भक्ति काव्य व भजन गुरुवार विशेष (भगवान श्री हरि विष्णु व गुरुदेव)

श्री बगलामुखी 108 पावन नाम जप: पीतांबरा देवी के 108 नाम एवं वाक् स्तम्भन फल

माँ बगलामुखी के 108 पावन नाम जप विधि, अर्थ एवं वाक् स्तम्भन के लाभ जानिए। पीतांबरा देवी की साधना हेतु सम्पूर्ण अष्टोत्तर शतनामावली यहाँ पढ़ें।

श्री बगलामुखी अष्टोत्तर शतनामावली पौराणिक परिचय एवं आध्यात्मिक रहस्य

माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें 'स्तम्भन' की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। बगला शब्द 'वल्गा' का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ होता है 'दुल्हन' या 'आकर्षण'। माँ बगलामुखी का स्वरूप पीत वर्ण का है, इसीलिए इन्हें 'पीतांबरा' भी कहा जाता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, जब सृष्टि के विनाश के लिए भयंकर तूफान आया था, तब भगवान विष्णु ने सौराष्ट्र के हरिद्रा सरोवर के तट पर तपस्या की थी। तब माँ बगलामुखी प्रकट हुईं और उन्होंने उस तूफान को स्तम्भित कर दिया। 108 नामों का जप साधक को मानसिक स्थिरता, वाक् सिद्धि और शत्रुओं के कुप्रभाव से मुक्ति दिलाने में सक्षम है। यह नामावली तंत्र और भक्ति का एक अद्भुत संगम है, जो साधक के भीतर के अहंकार को नष्ट कर उसे ब्रह्मज्ञान की ओर ले जाती है।

विनियोग, ध्यान एवं नामावली जप संकल्प

विनियोग: ॐ अस्य श्री बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रस्य नारद ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्री बगलामुखी देवता, सकलार्थ सिद्धये जपे विनियोगः।

ध्यान: पीताम्बरां द्विभुजां देवीं पीतवर्णां सुशोभिताम्। देव्यास्तु स्तम्भनशक्तिं ध्यायेत् सर्वार्थसिद्धये॥

संकल्प: हे माँ पीतांबरा, मैं (अपना नाम) अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति और शत्रुओं के दमन हेतु आपके 108 नामों का जप कर रहा हूँ। कृपया मुझे अपनी कृपा प्रदान करें।

