४७+ पावन त्यौहार विक्रम संवत २०८३ शास्त्रसम्मत मुहूर्त व विधियां

सनातन त्यौहार एवं पर्व निर्देशिका २०२६

समस्त हिंदू व्रत, पावन पर्वों एवं उत्सवों की तिथिवार प्रामाणिक सूची, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व शास्त्रोक्त महत्व।

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Hindu ११०
२८ अप्रैल २०२६, मंगलवार

Parashurama Dwadashi / Bhauma Pradosh Vrat 2026: 28 April, मंगलवार

परशुराम द्वादशी और भौम प्रदोष व्रत – 28 अप्रैल 2026, मंगलवार। जानें पूजा विधि, कथा, मुहूर्त और महत्व। | Parashurama...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu २७३
३० अप्रैल २०२६, गुरुवार

नरसिंह जयंती 2026: Narasimha Jayanti Date, Puja Vidhi & Rahu-Ketu Remedy

भगवान नरसिंह के प्रकटोत्सव का पावन पर्व | Appearance of Lord Narasimha (4th avatar of Vishnu) for protection from e...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu ८९
०१ मई २०२६, शुक्रवार

Buddha Purnima 2026 – बुद्ध पूर्णिमा / वैशाख पूर्णिमा / कूर्म जयंती / चित्रा पूर्णिमा (शुक्रवार)

बुद्ध पूर्णिमा – भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान एवं महापरिनिर्वाण दिवस। वैशाख पूर्णिमा, कूर्म जयंती, चित्रा पूर्णिमा एव...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu ३६९
०२ मई २०२६, शनिवार

Narada Jayanti 2026: देवर्षि नारद का प्राकट्य दिवस (2 May Saturday) | नारद जयंती

देवर्षि नारद जी का जन्मोत्सव - भक्ति, संगीत और ज्ञान के प्रतीक | Birth anniversary of Sage Narada, the divine messe...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu १२६०९
०५ मई २०२६, मंगलवार

Angarki Sankashti Chaturthi 2026 | अंगारकी संकष्टी चतुर्थी 2026

मंगलवार को पड़ने वाली विशेष गणेश चतुर्थी | Powerful Ganesha Chaturthi fasting on Tuesday, known for removing obstac...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu १३१
०९ मई २०२६, शनिवार

कालाष्टमी 2026: Kalashtami (Krishna Ashtami) – Lord Bhairava Puja for Protection & Fear Removal

भगवान भैरव (शिव का उग्र रूप) को समर्पित पर्व | Dedicated to Lord Bhairava, the fierce form of Shiva for protection ...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu ११४
१३ मई २०२६, बुधवार

अपरा एकादशी 2026 - Apara Ekadashi 2026: व्रत, तिथि एवं महत्व

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी का कठोर व्रत, भगवान विष्णु को समर्पित | Strict fast dedicated to Lord Vishnu for cleansing sin...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu १२५
१४ मई २०२६, गुरुवार

Guru Pradosh Vrat 2026 – गुरु प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष) 14 मई, गुरुवार: भगवान शिव की संध्या आराधना

प्रदोष व्रत – कृष्ण पक्ष त्रयोदशी। गुरुवार के दिन शिव पूजन से बाधाओं का नाश, मनोकामना सिद्धि और गुरु ग्रह की कृपा। ...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu २४७
१५ मई २०२६, शुक्रवार

Vrishabha Sankranti 2026: सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश (15 May Friday) | Masik Shivratri

सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश का पर्व, मासिक शिवरात्रि का संयोग | Sun's transit into Taurus (Vrishabha Rashi), coin...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu २४२
१६ मई २०२६, शनिवार

Jyeshtha Amavasya 2026 | Vat Savitri Vrat | Shani Jayanti | ज्येष्ठ अमावस्या 2026

वट सावित्री व्रत, शनि जयंती और अमावस्या का त्रिवेणी संगम | Sacred confluence of New Moon, Vat Savitri fasting for h...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu ६०६
२५ मई २०२६, सोमवार

गंगा दशहरा 2026: ज्येष्ठ शुक्ल दशमी | Ganga Dussehra 2026: Jyeshtha Shukla Dashami

पवित्र गंगा का धरती पर अवतरण दिवस | Celebrating the descent of the sacred Ganges to Earth....

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Islamic १३६६
२७ मई २०२६, बुधवार

ईद-उल-अज़हा 2026

बलिदान का त्योहार | Festival of Sacrifice....

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि

सनातन पर्व परंपरा एवं वैदिक काल-गणना का विज्ञान

सनातन हिंदू परंपरा में प्रत्येक पर्व और त्यौहार केवल सामाजिक उत्सव नहीं हैं, बल्कि वे सूर्य, चंद्रमा, नक्षत्रों और ऋतु संक्रमण के गहन खगोलीय सामंजस्य पर आधारित आध्यात्मिक विज्ञान हैं। वैदिक काल से ही हमारे ऋषियों ने मानव जीवन को प्रकृति के साथ लयबद्ध करने हेतु इन पावन पर्वों का निर्धारण किया है।

१. उदया तिथि एवं काल-व्यापिनी तिथि का शास्त्रीय नियम

धर्मसिंधु एवं निर्णयसिंधु ग्रंथों के अनुसार, हिंदू धर्म में पर्वों का निर्णय मुख्य रूप से दो प्रमुख आधारों पर होता है:

  • उदया तिथि (Udaya Tithi): जिस तिथि में सूर्योदय होता है, दिनभर सामान्यतः उसी तिथि का प्रभाव माना जाता है (जैसे रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी व्रत, दशहरा)।
  • काल-विशिष्ट व्यापिनी तिथि (Kala Vyapini): कुछ पर्व विशिष्ट प्रहर में मनाए जाते हैं—जैसे दीपावली का लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त उपरांत) में, महाशिवरात्रि का रुद्राभिषेक निशीथ काल (मध्यरात्रि) में, और करवा चौथ का पारण चंद्रोदय काल में। ऐसे में उस विशिष्ट काल में उपस्थित तिथि को ही ग्रहण किया जाता है।

२. लूनी-सोलर (Lunisolar) समन्वय और अधिकमास

सौर वर्ष ३६५.२४२ दिन का और चंद्र वर्ष ३५४.३६ दिन का होता है। प्रतिवर्ष आने वाले लगभग ११ दिनों के अंतर को संतुलित करने हेतु प्रत्येक ३२ माह १६ दिन (लगभग ३ वर्ष) में चंद्र वर्ष में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे 'अधिकमास' या 'पुरुषोत्तम मास' कहा जाता है। इसी वैज्ञानिक सामंजस्य के कारण हिंदू त्यौहार हमेशा अपनी प्राकृतिक ऋतुओं के अनुसार ही आते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ: यह सामग्री वैदिक पंचांग, पुराणों एवं प्रतिष्ठित सनातन धर्मग्रंथों के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा शोधपरक रूप से तैयार की गई है।
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