Morning Bhajan गुरुवार विशेष (भगवान श्री हरि विष्णु व गुरुदेव)

आज हनुमान जयंती के दिन सुबह यह हनुमान चालीसा सुनने से हनुमानजी प्रसन्न सभी मनोकामनायें पूर्ण होती है

हनुमान जयंती के पावन अवसर पर सुबह हनुमान चालीसा सुनने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जानें इसका पाठ, अर्थ और विशेष महत्व संदर्भ सहित।

हनुमान चालीसा पाठ एवं भावार्थ">श्री हनुमान चालीसा सनातन धर्म में सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली और सुनी जाने वाली स्तुतियों में से एक है। विशेष रूप से हनुमान जयंती के पावन अवसर पर सुबह के समय हनुमान चालीसा का श्रवण और पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित यह चालीसा केवल एक काव्य रचना नहीं है, बल्कि यह एक महामंत्र है जो साधक के जीवन से भय, संकट, रोग और दरिद्रता का नाश करता है। हनुमान जी कलयुग के जाग्रत देव हैं, जो अपने भक्तों की पुकार तुरंत सुनते हैं। हनुमान जयंती के दिन ब्रह्ममुहूर्त में हनुमान चालीसा का श्रवण करने से मन को असीम शांति मिलती है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस विस्तृत लेख में हम हनुमान चालीसा के संपूर्ण पाठ, उसके गूढ़ अर्थ, वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व, और हनुमान जयंती पर इसके विशेष लाभों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण चालीसा पाठ | Complete Chalisa Lyrics

॥ श्री हनुमान चालीसा ॥

॥ दोहा ॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौ पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहि हरहु कलेस बिकार॥

॥ चौपाई ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥२॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥४॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥५॥
शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन॥६॥
बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥७॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥८॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥१०॥
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥११॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥१२॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥१३॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥१५॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥१७॥
जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥१८॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥१९॥
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥२२॥
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥२३॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥२४॥
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥२६॥
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥२७॥
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥२८॥
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥
साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥३१॥
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥३४॥
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥३५॥
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥
जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥३७॥
जो सत बार पाठ कर जोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्ध साखी गौरीसा॥३९॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥४०॥

॥ दोहा ॥

पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥

दोहा एवं चौपाई संरचना | Doha & Chaupai Structure

हनुमान चालीसा की रचना अवधी भाषा में की गई है। इसमें कुल 40 चौपाइयां और प्रारंभ में दो तथा अंत में एक दोहा शामिल है। इस काव्य संरचना का प्रत्येक छंद अत्यंत वैज्ञानिक और छंदशास्त्र के नियमों के अनुकूल है। चौपाई एक सम मात्रिक छंद है, जिसमें प्रत्येक चरण में 16 मात्राएं होती हैं। दोहा एक अर्धसम मात्रिक छंद है, जिसके पहले और तीसरे चरण में 13-13 तथा दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएं होती हैं। यह विशिष्ट लयबद्धता मस्तिष्क में कंपन पैदा करती है, जिससे मानसिक तनाव दूर होता है और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।

प्रत्येक दोहे का अर्थ एवं भावार्थ | Doha Meaning & Bhavarth

प्रथम दोहा

"श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥"

भावार्थ: मैं अपने गुरुदेव के चरण कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ और निर्मल करता हूँ। इसके पश्चात, मैं श्री रघुनाथ जी (प्रभु श्री राम) के उस पवित्र और निर्मल यश का गान करता हूँ, जो जीवन के चार पुरुषार्थों—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्रदान करने वाला है। यह दोहा हमें सिखाता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गुरु वंदना और अहंकार के विसर्जन से होनी चाहिए।

द्वितीय दोहा

"बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौ पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहि हरहु कलेस बिकार॥"

