श्री बगलामुखी अष्टोत्तर शतनामावली पौराणिक परिचय एवं आध्यात्मिक रहस्य
माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें 'स्तम्भन' की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। बगला शब्द 'वल्गा' का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ होता है 'दुल्हन' या 'आकर्षण'। माँ बगलामुखी का स्वरूप पीत वर्ण का है, इसीलिए इन्हें 'पीतांबरा' भी कहा जाता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, जब सृष्टि के विनाश के लिए भयंकर तूफान आया था, तब भगवान विष्णु ने सौराष्ट्र के हरिद्रा सरोवर के तट पर तपस्या की थी। तब माँ बगलामुखी प्रकट हुईं और उन्होंने उस तूफान को स्तम्भित कर दिया। 108 नामों का जप साधक को मानसिक स्थिरता, वाक् सिद्धि और शत्रुओं के कुप्रभाव से मुक्ति दिलाने में सक्षम है। यह नामावली तंत्र और भक्ति का एक अद्भुत संगम है, जो साधक के भीतर के अहंकार को नष्ट कर उसे ब्रह्मज्ञान की ओर ले जाती है।
विनियोग, ध्यान एवं नामावली जप संकल्प
विनियोग: ॐ अस्य श्री बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रस्य नारद ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्री बगलामुखी देवता, सकलार्थ सिद्धये जपे विनियोगः।
ध्यान: पीताम्बरां द्विभुजां देवीं पीतवर्णां सुशोभिताम्। देव्यास्तु स्तम्भनशक्तिं ध्यायेत् सर्वार्थसिद्धये॥
संकल्प: हे माँ पीतांबरा, मैं (अपना नाम) अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति और शत्रुओं के दमन हेतु आपके 108 नामों का जप कर रहा हूँ। कृपया मुझे अपनी कृपा प्रदान करें।
माँ बगलामुखी के सम्पूर्ण 108 पावन नाम
| क्र.सं. | दिव्य नाम | प्रमुख भावार्थ |
|---|---|---|
| 1 | ॐ बगलामुख्यै नमः | बगुले के समान ध्यानमग्न रहने वाली |
| 2 | ॐ पीताम्बरायै नमः | पीले वस्त्र धारण करने वाली |
| 3 | ॐ स्तम्भिन्यै नमः | शत्रु की गति को रोकने वाली |
| 4 | ॐ वाग्देव्यै नमः | वाणी की अधिष्ठात्री देवी |
| 5 | ॐ महामायायै नमः | महान माया का स्वरूप |
| 6 | ॐ जगन्मात्रे नमः | संसार की माता |
| 7 | ॐ हरिद्रायै नमः | हल्दी के समान वर्ण वाली |
| 8 | ॐ शत्रुनाशिन्यै नमः | शत्रुओं का नाश करने वाली |
| 9 | ॐ दुष्टदमिन्यै नमः | दुष्टों का दमन करने वाली |
| 10 | ॐ मोहिन्यै नमः | सबको मोहित करने वाली |
| 11 | ॐ त्रैलोक्यवासिन्यै नमः | तीनों लोकों में निवास करने वाली |
| 12 | ॐ सिद्धिप्रदायै नमः | सिद्धियाँ प्रदान करने वाली |
| 13 | ॐ सर्वशक्तिमत्त्यै नमः | समस्त शक्तियों का आधार |
| 14 | ॐ भयहरायै नमः | भय को हरने वाली |
| 15 | ॐ दुःखनाशिन्यै नमः | दुःखों का नाश करने वाली |
| 16 | ॐ सुखप्रदायै नमः | सुख देने वाली |
| 17 | ॐ ज्ञानरूपिण्यै नमः | ज्ञान का स्वरूप |
| 18 | ॐ विद्याप्रदायै नमः | विद्या देने वाली |
| 19 | ॐ बुद्धिप्रदायै नमः | बुद्धि देने वाली |
| 20 | ॐ यशःप्रदायै नमः | यश देने वाली |
| 21 | ॐ विजयप्रदायै नमः | विजय दिलाने वाली |
| 22 | ॐ राज्यप्रदायै नमः | राज्य सुख देने वाली |
| 23 | ॐ धनप्रदायै नमः | धन देने वाली |
| 24 | ॐ ऐश्वर्यप्रदायै नमः | ऐश्वर्य देने वाली |
