Papmochani Ekadashi Vrat Katha गुरुवार विशेष (भगवान श्री हरि विष्णु व गुरुदेव)

महागौरी माता की आरती लिरिक्स (C Lyrics in Hindi) - Navratri 8th Day Aarti Mahagauri Aarti Tripti Shakya

नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की आरती का पाठ करें। तृप्ति शाक्य द्वारा स्वरबद्ध महागौरी आरती लिरिक्स, हिंदी अर्थ और पूजा विधि यहाँ पढ़ें।

महागौरी माता की आरती लिरिक्स (C Lyrics in Hindi) - Navratri 8th Day Aarti Mahagauri Aarti Tripti Shakya - Bhaktilok

शारदीय एवं वासंतिक नवरात्रि के अष्टम दिवस पर मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप मां महागौरी की उपासना का अनंत विधान है। नवरात्रि की महाष्टमी तिथि पर माता महागौरी की विधि-विधान से पूजा, हवन और आरती करने का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। तृप्ति शाक्य (Tripti Shakya) द्वारा स्वरबद्ध और भावपूर्ण शैली में गाई गई "महागौरी माता की आरती" भक्तों के अंतर्मन को भक्ति रस से सराबोर कर देती है। माता महागौरी का वर्ण पूर्णतः श्वेत है, जो शंख, चंद्र और कुंद के फूल के समान धवल आभा से युक्त हैं। इन्हें 'श्वेतवर्धरा च श्वेतगंधानुलिप्तवत्' कहा गया है। माता की यह पावन आरती साधक के जीवन के समस्त अंधकार, क्लेश, भय और पापों को विनष्ट कर सुख, शांति, ऐश्वर्य और आरोग्य प्रदान करती है। इस विस्तृत आलेख में हम मां महागौरी की पावन आरती के संपूर्ण बोल (Lyrics), सरल हिंदी अर्थ, माता की महिमा, पूजा विधि, अष्टम नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व और जीवन से जुड़ी सीख को शास्त्राधारित परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत कर रहे हैं।

सम्पूर्ण आरती पाठ | Complete Aarti Lyrics

जय महागौरी जगत की माया।
मैया जय महागौरी जगत की माया।
आठम नवरात्रि को तेरा व्रत जो पाया।।
मैया जय महागौरी जगत की माया॥

संग शिवजी का डमरू बाजे।
मैया के सिर मुकुट विराजे।
ऋद्धि-सिद्धि की दाता माता।
सब जग के दुख को तू बांटे।।

श्वेत वस्त्र धारी अति प्यारी।
मैया तेरा रूप है बलिहारी।
वृषारूढ़ भवानी महारानी।
तेरी महिमा गाए वेद पुरानी।।

कठिन तपस्या तुमने की थी।
शिव को पाने की जिद धरी थी।
नाम पड़ा महागौरी तुम्हारा।
भक्त जनों का तू है सहारा।।

कल-कल बहती गंगा धारा।
चरणों में झुके जगत सारा।
जो कोई ध्याए श्रद्धा मन से।
मुक्त होए वो सारे बंधन से।।

तृप्ति शाक्य स्वर में गाए।
भक्त झूम कर दर्शन पाए।
माता की आरती जो गावे।
सुख-समृद्धि घर में पावे।।

जय महागौरी जगत की माया।
मैया जय महागौरी जगत की माया।।

आरती का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth

मां महागौरी की यह आरती माता के अष्टम स्वरूप के प्रति अनन्य प्रेम, श्रद्धा और शरणागति का अद्भुत दस्तावेज है। आरती के आरंभ में भक्त मां को 'जगत की माया' और संपूर्ण ब्रह्मांड का संचालक मानते हुए प्रणाम करता है। जो साधक अष्टम नवरात्रि (महाष्टमी) के पवित्र व्रत और अनुष्ठान को पूर्ण निष्ठा से संपन्न करता है, उस पर माता की कृपा का अमृत बरसता है।

