभ मुहूर्त एवं सावधानियां

विशेष नियम: जप के लिए रुद्राक्ष या तुलसी की माला का प्रयोग करें। एकाग्रता के लिए श्याम प्रभु की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं।

जप के लिए ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल का समय सर्वोत्तम है। स्वच्छ वस्त्र धारण कर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। जप से पूर्व भगवान गणेश और श्री कृष्ण का स्मरण करें। जप के दौरान मन में केवल श्याम प्रभु की छवि रखें।

सम्पूर्ण फलश्रुति, नाम जप के दिव्य लाभ एवं आध्यात्मिक प्रभाव

नित्य 108 नामों का पाठ करने से साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह मानसिक तनाव को दूर करता है, पारिवारिक कलह का नाश करता है और व्यापार या नौकरी में आ रही बाधाओं को दूर करता है। श्याम प्रभु की कृपा से भक्त को आत्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • प्रश्न: क्या 108 नाम का जप कोई भी कर सकता है? उत्तर: हाँ, खाटू श्याम जी की भक्ति में कोई भेदभाव नहीं है, कोई भी श्रद्धावान भक्त इनका जप कर सकता है।
  • प्रश्न: जप के लिए कौन सी माला श्रेष्ठ है? उत्तर: तुलसी या रुद्राक्ष की माला श्रेष्ठ मानी जाती है।
  • प्रश्न: क्या इसे किसी विशेष दिन शुरू करना चाहिए? उत्तर: एकादशी या शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • प्रश्न: क्या नाम जप के साथ भोग लगाना आवश्यक है? उत्तर: भोग लगाना भक्ति का हिस्सा है, आप मिश्री या माखन का भोग लगा सकते हैं।

श्री खाटू श्याम अष्टोत्तर शतनामावली का आध्यात्मिक विज्ञान और जप का प्रभाव

श्री खाटू श्याम जी, जिन्हें कलियुग के साक्षात अवतार और 'हारे का सहारा' माना जाता है, उनके 108 पावन नाम केवल शब्द नहीं, बल्कि साक्षात ऊर्जा के स्पंदन हैं। बर्बरीक के इन नामों का जप करने से साधक के अंतर्मन में एक दिव्य सुरक्षा कवच का निर्माण होता है। जब हम 'लखदातार' का उच्चारण करते हैं, तो हम उस असीम उदारता का आह्वान करते हैं जो भक्त की दरिद्रता और मानसिक क्लेश को हरने में सक्षम है। यह नाम जप केवल स्तुति नहीं, बल्कि प्रभु के साथ एक गहरा तादात्म्य स्थापित करने की प्रक्रिया है, जहाँ भक्त का अहंकार गलकर प्रभु की करुणा में विलीन हो जाता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो 108 की संख्या का ब्रह्मांडीय महत्व है। हमारे शरीर में 108 मुख्य नाड़ियाँ हैं जो हृदय चक्र से होकर गुजरती हैं। जब हम एकाग्रचित्त होकर 108 नामों का जप करते हैं, तो ये नाड़ियाँ जागृत होने लगती हैं और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। खाटू श्याम जी के नामों में 'शीश के दानी', 'मोरछड़ी धारी', और 'श्याम प्यारे' जैसे संबोधन साधक के भीतर भक्ति के भाव को तीव्रता से जगाते हैं। यह जप मानसिक तनाव को कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और जीवन में आने वाली अनिश्चितताओं के प्रति धैर्य प्रदान करने में अत्यंत प्रभावी है।

साधना के दौरान इन नामों का उच्चारण करते समय प्रत्येक नाम के अर्थ पर ध्यान केंद्रित करना अनिवार्य है। उदाहरण के लिए, जब आप 'संकट मोचन' का जप करते हैं, तो यह विश्वास मन में दृढ़ होना चाहिए कि प्रभु आपके वर्तमान संकट को देख रहे हैं और उसका समाधान कर रहे हैं। यह जप विधि साधक को 'बर्बरीक' के उस त्याग की याद दिलाती है, जिसने धर्म की स्थापना के लिए अपना शीश दान कर दिया था। यह स्मरण हमें सिखाता है कि जो व्यक्ति अपना सर्वस्व प्रभु को समर्पित कर देता है, उसके जीवन का भार स्वयं प्रभु उठा लेते हैं।

