भक्ति काव्य व भजन गुरुवार विशेष (भगवान श्री हरि विष्णु व गुरुदेव)

भगवान विट्ठल (पांडुरंग) के 108 पावन नाम अष्टोत्तर शतनामावली, मंत्र, अर्थ एवं फलश्रुति। Read Vitthal 108 Names with meaning in Hindi on Bhaktilok.

भगवान विट्ठल अष्टोत्तर शतनामावली पौराणिक परिचय एवं आध्यात्मिक रहस्य

सनातन धर्म और वारकरी संप्रदाय में भगवान विट्ठल (जिन्हें पांडुरंग या विठोबा भी कहा जाता है) की उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। महाराष्ट्र के पंढरपुर में चंद्रभागा नदी के तट पर विराजमान भगवान विट्ठल ईट पर खड़े होकर अपने भक्तों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ही अपने भक्त पुण्डलिक की माता-पिता की सेवा से प्रसन्न होकर विट्ठल रूप में प्रकट हुए थे। भगवान विट्ठल की यह अष्टोत्तर शतनामावली उनके अनंत गुणों, रूपों और कल्याणकारी स्वरूप का वर्णन करती है। इस शतनामावली का नित्य पाठ करने से साधक के जीवन में भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और शांति का संचार होता है। वारकरी संप्रदाय के संतों जैसे संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, संत नामदेव और संत एकनाथ ने इसी विट्ठल नाम की महिमा को घर-घर तक पहुँचाया। भगवान विट्ठल के 108 नामों का स्मरण करना मानव जन्म को सफल बनाने का एक सर्वोत्तम साधन माना गया है।

विट्ठल भक्ति का मर्म

वारकरी संप्रदाय में 'रामकृष्ण हरी' का महामंत्र जपते हुए विट्ठल चरणों में ध्यान लगाने से भवसागर तर जाता है। विट्ठल नाम का अर्थ ही है जो ज्ञान (विट्) और थल (स्थान) का आधार हो या जो ईट पर खड़े होकर भक्तवत्सलता का परिचय देते हैं।

विनियोग, ध्यान एवं नामावली जप संकल्प

किसी भी अष्टोत्तर शतनामावली या स्तोत्र के पाठ से पूर्व मानसिक पवित्रता और संकल्प अत्यंत आवश्यक है। भगवान विट्ठल के स्मरण के साथ विनियोग और ध्यान करने से जप का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

ध्यानम्:
कस्तुरी तिलक ललाट पटे, वक्षः कौस्तुभ शोभितं,
नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले, वेणुं करे कंकणं।
सर्वांगे हरिचंदनं परितृप्तं, कंठे च मुक्तामणिं,
गोपस्त्री परिवेष्टितो विजयते, गोपालकृष्णो विभुः ॥

भगवान विट्ठल के सम्पूर्ण 108 पावन नाम

नीचे भगवान विट्ठल (पांडुरंग) के 108 दिव्य नाम उनके संस्कृत मंत्र रूप (ॐ...नमः) और सरल हिंदी अर्थ के साथ दिए गए हैं:

भगवान विट्ठल की अष्टोत्तर शतनामावली का दार्शनिक और आध्यात्मिक महत्व

भगवान विट्ठल, जिन्हें महाराष्ट्र के जन-जन के प्राण-धन और वारकरी संप्रदाय के आराध्य पांडुरंग के रूप में पूजा जाता है, केवल एक मूर्ति नहीं बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड के करुणा सागर का जीवंत प्रतीक हैं। ईंट पर खड़े होकर अपने भक्तों की प्रतीक्षा करने वाले भगवान विट्ठल की यह अष्टोत्तर शतनामावली (108 पावन नाम) उनके विराट स्वरूप, लीलाओं और भक्त-वात्सल्य का अद्भुत वर्णन करती है। जब कोई साधक इन एक सौ आठ नामों का नित्य जप करता है, तो उसके भीतर चेतना का एक ऐसा प्रवाह जागृत होता है जो उसे भौतिकता के विकारों से मुक्त कर परम आध्यात्मिक शांति की ओर अग्रसर करता है। इन नामों का प्रत्येक अक्षर वेदों और उपनिषदों के सार को अपने भीतर समेटे हुए है, जो साधक के अंतःकरण को पवित्र करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