आरती की पंक्तियों में माता के स्वरूप का वर्णन करते हुए बताया गया है कि उनके दाहिने पार्श्व में भगवान भोलेनाथ का डमरू शोभायमान है और मस्तक पर तेजोमय मुकुट सुसज्जित है। माता महागौरी अपने भक्तों को रिद्धि-सिद्धि और अणिमा-महिणिमा जैसी सभी दृष्टियों से परिपूर्ण करती हैं। उनका श्वेत वस्त्र धारण किया हुआ रूप और वृषभ (बैल) पर आसीन होने की मुद्रा वेदों और पुराणों में भी गाई गई है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, माता ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी, जिससे उनका वर्ण अत्यंत गौर (श्वेत) हो गया और वे 'महागौरी' कहलाईं। जो भी साधक सच्चे मन से मां के चरणों में ध्यान लगाता है, वह संसार के सभी बंधनों से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त करता है। गायिका तृप्ति शाक्य द्वारा इस आरती को स्वरबद्ध करने से इसमें लोक-संस्कृति और शास्त्रीय भक्ति का सुंदर समन्वय दिखाई देता है, जिससे श्रोता का मन सहज ही एकाग्र हो जाता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Words

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदರ್ಭ / प्रसंग
महागौरी अत्यंत गोरे या श्वेत वर्ण वाली देवी माता दुर्गा का अष्टम स्वरूप
वृषारूढ़ वृषभ (बैल) पर सवार होने वाली माता का वाहन
ऋद्धि-सिद्धि ऐश्वर्य, सफलता और आध्यत्मिक शक्तियां माता द्वारा भक्तों को प्रदान की जाने वाली कृपा
धवल सफेद, उज्ज्वल, पवित्र माता के वस्त्र और कांति
तपस्या साधना, कठोर व्रत और आराधना शिव प्राप्ति हेतु माता द्वारा किया गया अनुष्ठान

आरती में वर्णित देवता की महिमा | Glory of the Deity

हिंदू सनातन धर्म में मां महागौरी को आदि शक्ति मां दुर्गा का आठवां रूप माना जाता है। मारकंडेय पुराण और दुर्गा सप्तशती के अनुसार, महागौरी की शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है। इनके स्मरण मात्र से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। महागौरी का शाब्दिक अर्थ है 'महा + गौरी' यानी अतिशय श्वेत या उज्ज्वल। इनकी उपासना करने से साधक के जीवन के समस्त पाप, संताप और राहु-केतु जनित दोष शांत होते हैं। इन्हें अन्नपूर्णा और शंख-चंद्र-कुंद पुष्प के समान धवल कांति वाली देवी कहा गया है। इनका वाहन वृषभ होने के कारण इन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है। नवरात्रि की महाष्टमी के दिन महागौरी की पूजा करने से कन्या पूजन का पूर्ण फल प्राप्त होता है और साधक को आरोग्य, सौभाग्य एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप मां की महिमा को विस्तार से जानने के लिए महागौरी माता की व्रत कथा का भी पाठ कर सकते हैं।

आरती का धार्मिक महत्व एवं फल | Religious Significance & Traditional Benefits

संध्याकाल में या मां की पूजा के उपरांत नियमित रूप से महागौरी आरती गाने या सुनने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मान्यता है कि जो भक्त नवरात्रि के आठवें दिन विधि-विधान से हवन और आरती करते हैं, उनके घर में माता लक्ष्मी और मां महागौरी दोनों का शाश्वत वास होता है। इस आरती के पाठ से वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, मन को असीम शांति मिलती है और कुण्डली में चंद्रमा से जुड़े दोष भी दूर होते हैं। सनातन परंपरा में यह माना गया है कि बिना आरती के कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है, इसलिए आरती को पूजा का समापन और सर्वोच्च समर्पण का प्रतीक माना गया है।