| 25 | ॐ आरोग्यप्रदायै नमः | आरोग्य देने वाली |
| 26 | ॐ आयुःप्रदायै नमः | आयु बढ़ाने वाली |
| 27 | ॐ सौभाग्यप्रदायै नमः | सौभाग्य देने वाली |
| 28 | ॐ मोक्षप्रदायै नमः | मोक्ष देने वाली |
| 29 | ॐ धर्मप्रदायै नमः | धर्म का मार्ग दिखाने वाली |
| 30 | ॐ अर्थप्रदायै नमः | अर्थ प्रदान करने वाली |
| 31 | ॐ कामप्रदायै नमः | कामना पूरी करने वाली |
| 32 | ॐ सर्वमङ्गलकारिण्यै नमः | सबका मंगल करने वाली |
| 33 | ॐ सर्वसिद्धिप्रदायिन्यै नमः | सब सिद्धियाँ देने वाली |
| 34 | ॐ सर्वव्याधिनाशिन्यै नमः | सब रोगों का नाश करने वाली |
| 35 | ॐ सर्वपापहरायै नमः | सब पापों को हरने वाली |
| 36 | ॐ सर्वदुःखहरायै नमः | सब दुःखों को हरने वाली |
| 37 | ॐ सर्वभयनाशिन्यै नमः | सब भय का नाश करने वाली |
| 38 | ॐ सर्वशत्रुक्षयकारिण्यै नमः | शत्रुओं का क्षय करने वाली |
| 39 | ॐ सर्वविघ्नविनाशिन्यै नमः | सब विघ्नों का नाश करने वाली |
| 40 | ॐ सर्वसिद्धिप्रदायै नमः | सब सिद्धियों की प्रदाता |
| 41 | ॐ सर्वकामप्रदायै नमः | सब कामनाओं की प्रदाता |
| 42 | ॐ सर्वसौभाग्यदायै नमः | सब सौभाग्य की प्रदाता |
| 43 | ॐ सर्वैश्वर्यप्रदायै नमः | सब ऐश्वर्य की प्रदाता |
| 44 | ॐ सर्वज्ञानप्रदायै नमः | सब ज्ञान की प्रदाता |
| 45 | ॐ सर्वविद्याप्रदायै नमः | सब विद्याओं की प्रदाता |
| 46 | ॐ सर्वबुद्धिप्रदायै नमः | सब बुद्धि की प्रदाता |
| 47 | ॐ सर्वयशःप्रदायै नमः | सब यश की प्रदाता |
| 48 | ॐ सर्वविजयप्रदायै नमः | सब विजय की प्रदाता |
| 49 | ॐ सर्वरोगहरायै नमः | सब रोगों को हरने वाली |
| 50 | ॐ सर्वशोकहरायै नमः | सब शोक को हरने वाली |
| 51 | ॐ सर्वतापहरायै नमः | सब तापों को हरने वाली |
| 52 | ॐ सर्वक्लेशहरायै नमः | सब क्लेशों को हरने वाली |
| 53 | ॐ सर्वभयहरायै नमः | सब भय को हरने वाली |
| 54 | ॐ सर्वचिन्ताहरायै नमः | सब चिंताओं को हरने वाली |
| 55 | ॐ सर्वदुःखहरायै नमः | सब दुःखों को हरने वाली |
| 56 | ॐ सर्वपापहरायै नमः | सब पापों को हरने वाली |
| 57 | ॐ सर्वविघ्नहरायै नमः | सब विघ्नों को हरने वाली |
| 58 | ॐ सर्वशत्रुहरायै नमः | सब शत्रुओं को हरने वाली |
| 59 | ॐ सर्वदुष्टहरायै नमः | सब दुष्टों को हरने वाली |
| 60 | ॐ सर्वव्याधिहरायै नमः | सब व्याधियों को हरने वाली |
| 61 | ॐ सर्वदारिद्र्यहरायै नमः | सब दरिद्रता को हरने वाली |
| 62 | ॐ सर्वमृत्युहरायै नमः | अकाल मृत्यु को हरने वाली |
| 63 | ॐ सर्वकालहरायै नमः | काल को जीतने वाली |
| 64 | ॐ सर्वदोषहरायै नमः | सब दोषों को हरने वाली |
| 65 | ॐ सर्वग्रहहरायै नमः | सब ग्रहों के दोष हरने वाली |
| 66 | ॐ सर्वभूतहरायै नमः | सब भूतों को हरने वाली |
| 67 | ॐ सर्वप्रेतहरायै नमः | सब प्रेतों को हरने वाली |
| 68 | ॐ सर्वपिशाचहरायै नमः | सब पिशाचों को हरने वाली |
| 69 | ॐ सर्वराक्षसहरायै नमः | सब राक्षसों को हरने वाली |
| 70 | ॐ सर्वअसुरहरायै नमः | सब असुरों को हरने वाली |
| 71 | ॐ सर्वदानवहरायै नमः | सब दानवों को हरने वाली |
| 72 | ॐ सर्वमन्त्रहरायै नमः | सब मारण मंत्रों को हरने वाली |
| 73 | ॐ सर्वतन्त्रहरायै नमः | सब तंत्रों को हरने वाली |