माँ बगलामुखी के सम्पूर्ण 108 पावन नाम

क्र.सं.दिव्य नामप्रमुख भावार्थ
1ॐ बगलामुख्यै नमःबगुले के समान ध्यानमग्न रहने वाली
2ॐ पीताम्बरायै नमःपीले वस्त्र धारण करने वाली
3ॐ स्तम्भिन्यै नमःशत्रु की गति को रोकने वाली
4ॐ वाग्देव्यै नमःवाणी की अधिष्ठात्री देवी
5ॐ महामायायै नमःमहान माया का स्वरूप
6ॐ जगन्मात्रे नमःसंसार की माता
7ॐ हरिद्रायै नमःहल्दी के समान वर्ण वाली
8ॐ शत्रुनाशिन्यै नमःशत्रुओं का नाश करने वाली
9ॐ दुष्टदमिन्यै नमःदुष्टों का दमन करने वाली
10ॐ मोहिन्यै नमःसबको मोहित करने वाली
11ॐ त्रैलोक्यवासिन्यै नमःतीनों लोकों में निवास करने वाली
12ॐ सिद्धिप्रदायै नमःसिद्धियाँ प्रदान करने वाली
13ॐ सर्वशक्तिमत्त्यै नमःसमस्त शक्तियों का आधार
14ॐ भयहरायै नमःभय को हरने वाली
15ॐ दुःखनाशिन्यै नमःदुःखों का नाश करने वाली
16ॐ सुखप्रदायै नमःसुख देने वाली
17ॐ ज्ञानरूपिण्यै नमःज्ञान का स्वरूप
18ॐ विद्याप्रदायै नमःविद्या देने वाली
19ॐ बुद्धिप्रदायै नमःबुद्धि देने वाली
20ॐ यशःप्रदायै नमःयश देने वाली
21ॐ विजयप्रदायै नमःविजय दिलाने वाली
22ॐ राज्यप्रदायै नमःराज्य सुख देने वाली
23ॐ धनप्रदायै नमःधन देने वाली
24ॐ ऐश्वर्यप्रदायै नमःऐश्वर्य देने वाली
25ॐ आरोग्यप्रदायै नमःआरोग्य देने वाली
26ॐ आयुःप्रदायै नमःआयु बढ़ाने वाली
27ॐ सौभाग्यप्रदायै नमःसौभाग्य देने वाली
28ॐ मोक्षप्रदायै नमःमोक्ष देने वाली
29ॐ धर्मप्रदायै नमःधर्म का मार्ग दिखाने वाली
30ॐ अर्थप्रदायै नमःअर्थ प्रदान करने वाली
31ॐ कामप्रदायै नमःकामना पूरी करने वाली
32ॐ सर्वमङ्गलकारिण्यै नमःसबका मंगल करने वाली
33ॐ सर्वसिद्धिप्रदायिन्यै नमःसब सिद्धियाँ देने वाली
34ॐ सर्वव्याधिनाशिन्यै नमःसब रोगों का नाश करने वाली
35ॐ सर्वपापहरायै नमःसब पापों को हरने वाली
36ॐ सर्वदुःखहरायै नमःसब दुःखों को हरने वाली
37ॐ सर्वभयनाशिन्यै नमःसब भय का नाश करने वाली
38ॐ सर्वशत्रुक्षयकारिण्यै नमःशत्रुओं का क्षय करने वाली
39ॐ सर्वविघ्नविनाशिन्यै नमःसब विघ्नों का नाश करने वाली
40ॐ सर्वसिद्धिप्रदायै नमःसब सिद्धियों की प्रदाता
41ॐ सर्वकामप्रदायै नमःसब कामनाओं की प्रदाता
42ॐ सर्वसौभाग्यदायै नमःसब सौभाग्य की प्रदाता
43ॐ सर्वैश्वर्यप्रदायै नमःसब ऐश्वर्य की प्रदाता
44ॐ सर्वज्ञानप्रदायै नमःसब ज्ञान की प्रदाता
45ॐ सर्वविद्याप्रदायै नमःसब विद्याओं की प्रदाता
46ॐ सर्वबुद्धिप्रदायै नमःसब बुद्धि की प्रदाता
47ॐ सर्वयशःप्रदायै नमःसब यश की प्रदाता
48ॐ सर्वविजयप्रदायै नमःसब विजय की प्रदाता
49ॐ सर्वरोगहरायै नमःसब रोगों को हरने वाली
50ॐ सर्वशोकहरायै नमःसब शोक को हरने वाली
51ॐ सर्वतापहरायै नमःसब तापों को हरने वाली
52ॐ सर्वक्लेशहरायै नमःसब क्लेशों को हरने वाली
53ॐ सर्वभयहरायै नमःसब भय को हरने वाली
54ॐ सर्वचिन्ताहरायै नमःसब चिंताओं को हरने वाली
55ॐ सर्वदुःखहरायै नमःसब दुःखों को हरने वाली
