पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री भद्राचलम सीता रामचंद्रस्वामी मंदिर, भद्राद्री कोठागुडेम (तेलंगाना)

19 दर्शनार्थी
भद्राचलम, तेलंगाना
प्रकाशित: 26 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
भगवान श्री राम (वैकुंठ राम)
दर्शन समय सारिणी
प्रातः 05:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक एवं अपराह्न 03:00 बजे से रात्रि 09:00 बजे तक
नित्य आरती समय
सुप्रभातम: 05:00 AM | बालभोगम: 06:00 AM | निजाराधना: 08:30 AM | महामंगला आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM | शयन आरती: 09:00 PM
स्थान / नगर
भद्राचलम, तेलंगाना
आराध्य देव
भगवान श्री राम (वैकुंठ राम)
दर्शन समय
प्रातः 05:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक एवं अपराह्न 03:00 बजे से रात्रि 09:00 बजे तक
आरती समय
सुप्रभातम: 05:00 AM | बालभोगम: 06:00 AM | निजाराधना: 08:30 AM | महामंगला आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM | शयन आरती: 09:00 PM
स्थान / धाम
श्री सीता रामचंद्रस्वामी देवस्थानम, भद्राचलम, जिला भद्राद्री कोठागुडेम, तेलंगाना - 507111
अक्षर आकार:
पठन थीम:

श्री भद्राचलम सीता रामचंद्रस्वामी मंदिर: सनातन आस्था और भक्ति का अमर प्रांगण

तेलंगाना के घने जंगलों और पवित्र गोदावरी नदी के तट पर स्थित श्री भद्राचलम सीता रामचंद्रस्वामी मंदिर भारतीय संस्कृति, वैष्णव परंपरा और अनन्य रामभक्ति का एक अत्यंत प्रदीप्त केंद्र है। इसे 'दक्षिण अयोध्या' के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ भगवान श्री राम अपनी अर्धांगिनी माता सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ विराजमान हैं। इस दिव्य क्षेत्र का इतिहास महर्षि भद्र की तपस्या और सत्रहवीं शताब्दी के महान संत व भक्त कंचरला गोपण (भक्त रामदास) के असीम त्याग से जुड़ा हुआ है।

पौराणिक पृष्ठभूमि और भद्र ऋषि की तपस्या

त्रेतायुग में जब भगवान राम अपने वनवास के दौरान दंडकारण्य में भ्रमण कर रहे थे, तब मेरु पर्वत के पुत्र 'भद्र' नामक ऋषि ने भगवान राम के दर्शन के लिए कठोर तपस्या की थी। भद्र ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान राम ने उन्हें दर्शन दिए और आशीर्वाद दिया कि वे इस स्थान पर गोदावरी नदी के तट पर उनके साथ निवास करेंगे। भद्र ऋषि की इस महान तपस्या और वरदान के कारण ही इस पवित्र स्थल का नाम 'भद्राचलम' (भद्र का अचल पर्वत) पड़ा। पौराणिक कथाओं के अनुसार, वैकुंठ लोक में भगवान विष्णु चतुर्बाहु (चार भुजाओं वाले) रूप में शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए रहते हैं। यहाँ मुख्य विग्रह में भगवान राम इसी वैकुंठ रूप में अपने दोनों हाथों में धनुष-बाण के साथ-साथ शंख और चक्र भी धारण किए हुए हैं, इसीलिए इन्हें 'वैकुंठ राम' कहा जाता है। माता सीता उनके वाम भाग में और लक्ष्मण जी उनके दाहिनी ओर सुशोभित हैं।

भक्त रामदास और मंदिर का ऐतिहासिक जीर्णोद्धार

भद्राचलम मंदिर के आधुनिक इतिहास में सत्रहवीं शताब्दी के महान संत कंचरला गोपण (जो इतिहास में 'भक्त रामदास' के नाम से प्रसिद्ध हैं) का योगदान स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। गोलकुंडा के नवाब के अधीन तहसीलदार के रूप में कार्यरत रामदास जी ने भगवान राम के इस प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार और भव्य निर्माण के लिए सरकारी खजाने की धनराशि का उपयोग कर लिया था। इसके परिणाम Ten उसे गोलकुंडा के दुर्ग के एक अंधकारमय कारागार में कठोर यंत्रणाओं का सामना करना पड़ा।

कारागार की उस एकांत और कष्टप्रद स्थिति में भक्त रामदास ने भगवान श्री राम को समर्पित अत्यंत मर्मस्पर्शी और मधुर कीर्तनों की रचना की, जो आज भी 'रामदास कीर्तन' या 'दाशरथी शतकम' के रूप में दक्षिण भारत के घर-घर में गाए जाते हैं। किंवदंती है कि उनकी अटूट भक्ति से द्रवित होकर स्वयं भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने नवाब के पास जाकर सोने के सिक्कों (अन्नाल रूकावू) के रूप में सारा कर्ज चुकाया और रामदास को कारागार से मुक्त कराया। आज भी वे स्वर्ण सिक्के मंदिर के आभूषण कक्ष में सुरक्षित हैं और विशेष अवसरों पर दर्शनार्थियों को दिखाए जाते हैं।

दिव्य वास्तुकला और गर्भगृह की विशेषता

भद्राचलम मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय द्राविड़ शैली और स्थानीय संस्कृति का एक अद्भुत संगम है। मंदिर परिसर विशाल और पत्थरों की नक्काशी से सुसज्जित है। मुख्य प्रवेश द्वार पर भव्य गोपुरम (राजगोपुरम) स्थित है, जिस पर पौराणिक कथाओं के जीवंत प्रसंग उकेरे गए हैं।