| 74 | ॐ सर्वयन्त्रहरायै नमः | सब यंत्रों को हरने वाली |
| 75 | ॐ सर्वविषहरायै नमः | सब विष को हरने वाली |
| 76 | ॐ सर्वशस्त्रहरायै नमः | सब शस्त्रों को हरने वाली |
| 77 | ॐ सर्वअस्त्रहरायै नमः | सब अस्त्रों को हरने वाली |
| 78 | ॐ सर्वव्याधिहरायै नमः | सब व्याधियों को हरने वाली |
| 79 | ॐ सर्वशोकहरायै नमः | सब शोक को हरने वाली |
| 80 | ॐ सर्वतापहरायै नमः | सब तापों को हरने वाली |
| 81 | ॐ सर्वक्लेशहरायै नमः | सब क्लेशों को हरने वाली |
| 82 | ॐ सर्वभयहरायै नमः | सब भय को हरने वाली |
| 83 | ॐ सर्वचिन्ताहरायै नमः | सब चिंताओं को हरने वाली |
| 84 | ॐ सर्वदुःखहरायै नमः | सब दुःखों को हरने वाली |
| 85 | ॐ सर्वपापहरायै नमः | सब पापों को हरने वाली |
| 86 | ॐ सर्वविघ्नहरायै नमः | सब विघ्नों को हरने वाली |
| 87 | ॐ सर्वशत्रुहरायै नमः | सब शत्रुओं को हरने वाली |
| 88 | ॐ सर्वदुष्टहरायै नमः | सब दुष्टों को हरने वाली |
| 89 | ॐ सर्वव्याधिहरायै नमः | सब व्याधियों को हरने वाली |
| 90 | ॐ सर्वदारिद्र्यहरायै नमः | सब दरिद्रता को हरने वाली |
| 91 | ॐ सर्वमृत्युहरायै नमः | अकाल मृत्यु को हरने वाली |
| 92 | ॐ सर्वकालहरायै नमः | काल को जीतने वाली |
| 93 | ॐ सर्वदोषहरायै नमः | सब दोषों को हरने वाली |
| 94 | ॐ सर्वग्रहहरायै नमः | सब ग्रहों के दोष हरने वाली |
| 95 | ॐ सर्वभूतहरायै नमः | सब भूतों को हरने वाली |
| 96 | ॐ सर्वप्रेतहरायै नमः | सब प्रेतों को हरने वाली |
| 97 | ॐ सर्वपिशाचहरायै नमः | सब पिशाचों को हरने वाली |
| 98 | ॐ सर्वराक्षसहरायै नमः | सब राक्षसों को हरने वाली |
| 99 | ॐ सर्वअसुरहरायै नमः | सब असुरों को हरने वाली |
| 100 | ॐ सर्वदानवहरायै नमः | सब दानवों को हरने वाली |
| 101 | ॐ सर्वमन्त्रहरायै नमः | सब मारण मंत्रों को हरने वाली |
| 102 | ॐ सर्वतन्त्रहरायै नमः | सब तंत्रों को हरने वाली |
| 103 | ॐ सर्वयन्त्रहरायै नमः | सब यंत्रों को हरने वाली |
| 104 | ॐ सर्वविषहरायै नमः | सब विष को हरने वाली |
| 105 | ॐ सर्वशस्त्रहरायै नमः | सब शस्त्रों को हरने वाली |
| 106 | ॐ सर्वअस्त्रहरायै नमः | सब अस्त्रों को हरने वाली |
| 107 | ॐ बगलामुख्यै नमः | बगलामुखी देवी को नमन |
| 108 | ॐ पीताम्बरायै नमः | पीतांबरा देवी को नमन |
108 नाम जप की प्रामाणिक विधि
माँ बगलामुखी की साधना अत्यंत गोपनीय और शक्तिशाली है। जप के लिए पीले वस्त्र, पीला आसन और हल्दी की माला का प्रयोग करना चाहिए। साधना के लिए ब्रह्ममुहूर्त या रात्रि का समय सर्वोत्तम है। जप के पूर्व माँ का ध्यान करें और संकल्प लें। जप के दौरान मन को एकाग्र रखना अनिवार्य है।
सम्पूर्ण फलश्रुति
जो साधक नित्य श्रद्धापूर्वक माँ बगलामुखी के इन 108 नामों का पाठ करता है, उसे शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। वाक् सिद्धि प्राप्त होती है, जिससे व्यक्ति के शब्द सत्य सिद्ध होने लगते हैं। समस्त प्रकार के तंत्र-मंत्र के प्रभाव नष्ट हो जाते हैं और साधक को जीवन में सुख, शांति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
श्री बगलामुखी अष्टोत्तर शतनामावली का आध्यात्मिक विज्ञान और वाक् स्तम्भन का रहस्य
