पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

उडुपी श्रीकृष्ण मठ: कनक दास की भक्ति और भगवान की पश्चिम मुखी प्रतिमा

20 दर्शनार्थी
उडुपी, कर्नाटक
प्रकाशित: 26 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
भगवान श्रीकृष्ण
दर्शन समय सारिणी
सुबह 04:00 बजे से रात्रि 09:00 बजे तक (दैनिक)
नित्य आरती समय
निर्मल्य विसर्जन: 04:00 AM | उषा काल पूजा: 04:30 AM | महापूजा: 11:30 AM | रात्रिपूजा: 08:00 PM
स्थान / नगर
उडुपी, कर्नाटक
आराध्य देव
भगवान श्रीकृष्ण
दर्शन समय
सुबह 04:00 बजे से रात्रि 09:00 बजे तक (दैनिक)
आरती समय
निर्मल्य विसर्जन: 04:00 AM | उषा काल पूजा: 04:30 AM | महापूजा: 11:30 AM | रात्रिपूजा: 08:00 PM
स्थान / धाम
Car Street, Udupi, Karnataka 576101
अक्षर आकार:
पठन थीम:

उडुपी श्रीकृष्ण मठ: एक आध्यात्मिक परिचय

उडुपी श्रीकृष्ण मठ, कर्नाटक के तटवर्ती क्षेत्र में स्थित एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक तीर्थ स्थल है। यह मठ न केवल अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह द्वैत दर्शन के प्रणेता श्री मध्वाचार्य की कर्मभूमि भी है। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण की बाल रूप प्रतिमा की पूजा की जाती है, जो अत्यंत दुर्लभ और अलौकिक है।

ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि

13वीं शताब्दी में श्री मध्वाचार्य ने इस मठ की स्थापना की थी। किंवदंती है कि भगवान श्रीकृष्ण की यह प्रतिमा उन्हें समुद्र के किनारे एक जहाज से प्राप्त हुई थी, जो चंदन की लकड़ी में लिपटी हुई थी। इस प्रतिमा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पश्चिम की ओर मुख करके स्थापित है, जबकि अधिकांश मंदिरों में प्रतिमाएं पूर्व की ओर होती हैं।

कनक दास और 'कनकन किंडी' (Kanaka's Window)

भक्त कनक दास की कथा इस मंदिर से अटूट रूप से जुड़ी है। कहा जाता है कि कनक दास को जाति के आधार पर मंदिर में प्रवेश नहीं दिया गया था। उन्होंने मंदिर की पिछली दीवार के पास बैठकर भगवान की स्तुति की। उनकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर, मंदिर की दीवार में एक दरार पड़ गई और भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्वयं घूमकर उनकी ओर मुख कर ली। आज भी भक्त 'कनकन किंडी' के माध्यम से भगवान के दर्शन करते हैं।

वास्तुकला और गर्भगृह

मंदिर की वास्तुकला द्रविड़ शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर का गर्भगृह अत्यंत शांत और ऊर्जावान है। यहाँ की प्रतिमा को 'बालकृष्ण' के रूप में पूजा जाता है, जिनके एक हाथ में मथानी और दूसरे में रस्सी है। मंदिर परिसर में 'अष्ट मठ' हैं, जो बारी-बारी से मंदिर के प्रबंधन और पूजा का दायित्व संभालते हैं।

दैनिक अनुष्ठान और दर्शन

मंदिर में प्रतिदिन 14 प्रकार की पूजाएं होती हैं। 'निर्मल्य विसर्जन' से लेकर 'शयन आरती' तक, हर अनुष्ठान का अपना आध्यात्मिक महत्व है। भक्तों के लिए दर्शन की व्यवस्था अत्यंत सुव्यवस्थित है।

पूजा का नामसमय
निर्मल्य विसर्जन04:00 AM
मंगला आरती05:30 AM
महापूजा11:30 AM
शयन आरती09:00 PM

प्रमुख उत्सव: पर्याय महोत्सव

उडुपी का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव 'पर्याय' है, जो हर दो वर्ष में आयोजित होता है। इसमें एक मठ से दूसरे मठ को मंदिर के प्रबंधन का अधिकार सौंपा जाता है। यह एक भव्य सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन होता है जिसे देखने के लिए दुनिया भर से श्रद्धालु आते हैं।

कैसे पहुंचें

  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा मैंगलोर (IXE) है, जो उडुपी से लगभग 60 किमी दूर है।
  • रेल मार्ग: उडुपी रेलवे स्टेशन कोंकण रेलवे मार्ग पर स्थित है और प्रमुख शहरों से जुड़ा है।
  • सड़क मार्ग: उडुपी राष्ट्रीय राजमार्ग 66 (NH 66) के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

आवास और सुविधाएं

मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित कई धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। 'अन्नब्रह्म' योजना के तहत प्रतिदिन हजारों भक्तों को निःशुल्क महाप्रसाद (भोजन) वितरित किया जाता है।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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