Matarani Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

ओ चकेया ढोल कते चिमटा लिरिक्स (Chakeya dholak te chimta Lyrics in Hindi) - Matarani Bhajan

माता रानी का प्रसिद्ध भजन 'ओ चकेया ढोल कते चिमटा लिरिक्स' हिंदी में पढ़ें। माँ दुर्गा के जागरण और देवी संकीर्तन के लिए संदर्भ सहित संपूर्ण गीत।

माता रानी विशेष भजन

Matarani Bhajan

प्रकाशित तिथि: 2023/09/20 | श्रेणी: माता रानी भजन, देवी संकीर्तन | वाचन समय: 7 मिनट

सनातन धर्म और विशेष रूप से उत्तर भारत की लोक-संस्कृति में माता रानी (माँ दुर्गा, शेरावाली, वैष्णो देवी) के दरबार में हाजिरी लगाने का अपना ही एक अलौकिक आनंद है। "ओ चकेया ढोल कते चिमटा" अत्यंत लोकप्रिय, ऊर्जावान और भक्ति रस से परिपूर्ण माता रानी का एक पारंपरिक भजन है। इस भजन में माँ के दरबार में जाने की लालसा, रास्ते के संजोए गए उपहार और जीवन को सफल बनाने की अदम्य जिजीविषा को बहुत ही सुंदर लोक-शैलियों में पिरोया गया है। जब भक्त माता के जागरण या चौकी में ढोल और चिमटे की थाप पर इस भजन को गाते हैं, तो पूरा वातावरण दिव्यता और आनंद से सराबोर हो जाता है। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि जीवात्मा की उस यात्रा का प्रतीक है जो अपनी माँ (आदि शक्ति) के चरणों में सर्वस्व समर्पित करने के लिए आतुर रहती है। भक्तलोक के इस विस्तृत आलेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, विस्तृत अर्थ, आध्यात्मिक महत्व और गायन की परंपरा का गहन अध्ययन करेंगे।

मुख्य जानकारी (Quick Bhajan Information)

यह भजन माता रानी के भक्तों द्वारा विशेषकर नवरात्र, जागरण, माता की चौकी और माता के दरबार की यात्रा के दौरान अत्यंत प्रेम से गाया जाता है। इसमें राही (पथिक) के माध्यम से माता के लिए चुनियां, बिंदिया, चूड़ियाँ और साड़ियाँ भेंट ले जाने का भावपूर्ण चित्रण है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

|| मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन ||

ओ चकेया ढोल कते चिमटा मईया दे द्वारे जाना हों..2
मईया दे द्वारे जाना हो दाती दे द्वारे जाना हो..2

ओ राही राही जादेंआ राहिया
मईयां जो चुनियाँ ले आई जाया..2
मईयां जो चुनियाँ ओढ़ाई जाया हो जीवन सफल बनाई जाया।

ओ राही राही जादेंआ राहिया
मईयां जो बिंदिया ले आई जाया..2
मईयां जो बिंदिया लगाई जाया हो जीवन सफल बनाई जाया।

ओ राही राही जादेंआ राहिया
मईयां जो चूड़ियाँ ले आई जाया..2
मईयां जो चूड़ियाँ पहनाई जाया हो जीवन सफल बनाई जाया।

ओ राही राही जादेंआ राहिया
मईयां जो साड़ियां ले आई जाया..2
मईयां जो साड़ियां लगाई जाया हो जीवन सफल बनाई जाया।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन की पंक्तियाँ सरल होने के बावजूद अत्यंत गहरे दार्शनिक और भावनात्मक संदेश को समेटे हुए हैं। यहाँ इसका विस्तृत भावार्थ प्रस्तुत है:

मुखड़ा (स्थायी): भक्त अपने साथियों और मन को संबोधित करते हुए कहता है—हे साथियों! ढोल और चिमटा उठा लो, क्योंकि अब हमें माँ के दरबार में जाना है। दाती (सबकी झोली भरने वाली माँ) के द्वार पर पहुँचकर जीवन के सारे संताप मिट जाते हैं। ढोल और चिमटे की गूंज नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाकर सकारात्मक और सात्विक ऊर्जा का संचार करती है।

पहला अंतरा (चुनरी समर्पण): भक्त मार्ग में मिलने वाले हर पथिक (राही) से आग्रह करता है कि जब तुम माता के दरबार की ओर जाओ, तो माँ के लिए लाल चुनरी लेते जाना। जब माँ को वह चुनरी ओढ़ाई जाए, तो हमारा यह मनुष्य जीवन सफल हो जाए। चुनरी समर्पण का अर्थ है माँ के प्रति पूर्ण समर्पण और आदर भाव।