माँ बगलामुखी, जिन्हें 'पीतांबरा' के नाम से भी जाना जाता है, दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। उनके 108 पावन नाम केवल स्तुति के शब्द नहीं हैं, बल्कि ये ब्रह्मांडीय ऊर्जा के विशिष्ट स्पंदन हैं। जब साधक इन नामों का जप करता है, तो वह अपनी चेतना को देवी के उस स्वरूप से जोड़ता है जो 'स्तम्भन' की अधिष्ठात्री हैं। स्तम्भन का अर्थ केवल शत्रुओं को रोकना नहीं है, बल्कि अपनी चंचल इंद्रियों, नकारात्मक विचारों और भ्रमित बुद्धि को स्थिर करना है। इन 108 नामों का प्रत्येक अक्षर एक बीज मंत्र की भांति कार्य करता है, जो साधक के भीतर वाक् सिद्धि के द्वार खोलता है।
वाक् स्तम्भन का अर्थ है—वाणी में वह ओज और प्रभाव उत्पन्न करना, जिससे सत्य का मार्ग प्रशस्त हो। माँ बगलामुखी की कृपा से साधक की वाणी में 'अमोघ शक्ति' का संचार होता है। जब कोई व्यक्ति इन 108 नामों का पाठ करता है, तो उसके कंठ चक्र (Vishuddha Chakra) में दिव्य ऊर्जा का प्रवाह तीव्र हो जाता है। यह प्रक्रिया न केवल बाहरी शत्रुओं के मुख को स्तम्भित करती है, बल्कि साधक के भीतर के 'अहंकार' और 'मिथ्या भाषण' को भी समाप्त कर देती है। यह एक उच्च स्तरीय आध्यात्मिक साधना है, जिसमें नाम जप के साथ-साथ एकाग्रता का होना अनिवार्य है।
इन नामों का जप करते समय 'पीत' (पीले) रंग का विशेष महत्व है। माँ बगलामुखी को पीतांबरा कहा जाता है क्योंकि वे पीले वस्त्र, पीले पुष्प और पीले आसन पर विराजमान रहती हैं। 108 नामों का जप करते समय यदि साधक पीले वस्त्र धारण करे और हल्दी की माला का उपयोग करे, तो जप का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। यह साधना विशेष रूप से उन लोगों के लिए वरदान है जो न्यायिक विवादों, वाक-युद्ध, या नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से जूझ रहे हैं। यह नाम जप साधक के चारों ओर एक सुरक्षा कवच (कवच) का निर्माण करता है, जिसे भेदना किसी भी नकारात्मक शक्ति के लिए असंभव है।
श्री बगलामुखी 108 नाम: साधना विधि एवं अनुष्ठानिक नियम
माँ बगलामुखी के 108 नामों का जप करने के लिए एक निश्चित विधि का पालन करना आवश्यक है ताकि ऊर्जा का सही दिशा में संचरण हो सके। सबसे पहले साधक को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा स्थल पर माँ बगलामुखी का यंत्र या चित्र स्थापित करें। माँ को पीले पुष्प, अक्षत, और हल्दी की गांठ अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं और संकल्प लें कि आप यह जप लोक कल्याण और आत्म-शुद्धि के लिए कर रहे हैं।
जप के लिए हल्दी की माला (हरिद्रा माला) को सर्वोत्तम माना गया है। माला को धारण करने से पहले उसे गंगाजल से शुद्ध करें। जप के दौरान मेरुदंड को सीधा रखें और अपनी दृष्टि को माँ के चरणों या यंत्र के मध्य भाग पर केंद्रित करें। प्रत्येक नाम के अंत में 'नमः' का उच्चारण करते हुए मन ही मन देवी के स्वरूप का ध्यान करें। यदि संभव हो, तो जप के पश्चात 'बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र' का पाठ करें। यह स्तोत्र साधक को मानसिक दृढ़ता और वाक् सिद्धि प्रदान करने में सहायक होता है।
