दिव्य भक्ति नाद कैप्सूल
पूजन व ध्यान के समय पवित्र वातावरण निर्माण हेतु स्पर्श करें:
महाशिवरात्रि का परिचय एवं महात्म्य
महाशिवरात्रि सनातन धर्म का सबसे कल्याणकारी और आध्यात्मिक रूप से जाग्रत महापर्व है। इस पावन रात्रि को शिवलिंग के रूप में भगवान शिव का प्राकट्य हुआ था और इसी दिन शिव-शक्ति का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। चारों प्रहर में रुद्राभिषेक, बिल्वपत्र अर्पण और रात्रि जागरण से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है।
शिवपुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात ब्रह्मांडीय ऊर्जा का स्तर अत्यंत तीव्र होता है। इस रात मेरुदंड को सीधा रखकर जागरण और ध्यान करने से मनुष्य की कुंडलिनी चेतना ऊर्ध्वगामी होती है। भगवान आशुतोष केवल एक लोटा जल और त्रिपत्र बेलपत्र से ही प्रसन्न होकर भक्तों को अमोघ वरदान प्रदान करते हैं।
महाशिवरात्रि २०२४: शास्त्रसम्मत शुभ मुहूर्त
द्रिक गणित पंचांग एवं सूर्य-सिद्धांत गणना के अनुसार वर्ष २०२४ (विक्रम संवत २०८१) में पूजन एवं अनुष्ठान के अत्यंत फलदायी मुहूर्त:
संपूर्ण पूजा सामग्री सूची (Checklist)
शास्त्रोक्त पूजन हेतु आवश्यक समस्त सामग्रियों का संग्रह पूर्व में ही कर लें:
चरणबद्ध एवं शास्त्रीय पूजा विधि
शास्त्रों में वर्णित प्रामाणिक विधि के अनुसार निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
पौराणिक व्रत कथा एवं धार्मिक इतिहास
शिवपुराण के विद्येश्वर संहिता के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के मध्य अपनी-अपनी श्रेष्ठता को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। तभी उनके मध्य एक अनंत ज्योतिर्मय लिंग प्रकट हुआ जिसका न आदि था न अंत। जब दोनों देव उसका छोर न पा सके, तब भगवान शिव उस अग्निस्तंभ से प्रकट हुए। वह दिन फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी था, जिसे महाशिवरात्रि कहा गया।
प्रमुख मंत्र, स्तुति व श्लोक
महामृत्युंजय संजीवनी मंत्र
क्या करें और क्या न करें (नियम व सावधानियां)
क्या करें (करणीय कार्य)
- शिवलिंग पर सदैव चिकनी सतह की ओर से ही बेलपत्र अर्पित करें।
- रुद्राक्ष माला से महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
क्या न करें (वर्जित कार्य)
- शिवजी की पूजा में केतकी का फूल, तुलसी दल व हल्दी न चढ़ाएं।
- शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा न करें।