सनातन संस्कृति में नामजप को कलियुग में मोक्ष का सबसे सुगम और शक्तिशाली मार्ग माना गया है। विट्ठल नाम के उच्चारण मात्र से जीवन के समस्त क्लेश और संताप स्वतः ही शांत होने लगते हैं। अष्टोत्तर शतनामावली के ये 108 नाम भगवान के विभिन्न गुणों—जैसे उनकी करुणा, उनका भक्तों के प्रति अगाध प्रेम, उनका योगेश्वर रूप और उनकी पालक शक्ति—का सजीव चित्रण करते हैं। वारकरी संप्रदाय के महान संतों जैसे संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, संत नामदेव और संत एकनाथ ने हमेशा नामस्मरण को ही अपनी साधना का मुख्य आधार बनाया। उनका यह दृढ़ विश्वास था कि पांडुरंग के इन पवित्र नामों का स्मरण करने वाले को बैकुंठ जाने की भी आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि विट्ठल का नाम स्वयं ही बैकुंठ को भक्त के हृदय में ले आता है।

इन 108 नामों का जप करने की प्रक्रिया केवल एक यांत्रिक आवृत्ति नहीं है, बल्कि यह ईश्वर के साथ एक गाढ़ा भावनात्मक और मानसिक संबंध स्थापित करने का दिव्य माध्यम है। जब साधक एकाग्रचित्त होकर 'ॐ विठ्ठलाय नमः', 'ॐ पांडुरंगाय नमः', या 'ॐ पंढरीनाथाय नमः' जैसे नामों का उच्चारण करता है, तो उसके श्वास-प्रश्वास में एक पावन स्पंदन उत्पन्न होता है। यह स्पंदन चक्रों को संतुलित करता है, मन की चंचलता को दूर करता है और साधक को गहरे ध्यान की अवस्था में ले जाता है। नामजप की यह साधना आंतरिक शुद्धि का सबसे बड़ा अनुष्ठान है, जो मनुष्य को अहंकार और ममत्व के बंधनों से मुक्त कर भगवत्प्रेम की रसधारा में डुबो देती है.

पंढरपुर के पवित्र धाम में भीमा नदी (चंद्रभागा) के तट पर विराजमान भगवान विट्ठल के इन नामों का स्मरण करने से व्यक्ति के पिछले जन्मों के संचित कर्म भी क्षीण होने लगते हैं। पांडुरंग का रूप अत्यंत सरल और करुणामयी है, और उनके नाम भी उतने ही सुलभ और प्रभावकारी हैं। जो व्यक्ति अपने व्यस्त दैनिक जीवन में भी नियमित रूप से इस शतनामावली का पाठ करता है, उसे भगवान विट्ठल की असीम कृपा सहज ही प्राप्त हो जाती है। यह नामावली न केवल मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में धैर्य, संयम, भक्ति और आनंद का संचार करती है।

भगवान विट्ठल की संपूर्ण अष्टोत्तर शतनामावली (108 पावन नाम)

भगवान श्री विट्ठल के इन 108 पावन नामों का पाठ पूरी श्रद्धा, नियम और पवित्रता के साथ किया जाना चाहिए। प्रत्येक नाम के अंत में 'नमः' का उच्चारण करते हुए भगवान के चरणों में मानसिक रूप से पुष्प अर्पित करने की भावना रखनी चाहिए। यहाँ भगवान पांडुरंग की संपूर्ण अष्टोत्तर शतनामावली प्रस्तुत है:

क्र.सं.दिव्य नाम (मंत्र रूप)प्रमुख भावार्थ (सरल हिंदी अर्थ)
1ॐ विठ्ठलाय नमःविट्ठल अर्थात जो परम ज्ञान और ईट पर आसीन हैं
2ॐ पाण्डुरंगाय नमःजिनका वर्ण श्वेत या गौर आभायुक्त है
3ॐ कृष्णाय नमःजो स्वयं पूर्णब्रह्म श्रीकृष्ण हैं
4ॐ विष्णुवे नमःजो संपूर्ण जगत के पालनहार विष्णु हैं
5ॐ मधुसूदनाय नमःमधु नामक राक्षस का वध करने वाले
6ॐ केशवाय नमःसुंदर केश वाले या केशी का वध करने वाले
7ॐ माधवाय नमःमाता लक्ष्मी के पति या मधु कुल में उत्पन्न
8ॐ हृषिकेशाय नमःइंद्रियों के स्वामी
9ॐ पद्मनाभाय नमःजिनकी नाभि से कमल उत्पन्न हुआ है
10ॐ गोविंदाय नमःगायों और पृथ्वी को प्रसन्न करने वाले
11ॐ अच्युताय नमःजो कभी अपने पद से च्युत नहीं होते
12ॐ अनन्ताय नमःजिनका कोई अंत नहीं है
13ॐ वासुदेवाय नमःवसुदेव के पुत्र और सर्वव्यापी
14ॐ त्रिविक्रमाय नमःतीन पगों में तीनों लोकों को नापने वाले
15ॐ श्रीलक्षणाय नमःशुभ लक्षणों से युक्त
16ॐ दामोदराय नमःजिनका उधर माता यशोदा द्वारा रस्सी से बंधा गया था
17ॐ नारायणाय नमःसमस्त जीवों के आश्रय
18ॐ पुरुषोत्तमाय नमःपुरुषों में उत्तम
19ॐ वैकुण्ठनाथाय नमःवैकुण्ठ धाम के स्वामी
20ॐ भक्तवत्सलाय नमःभक्तों से प्रेम करने वाले
21ॐ पुण्डलिकप्रियाय नमःभक्त पुण्डलिक को प्रिय
22ॐ भीमाशंकरप्रियाय नमःभीमा नदी के तट पर निवास करने वाले
23ॐ चंद्रभागातिथये नमःचंद्रभागा नदी के तट के अतिथि
24ॐ विटस्थिताय नमःईट पर खड़े रहने वाले
25ॐ कटिहस्ताय नमःकमर पर दोनों हाथ रखे हुए
26ॐ शंखचक्रधराय नमःशंख और चक्र धारण करने वाले
27ॐ गदापद्मधराय नमःगदा और पद्म धारण करने वाले
28ॐ किरीटकुण्डलशोभिताय नमःमुकुट और कुंडल से सुशोभित
29ॐ वनमालिने नमःवनों की माला पहनने वाले
30ॐ पीतवाससे नमःपीतांबर वस्त्र धारण करने वाले
31ॐ श्रीकंठाय नमःसुंदर कंठ वाले
32ॐ कौस्तुभमणिभूषिताय नमःकौस्तुभ मणि से सुशोभित
33ॐ भक्तप्रियकराय नमःभक्तों को प्रिय करने वाले
34ॐ दीनबंधवे नमःदीनों और गरीबों के बंधु
35ॐ करुणासिंधवे नमःदया के सागर
36ॐ भक्तार्तिनाशनाय नमःभक्तों के दुखों का नाश करने वाले
37ॐ संसारमोचकाय नमःसंसार रूपी बंधन से मुक्त करने वाले
38ॐ भवसागरतारकाय नमःभवसागर से पार लगाने वाले
39ॐ ज्ञानप्रदाय नमःज्ञान प्रदान करने वाले
40ॐ मुक्तिप्रदाय नमःमोक्ष प्रदान करने वाले
41ॐ भुक्तिमुक्तिप्रदायकाय नमःभोग और मोक्ष दोनों देने वाले
42ॐ योगिने नमःयोगियों के ध्येय
43ॐ योगेश्वराय नमःयोगियों के ईश्वर
44ॐ योगनिधिने नमःयोग के खजाने
45ॐ परमत्मने नमःपरम आत्मा
46ॐ परात्पराय नमःपरा से भी परे सर्वोच्च सत्ता
47ॐ जगन्नाथाय नमःसंसार के नाथ
48ॐ जगद्गुरवे नमःसंसार के गुरु