साधना के दौरान सात्विक आहार का पालन करना अनिवार्य है। तामसिक भोजन और नकारात्मक संगति से दूर रहना चाहिए। माँ बगलामुखी की साधना में 'गुप्तता' का विशेष महत्व है। अपनी साधना के अनुभवों को किसी के साथ साझा न करें, क्योंकि इससे ऊर्जा का क्षय होता है। यदि आप किसी विशेष कार्य की सिद्धि के लिए यह जप कर रहे हैं, तो 11 दिनों तक निरंतर 108 नामों का पाठ करें। यह अनुष्ठान साधक के जीवन में आने वाली बाधाओं को जड़ से समाप्त करने की क्षमता रखता है।
| साधना का अंग | विवरण एवं महत्व |
|---|---|
| माला का प्रकार | हल्दी की माला (हरिद्रा माला) - स्तम्भन हेतु सर्वश्रेष्ठ। |
| आसन | पीला ऊनी आसन या रेशमी वस्त्र। |
| दिशा | उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके जप करें। |
| नैवेद्य (भोग) | पीले मिष्ठान, बेसन के लड्डू या चने की दाल। |
| समय | ब्रह्म मुहूर्त या सूर्यास्त के पश्चात का समय। |
फलश्रुति: नाम जप के दिव्य लाभ और वाक् स्तम्भन का प्रभाव
शास्त्रों के अनुसार, जो साधक श्रद्धापूर्वक माँ बगलामुखी के 108 नामों का नित्य पाठ करता है, उसे 'वाक् सिद्धि' प्राप्त होती है। वाक् सिद्धि का अर्थ है—साधक के मुख से निकली हुई बात का सत्य होना। यह शक्ति अत्यंत प्रभावशाली है, इसलिए इसका उपयोग केवल परोपकार और धर्म की रक्षा के लिए ही किया जाना चाहिए। जो व्यक्ति इस जप को सिद्ध कर लेता है, उसके शत्रु स्वयं ही शांत हो जाते हैं। यहाँ शत्रु का अर्थ केवल बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि हमारे भीतर के काम, क्रोध, लोभ और मोह भी हैं, जो हमें सत्य के मार्ग से भटकाते हैं।
इस जप का एक अन्य महत्वपूर्ण फल 'भय का नाश' है। माँ बगलामुखी को 'भयनाशिनी' भी कहा जाता है। जो साधक निरंतर इन नामों का स्मरण करता है, उसके मन से मृत्यु, अज्ञात, और भविष्य की चिंताएं समाप्त हो जाती हैं। उसे जीवन की विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहने का साहस प्राप्त होता है। यह साधना साधक को एक 'स्तम्भ' की भांति स्थिर बनाती है, जो तूफानों में भी नहीं डगमगाता।
आध्यात्मिक संदेश: माँ बगलामुखी के 108 नामों का जप केवल बाहरी विजय के लिए नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर के अज्ञान को स्तम्भित करने के लिए है। जब आप 'पीतांबरा' के नामों का उच्चारण करते हैं, तो आप स्वयं को उस दिव्य प्रकाश में विलीन कर रहे होते हैं जो समस्त भ्रमों को नष्ट करने में सक्षम है। श्रद्धा और निरंतरता ही इस साधना की कुंजी है।
अंततः, यह साधना मोक्ष की ओर ले जाने वाली एक सीढ़ी है। जब साधक के भीतर वाक् सिद्धि और मानसिक स्थिरता आ जाती है, तो वह परमात्मा के साथ एकाकार होने के योग्य बन जाता है। माँ बगलामुखी की कृपा से साधक का व्यक्तित्व चुंबकीय और प्रभावशाली हो जाता है। समाज में उसे मान-सम्मान और यश की प्राप्ति होती है। अतः, जो भी साधक अपने जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और आत्म-शक्ति की वृद्धि करना चाहता है, उसे माँ बगलामुखी के इन 108 पावन नामों का आश्रय अवश्य लेना चाहिए।
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