पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री कैला देवी मंदिर, करौली (राजस्थान)

18 दर्शनार्थी
करौली, राजस्थान
प्रकाशित: 26 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
माँ कैला देवी
दर्शन समय सारिणी
सुबह 04:00 बजे से रात्रि 09:30 बजे तक (दैनिक)
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 05:00 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM | शयन आरती: 09:30 PM
स्थान / नगर
करौली, राजस्थान
आराध्य देव
माँ कैला देवी
दर्शन समय
सुबह 04:00 बजे से रात्रि 09:30 बजे तक (दैनिक)
आरती समय
मंगला आरती: 05:00 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM | शयन आरती: 09:30 PM
स्थान / धाम
कैला देवी मंदिर, त्रिकूट पर्वत, करौली, राजस्थान 322243
अक्षर आकार:
पठन थीम:

श्री कैला देवी मंदिर: आस्था और शक्ति का महातीर्थ

राजस्थान के करौली जिले में त्रिकूट पर्वत की सुरम्य पहाड़ियों के बीच स्थित 'कैला देवी मंदिर' न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह करोड़ों भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है। यह मंदिर माँ दुर्गा के स्वरूप 'महालक्ष्मी' को समर्पित है। यहाँ की दिव्य ऊर्जा और लांगुरिया गीतों की गूंज भक्तों को एक अलौकिक शांति प्रदान करती है।

ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि

पौराणिक कथाओं के अनुसार, कैला देवी का यह स्थान भगवान कृष्ण की बहन योगमाया से जुड़ा है। कहा जाता है कि जब कंस ने योगमाया को मारने का प्रयास किया, तो वे आकाश में विलीन हो गईं और त्रिकूट पर्वत पर आकर स्थापित हुईं। ऐतिहासिक रूप से, इस मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में यदुवंशी राजपूत शासकों द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर अपनी चमत्कारी शक्तियों के लिए जाना जाता है, जहाँ भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और माँ की कृपा से उन्हें पूर्ण करते हैं।

स्थापत्य कला और गर्भगृह

मंदिर की वास्तुकला राजस्थानी शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर का मुख्य द्वार संगमरमर से निर्मित है, जिस पर की गई नक्काशी अत्यंत मनमोहक है। गर्भगृह में माँ कैला देवी की प्रतिमा स्थापित है, जिनके दाईं ओर माँ चामुंडा की प्रतिमा भी विराजमान है। मंदिर का विशाल प्रांगण और चारों ओर फैली अरावली की पहाड़ियां इसे एक शांत और आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करती हैं।

लांगुरिया गीतों की परंपरा

कैला देवी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता 'लांगुरिया' गीत हैं। भक्तगण माँ की स्तुति में ढोल-नगाड़ों के साथ लांगुरिया गाते हुए मंदिर तक पहुंचते हैं। लांगुरिया भगवान हनुमान का प्रतीक माने जाते हैं, जो माँ की सेवा में सदैव तत्पर रहते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है और भक्तों के उत्साह को दोगुना कर देती है।

प्रमुख उत्सव: लक्खी मेला

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में यहाँ 'लक्खी मेला' आयोजित होता है, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। इस दौरान पूरा क्षेत्र भक्ति के रंग में सराबोर हो जाता है। नवरात्र के दौरान विशेष हवन, अभिषेक और अनुष्ठान किए जाते हैं, जो मंदिर की भव्यता को और बढ़ा देते हैं।

यात्रा और दर्शन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी

मंदिर तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग सबसे सुलभ है। निकटतम रेलवे स्टेशन 'गंगापुर सिटी' है, जो यहाँ से लगभग 35 किमी दूर है। निकटतम हवाई अड्डा 'जयपुर' है। मंदिर परिसर में भक्तों के लिए ठहरने हेतु धर्मशालाएं और ट्रस्ट के गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को शालीन वस्त्र धारण करने की सलाह दी जाती है।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

दर्शनार्थियों के अनुभव व समीक्षाएँ (0)

मंदिर दर्शन की अपनी आध्यात्मिक अनुभूति साझा करें

मंदिर विवरण कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!