पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री एकलिंगजी मंदिर, उदयपुर (राजस्थान)

16 दर्शनार्थी
कैलाशपुरी, राजस्थान
प्रकाशित: 26 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
भगवान शिव (एकलिंग नाथ)
दर्शन समय सारिणी
सुबह 04:15 बजे से रात्रि 07:30 बजे तक (विभिन्न अंतराल पर)
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 04:15 AM | श्रृंगार आरती: 10:30 AM | संध्या आरती: 06:30 PM | शयन आरती: 07:30 PM
स्थान / नगर
कैलाशपुरी, राजस्थान
आराध्य देव
भगवान शिव (एकलिंग नाथ)
दर्शन समय
सुबह 04:15 बजे से रात्रि 07:30 बजे तक (विभिन्न अंतराल पर)
आरती समय
मंगला आरती: 04:15 AM | श्रृंगार आरती: 10:30 AM | संध्या आरती: 06:30 PM | शयन आरती: 07:30 PM
स्थान / धाम
कैलाशपुरी, उदयपुर, राजस्थान 313202
अक्षर आकार:
पठन थीम:

श्री एकलिंगजी मंदिर: मेवाड़ की आध्यात्मिक राजधानी

मेवाड़ के इतिहास में श्री एकलिंगजी का स्थान सर्वोपरि है। उदयपुर से लगभग 22 किलोमीटर दूर कैलाशपुरी में स्थित यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास का साक्षी भी है। यहाँ के अधिष्ठाता भगवान शिव हैं, जिन्हें 'एकलिंग नाथ' के रूप में पूजा जाता है।

ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान शिव के आशीर्वाद से हुई थी। ऐतिहासिक रूप से, बप्पा रावल ने 8वीं शताब्दी में इस मंदिर का निर्माण करवाया था। तब से, मेवाड़ के महाराणा स्वयं को एकलिंग नाथ का 'दीवान' (प्रतिनिधि) मानते हैं और शासन का कार्यभार उन्हीं के नाम से संचालित करते हैं। यह परंपरा आज भी जीवित है।

वास्तुकला और गर्भगृह

मंदिर की वास्तुकला नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका मुख्य आकर्षण गर्भगृह में स्थित चार मुखी शिवलिंग है। काले संगमरमर से निर्मित यह शिवलिंग अत्यंत दिव्य है, जिसके चार मुख क्रमशः ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सूर्य देव का प्रतिनिधित्व करते हैं। मंदिर परिसर में कई अन्य छोटे मंदिर भी हैं, जो इसे एक विशाल मंदिर समूह का रूप देते हैं।

दैनिक दर्शन और आरती अनुष्ठान

मंदिर के कपाट सुबह 04:15 बजे मंगला आरती के साथ खुलते हैं। दिन भर में विभिन्न समय पर भोग और श्रृंगार आरती होती है। भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे मंदिर की आधिकारिक समय-सारणी का पालन करें।

प्रमुख उत्सव

महाशिवरात्रि यहाँ का सबसे मुख्य पर्व है। इस दिन मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है और लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इसके अलावा श्रावण मास के सोमवार और प्रदोष व्रत पर विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

यात्रा निर्देश

वायु मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा डबोक (उदयपुर) है। रेल मार्ग: उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन निकटतम है। सड़क मार्ग: उदयपुर से बस या टैक्सी द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।

तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं

मंदिर ट्रस्ट द्वारा परिसर के बाहर धर्मशालाओं की व्यवस्था है। निकटतम शहर उदयपुर में सभी प्रकार के होटल और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। मंदिर के आसपास शुद्ध सात्विक भोजन के लिए कई भोजनालय स्थित हैं।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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