पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

विरुपाक्ष मंदिर हंपी: विजयनगर साम्राज्य का गौरव और स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना

14 दर्शनार्थी
हंपी, कर्नाटक
प्रकाशित: 26 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
Lord Shiva (Virupaksha)
दर्शन समय सारिणी
सुबह 06:00 बजे से रात्रि 09:00 बजे तक (दैनिक)
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 06:30 AM | मध्याह्न पूजा: 12:30 PM | संध्या आरती: 07:30 PM | शयन आरती: 08:45 PM
स्थान / नगर
हंपी, कर्नाटक
आराध्य देव
Lord Shiva (Virupaksha)
दर्शन समय
सुबह 06:00 बजे से रात्रि 09:00 बजे तक (दैनिक)
आरती समय
मंगला आरती: 06:30 AM | मध्याह्न पूजा: 12:30 PM | संध्या आरती: 07:30 PM | शयन आरती: 08:45 PM
स्थान / धाम
Hampi Bazaar, Hampi, Vijayanagara District, Karnataka 583239
अक्षर आकार:
पठन थीम:

विरुपाक्ष मंदिर: विजयनगर साम्राज्य का आध्यात्मिक हृदय

हंपी की पावन भूमि पर स्थित विरुपाक्ष मंदिर न केवल एक ऐतिहासिक स्मारक है, बल्कि यह भगवान शिव के 'विरुपाक्ष' स्वरूप का एक जीवंत केंद्र है। तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित यह मंदिर विजयनगर साम्राज्य की वास्तुकला और भक्ति का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।

ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि

विरुपाक्ष मंदिर का इतिहास 7वीं शताब्दी से भी पुराना माना जाता है, हालांकि वर्तमान स्वरूप विजयनगर साम्राज्य के शासकों, विशेषकर कृष्णदेवराय के योगदान का परिणाम है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह स्थान भगवान शिव और माता पंपा देवी के विवाह का साक्षी है। 'विरुपाक्ष' का अर्थ है 'जिसकी आंखें तिरछी या विशेष हैं', जो भगवान शिव के उस स्वरूप को दर्शाता है जिसने कामदेव को भस्म किया था।

स्थापत्य कला का अद्भुत संगम

मंदिर का प्रवेश द्वार (गोपुरम) लगभग 50 मीटर ऊंचा है, जो विजयनगर वास्तुकला की भव्यता को दर्शाता है। मंदिर के भीतर के खंभों पर की गई नक्काशी, जिसमें पौराणिक कथाओं और रामायण के दृश्यों को उकेरा गया है, पर्यटकों और भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है। गर्भगृह में स्थित शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है, जिसकी ऊर्जा अत्यंत प्रभावशाली है।

दैनिक अनुष्ठान और दर्शन

मंदिर में प्रतिदिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त सुबह की मंगला आरती में भाग लेकर दिन की शुरुआत कर सकते हैं। मंदिर परिसर में स्थित अन्य छोटे मंदिरों में भी दर्शन करना एक अद्भुत अनुभव होता है।

प्रमुख उत्सव

फरवरी माह में आयोजित होने वाला 'रथोत्सव' (विरुपाक्ष रथ यात्रा) यहाँ का सबसे प्रमुख उत्सव है। इस दौरान हंपी की गलियां भक्ति के रंग में रंग जाती हैं। इसके अलावा महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष अभिषेक और हवन का आयोजन किया जाता है।

यात्रा निर्देश

हंपी तक पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा 'जिन्नदाल विजय नगर' है। रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए 'होसपेट जंक्शन' सबसे नजदीकी स्टेशन है। सड़क मार्ग से हंपी कर्नाटक के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

तीर्थयात्रियों के लिए सुझाव

मंदिर परिसर में प्रवेश करते समय शालीन वस्त्र धारण करें। फोटोग्राफी के लिए अनुमति का ध्यान रखें। मंदिर के आसपास कई धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं, जहाँ भक्त ठहर सकते हैं।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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