56ॐ सर्वपापहरायै नमःसब पापों को हरने वाली
57ॐ सर्वविघ्नहरायै नमःसब विघ्नों को हरने वाली
58ॐ सर्वशत्रुहरायै नमःसब शत्रुओं को हरने वाली
59ॐ सर्वदुष्टहरायै नमःसब दुष्टों को हरने वाली
60ॐ सर्वव्याधिहरायै नमःसब व्याधियों को हरने वाली
61ॐ सर्वदारिद्र्यहरायै नमःसब दरिद्रता को हरने वाली
62ॐ सर्वमृत्युहरायै नमःअकाल मृत्यु को हरने वाली
63ॐ सर्वकालहरायै नमःकाल को जीतने वाली
64ॐ सर्वदोषहरायै नमःसब दोषों को हरने वाली
65ॐ सर्वग्रहहरायै नमःसब ग्रहों के दोष हरने वाली
66ॐ सर्वभूतहरायै नमःसब भूतों को हरने वाली
67ॐ सर्वप्रेतहरायै नमःसब प्रेतों को हरने वाली
68ॐ सर्वपिशाचहरायै नमःसब पिशाचों को हरने वाली
69ॐ सर्वराक्षसहरायै नमःसब राक्षसों को हरने वाली
70ॐ सर्वअसुरहरायै नमःसब असुरों को हरने वाली
71ॐ सर्वदानवहरायै नमःसब दानवों को हरने वाली
72ॐ सर्वमन्त्रहरायै नमःसब मारण मंत्रों को हरने वाली
73ॐ सर्वतन्त्रहरायै नमःसब तंत्रों को हरने वाली
74ॐ सर्वयन्त्रहरायै नमःसब यंत्रों को हरने वाली
75ॐ सर्वविषहरायै नमःसब विष को हरने वाली
76ॐ सर्वशस्त्रहरायै नमःसब शस्त्रों को हरने वाली
77ॐ सर्वअस्त्रहरायै नमःसब अस्त्रों को हरने वाली
78ॐ सर्वव्याधिहरायै नमःसब व्याधियों को हरने वाली
79ॐ सर्वशोकहरायै नमःसब शोक को हरने वाली
80ॐ सर्वतापहरायै नमःसब तापों को हरने वाली
81ॐ सर्वक्लेशहरायै नमःसब क्लेशों को हरने वाली
82ॐ सर्वभयहरायै नमःसब भय को हरने वाली
83ॐ सर्वचिन्ताहरायै नमःसब चिंताओं को हरने वाली
84ॐ सर्वदुःखहरायै नमःसब दुःखों को हरने वाली
85ॐ सर्वपापहरायै नमःसब पापों को हरने वाली
86ॐ सर्वविघ्नहरायै नमःसब विघ्नों को हरने वाली
87ॐ सर्वशत्रुहरायै नमःसब शत्रुओं को हरने वाली
88ॐ सर्वदुष्टहरायै नमःसब दुष्टों को हरने वाली
89ॐ सर्वव्याधिहरायै नमःसब व्याधियों को हरने वाली
90ॐ सर्वदारिद्र्यहरायै नमःसब दरिद्रता को हरने वाली
91ॐ सर्वमृत्युहरायै नमःअकाल मृत्यु को हरने वाली
92ॐ सर्वकालहरायै नमःकाल को जीतने वाली
93ॐ सर्वदोषहरायै नमःसब दोषों को हरने वाली
94ॐ सर्वग्रहहरायै नमःसब ग्रहों के दोष हरने वाली
95ॐ सर्वभूतहरायै नमःसब भूतों को हरने वाली
96ॐ सर्वप्रेतहरायै नमःसब प्रेतों को हरने वाली
97ॐ सर्वपिशाचहरायै नमःसब पिशाचों को हरने वाली
98ॐ सर्वराक्षसहरायै नमःसब राक्षसों को हरने वाली
99ॐ सर्वअसुरहरायै नमःसब असुरों को हरने वाली
100ॐ सर्वदानवहरायै नमःसब दानवों को हरने वाली
101ॐ सर्वमन्त्रहरायै नमःसब मारण मंत्रों को हरने वाली
102ॐ सर्वतन्त्रहरायै नमःसब तंत्रों को हरने वाली
103ॐ सर्वयन्त्रहरायै नमःसब यंत्रों को हरने वाली
104ॐ सर्वविषहरायै नमःसब विष को हरने वाली
105ॐ सर्वशस्त्रहरायै नमःसब शस्त्रों को हरने वाली
106ॐ सर्वअस्त्रहरायै नमःसब अस्त्रों को हरने वाली
107ॐ बगलामुख्यै नमःबगलामुखी देवी को नमन
108ॐ पीताम्बरायै नमःपीतांबरा देवी को नमन