आरती करने की सही विधि एवं थाली सज्जा | Aarti Vidhi & Thali Preparation

माता महागौरी की आरती करने के लिए पूजा की थाली को विधिवत सजाना चाहिए। थाली में निम्नलिखित सामग्री अवश्य होनी चाहिए:

  • शुद्ध घी का दीपक (अखंड या पंचमुखी दीया)।
  • कपूर और धूपबत्ती।
  • सिंदूर, रोली, अक्षत (सासाबूत चावल)।
  • श्वेत या लाल रंग के ताजे पुष्प (विशेषकर मोगरा या चमेली)।
  • नैवेद्य के रूप में हलवा, पूरी, चने और नारियल का भोग।
  • आरती की घंटी और शंख।

आरती करते समय मन को पूरी तरह शांत रखें और माता के श्वेत स्वरूप का ध्यान करें। आरती की थाली को clockwise (घड़ी की सुई की दिशा में) कम से कम चार बार चरणों की ओर, दो बार नाभि की ओर और तीन बार मुख की ओर घुमाते हुए कुल सात बार घुमाना चाहिए।

आरती करने का सही समय, दिशा एवं दीप घुमाने की विधि | Best Time & Movement

मां महागौरी की आरती प्रातःकाल पूजा के अंत में और विशेष रूप से संध्याकाल (प्रदोष काल) में करनी चाहिए। आरती करते समय साध का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। दीप घुमाते समय मन में यह भाव होना चाहिए कि यह बाहरी कपूर और घी की ज्योति हमारे भीतर के अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैला रही है। आरती के उपरांत दोनों हथेलियों को ज्योति के ऊपर रखकर आँखों से लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त आराधना के लिए आप शिव पार्वती विवाह भजन का भी स्मरण कर सकते हैं।

आरती के दौरान घंटी, शंख एवं दीप का महत्व | Bell, Conch & Lamp Symbolism

आरती के समय बजाई जाने वाली घंटी और शंख का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से बड़ा महत्व है। घंटी की ध्वनि से निकलने वाली नाद तरंगें आसपास के वातावरण में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा और सूक्ष्म कीटाणुओं का नाश करती हैं। शंख की ध्वनि ब्रह्मांड के मूल नाद 'ॐ' का प्रतीक है, जो देवी-देवताओं का आह्वान करती है। दीपक का जलना आत्मा के परमात्मा में विलीन होने और जलती हुई बाती द्वारा अहंकार के जलने का संदेश देता है।

घर में आरती कैसे करें एवं सावधानियां | Home Aarti & Rules

घर में आरती करते समय पवित्रता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। आरती स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। ज्वलनशील पदार्थों से सुरक्षा का ध्यान रखें और बच्चों को जलते हुए कपूर से दूर रखें। आरती के समय सभी पारिवारिक सदस्यों को एक साथ मिलकर जयकारा लगाना चाहिए, जिससे पारिवारिक एकता और धार्मिक उल्लास बढ़ता है।

आरती का आध्यात्मिक संदेश एवं दैनिक जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

महागौरी की आरती हमें यह सिखाती है कि जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियां (जैसे माता द्वारा की गई कठिन तपस्या) क्यों न आएं, यदि हमारा लक्ष्य और संकल्प पवित्र है, तो हमें परम सत्ता की प्राप्ति अवश्य होती है। श्वेत वर्ण स्वच्छता, पारदर्शिता, सादगी और निष्कलंकता का प्रतीक है। हमें अपने आचरण में भी इसी पवित्रता को अपनाना चाहिए। जीवन के हर मोड़ पर अहंकार का त्याग कर करुणा, प्रेम और सेवा भाव से जीना ही सच्ची भगवद्-आराधना है। नियमित रूप से आरती गाने से मन की चंचलता समाप्त होती है और जीवन में अनुशासन और संतुलन आता है।

