नाम है तेरा तारण हारा लिरिक्स हिंदी (Naam Hai Tera Taran Hara Lyrics in Hindi)
भक्ति संगीत की अनंत श्रृंखला में खाटूश्याम बाबा और श्री कृष्ण के चरणों में समर्पित यह अत्यंत मनमोहक भजन श्याम भजन प्रेमियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। 'नाम है तेरा तारण हारा' भजन न केवल भगवान की महिमा का गुणगान करता है, बल्कि शरणागत भक्तों के समस्त दुखों का निवारण करने वाले प्रभु की अहेतुकी कृपा को भी रेखांकित करता है। इस भजन का प्रत्येक शब्द साधक के हृदय में अटूट श्रद्धा, भक्ति, और समर्पण का भाव जागृत करता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिससे आप पूरी तल्लीनता के साथ इस संकीर्तन का आनंद ले सकें।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
स्थाई (Mukhda):
नाम है तेरा तारण हारा, कब तेरा दर्शन होगा?
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर, वो कितना सुंदर होगा!
वो कितना सुंदर होगा…
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर, वो कितना सुंदर होगा!
अंतरा 1:
तुमने तारे लाखों प्राणी, यहाँ संतों की वाणी है,
तेरी छवि पर वो मेरे भगवंत, यहाँ दुनिया दीवानी है!
भाव से तेरी जो जग चाहूँ, जीवन में मंगल होगा,
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर, वो कितना सुंदर होगा!
वो कितना सुंदर होगा…
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर, वो कितना सुंदर होगा!
अंतरा 2:
सुरवर मुनिवारा जिनके चरणों में, निशदिन शीश झुकाते हैं,
जो गाते हैं प्रभु की महिमा, वो सब कुछ पा जाते हैं!
अपने कष्ट मिटाने को तेरे, चरणों का वंदन होगा,
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर, वो कितना सुंदर होगा!
वो कितना सुंदर होगा…
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर, वो कितना सुंदर होगा!
अंतरा 3:
मन की मूरत लेकर स्वामी, तेरे चरण में आए हैं,
हम हैं बालक तेरे दिनावारा, तेरे ही गुण गाते हैं!
भाव से पार उतरने को, तेरे गीतों का संगम होगा,
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर, वो कितना सुंदर होगा!
वो कितना सुंदर होगा…
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर, वो कितना सुंदर होगा!
अंतिम समापन:
नाम है तेरा तारण हारा, कब तेरा दर्शन होगा?
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर, वो कितना सुंदर होगा!
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर, वो कितना सुंदर होगा!
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन एक भक्त की अपने आराध्य के प्रति उत्कट लालसा (विरह) और अगाध प्रेम का अद्भुत दस्तावेज है। आइए इस पावन भजन के भावार्थ को गहराई से समझें:
स्थाई का भाव: भक्त अपने इष्टदेव को संबोधित करते हुए कहता है कि हे प्रभु! आपका नाम ही संसार सागर से पार उतारने वाला (तारणहारा) है। आपके इस पवित्र नाम के स्मरण मात्र से जीवन की सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं। भक्त के मन में एक ही उत्कंठा है—हे प्रभु! मुझे आपके दिव्य दर्शन कब प्राप्त होंगे? आपकी यह भौतिक या पाषाण प्रतिमा इतनी अधिक मनमोहक और अलौकिक है, तो स्वयं साक्षात विग्रह या आपका वास्तविक स्वरूप कितना अधिक सुंदर, भव्य और आनंददायक होगा!
