पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री कैला देवी मंदिर, करौली (राजस्थान)

16 दर्शनार्थी
कैला देवी, राजस्थान
प्रकाशित: 26 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
माँ कैला देवी (महालक्ष्मी स्वरूप)
दर्शन समय सारिणी
सुबह 04:00 बजे से रात्रि 09:30 बजे तक
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 05:00 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM | शयन आरती: 09:30 PM
स्थान / नगर
कैला देवी, राजस्थान
आराध्य देव
माँ कैला देवी (महालक्ष्मी स्वरूप)
दर्शन समय
सुबह 04:00 बजे से रात्रि 09:30 बजे तक
आरती समय
मंगला आरती: 05:00 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM | शयन आरती: 09:30 PM
स्थान / धाम
कैला देवी मंदिर, त्रिकूट पर्वत, करौली, राजस्थान 322243
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पठन थीम:

श्री कैला देवी मंदिर: आस्था और भक्ति का महातीर्थ

राजस्थान के करौली जिले में त्रिकूट पर्वत की सुरम्य पहाड़ियों के बीच स्थित 'कैला देवी मंदिर' न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं का एक जीवंत केंद्र है। यह मंदिर माँ कैला देवी को समर्पित है, जिन्हें साक्षात महालक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। यहाँ की भक्ति परंपरा में 'लांगुरिया' गीतों का विशेष महत्व है, जो भक्त माँ की स्तुति में गाते हैं।

पौराणिक पृष्ठभूमि और इतिहास

पौराणिक कथाओं के अनुसार, कैला देवी का यह स्थान भगवान कृष्ण की बहन योगमाया से भी जुड़ा है। मान्यता है कि जब कंस ने योगमाया को मारने का प्रयास किया, तो वे आकाश में विलीन हो गईं और त्रिकूट पर्वत पर आकर स्थापित हुईं। ऐतिहासिक रूप से, यह मंदिर करौली के यदुवंशी राजाओं की कुलदेवी के रूप में पूजित है। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 18वीं शताब्दी में राजा गोपाल सिंह द्वारा निर्मित कराया गया था, जो अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।

वास्तुकला और गर्भगृह

मंदिर की वास्तुकला राजस्थानी और नागर शैली का अद्भुत मिश्रण है। मंदिर का मुख्य द्वार संगमरमर से निर्मित है, जिस पर नक्काशी का बारीक काम किया गया है। गर्भगृह में माँ कैला देवी की दो मूर्तियाँ स्थापित हैं। बाईं ओर माँ कैला देवी (महालक्ष्मी) हैं और दाईं ओर माँ चामुंडा देवी विराजमान हैं। दोनों प्रतिमाएं अत्यंत सौम्य और प्रभावशाली हैं, जो भक्तों को आत्मिक शांति प्रदान करती हैं।

लांगुरिया परंपरा और उत्सव

कैला देवी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का 'लक्खी मेला' है, जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में आयोजित होता है। इस दौरान लाखों भक्त 'पदयात्रा' करते हुए यहाँ पहुँचते हैं। 'लांगुरिया' गीत, जो हनुमान जी (जिन्हें यहाँ लांगुरिया कहा जाता है) की स्तुति में गाए जाते हैं, इस यात्रा का अभिन्न अंग हैं। यह लोक संगीत और भक्ति का ऐसा संगम है जो विश्व में अद्वितीय है।

दैनिक दर्शन और नियम

मंदिर में दर्शन का क्रम प्रातः मंगला आरती से शुरू होता है। भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे मंदिर परिसर में शालीन वस्त्र धारण करें। मंदिर के भीतर फोटोग्राफी वर्जित है।

आरती का नामसमय
मंगला आरती05:00 AM
भोग आरती12:00 PM
संध्या आरती07:00 PM
शयन आरती09:30 PM

कैसे पहुंचें (Travel Guide)

हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा जयपुर (सांगानेर) है, जो लगभग 160 किमी दूर है। वहां से टैक्सी या बस द्वारा करौली पहुंचा जा सकता है।

रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन 'गंगापुर सिटी' है, जो दिल्ली-मुंबई मुख्य लाइन पर स्थित है। स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 35 किमी है।

सड़क मार्ग: करौली राजस्थान के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। जयपुर, भरतपुर और धौलपुर से नियमित बसें उपलब्ध हैं।

आवास और सुविधाएं

मंदिर ट्रस्ट द्वारा यात्रियों के लिए धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, मंदिर के पास कई निजी होटल और धर्मशालाएं भी हैं। मंदिर परिसर में निःशुल्क भोजन प्रसादम की व्यवस्था भी समय-समय पर आयोजित की जाती है।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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