49ॐ जगत्पात्राय नमःसमस्त जगत के आधार
50ॐ जगत्साक्षिणे नमःसंसार के साक्षी
51ॐ सर्वभूतात्मने नमःसब भूतों की आत्मा
52ॐ सर्वेश्वराय नमःसबके ईश्वर
53ॐ सर्वज्ञाय नमःसब कुछ जानने वाले
54ॐ सर्वव्यापिने नमःसब जगह व्याप्त
55ॐ सर्वमंगलाय नमःसबका कल्याण करने वाले
56ॐ शरण्यप्रियाय नमःशरण में आए हुओं को प्रिय
57ॐ आर्तिहरताय नमःपीड़ा हरने वाले
58ॐ संकटमोचकाय नमःसंकटों से छुड़ाने वाले
59ॐ दुष्टनिर्दलनाय नमःदुष्टों का नाश करने वाले
60ॐ साधुपालकाय नमःसज्जनों की रक्षा करने वाले
61ॐ धर्मसंस्थापकाय नमःधर्म की स्थापना करने वाले
62ॐ सत्यसंधाय नमःसत्य प्रतिज्ञा वाले
63ॐ सत्यप्रियाय नमःसत्य प्रिय
64ॐ धर्मप्रियाय नमःधर्म प्रिय
65ॐ भक्तवाञ्छाकल्पद्रुमाय नमःभक्तों की इच्छा पूरी करने वाले कल्पवृक्ष
66ॐ कामधेनुस्वरूपाय नमःकामधेनु के समान फल देने वाले
67ॐ चिंतामणिप्रभवे नमःचिंतामणि के समान प्रभाव वाले
68ॐ शान्ताय नमःशांत स्वरूप
69ॐ दान्ताय नमःइंद्रियों को वश में रखने वाले
70ॐ क्षमाशीलाय नमःक्षमा के भंडार
71ॐ करुणानिधये नमःदया के खजाने
72ॐ तेजस्विने नमःतेजपुंज
73ॐ वर्चस्विने नमःदीप्तिमान
74ॐ यशस्विने नमःयश प्राप्त
75ॐ सर्वलोकमंगलाय नमःसभी लोकों का मंगल करने वाले
76ॐ सर्वरोगनिवारकाय नमःसभी रोगों का निवारण करने वाले
77ॐ आयुःप्रदाय नमःलंबी आयु देने वाले
78ॐ धनप्रदाय नमःधन और ऐश्वर्य देने वाले
79ॐ ऐश्वर्यप्रदायकाय नमःपरम ऐश्वर्य दाता
80ॐ पुत्रपौत्रप्रदाय नमःवंश वृद्धि करने वाले
81ॐ विद्याप्रदाय नमःविद्या और बुद्धि देने वाले
82ॐ बुद्धिवर्धकाय नमःबुद्धि को बढ़ाने वाले
83ॐ स्मृतिप्रदाय नमःस्मरण शक्ति देने वाले
84ॐ कीर्तिप्रदाय नमःकीर्ति फैलाने वाले
85ॐ बलप्रदाय नमःशारीरिक और आत्मिक बल देने वाले
86ॐ उत्साहवर्धकाय नमःउत्साह बढ़ाने वाले
87ॐ निर्भयप्रदाय नमःभय दूर करने वाले
88ॐ शोकनिवारकाय नमःशोक का निवारण करने वाले
89ॐ भयहरताय नमःभय हरने वाले
90ॐ दुःस्वप्ननाशनाय नमःबुरे सपनों का नाश करने वाले
91ॐ पापनाशनाय नमःपापों का नाश करने वाले
92ॐ पुण्यरक्षकाय नमःपुण्य की रक्षा करने वाले
93ॐ पवित्राय नमःपरम पवित्र
94ॐ मंगलाय नमःमंगलस्वरूप
95ॐ शुभाय नमःशुभकारी
96ॐ अच्युतप्रियाय नमःअच्युत को प्रिय
97ॐ गरुड़ध्वजाय नमःगरुड़ जिनका चिह्न है
98ॐ शेषशायिने नमःशेषनाग पर शयन करने वाले
99ॐ क्षीरसागरवासिने नमःक्षीरसागर में निवास करने वाले
100ॐ रमानाथाय नमःमाता लक्ष्मी के नाथ
101ॐ कमलोदराय नमःकमल के समान पेट वाले
102ॐ वनमालाधराय नमःवनमाला धारण करने वाले
103ॐ मुरारये नमःमुर राक्षस के शत्रु
104ॐ कंसनाशाय नमःकंस का वध करने वाले