प्रथम अंतरा का भाव: संत-महात्माओं की वाणी इस बात की साक्षी है कि आपने अतीत में अनगिनत प्राणियों का उद्धार किया है। हे भगवन! आपकी अलौकिक छवि पर आज संपूर्ण संसार मुग्ध है और आपकी भक्ति में लीन है। यदि मनुष्य अपने जीवन में पूरी निष्ठा और भाव से आपकी चाहत रखे, तो उसके संपूर्ण जीवन में मंगल और कल्याण ही होगा।
द्वितीय व तृतीय अंतरा का भाव: बड़े-बड़े देवता, सुर, और मुनिगण निरंतर जिनके चरणों में अपना शीश झुकाते हैं, उनकी शरण में जाने से भक्तों के सभी कष्ट स्वतः नष्ट हो जाते हैं। भक्त कहता है कि हे स्वामी! हम आपके ही बालक हैं और दीन-दुखियों के प्रति आपकी करुणा का गुणगान करते हैं। इस भवसागर से पार उतरने का एकमात्र साधन आपके चरणों का आश्रय और आपके गुणों का गान ही है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- भक्ति का अनूठा संगम: यह भजन साधक के भीतर समर्पण और प्रेम की त्रिवेणी प्रवाहित करता है।
- नाम जप की महिमा: भगवान के नाम को 'तारणहारा' कहकर उसकी मुक्तिदायिनी शक्ति को स्थापित किया गया है।
- दर्शन की लालसा: साधक के मन में भगवान के स्वरूप को देखने की तीव्र उत्कंठा ही इस भजन का प्राण है।
- मानसिक शांति: इस भजन का नियमित श्रवण या गान करने से मन के संताप और चिंताएं दूर होती हैं।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को गाने और सुनने के लिए ब्रह्ममुहूर्त, संध्यावंदन का समय, अथवा किसी भी सत्संग और एकांत साधना का समय अत्यंत उत्तम माना गया है। इसे आप निम्नलिखित अवसरों पर गा सकते हैं:
- दैनिक पूजा और आरती के समय प्रातःकाल अथवा सायंकाल।
- खाटूश्याम जी के फाल्गुन मेले या एकादशी की रात्रि के जागरण में।
- घर पर होने वाले पारिवारिक संकीर्तन और धार्मिक उत्सवों के दौरान।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से कलियुग के अवतारी बाबा खाटूश्याम (श्रीकृष्ण के शीश रूप) और भगवान श्री हरि विष्णु के विभिन्न रूपों को समर्पित है। सनातन धर्म में श्याम बाबा को हारे का सहारा और तारणहारा माना गया है। संत परंपरा में यह माना गया है कि जब भक्त अपने इष्ट के चरणों में पूर्ण रूप से समर्पित हो जाता है, तो भगवान स्वयं उसकी नैया पार लगाते हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| तारणहारा | संसार सागर से पार लगाने वाला | जो जीवों को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त करे। |
| प्रतिमा | मूर्ति या विग्रह | भगवान का साक्षात या प्रतीकात्मक रूप। |
| सुरवर मुनिवारा | देवता और श्रेष्ठ मुनि | समस्त ब्रह्मांड के ज्ञानी और तपस्वी। |
| दिनावारा | दीनों का नाथ / गरीबों का सहारा | अनाथों और पीड़ितों के रक्षक भगवान। |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | नाम है तेरा तारण हारा (Naam Hai Tera Taran Hara) |
|---|---|
| समर्पित देवता | श्री खाटूश्याम जी / भगवान कृष्ण |
| संगीत श्रेणी | नवीनतम श्याम भजन (Latest Shyam Bhajan) |
| भाषा | सरल हिंदी / ब्रज-अवधी मिश्रित बोल |
| मुख्य भाव | भक्ति, शरणागति, दर्शन लालसा |
| उपयुक्त अवसर | एकादशी, जागरण, दैनिक सत्संग |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: 'नाम है तेरा तारण हारा' भजन किस देवता को समर्पित है?
यह भजन मुख्य रूप से कलियुग के देवता बाबा खाटूश्याम जी और भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है।
Q2: इस भजन को गाने से क्या आध्यात्मिक लाभ मिलता है?
इस भजन के गान और श्रवण से मन शांत होता है, भगवान के प्रति प्रेम बढ़ता है और मानसिक चिंताओं से मुक्ति मिलती है।
Q3: क्या इस भजन को घर पर दैनिक पूजा के समय गाया जा सकता है?
हाँ, आप इसे सुबह या शाम की पूजा, आरती और विशेष अवसरों पर आसानी से गा सकते हैं।
Q4: भजन में 'तारणहारा' शब्द का क्या अर्थ है?
तारणहारा का अर्थ है—भक्तों को इस कठिन भवसागर (दुखों के संसार) से पार उतारने वाला प्रभु।
Q5: ऐसे भजनों को और अधिक प्रभावी ढंग से कैसे गाएं?
पूरी तल्लीनता, शुद्ध उच्चारण और सच्ची भावना के साथ ढोलक, हारमोनियम या मंजीरे के साथ गाने से इसका प्रभाव और बढ़ जाता है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
भक्तिलोक (Bhaktilok.in) पर प्रकाशित यह सामग्री पारंपरिक स्रोतों, लोक-साहित्य और भक्तों के अनुभवों के आधार पर तैयार की गई है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध और प्रामाणिक devotional content पहुँचाना है।
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