Quick Information Table | एक नजर में आरती की जानकारी

विशेषता विवरण
आरती का नाम महागौरी माता की आरती (C Lyrics in Hindi)
समर्पित देवी मां महागौरी (नवदुर्गा का अष्टम स्वरूप)
स्वर / कलाकार तृप्ति शाक्य (Tripti Shakya)
संगीत परंपरा भक्ति संगीत / देवी आरती संग्रह
उचित अवसर Navratri 8th Day (महाष्टमी), दुर्गा पूजा, मंगलवार और शुक्रवार
शुभ रंग श्वेत (सफेद) / गुलाबी
मुख्य फल सुख, शांति, आरोग्य, पाप मुक्ति और मोक्ष

मुख्य आध्यात्मिक सीख | Key Takeaways

  • कठिन से कठिन साधना भी सच्चे प्रेम और दृढ़ संकल्प से सफल हो जाती है।
  • श्वेत वस्त्र और धवल स्वरूप हमें आंतरिक और बाहरी शुद्धता का संदेश देता है।
  • संध्याकाल में नियमित आरती करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • माता महागौरी की कृपा से साधक के सभी प्रकार के भय और संकट दूर होते हैं।
  • पारिवारिक और मानसिक शांति के लिए माता की आराधना परम औषधि है।
  • भक्ति में संगीत और स्वर का संलयन मन को शीघ्र भगवान में लीन कर देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

मां महागौरी की विशेष आरती शारदीय और वासंतिक नवरात्रि के आठवें दिन (महाष्टमी) को की जाती है। इसके अलावा प्रत्येक मंगलवार, शुक्रवार और देवी पूजन के दिनों में भी इस आरती का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।

प्रसिद्ध गायिका तृप्ति शाक्य की मधुर और भावपूर्ण आवाज में यह आरती संगीतबद्ध है, जो श्रोताओं के मन में भक्ति रस का संचार करती है और आसानी से याद हो जाती है।

माता महागौरी का वर्ण पूर्णतः श्वेत (गौर) है और उनका वाहन वृषभ (बैल) है। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और उनके चार हाथ हैं जिनमें अभय मुद्रा, त्रिशूल, डमरू और वरद मुद्रा सुशोभित है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना से कुण्डली में राहु-केतु के बुरे प्रभाव और चंद्रमा से जुड़े दोष शांत होते हैं।

आरती करते समय तन और मन की पवित्रता, सही दिशा (पूर्व या उत्तर), घंटी और शंख का उचित नाद तथा दीपक को पूरी श्रद्धा के साथ घुमाने का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

माता महागौरी को हलवा, पूरी, चने और नारियल का भोग अत्यंत प्रिय है। महाष्टमी के दिन कन्या पूजन के साथ इस भोग को अर्पित किया जाता है।

भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता ने जंगलों में कठोर तपस्या की थी, जिससे उनका शरीर काला पड़ गया था। तब शिवजी ने गंगा जल से उनके शरीर को धोया, जिससे वे विद्युत के समान अत्यंत कांतिवान और गौर वर्ण की हो गईं, और उनका नाम 'महागौरी' पड़ा।

हाँ, आप भक्ति भाव और शुद्ध उच्चारण के साथ मोबाइल या डिजिटल माध्यमों से भी आरती का पाठ कर सकते हैं। मुख्य बात मन की श्रद्धा और समर्पण है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस आलेख में प्रस्तुत माता महागौरी की आरती के बोल, अर्थ और धार्मिक विवरण सनातन ग्रंथों, पुराणों और पारंपरिक भक्ति परंपराओं पर आधारित हैं। पाठकों की सुविधा के लिए इसे अत्यंत सरल और बोधगम्य हिंदी में प्रस्तुत किया गया है ताकि हर आयु वर्ग के भक्त इसका लाभ उठा सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण एवं मार्कंडेय पुराण (दुर्गा सप्तशती)
  • पारंपरिक सनातन आरती संग्रह एवं भजन विधान
  • वैदिक एवं पौराणिक व्रत कथाकोश

संबंधित भजन एवं लेख

माता महागौरी और नवरात्रि पर्व से जुड़े अन्य पावन लेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 03 Nov 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!