105ॐ कालमर्धनाय नमःकाल का मर्दन करने वाले
106ॐ भक्तवल्लभाय नमःभक्तों के वल्लभ
107ॐ पाण्डुरंगविठ्ठलाय नमःपांडुरंग रूपी विट्ठल
108ॐ श्रीविठ्ठलस्वामिने नमःसमस्त जगत के स्वामी श्री विट्ठल
क्रम संख्या भगवान विट्ठल का पावन नाम क्रम संख्या भगवान विट्ठल का पावन नाम
१ॐ विठ्ठलाय नमः५५ॐ योगिने नमः
२ॐ पांडुरंगाय नमः५६ॐ योगप्रदाय नमः
३ॐ पंढरीनाथाय नमः५७ॐ ब्रह्मणे नमः
४ॐ भीमावरतीरस्थाय नमः५८ॐ परब्रह्मणे नमः
५ॐ चंद्रभागा-तटस्थाय नमः५९ॐ सच्चिदानंदविग्रहाय नमः
६ॐ पुंडरीकवरदाय नमः६०ॐ भक्तवत्सलाय नमः
७ॐ कृष्णाय नमः६१ॐ शरणागतवत्सलाय नमः
८ॐ विष्णवे नमः६२ॐ करुणासिंधवे नमः
९ॐ अच्युताय नमः६३ॐ दीनबंधवे नमः
१०ॐ अनंताय नमः६४ॐ आर्तत्राणपरायणाय नमः
११ॐ वासुदेवाय नमः६५ॐ करुणाकराय नमः
१२ॐ केशवाय नमः६६ॐ दयालवे नमः
१३ॐ माधवाय नमः६७ॐ सुलभभक्ताय नमः
१४ॐ गोविंदाय नमः६८ॐ दुर्लभदुरात्मने नमः
१५ॐ त्रिविक्रमाय नमः६९ॐ शांतये नमः
१६ॐ वामनाय नमः७०ॐ दान्ताय नमः
१७ॐ श्रीधराय नमः७१ॐ जितेन्द्रियाय नमः
१८ॐ हृषिकेशाय नमः७२ॐ कामजित्रे नमः
१९ॐ पद्मनाभाय नमः७३ॐ क्रोधजित्रे नमः
२०ॐ दामोदराय नमः७४ॐ लोभनाशाय नमः
२१ॐ संकर्षणाय नमः७५ॐ मोहहराय नमः
२२ॐ प्रद्युम्नाय नमः७६ॐ मदनाशाय नमः
२३ॐ अनिरुद्धाय नमः७७ॐ संसारतारकाय नमः
२४ॐ पुरुषोत्तमाय नमः७८ॐ भवभयनाशाय नमः
२५ॐ अधोक्षजाय नमः७९ॐ मृत्यंजय नमः
२६ॐ नारसिंहाय नमः८०ॐ अभयप्रदाय नमः
२७ॐ राघवाय नमः८१ॐ वरप्रदाय नमः
२८ॐ रामय नमः८२ॐ सर्वेश्वराय नमः
२९ॐ बालकृष्णाय नमः८३ॐ महेश्वराय नमः
३०ॐ मुरारये नमः८४ॐ सर्वभूतात्मने नमः
३१ॐ कंसमथनाय नमः८५ॐ विश्वात्मने नमः
३२ॐ दैत्यनाशाय नमः८६ॐ विश्वरूपिणे नमः
३३ॐ भक्तप्रियकाय नमः८७ॐ विश्वसंभवाय नमः
३४ॐ पुंडरीकाक्षाय नमः८८ॐ जगन्नाथाय नमः
३५ॐ गदाधराय नमः८९ॐ जगदीश्वराय नमः
३६ॐ शंखपाणिने नमः९०ॐ लोकनाथाय नमः
३७ॐ चक्रहस्ताय नमः९१ॐ भुवनपालांगकाय नमः
३८ॐ पद्महस्ताय नमः९२ॐ पुराणपुरुषाय नमः
३९ॐ वनमालिने नमः९३ॐ नव्याय नमः
४०ॐ पीतवाससे नमः९४ॐ ज्ञानाय नमः
४१ॐ श्रीकंठाय नमः९५ॐ विज्ञानमयाय नमः
४२ॐ कौस्तुभश्रियै नमः९६ॐ आनंदमयाय नमः
४३ॐ श्रीवत्सवक्षसे नमः९७ॐ सत्यरूपिणे नमः
४४ॐ गरुडध्वजाय नमः९८ॐ धर्मरक्षकाय नमः
४५ॐ शेषाशयाय नमः९९ॐ पापनाशाय नमः
४६ॐ जगन्मूलाय नमः१००ॐ पुनीतकीर्तये नमः
४७ॐ जगत्पात्राय नमः१०१ॐ नामप्रियाय नमः
४८ॐ जगत्सृष्ट्रे नमः१०२ॐ भक्तदासाय नमः
४९ॐ जगत्पालकाय नमः१०३ॐ ईंटस्थितपदद्वयाय नमः
५0ॐ जगत्हर्त्रे नमः१०४ॐ कटिहस्तमूर्तये नमः
५१ॐ मायामयाय नमः१०५ॐ समचरणाय नमः
५२ॐ योगिने नमः१०६ॐ मुकुंदाय नमः
५३ॐ योगेश्वराय नमः१०७ॐ विमुक्तये नमः
५४ॐ योगनिधये नमः१०८ॐ श्रीपांडुरंगविट्ठलाय नमः

