पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

यमुनोत्री धाम मंदिर — इतिहास, दर्शन समय, आरती एवं संपूर्ण यात्रा गाइड

165 दर्शनार्थी
यमुनोत्री, उत्तराखंड
प्रकाशित: 30 Sep 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
देवी यमुना
दर्शन समय सारिणी
सुबह 06:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक (दैनिक)
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 06:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:30 PM
स्थान / नगर
यमुनोत्री, उत्तराखंड
आराध्य देव
देवी यमुना
दर्शन समय
सुबह 06:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक (दैनिक)
आरती समय
मंगला आरती: 06:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:30 PM
स्थान / धाम
यमुनोत्री धाम, जिला उत्तरकाशी, उत्तराखंड - 249141
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पठन थीम:

यमुनोत्री धाम: एक परिचय

यमुनोत्री धाम, उत्तराखंड के चार धामों में से प्रथम धाम है। यह पवित्र यमुना नदी का उद्गम स्थल है। समुद्र तल से 3,293 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह मंदिर देवी यमुना को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यमुना सूर्य देव की पुत्री और यमराज की बहन हैं। यहाँ की यात्रा न केवल शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण है, बल्कि आध्यात्मिक रूप से अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

पौराणिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

स्कंद पुराण के अनुसार, यमुनोत्री का क्षेत्र 'अमृता' के नाम से जाना जाता था। कहा जाता है कि ऋषि असित मुनि का आश्रम यहीं था और वे प्रतिदिन यमुना और गंगा में स्नान करते थे। जब वे वृद्ध हो गए, तो यमुना ने स्वयं उनके आश्रम के पास प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिए। वर्तमान मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी में टिहरी की महारानी गुलेरिया द्वारा करवाया गया था, जो भूकंप और हिमस्खलन के कारण कई बार क्षतिग्रस्त हुआ और पुनर्निर्मित किया गया।

वास्तुकला और गर्भगृह

यमुनोत्री मंदिर की वास्तुकला हिमालयी शैली की है। मंदिर का निर्माण मुख्य रूप से पत्थर और लकड़ी से हुआ है। गर्भगृह में देवी यमुना की काले संगमरमर की मूर्ति स्थापित है। मंदिर के ठीक बाहर 'सूर्य कुंड' और 'गौरी कुंड' स्थित हैं। सूर्य कुंड का जल अत्यंत गर्म होता है, जिसमें चावल और आलू पकाकर देवी को भोग लगाया जाता है।

प्रमुख अनुष्ठान और उत्सव

यमुनोत्री धाम में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर मंदिर के कपाट खुलते हैं और दीपावली के दिन भाई दूज के अवसर पर कपाट बंद कर दिए जाते हैं। शीतकाल में देवी यमुना की डोली खरसाली गाँव में स्थित मंदिर में स्थानांतरित कर दी जाती है।

यात्रा मार्ग और पहुँच

साधन विवरण
हवाई मार्ग निकटतम हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है।
रेल मार्ग निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश या देहरादून है।
सड़क मार्ग जानकी चट्टी तक वाहन जाते हैं, जहाँ से 6 किलोमीटर की चढ़ाई पैदल, खच्चर या पालकी द्वारा होती है।

तीर्थयात्रियों के लिए सुझाव

यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने साथ पर्याप्त गर्म कपड़े, दवाइयाँ और पहचान पत्र रखें। मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखना अनिवार्य है।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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