पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)

93 दर्शनार्थी
वाराणसी, उत्तर प्रदेश
प्रकाशित: 30 Sep 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
भगवान शिव (विश्वनाथ)
दर्शन समय सारिणी
सुबह 03:00 बजे से रात्रि 11:00 बजे तक (दैनिक)
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 03:00 AM | भोग आरती: 11:15 AM | सप्तऋषि आरती: 07:00 PM | श्रृंगार भोग आरती: 09:00 PM | शयन आरती: 10:30 PM
स्थान / नगर
वाराणसी, उत्तर प्रदेश
आराध्य देव
भगवान शिव (विश्वनाथ)
दर्शन समय
सुबह 03:00 बजे से रात्रि 11:00 बजे तक (दैनिक)
आरती समय
मंगला आरती: 03:00 AM | भोग आरती: 11:15 AM | सप्तऋषि आरती: 07:00 PM | श्रृंगार भोग आरती: 09:00 PM | शयन आरती: 10:30 PM
स्थान / धाम
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, विश्वनाथ गली, वाराणसी, उत्तर प्रदेश 221001
अक्षर आकार:
पठन थीम:

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग: आध्यात्मिक वैभव

वाराणसी, जिसे काशी के नाम से भी जाना जाता है, भगवान शिव की प्रिय नगरी है। यहाँ स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। स्कंद पुराण में काशी की महिमा का वर्णन करते हुए इसे 'अविमुक्त क्षेत्र' कहा गया है। माना जाता है कि जो भी इस पवित्र भूमि पर प्राण त्यागता है, उसे सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि

काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है। पुराणों के अनुसार, भगवान शिव ने स्वयं इस स्थान को अपनी राजधानी के रूप में चुना था। मंदिर का उल्लेख महाभारत और उपनिषदों में भी मिलता है। समय के साथ, मंदिर को कई बार आक्रमणों का सामना करना पड़ा और पुनर्निर्माण किया गया। वर्तमान मंदिर का निर्माण 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा करवाया गया था।

वास्तुकला और गर्भगृह

मंदिर की वास्तुकला नागर शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर के शिखर पर सोने की परत चढ़ी है, जिसे महाराजा रणजीत सिंह ने दान किया था। गर्भगृह में स्थित शिवलिंग स्वयंभू है, जो चांदी की वेदी पर स्थापित है। मंदिर परिसर में ज्ञानवापी कूप और कई छोटे मंदिर भी स्थित हैं, जो इसे एक विशाल आध्यात्मिक केंद्र बनाते हैं।

दैनिक अनुष्ठान और दर्शन

मंदिर में दिन भर विभिन्न आरती और पूजाएं होती हैं। मंगला आरती सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसके लिए भक्तों को पहले से बुकिंग करनी होती है। सप्तऋषि आरती के दौरान सात विद्वान ब्राह्मणों द्वारा विशेष पूजा की जाती है, जो अत्यंत मनमोहक होती है।

प्रमुख उत्सव

उत्सव विवरण
महाशिवरात्रि यहाँ का सबसे प्रमुख त्योहार है।
सावन मास लाखों कांवड़िये गंगा जल लेकर मंदिर पहुँचते हैं।
देव दीपावली मंदिर और घाटों का दृश्य अलौकिक होता है।

यात्रा और ठहरने की व्यवस्था

वाराणसी सड़क, रेल और वायु मार्ग से देश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा है। वाराणसी जंक्शन (वाराणसी कैंट) मुख्य रेलवे स्टेशन है। मंदिर के आसपास कई सरकारी और निजी धर्मशालाएं उपलब्ध हैं। मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित 'काशी विश्वनाथ अन्नक्षेत्र' में भक्तों के लिए निःशुल्क भोजन की व्यवस्था है।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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