भावार्थ: हे पवनपुत्र! मैं स्वयं को शारीरिक और मानसिक रूप से निर्बल तथा बुद्धिहीन मानता हूँ और आपका स्मरण करता हूँ। आप मुझे शारीरिक बल, बौद्धिक क्षमता और आध्यात्मिक विद्या प्रदान करें, तथा मेरे सभी दुखों, क्लेशों और मानसिक विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह) का हरण करें।

अंतिम दोहा

"पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥"

भावार्थ: हे पवनपुत्र, संकटों को हरने वाले और साक्षात मंगल के स्वरूप! आप देवताओं के राजा हैं। आप प्रभु श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी सहित सदैव मेरे हृदय मंदिर में निवास करें। यह दोहा शरणागति और अनन्य भक्ति का प्रतीक है।

प्रत्येक चौपाई का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning of Chaupais

यहाँ हनुमान चालीसा की कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण और चमत्कारी चौपाइयों का विस्तृत भावार्थ प्रस्तुत किया जा रहा है, जो साधक के जीवन में सीधा प्रभाव डालती हैं:

ज्ञान और शक्ति का सागर

"जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥"

भावार्थ: ज्ञान और गुणों के असीम सागर श्री हनुमान जी की जय हो। तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल) में अपनी कीर्ति फैलाने वाले वानरराज हनुमान जी की जय हो। यह चौपाई हनुमान जी के विराट स्वरूप और उनके ज्ञान की असीमितता को दर्शाती है।

अतुलनीय बल के स्वामी

"राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥"

भावार्थ: आप भगवान श्री राम के परम दूत हैं और अतुलनीय शक्ति के भंडार हैं। आपको माता अंजनी के पुत्र और पवनपुत्र के नाम से जाना जाता है। यह चौपाई हनुमान जी के पराक्रम और उनकी दिव्य उत्पत्ति का स्मरण कराती है।

संकट और रोगों का नाश

"नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥"

भावार्थ: जो साधक निरंतर वीर हनुमान जी के नाम का जप करता रहता है, उसके सभी शारीरिक रोग और मानसिक पीड़ाएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं। यह चौपाई स्वास्थ्य लाभ और मानसिक शांति के लिए एक अचूक मंत्र है।

भय और बाधाओं से मुक्ति

"संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥"

भावार्थ: जो व्यक्ति मन, कर्म और वाणी से हनुमान जी का ध्यान करता है, हनुमान जी उसे जीवन के हर छोटे-बड़े संकट से मुक्त कर देते हैं। यह चौपाई हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में मनसा, वाचा और कर्मणा की शुद्धता आवश्यक है।

अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के प्रदाता

"अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥"

भावार्थ: आपको माता सीता से यह वरदान प्राप्त है कि आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां प्रदान कर सकते हैं। यह चौपाई भौतिक समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति दोनों के द्वार खोलती है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Words

कठिन शब्द सरल हिंदी अर्थ संदर्भ और महत्व
कपीस वानरों के राजा / स्वामी हनुमान जी के लिए प्रयुक्त आदरसूचक शब्द
कंचन स्वर्ण / सोना हनुमान जी के दिव्य और चमकीले वर्ण को दर्शाता है
सुबेसा सुंदर वस्त्र / वेशभूषा हनुमान जी के सौम्य और सुंदर रूप का वर्णन
सुवन पुत्र / संतान शंकर सुवन अर्थात भगवान शिव के अवतार
अमित असीमित / जिसकी कोई सीमा न हो अमित जीवन फल अर्थात अनंत सुख
रसायन दिव्य औषधि / राम नाम का रस राम रसायन का अर्थ है प्रभु भक्ति का अमृत
बंदि कैद / बंधन सांसारिक और भौतिक बंधनों से मुक्ति

