पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री मणिकर्णिका शक्तिपीठ (मणिकर्णिका घाट), वाराणसी - पौराणिक इतिहास, दर्शन समय एवं संपूर्ण यात्रा गाइड

14 दर्शनार्थी
वाराणसी, उत्तर प्रदेश
प्रकाशित: 17 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
माँ सती (विशालाक्षी)
दर्शन समय सारिणी
सुबह 05:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 05:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM
स्थान / नगर
वाराणसी, उत्तर प्रदेश
आराध्य देव
माँ सती (विशालाक्षी)
दर्शन समय
सुबह 05:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक
आरती समय
मंगला आरती: 05:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM
स्थान / धाम
मणिकर्णिका घाट, वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत
अक्षर आकार:
पठन थीम:

वाराणसी, जिसे काशी और अविमुक्त क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है, सनातन धर्म की आध्यात्मिक राजधानी है। इसी पावन नगरी के मणिकर्णिका घाट पर स्थित 'मणिकर्णिका शक्तिपीठ' माँ सती के 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह वह स्थान है जहाँ माता सती के कर्ण-कुंडल गिरे थे, जिसके कारण इसे मणिकर्णिका कहा जाता है।

मंदिर का परिचय एवं पौराणिक इतिहास

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर ब्रह्मांड में भ्रमण कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 भाग किए थे। जहाँ-जहाँ ये अंग गिरे, वहाँ शक्तिपीठों की स्थापना हुई। वाराणसी में माँ सती के कर्ण-कुंडल गिरे थे, जिससे इस स्थान का नाम 'मणिकर्णिका' पड़ा।

मणिकर्णिका घाट को 'महाश्मशान' भी कहा जाता है। यहाँ की मान्यता है कि जो भी जीव यहाँ अपने प्राण त्यागता है, उसे स्वयं भगवान शिव तारक मंत्र प्रदान करते हैं, जिससे उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्थान जीवन और मृत्यु के चक्र से मुक्ति का प्रतीक है। यहाँ स्थित विशालाक्षी मंदिर का भी विशेष महत्व है, जिसे शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है।

इतिहासकारों और धर्मग्रंथों के अनुसार, यह स्थान आदिकाल से ही सिद्धों, योगियों और संन्यासियों का केंद्र रहा है। यहाँ की ऊर्जा अत्यंत तीव्र है, जो साधकों को आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाती है।

मंदिर की स्थापत्य कला एवं गर्भगृह संरचना

मणिकर्णिका घाट का स्थापत्य अत्यंत प्राचीन है। यहाँ के मंदिर और घाट की सीढ़ियाँ पत्थर की बनी हैं, जो सदियों पुरानी हैं। गर्भगृह में माँ विशालाक्षी की भव्य प्रतिमा स्थापित है, जो भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती है। मंदिर की वास्तुकला में उत्तर भारतीय शैली की झलक मिलती है। गर्भगृह के चारों ओर नक्काशीदार खंभे और पौराणिक कथाओं को दर्शाती हुई मूर्तियाँ लगी हैं।

दर्शन, आरती एवं पूजा का समय

मंदिर के दर्शन का समय सुबह 05:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक है। विशेष अवसरों पर समय में परिवर्तन हो सकता है।

  • मंगला आरती: 05:30 AM
  • भोग आरती: 12:00 PM
  • संध्या आरती: 07:00 PM

भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे भीड़ से बचने के लिए सुबह जल्दी दर्शन के लिए आएं।

प्रमुख त्यौहार एवं उत्सव

मणिकर्णिका शक्तिपीठ पर नवरात्रि के दौरान विशेष उत्सव मनाया जाता है। इसके अलावा, महाशिवरात्रि और कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इन दिनों मंदिर को फूलों और दीपों से भव्य रूप से सजाया जाता है।

मंदिर तक कैसे पहुंचे

वायु मार्ग: वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा है। यहाँ से टैक्सी या ऑटो द्वारा घाट तक पहुँचा जा सकता है।

रेल मार्ग: वाराणसी जंक्शन (वाराणसी कैंट) और काशी स्टेशन प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं।

सड़क मार्ग: वाराणसी देश के प्रमुख शहरों से राष्ट्रीय राजमार्गों द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

यात्रियों के लिए उपयोगी सुझाव

मंदिर दर्शन के लिए सात्विक वस्त्र धारण करें। घाट पर फोटोग्राफी करते समय स्थानीय परंपराओं और भावनाओं का सम्मान करें। ठहरने के लिए घाट के पास कई धर्मशालाएं और होटल उपलब्ध हैं।

आस-पास के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थल

काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, काल भैरव मंदिर, और सारनाथ।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

दर्शनार्थियों के अनुभव व समीक्षाएँ (0)

मंदिर दर्शन की अपनी आध्यात्मिक अनुभूति साझा करें

मंदिर विवरण कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!