108 नाम जप की प्रामाणिक विधि

माँ बगलामुखी की साधना अत्यंत गोपनीय और शक्तिशाली है। जप के लिए पीले वस्त्र, पीला आसन और हल्दी की माला का प्रयोग करना चाहिए। साधना के लिए ब्रह्ममुहूर्त या रात्रि का समय सर्वोत्तम है। जप के पूर्व माँ का ध्यान करें और संकल्प लें। जप के दौरान मन को एकाग्र रखना अनिवार्य है।

सम्पूर्ण फलश्रुति

जो साधक नित्य श्रद्धापूर्वक माँ बगलामुखी के इन 108 नामों का पाठ करता है, उसे शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। वाक् सिद्धि प्राप्त होती है, जिससे व्यक्ति के शब्द सत्य सिद्ध होने लगते हैं। समस्त प्रकार के तंत्र-मंत्र के प्रभाव नष्ट हो जाते हैं और साधक को जीवन में सुख, शांति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

श्री बगलामुखी अष्टोत्तर शतनामावली का आध्यात्मिक विज्ञान और वाक् स्तम्भन का रहस्य

माँ बगलामुखी, जिन्हें 'पीतांबरा' के नाम से भी जाना जाता है, दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। उनके 108 पावन नाम केवल स्तुति के शब्द नहीं हैं, बल्कि ये ब्रह्मांडीय ऊर्जा के विशिष्ट स्पंदन हैं। जब साधक इन नामों का जप करता है, तो वह अपनी चेतना को देवी के उस स्वरूप से जोड़ता है जो 'स्तम्भन' की अधिष्ठात्री हैं। स्तम्भन का अर्थ केवल शत्रुओं को रोकना नहीं है, बल्कि अपनी चंचल इंद्रियों, नकारात्मक विचारों और भ्रमित बुद्धि को स्थिर करना है। इन 108 नामों का प्रत्येक अक्षर एक बीज मंत्र की भांति कार्य करता है, जो साधक के भीतर वाक् सिद्धि के द्वार खोलता है।

वाक् स्तम्भन का अर्थ है—वाणी में वह ओज और प्रभाव उत्पन्न करना, जिससे सत्य का मार्ग प्रशस्त हो। माँ बगलामुखी की कृपा से साधक की वाणी में 'अमोघ शक्ति' का संचार होता है। जब कोई व्यक्ति इन 108 नामों का पाठ करता है, तो उसके कंठ चक्र (Vishuddha Chakra) में दिव्य ऊर्जा का प्रवाह तीव्र हो जाता है। यह प्रक्रिया न केवल बाहरी शत्रुओं के मुख को स्तम्भित करती है, बल्कि साधक के भीतर के 'अहंकार' और 'मिथ्या भाषण' को भी समाप्त कर देती है। यह एक उच्च स्तरीय आध्यात्मिक साधना है, जिसमें नाम जप के साथ-साथ एकाग्रता का होना अनिवार्य है।

इन नामों का जप करते समय 'पीत' (पीले) रंग का विशेष महत्व है। माँ बगलामुखी को पीतांबरा कहा जाता है क्योंकि वे पीले वस्त्र, पीले पुष्प और पीले आसन पर विराजमान रहती हैं। 108 नामों का जप करते समय यदि साधक पीले वस्त्र धारण करे और हल्दी की माला का उपयोग करे, तो जप का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। यह साधना विशेष रूप से उन लोगों के लिए वरदान है जो न्यायिक विवादों, वाक-युद्ध, या नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से जूझ रहे हैं। यह नाम जप साधक के चारों ओर एक सुरक्षा कवच (कवच) का निर्माण करता है, जिसे भेदना किसी भी नकारात्मक शक्ति के लिए असंभव है।

श्री बगलामुखी 108 नाम: साधना विधि एवं अनुष्ठानिक नियम

माँ बगलामुखी के 108 नामों का जप करने के लिए एक निश्चित विधि का पालन करना आवश्यक है ताकि ऊर्जा का सही दिशा में संचरण हो सके। सबसे पहले साधक को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा स्थल पर माँ बगलामुखी का यंत्र या चित्र स्थापित करें। माँ को पीले पुष्प, अक्षत, और हल्दी की गांठ अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं और संकल्प लें कि आप यह जप लोक कल्याण और आत्म-शुद्धि के लिए कर रहे हैं।

जप के लिए हल्दी की माला (हरिद्रा माला) को सर्वोत्तम माना गया है। माला को धारण करने से पहले उसे गंगाजल से शुद्ध करें। जप के दौरान मेरुदंड को सीधा रखें और अपनी दृष्टि को माँ के चरणों या यंत्र के मध्य भाग पर केंद्रित करें। प्रत्येक नाम के अंत में 'नमः' का उच्चारण करते हुए मन ही मन देवी के स्वरूप का ध्यान करें। यदि संभव हो, तो जप के पश्चात 'बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र' का पाठ करें। यह स्तोत्र साधक को मानसिक दृढ़ता और वाक् सिद्धि प्रदान करने में सहायक होता है।

