पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री पलानी मुरुगन मंदिर: सिद्धों की साधना स्थली और दिव्य अभिषेक

16 दर्शनार्थी
पलानी, तमिलनाडु
प्रकाशित: 26 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
भगवान कार्तिकेय (मुरुगन)
दर्शन समय सारिणी
सुबह 06:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक (दैनिक)
नित्य आरती समय
विश्वरूप दर्शन: 06:00 AM | कालसंधी: 08:00 AM | उच्चिकालम: 12:00 PM | सायाराचाई: 05:30 PM | राकालाम: 08:00 PM
स्थान / नगर
पलानी, तमिलनाडु
आराध्य देव
भगवान कार्तिकेय (मुरुगन)
दर्शन समय
सुबह 06:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक (दैनिक)
आरती समय
विश्वरूप दर्शन: 06:00 AM | कालसंधी: 08:00 AM | उच्चिकालम: 12:00 PM | सायाराचाई: 05:30 PM | राकालाम: 08:00 PM
स्थान / धाम
पलानी हिल्स, पलानी, डिंडीगुल जिला, तमिलनाडु - 624601
अक्षर आकार:
पठन थीम:

श्री पलानी मुरुगन मंदिर: एक दिव्य आध्यात्मिक यात्रा

पलानी मुरुगन मंदिर, जिसे 'दंडायुधपाणि स्वामी मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण भारत के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है। यह मंदिर भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) के छह प्रमुख आवासों (अरुपदैवीडु) में से तीसरा है। यह मंदिर न केवल अपनी वास्तुकला के लिए, बल्कि अपने अद्वितीय 'नवपाषाण' विग्रह के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है।

ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव ने ज्ञान का फल (ज्ञानपझम) देने के लिए मुरुगन और गणेश के बीच प्रतियोगिता रखी, तो मुरुगन हारने के बाद क्रोधित होकर कैलाश छोड़कर पलानी की पहाड़ियों पर आ गए। यहाँ ऋषि अगस्त्य और सिद्धों ने उनकी तपस्या की। इस मंदिर के मुख्य विग्रह का निर्माण महान सिद्ध 'भोगर' ने किया था। उन्होंने नौ प्रकार के जहरीले पदार्थों (नवपाषाण) को मिलाकर एक ऐसी मूर्ति बनाई, जिसमें औषधीय गुण हैं। कहा जाता है कि इस मूर्ति पर चढ़ाए गए दूध और पंचामृत का सेवन करने से असाध्य रोग दूर हो जाते हैं।

वास्तुकला और गर्भगृह

यह मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। पहाड़ी की चोटी पर स्थित होने के कारण, यहाँ तक पहुँचने के लिए एक भव्य सीढ़ी मार्ग और एक आधुनिक 'विंच' (रोपवे) की सुविधा है। गर्भगृह में भगवान मुरुगन की मूर्ति 'दंडायुधपाणि' (हाथ में दंड धारण किए हुए) मुद्रा में है। यह मूर्ति अन्य मंदिरों की तरह धातु या पत्थर की नहीं, बल्कि सिद्धों द्वारा निर्मित नवपाषाण की है।

दैनिक पूजा और अनुष्ठान

मंदिर में दिन भर में छह बार पूजा (कालसंधी से राकालाम तक) की जाती है। प्रत्येक पूजा के दौरान भगवान का विशेष अभिषेक किया जाता है। विशेष रूप से 'पंचामृत अभिषेक' यहाँ का मुख्य आकर्षण है।

पूजा का नामसमय
विश्वरूप दर्शन06:00 AM
कालसंधी08:00 AM
उच्चिकालम12:00 PM
सायाराचाई05:30 PM
राकालाम08:00 PM

प्रमुख उत्सव

यहाँ का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार 'थाई पूसम' (Thai Poosam) है, जिसमें लाखों भक्त कावड़ लेकर आते हैं। इसके अलावा, 'पंगुनी उथिरम' और 'स्कंद षष्ठी' भी अत्यंत धूमधाम से मनाए जाते हैं।

यात्रा और ठहरने की व्यवस्था

कैसे पहुंचें: निकटतम हवाई अड्डा कोयंबटूर (लगभग 100 किमी) है। पलानी रेलवे स्टेशन मदुरै और कोयंबटूर से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। सड़क मार्ग से पलानी तमिलनाडु के प्रमुख शहरों से जुड़ा है।

आवास: मंदिर देवस्थानम द्वारा संचालित कई धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। भक्त 'अन्नदानम' (निःशुल्क भोजन) का लाभ भी उठा सकते हैं, जो मंदिर परिसर में प्रतिदिन आयोजित होता है।

महत्वपूर्ण निर्देश

मंदिर में प्रवेश के लिए पारंपरिक वेशभूषा (धोती/साड़ी) को प्राथमिकता दी जाती है। परिसर में स्वच्छता बनाए रखें और फोटोग्राफी के नियमों का पालन करें।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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