चालीसा में वर्णित देवता की महिमा | Glory of the Deity

श्री हनुमान जी महाराज कलयुग के एकमात्र ऐसे देवता हैं जो सशरीर पृथ्वी पर विचरण करते हैं। उन्हें चिरंजीवी होने का वरदान प्राप्त है। हनुमान चालीसा में उनकी बहुआयामी महिमा का वर्णन है। वे एक ओर जहाँ अतुलित बलशाली हैं, वहीं दूसरी ओर वे "विद्यावान गुनी अति चातुर" भी हैं। वे केवल शारीरिक शक्ति के ही नहीं, बल्कि बुद्धि, विवेक, कूटनीति और व्याकरण के भी परम ज्ञाता हैं। प्रभु श्री राम के प्रति उनका समर्पण निष्काम सेवा का सर्वोत्तम उदाहरण है। हनुमान जी की पूजा करने से शनि देव और राहु-केतु जैसे क्रूर ग्रहों के दुष्प्रभाव भी शांत हो जाते हैं।

चालीसा की रचना, रचनाकार एवं पृष्ठभूमि | Author, Origin & Background

हनुमान चालीसा की रचना महान संत गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। जनश्रुतियों के अनुसार, जब मुगल सम्राट अकबर ने तुलसीदास जी को बंदी बना लिया था, तब कारागार में उन्होंने हनुमान जी की स्तुति में इस चालीसा की रचना की थी। जैसे ही चालीसा का पाठ पूर्ण हुआ, वैसे ही असंख्य बंदरों ने महल और कारागार पर धावा बोल दिया। इस चमत्कार को देखकर अकबर भयभीत हो गया और उसने तुलसीदास जी को ससम्मान मुक्त कर दिया। तब से यह मान्यता है कि जो भी व्यक्ति संकट के समय हनुमान चालीसा का पाठ करता है, उसे सभी बंधनों से मुक्ति मिल जाती है।

चालीसा का आध्यात्मिक महत्व एवं लाभ | Spiritual Significance & Benefits

हनुमान जयंती के पावन अवसर पर सुबह के समय हनुमान चालीसा सुनने या पढ़ने के निम्नलिखित अद्भुत लाभ हैं:

  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: सुबह के समय वातावरण शांत होता है। इस समय चालीसा के श्रवण से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
  • भय और तनाव से मुक्ति: हनुमान जी का नाम ही भय नाशक है। इसके नियमित श्रवण से मानसिक अशांति और अवसाद दूर होता है।
  • आत्मविश्वास में वृद्धि: हनुमान चालीसा की चौपाइयां साधक के भीतर साहस और आत्मविश्वास का संचार करती हैं।
  • ग्रह दोषों का निवारण: हनुमान जी की आराधना से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
  • मनोकामना पूर्ति: हनुमान जयंती के दिन श्रद्धापूर्वक किया गया पाठ साधक की सभी जायज मनोकामनाओं को पूर्ण करता है।

चालीसा पाठ विधि एवं नियम | Recitation Method & Vidhi

हनुमान जयंती के दिन हनुमान चालीसा का पाठ या श्रवण करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  1. ब्रह्ममुहूर्त में उठें: सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
  2. स्वच्छ वस्त्र धारण करें: लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  3. पूजा स्थल की तैयारी: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष गाय के घी का दीपक या चमेली के तेल का दीपक जलाएं।
  4. संकल्प लें: हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए हनुमान जी से प्रार्थना करें।
  5. एकाग्रता से पाठ करें: यदि आप पाठ सुन रहे हैं, तो अपना पूरा ध्यान चौपाइयों के अर्थ पर केंद्रित करें।

दैनिक जीवन में चालीसा की उपयोगिता | Daily Life Relevance

आज के आधुनिक और तनावपूर्ण जीवन में हनुमान चालीसा अत्यंत प्रासंगिक है:

  • विद्यार्थियों के लिए: यह एकाग्रता और स्मरण शक्ति को बढ़ाती है। "बल बुधि बिद्या देहु मोहि" का भाव छात्रों को मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाता है।
  • पेशेवरों के लिए: कार्यक्षेत्र में आने वाली बाधा

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 02 Nov 2026

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