दिव्य भक्ति नाद कैप्सूल
पूजन व ध्यान के समय पवित्र वातावरण निर्माण हेतु स्पर्श करें:
जगन्नाथ रथ यात्रा का परिचय एवं महात्म्य
पुरी धाम की विश्वप्रसिद्ध श्री जगन्नाथ रथ यात्रा सनातन संस्कृति का अद्वितीय महामहोत्सव है। इस पावन दिन स्वयं जगत के नाथ प्रभु जगन्नाथ अपने भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भव्य दिव्य रथों (नंदीघोष, तालध्वज, दर्पदलन) पर आरूढ़ होकर प्रजा को दर्शन देने नगर भ्रमण पर निकलते हैं।
स्कंद पुराण के अनुसार, जो मनुष्य रथ पर विराजमान भगवान जगन्नाथ के दर्शन करता है अथवा रथ की रस्सियों को खींचता है, उसे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति प्राप्त होती है ("रथे तु वामनं दृष्ट्वा पुनर्जन्म न विद्यते")। यह समता और भक्ति का सबसे बड़ा वैश्विक उत्सव है।
जगन्नाथ रथ यात्रा २०२७: शास्त्रसम्मत शुभ मुहूर्त
द्रिक गणित पंचांग एवं सूर्य-सिद्धांत गणना के अनुसार वर्ष २०२७ (विक्रम संवत २०८४) में पूजन एवं अनुष्ठान के अत्यंत फलदायी मुहूर्त:
संपूर्ण पूजा सामग्री सूची (Checklist)
शास्त्रोक्त पूजन हेतु आवश्यक समस्त सामग्रियों का संग्रह पूर्व में ही कर लें:
चरणबद्ध एवं शास्त्रीय पूजा विधि
शास्त्रों में वर्णित प्रामाणिक विधि के अनुसार निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
पौराणिक व्रत कथा एवं धार्मिक इतिहास
राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान जगन्नाथ के इस दिव्य दारु ब्रह्म विग्रह की स्थापना की थी। देवशिल्पी विश्वकर्मा जी ने शर्त रखी थी कि विग्रह निर्माण के समय कोई द्वार नहीं खोलेगा। किंतु रानी गुंडिचा की उत्सुकता पर राजा ने द्वार खोल दिया, जिससे प्रभु ने इसी अपूर्ण दिव्य स्वरूप में दर्शन दिए। प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को प्रभु अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं।
प्रमुख मंत्र, स्तुति व श्लोक
श्री जगन्नाथाष्टकम महामंत्र
क्या करें और क्या न करें (नियम व सावधानियां)
क्या करें (करणीय कार्य)
- रथ की रस्सी का स्पर्श व दर्शन अवश्य करें।
- जगन्नाथ महाप्रसाद को बिना किसी भेद के आदरपूर्वक ग्रहण करें।
क्या न करें (वर्जित कार्य)
- महाप्रसाद का कभी अनादर न करें।
- प्रभु के विग्रह के प्रति संशय न रखें।