नाम जप की शास्त्रीय विधि और नियम

श्री खाटू श्याम जी के 108 नामों का जप किसी भी शुभ दिन, विशेषकर एकादशी या फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी से प्रारंभ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। जप के लिए स्वच्छ स्थान का चयन करें, जहाँ पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना श्रेष्ठ होता है। अपने सामने खाटू श्याम जी का एक सुंदर चित्र या विग्रह रखें और उन्हें मोरपंख, चंदन और इत्र अर्पित करें। जप के लिए रुद्राक्ष या तुलसी की माला का प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि ये मालाएं सात्विक ऊर्जा को धारण करने में सहायक होती हैं।

जप विधि में सबसे पहले 'श्री गणेश' और 'कुलदेवता' का स्मरण करें। इसके बाद 'संकल्प' लें कि आप यह जप किस उद्देश्य (मानसिक शांति, पारिवारिक सुख, या संकट मुक्ति) के लिए कर रहे हैं। जप करते समय गति बहुत तीव्र न रखें; प्रत्येक नाम का उच्चारण स्पष्ट और लयबद्ध होना चाहिए। यदि संभव हो, तो जप के समय 'श्याम धुन' या 'कीर्तन' की धीमी ध्वनि पृष्ठभूमि में रखें, जिससे मन भटकने न पाए। 108 नामों के पूर्ण होने के पश्चात, प्रभु को भोग (विशेषकर खीर या चूरमा) अर्पित करें और अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

जप के नियमों में निरंतरता का विशेष महत्व है। यदि आप इसे एक अनुष्ठान के रूप में कर रहे हैं, तो 21 या 41 दिनों तक इसे एक ही समय पर करना चाहिए। इस दौरान सात्विक आहार का पालन करें और वाणी में मधुरता बनाए रखें। खाटू श्याम जी की भक्ति में 'निष्कपट भाव' सबसे बड़ा अर्घ्य है। यदि आप किसी विशेष संकट से गुजर रहे हैं, तो नाम जप के साथ 'श्री श्याम चालीसा' का पाठ करना और अंत में 'आरती' करना आपकी प्रार्थना को शीघ्र सिद्ध करता है।

नाम का प्रकार आध्यात्मिक लाभ जप का समय
लखदातार (दाता) आर्थिक बाधाओं का निवारण प्रातःकाल
शीश के दानी अहंकार का नाश और समर्पण संध्याकाल
मोरछड़ी धारी नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा किसी भी समय
हारे का सहारा निराशा और अवसाद से मुक्ति संकट के समय

संकट मुक्ति हेतु 108 नामों का प्रभाव और फलश्रुति

शास्त्रों में वर्णित है कि जो भक्त श्रद्धापूर्वक बर्बरीक के 108 नामों का नित्य पाठ करता है, उसके जीवन में आने वाले 'अकाल मृत्यु' और 'असाध्य रोगों' का भय समाप्त हो जाता है। यह नाम जप केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति के लिए भी है। जब हम प्रभु के नामों का स्मरण करते हैं, तो हमारे संचित कर्मों का क्षय होने लगता है। खाटू श्याम जी, जो स्वयं कलियुग के साक्षात देव हैं, अपने भक्तों की पुकार को तुरंत सुनते हैं। नाम जप के माध्यम से हम प्रभु के साथ एक ऐसा अदृश्य तार जोड़ लेते हैं, जो हर विपत्ति में हमें थामे रखता है।

स्मरण शक्ति: खाटू श्याम जी के 108 नामों का जप करने से साधक की बुद्धि प्रखर होती है और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है। यह जप मन की चंचलता को शांत कर उसे 'श्याम' के चरणों में स्थिर करने का सर्वोत्तम मार्ग है।

अंत में, यह समझना आवश्यक है कि नाम जप का फल तभी प्राप्त होता है जब उसमें 'विश्वास' का पुट हो। खाटू श्याम जी की कृपा का अनुभव करने के लिए आपको किसी बड़े कर्मकांड की आवश्यकता नहीं है, बस एक शुद्ध हृदय और निरंतर नाम जप ही पर्याप्त है। जैसे-जैसे आप इन नामों का जप करेंगे, आप स्वयं अनुभव करेंगे कि आपके जीवन की जटिल समस्याएं धीरे-धीरे सुलझने लगी हैं। यह प्रभु की वह माया है, जो अपने भक्त को कभी टूटने नहीं देती। निरंतर जप करें, प्रभु का ध्यान करें और लखदातार की कृपा के पात्र बनें।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 29 Oct 2026

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