पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, तिरुवनंतपुरम (केरल)

101 दर्शनार्थी
तिरुवनंतपुरम, केरल
प्रकाशित: 30 Sep 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
भगवान अनंत पद्मनाभ (विष्णु)
दर्शन समय सारिणी
सुबह 03:30 बजे से 12:00 बजे तक और शाम 05:00 बजे से 07:20 बजे तक
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 03:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 06:45 PM | शयन आरती: 07:20 PM
स्थान / नगर
तिरुवनंतपुरम, केरल
आराध्य देव
भगवान अनंत पद्मनाभ (विष्णु)
दर्शन समय
सुबह 03:30 बजे से 12:00 बजे तक और शाम 05:00 बजे से 07:20 बजे तक
आरती समय
मंगला आरती: 03:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 06:45 PM | शयन आरती: 07:20 PM
स्थान / धाम
West Nada, Fort, East Fort, Pazhavangadi, Thiruvananthapuram, Kerala 695023
अक्षर आकार:
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श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर: एक परिचय

तिरुवनंतपुरम में स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर न केवल भारत का बल्कि विश्व का सबसे धनी मंदिर माना जाता है। यह मंदिर भगवान विष्णु के 'अनंत शयन' रूप को समर्पित है। यह 108 दिव्य देशों में से एक है और वैष्णव परंपरा में इसका अत्यंत उच्च स्थान है।

पौराणिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

स्कंद पुराण और ब्रह्म पुराण में इस मंदिर का उल्लेख मिलता है। किंवदंती है कि ऋषि दिवाकर मुनि ने भगवान विष्णु की घोर तपस्या की थी, जिसके परिणामस्वरूप भगवान उन्हें बालक के रूप में दर्शन दिए। बाद में, भगवान ने उन्हें अनंत के रूप में दर्शन दिए, जो इतने विशाल थे कि ऋषि को उनके दर्शन के लिए तीन द्वारों का उपयोग करना पड़ा।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः

वास्तुकला का अद्भुत संगम

यह मंदिर द्रविड़ और केरल शैली की वास्तुकला का एक अनूठा मिश्रण है। मंदिर का सात मंजिला गोपुरम (प्रवेश द्वार) अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल प्रतिमा है, जिसे 12,008 शालिग्राम पत्थरों से बनाया गया है।

द्वार दर्शन का विवरण
प्रथम द्वार भगवान विष्णु का मुख
द्वितीय द्वार भगवान विष्णु की नाभि
तृतीय द्वार भगवान विष्णु के चरण

दैनिक अनुष्ठान और दर्शन

मंदिर में दर्शन के लिए कड़े नियम हैं। भगवान की प्रतिमा को 'कडुशर्करा योगम' नामक एक विशेष आयुर्वेदिक लेप से ढका गया है। मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पूजाएं वैदिक परंपराओं के अनुसार होती हैं।

प्रमुख उत्सव

मंदिर में 'अल्पसी' और 'पंगुनी' उत्सव मुख्य रूप से मनाए जाते हैं, जिसमें 'आराट्टू' जुलूस निकाला जाता है। इन अवसरों पर मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है।

यात्रा और ठहरने की व्यवस्था

तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डा मंदिर से मात्र 6 किमी दूर है। रेलवे स्टेशन भी पास ही स्थित है। मंदिर के आसपास कई धर्मशालाएं और होटल उपलब्ध हैं।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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