साधना के दौरान सात्विक आहार का पालन करना अनिवार्य है। तामसिक भोजन और नकारात्मक संगति से दूर रहना चाहिए। माँ बगलामुखी की साधना में 'गुप्तता' का विशेष महत्व है। अपनी साधना के अनुभवों को किसी के साथ साझा न करें, क्योंकि इससे ऊर्जा का क्षय होता है। यदि आप किसी विशेष कार्य की सिद्धि के लिए यह जप कर रहे हैं, तो 11 दिनों तक निरंतर 108 नामों का पाठ करें। यह अनुष्ठान साधक के जीवन में आने वाली बाधाओं को जड़ से समाप्त करने की क्षमता रखता है।

साधना का अंग विवरण एवं महत्व
माला का प्रकार हल्दी की माला (हरिद्रा माला) - स्तम्भन हेतु सर्वश्रेष्ठ।
आसन पीला ऊनी आसन या रेशमी वस्त्र।
दिशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके जप करें।
नैवेद्य (भोग) पीले मिष्ठान, बेसन के लड्डू या चने की दाल।
समय ब्रह्म मुहूर्त या सूर्यास्त के पश्चात का समय।

फलश्रुति: नाम जप के दिव्य लाभ और वाक् स्तम्भन का प्रभाव

शास्त्रों के अनुसार, जो साधक श्रद्धापूर्वक माँ बगलामुखी के 108 नामों का नित्य पाठ करता है, उसे 'वाक् सिद्धि' प्राप्त होती है। वाक् सिद्धि का अर्थ है—साधक के मुख से निकली हुई बात का सत्य होना। यह शक्ति अत्यंत प्रभावशाली है, इसलिए इसका उपयोग केवल परोपकार और धर्म की रक्षा के लिए ही किया जाना चाहिए। जो व्यक्ति इस जप को सिद्ध कर लेता है, उसके शत्रु स्वयं ही शांत हो जाते हैं। यहाँ शत्रु का अर्थ केवल बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि हमारे भीतर के काम, क्रोध, लोभ और मोह भी हैं, जो हमें सत्य के मार्ग से भटकाते हैं।

इस जप का एक अन्य महत्वपूर्ण फल 'भय का नाश' है। माँ बगलामुखी को 'भयनाशिनी' भी कहा जाता है। जो साधक निरंतर इन नामों का स्मरण करता है, उसके मन से मृत्यु, अज्ञात, और भविष्य की चिंताएं समाप्त हो जाती हैं। उसे जीवन की विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहने का साहस प्राप्त होता है। यह साधना साधक को एक 'स्तम्भ' की भांति स्थिर बनाती है, जो तूफानों में भी नहीं डगमगाता।

आध्यात्मिक संदेश: माँ बगलामुखी के 108 नामों का जप केवल बाहरी विजय के लिए नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर के अज्ञान को स्तम्भित करने के लिए है। जब आप 'पीतांबरा' के नामों का उच्चारण करते हैं, तो आप स्वयं को उस दिव्य प्रकाश में विलीन कर रहे होते हैं जो समस्त भ्रमों को नष्ट करने में सक्षम है। श्रद्धा और निरंतरता ही इस साधना की कुंजी है।

अंततः, यह साधना मोक्ष की ओर ले जाने वाली एक सीढ़ी है। जब साधक के भीतर वाक् सिद्धि और मानसिक स्थिरता आ जाती है, तो वह परमात्मा के साथ एकाकार होने के योग्य बन जाता है। माँ बगलामुखी की कृपा से साधक का व्यक्तित्व चुंबकीय और प्रभावशाली हो जाता है। समाज में उसे मान-सम्मान और यश की प्राप्ति होती है। अतः, जो भी साधक अपने जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और आत्म-शक्ति की वृद्धि करना चाहता है, उसे माँ बगलामुखी के इन 108 पावन नामों का आश्रय अवश्य लेना चाहिए।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 29 Oct 2026

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