दूसरा, तीसरा और चौथा अंतरा (बिंदिया, चूड़ियाँ और साड़ियाँ): इसी प्रकार भक्त राही से निवेदन करता है कि माँ के लिए सुहाग की निशानियाँ जैसे बिंदिया, चूड़ियाँ और पावन साड़ियाँ भी लेते जाना। जब माता के श्रृंगार में इन वस्तुओं को अर्पित किया जाता है और भक्त उस अलौकिक रूप के दर्शन करते हैं, तो उनका लोक और परलोक दोनों सुधर जाते हैं और जीवन का मूल उद्देश्य यानी मुक्ति व भक्ति प्राप्त हो जाती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

माता रानी के भजनों में लोक संस्कृति और शास्त्रीय भक्ति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। इस भजन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • लोक वाद्य यंत्रों का प्रयोग: ढोल और चिमटे का उल्लेख इसे पारंपरिक पहाड़ी और पंजाबी लोक-भजन शैली से जोड़ता है।
  • समर्पण का भाव: राही (राहगीर) के माध्यम से हर आने-जाने वाले को पुण्य कार्य में भागीदार बनने की प्रेरणा दी गई है।
  • श्रृंगार भाव: देवी माँ के अलौकिक श्रृंगार (चुनरी, बिंदिया, चूड़ी, साड़ी) के माध्यम से माता के प्रति वात्सल्य और अनन्य प्रेम प्रकट किया जाता है।
  • जीवन की सार्थकता: भजन की प्रत्येक पंक्ति के अंत में "जीवन सफल बनाई जाया" वाक्य मानव योनि के परम लक्ष्य की याद दिलाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

माता रानी के इस ऊर्जावान भजन को गाने और सुनने के लिए किसी विशेष नियम की बाध्यता नहीं है, तथापि निम्नलिखित अवसरों पर इसका विशेष महत्व है:

  • शारदीय एवं चैत्र नवरात्र: नौ दिनों तक चलने वाली माँ दुर्गा की आराधना के दौरान प्रात:काल या संध्याकालीन आरती के बाद।
  • माता का जागरण या चौकी: रात्रि जागरण के समय जब वातावरण को ऊर्जावान बनाना हो, तब ढोल-मंजीरे और चिमटे के साथ।
  • माता वैष्णो देवी या अन्य शक्तिपीठ यात्रा: तीर्थ यात्रा के दौरान बस, ट्रेन या पदयात्रा करते समय भक्त इस भजन का सामूहिक गान करते हैं।
  • घर की पूजा या संकीर्तन: शुक्रवार के दिन माता संतोषी या दुर्गा के विशेष पूजन के समय।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल अर्थ संदर्भ / भाव
चकेया उठा लिया / तैयार कर लिया भक्ति के लिए वाद्य यंत्र उठाने का आह्वान
चिमटा लोहे का पारंपरिक वाद्य यंत्र संतों और जोगियों द्वारा भजन में ताल देने का साधन
दाती दाता / देने वाली (माँ) भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली देवी
राही पथिक / राहगीर मार्ग में मिलने वाला हर संसारी जीव
चुनियाँ / बिंदिया वस्त्र और श्रृंगार सामग्री माँ के प्रति प्रेम और आदर का प्रतीक

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम ओ चकेया ढोल कते चिमटा (Chakeya Dholak Te Chimta)
समर्पित देवता माता रानी (माँ दुर्गा, शेरावाली, आदिशक्ति)
संगीत शैली लोक भजन, पहाड़ी/पंजाबी लोकगीत शैली
मुख्य भाव प्रेम, समर्पण, उत्साह और यात्रा का आनंद
उचित अवसर नवरात्र, जागरण, माता की चौकी, तीर्थ यात्रा
भाषा हिंदी / पंजाबी मिश्रित लोक भाषा

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन उत्तर भारतीय लोक संस्कृति, विशेषकर पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के माता के जागरणों और चौकियों की पारंपरिक गायन शैली से जुड़ा हुआ है।

इस भजन का मुख्य उद्देश्य माता रानी के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करना, जागरण में ऊर्जा का संचार करना और माँ के दरबार में जाने की अपनी आंतरिक प्रसन्नता को प्रकट करना है।

हाँ, शारदीय और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसरों पर होने वाले संकीर्तन और चौकी में यह भजन अत्यधिक श्रद्धा के साथ गाया जाता है।

'राही' का अर्थ मार्ग पर चलने वाला पथिक या राहगीर है, जिसे भक्त संबोधित करके माता के दरबार में भेंट पहुँचाने का अनुरोध कर रहा है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख भक्तों की सुविधा के लिए पारंपरिक लोक-साहित्य और संकीर्तन परंपराओं के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य सनातन धर्म की लोक-भक्ति परंपराओं को सुरक्षित रखना और पाठकों तक सही सामग्री पहुँचाना है।

स्रोत: पारंपरिक लोकगीत संग्रह एवं माता रानी संकीर्तन पुस्तिकाएं।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 19 Oct 2026

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