गर्भ गृह (Sanctum Sanctorum) की बनावट अत्यंत रहस्यमयी और अलौकिक है। गर्भगृह के भीतर भगवान श्री राम की मुख्य प्रतिमा लगभग पाँच फीट ऊंची है, जिसमें वे पद्मासन या वीरासन मुद्रा में विराजमान हैं। माता सीता उनके गोद के पास नहीं बल्कि उनके बगल में एक ही पाषाण पर उत्कीर्ण हैं। मंदिर के मुख्य प्रांगण में राजमहल शैली के मंडप, कल्याण मंडप और अमृत कलश स्तंभ पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। गोदावरी नदी के ठीक किनारे स्थित होने के कारण मंदिर के पावन घाट से नदी का मनोरम दृश्य दिखाई देता है, जो ध्यान और साधना के लिए उत्तम है।

दैनिक दिनचर्या, दर्शन समय और आरती अनुष्ठान

मंदिर के कपाट प्रतिदिन सुबह तड़के खुलते हैं और रात्रि शयन आरती तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान अनवरत चलते रहते हैं।

अनुष्ठान का नामसमय (प्रातः / सायं)विवरण
सुप्रभातम सेवा05:00 AM - 05:30 AMभगवान को निद्रा से जगाने और मंत्रोच्चार का समय।
बालभोगम06:00 AMभगवान को प्रथम नैवेद्य अर्पण।
निजाराधना एवं दर्शन08:30 AM - 12:00 PMसामान्य एवं विशेष दर्शन तथा अभिषेक।
महामंगला आरती12:00 PM - 12:30 PMदोपहर की मुख्य आरती और भोग।
अपराह्न दर्शन03:00 PM - 07:00 PMदोपहर के विश्राम के पश्चात पुनश्च दर्शन प्रारंभ।
संध्या आरती07:00 PM - 07:45 PMसंध्या बेला में दीप प्रज्वलन और आरती।
शयन आरती09:00 PMरात्रि शयन से पूर्व अंतिम सेवा।

प्रमुख उत्सव और वार्षिक मेले

भद्राचलम में मनाए जाने वाले उत्सवों में सबसे प्रमुख 'श्री रामनवमी ब्रह्मोत्सव' है, जो चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी (श्री रामनवमी) तक अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है।

  • श्री सीताराम कल्याणोत्सव: चैत्र शुक्ल नवमी के दिन भगवान श्री राम और माता सीता का दिव्य विवाह उत्सव गोदावरी तट पर स्थित 'मिथिला स्टेडियम' में अत्यंत भव्यता के साथ संपन्न होता है। इस ऐतिहासिक विवाह में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। मंदिर ट्रस्ट की ओर से भगवान को मोती और रेशमी वस्त्र अर्पित किए जाते हैं।
  • वैकुंठ एकादशी (मुक्कोटी एकादशी): इस पवित्र अवसर पर 'उत्तरा द्वार दर्शन' का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस द्वार से प्रवेश करने वाले भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • कार्तिक पूर्णिमा और विजया दशमी: इन पर्वों पर गोदावरी नदी में दीपदान और भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है, जो देखने योग्य होता है।

संपूर्ण यात्रा मार्गदर्शिका (कैसे पहुंचें)

भद्राचलम सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, जिससे यहाँ पहुँचना बेहद सुगम है:

  • वायु मार्ग (By Air): निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा हैदराबाद का राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (HYD) है, जो यहाँ से लगभग 310 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। विजयवाड़ा हवाई अड्डा (VGA) भी लगभग 175 किमी दूर है। हवाई अड्डे से टैक्सी या बस द्वारा भद्राचलम पहुँचा जा सकता है।
  • रेल मार्ग (By Rail): भद्राचलम का अपना रेलवे स्टेशन 'भद्राचलम रोड' (स्टेशन कोड: BDCR) है, जो कि भद्राचलम शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर कोठागुडेम के पास स्थित है। सिकंदराबाद, वारंगल और विजयवाड़ा से यहाँ के लिए सीधी ट्रेनें चलती हैं।
  • सड़क मार्ग (By Road): तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (TSRTC) और आंध्र प्रदेश (APS RTC) की बसें हैदराबाद, वारंगल, खम्माम, विजयवाड़ा और राजमुंदरी से नियमित रूप से भद्राचलम के लिए संचालित होती हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से निजी वाहनों से भी यात्रा करना अत्यंत सुविधाजनक है।

आवास, प्रसादम और तीर्थयात्री सुविधाएं

भद्राचलम देवस्थानम ट्रस्ट की ओर से तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए उत्तम प्रबंध किए गए हैं:

मंदिर समिति द्वारा संचालित विभिन्न विश्राम गृह (Dharamshala & Guest Houses) जैसे कि भद्रगिरि सत्संग भवन, श्री राम सदन और बजट कॉटेज बहुत किफायती दरों पर उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त शहर में कई आधुनिक होटल और लॉज भी मौजूद हैं।

मंदिर परिसर के निकट ही 'नित्य अन्नदानम ट्रस्ट' द्वारा प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं को निःशुल्क महाप्रसाद (भोजन प्रसादम) वितरित किया जाता है। यहाँ का 'भद्राचलम लड्डू प्रसादम' बहुत प्रसिद्ध है, जिसे भक्तजन अपने साथ श्रद्धा स्वरूप ले जाते हैं। सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से मंदिर परिसर में लॉकर रूम, जूता स्टैंड और विश्राम कक्ष की उत्तम व्यवस्था उपलब्ध है।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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