अष्टोत्तर शतनामावली का यह क्रम भगवान विट्ठल के बाल्यकाल से लेकर उनके परम ब्रह्म स्वरूप तक की संपूर्ण यात्रा को हमारे समक्ष प्रस्तुत करता है। इन नामों में 'ईंटस्थितपदद्वयाय' और 'कटिहस्तमूर्तये' जैसे नाम सीधे तौर पर उनकी उस अद्वितीय मूर्ति का वर्णन करते हैं, जिसमें वे अपनी कमर पर दोनों हाथ धरे ईंट पर खड़े हैं। यह मुद्रा इस बात का प्रतीक है कि भगवान अपने भक्तों की पुकार सुनने के लिए हमेशा तत्पर हैं और जो भी उनकी शरण में आता है, वे उसे अपनी पनाह में ले लेते हैं। इन नामों का सस्वर पाठ करने से साधक को मानसिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर असीम शांति की प्राप्ति होती है.

नाम जप की विधि, नियम और विशेष फलश्रुति

"कलौ नाम च नाम च नामैव मम जीवनम्। विट्ठल नामस्मरेत् यस्तु तस्य मुक्तिः करे स्थिता॥"

भगवान विट्ठल की इस अष्टोत्तर शतनामावली का जप करने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है ताकि साधना का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। प्रातःकाल ब्रह्म बेला में स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अपने घर के पूजा गृह में भगवान विट्ठल और रखुमाई (रुक्मिणी) की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक और धूप प्रज्वलित करें। आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। तुलसी की माला या स्फटिक की माला का उपयोग नाम जप के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। जप करते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और समर्पण का भाव होना चाहिए, क्योंकि भगवान बाहरी दिखावे से अधिक भक्त के आंतरिक भाव को महत्व देते हैं।

इस शतनामावली के पाठ और जप की फलश्रुति का वर्णन विभिन्न संतों और पुराणों में मिलता है। जो भक्त पूर्ण नियम और निष्ठा के साथ इस अष्टोत्तर शतनामावली का प्रतिदिन पाठ करता है, उसके जीवन से दरिद्रता, भय, मानसिक अशांति और अज्ञान का अंधकार हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। पांडुरंग की कृपा से उसके परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। स्वास्थ्य लाभ, लंबी आयु, और यश की प्राप्ति के लिए यह जप अचूक औषधि के समान कार्य करता है। विशेषकर एकादशी तिथि, आषाढ़ी एकादशी, और कार्तिकी एकादशी के पावन अवसरों पर इस शतनामावली का अनुष्ठान करने से कई गुना अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

अंततः, भगवान विट्ठल के 108 पावन नामों का यह जप साधक को भवसागर से पार लगाने वाली नौका के समान है। यह केवल मोक्ष का साधन नहीं है, बल्कि जीवन को जीने की एक दिव्य कला भी सिखाता है। जब मनुष्य अपने हर श्वास के साथ विट्ठल नाम का स्मरण करने लगता है, तो उसका अंतःकरण मंदिर बन जाता है और उसे हर जगह पांडुरंग के ही दर्शन होने लगते हैं। आइए, हम सब भी अपने जीवन को धन्य बनाने के लिए इस पावन अष्टोत्तर शतनामावली को अपने नित्य नियम का हिस्सा बनाएं और भगवान विट्ठल के चरणों में अपनी अनन्य भक्ति अर्पित करें। जय जय राम कृष्ण हरि!

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 29 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!