पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री धारी देवी मंदिर, श्रीनगर गढ़वाल (उत्तराखंड)

29 दर्शनार्थी
श्रीनगर, उत्तराखंड
प्रकाशित: 26 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
माँ धारी देवी
दर्शन समय सारिणी
सुबह 06:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक (दैनिक)
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 06:30 AM | भोग आरती: 12:30 PM | संध्या आरती: 07:30 PM
स्थान / नगर
श्रीनगर, उत्तराखंड
आराध्य देव
माँ धारी देवी
दर्शन समय
सुबह 06:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक (दैनिक)
आरती समय
मंगला आरती: 06:30 AM | भोग आरती: 12:30 PM | संध्या आरती: 07:30 PM
स्थान / धाम
धारी देवी मंदिर, श्रीनगर-रुद्रप्रयाग मार्ग, कल्यासौड़, उत्तराखंड 246174
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पठन थीम:

श्री धारी देवी मंदिर: चारधाम की रक्षक और अलौकिक शक्ति

उत्तराखंड की गोद में स्थित, श्रीनगर-रुद्रप्रयाग मार्ग पर कल्यासौड़ नामक स्थान पर माँ धारी देवी का दिव्य मंदिर स्थित है। यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि इसे चारधाम यात्रा की रक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है। अलकनंदा नदी के तट पर स्थित यह मंदिर सदियों से भक्तों की आस्था का केंद्र रहा है।

पौराणिक संदर्भ और इतिहास

पौराणिक कथाओं के अनुसार, धारी देवी माँ काली का ही एक रूप हैं। किंवदंती है कि एक बार भीषण बाढ़ में मंदिर बह गया था और मूर्ति एक चट्टान से टकराकर रुक गई थी। तब ग्रामीणों को देवी ने स्वप्न में दर्शन देकर अपना स्थान पुनः स्थापित करने का निर्देश दिया था। माँ धारी देवी को चारधाम (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) की रक्षक माना जाता है। मान्यता है कि यदि देवी प्रसन्न हैं, तो चारधाम यात्रा निर्विघ्न संपन्न होती है।

अद्भुत चमत्कार: रूप परिवर्तन

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता माँ धारी देवी की प्रतिमा है। भक्त और स्थानीय लोग बताते हैं कि देवी की प्रतिमा दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है। सुबह वे एक छोटी कन्या के रूप में दिखाई देती हैं, दोपहर में एक युवती के रूप में, और शाम को एक वृद्ध महिला के रूप में। यह अलौकिक दृश्य भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

वास्तुकला और गर्भगृह

मंदिर का निर्माण पारंपरिक पहाड़ी शैली में किया गया है। गर्भगृह में माँ धारी देवी की अत्यंत सौम्य और प्रभावशाली प्रतिमा स्थापित है। मंदिर का परिसर अलकनंदा नदी के ठीक ऊपर स्थित है, जिससे यहाँ का वातावरण अत्यंत शांत और ऊर्जावान रहता है। हाल के वर्षों में, मंदिर का पुनरुद्धार किया गया है ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु यहाँ दर्शन कर सकें।

दैनिक पूजा और अनुष्ठान

मंदिर में प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा की जाती है। मंगला आरती से लेकर शयन आरती तक, मंदिर का वातावरण भक्तिमय रहता है। विशेष अवसरों पर देवी का भव्य श्रृंगार किया जाता है और भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है।

प्रमुख उत्सव

नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष अनुष्ठान और हवन का आयोजन होता है। इसके अलावा, महाशिवरात्रि और अन्य हिंदू त्योहारों पर यहाँ भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं।

यात्रा गाइड: कैसे पहुंचें

  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है, जो लगभग 150 किमी दूर है।
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। वहां से आप टैक्सी या बस द्वारा श्रीनगर पहुंच सकते हैं।
  • सड़क मार्ग: श्रीनगर गढ़वाल मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-58) से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। दिल्ली से श्रीनगर के लिए सीधी बसें उपलब्ध हैं।

तीर्थयात्रियों के लिए सुझाव

मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखें। दर्शन के दौरान पारंपरिक वस्त्र धारण करना उचित माना जाता है। मंदिर के आसपास ठहरने के लिए श्रीनगर शहर में कई होटल और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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