पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री कालीघाट शक्तिपीठ (कोलकाता, पश्चिम बंगाल)

21 दर्शनार्थी
कोलकाता, पश्चिम बंगाल
प्रकाशित: 26 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
माँ काली
दर्शन समय सारिणी
प्रातः 05:00 बजे से रात्रि 10:30 बजे तक (प्रत्येक दिन)
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 05:00 AM | महास्नान एवं भोग: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM | शयन आरती: 10:30 PM
स्थान / नगर
कोलकाता, पश्चिम बंगाल
आराध्य देव
माँ काली
दर्शन समय
प्रातः 05:00 बजे से रात्रि 10:30 बजे तक (प्रत्येक दिन)
आरती समय
मंगला आरती: 05:00 AM | महास्नान एवं भोग: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM | शयन आरती: 10:30 PM
स्थान / धाम
कालीघाट, कोलकाता, पश्चिम बंगाल - 700026
अक्षर आकार:
पठन थीम:

श्री कालीघाट शक्तिपीठ: परिचय एवं महिमा

पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी कोलकाता के हृदय स्थल पर आदिशक्ति माँ महाकाली का यह दिव्य धाम अवस्थित है। श्री कालीघाट शक्तिपीठ भारत के इक्यावन (51) शक्तिपीठों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के अंगों को काटा था, तब इस पवित्र स्थल पर माता के दाएं पैर की चार उंगलियां गिरी थीं। तब से यह स्थान तान्त्रिकों, अघोरियों और सामान्य गृहस्थ भक्तों के लिए परम मोक्ष दायिनी स्थली के रूप में प्रतिष्ठित है।

यह मंदिर आदि गंगा (हुगली नदी की मूल धारा) के तट पर स्थित है। 'कोलकाता' नाम की उत्पत्ति भी इसी पवित्र 'कालीक्षेत्र' या 'कालीघाट' से हुई मानी जाती है। यहाँ की अधिष्ठात्री देवी को 'दक्षिणकाली' के रूप में पूजा जाता है, जो अपने भक्तों के सभी प्रकार के भयों को दूर कर उन्हें मोक्ष और अभय प्रदान करती हैं।

पौराणिक पृष्ठभूमि एवं इतिहास

कालीघाट का उल्लेख विभिन्न पुराणों और तंत्र शास्त्रों में मिलता है। हालाँकि, वर्तमान मंदिर का मुख्य ढांचा लगभग दो सौ वर्ष पुराना है, जिसका निर्माण सन 1809 में साबर्ण राय चौधरी परिवार के संरक्षण में प्रारंभ हुआ था और इसे सन 1899 में पूर्ण किया गया था। इस मंदिर के इतिहास से अनेक संतों और महापुरुषों का नाम जुड़ा हुआ है। स्वामी रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानन्द और श्री रामकृष्ण की धर्मपत्नी माँ सारदा देवी का इस शक्तिपीठ से गहरा आध्यात्मिक संबंध रहा है।

वास्तुकला और गर्भगृह का रहस्य

कालीघाट मंदिर की वास्तुकला पारंपरिक बंगाली मंदिर वास्तुकला (चाला शैली) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें बाद के कालखंडों में आधुनिक तत्वों का भी समावेश किया गया है। मुख्य मंदिर के गुंबद पर पारंपरिक बंगाली चौ-चाला या आठ-चाला शैली की छाप दिखाई देती है।

गर्भगृह में स्थापित माता काली का विग्रह अत्यंत अद्वितीय और रहस्यमयी है। अन्य मंदिरों की माँ काली की मूर्तियों से भिन्न, यहाँ माता की तीन बड़ी आँखें, लंबी जीभ जो कि शुद्ध सोने की बनी है, और उनके चारों हाथ भी स्वर्ण निर्मित हैं। विग्रह में माता के हाथों में कटा हुआ सिर और खड़ग सुशोभित है। यह रूप प्रलयंकारी होने के साथ-साथ अत्यंत वात्सल्यमयी भी है, जो अपने शरणागत भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती है।

दैनिक दर्शन एवं पूजन समय सारणी

अनुष्ठान / सेवासमय
मंगला आरती एवं द्वार खुलनाप्रातः 05:00 बजे
नित्य पूजा एवं श्रृंगारप्रातः 06:00 बजे से 11:00 बजे तक
भोग आरती एवं राजभोगदोपहर 12:00 बजे से 12:30 बजे तक
मंदिर के पट बंद (विश्राम हेतु)दोपहर 02:00 बजे से 04:00 बजे तक
संध्या आरती एवं प्रकाश व्यवस्थासायंकाल 07:00 बजे से 08:00 बजे तक
शयन आरती और पट बंद होनारात्रि 10:30 बजे

प्रमुख पर्व एवं वार्षिक उत्सव

कालीघाट शक्तिपीठ में वर्ष भर उत्सवों का तांता लगा रहता है, जिनमें निम्नलिखित प्रमुख हैं:

  • काली पूजा (दीपावली): कार्तिक अमावस्या के दिन यहाँ माँ काली की महानिशा पूजा होती है, जिसमें लाखों की संख्या में भक्त देश-विदेश से दर्शन के लिए आते हैं।
  • दुर्गा पूजा: आश्विन मास के शारदीय नवरात्रों में यहाँ विशेष हवन, नवपत्रिका प्रवेश और महासप्तमी से महानवमी तक भव्य अनुष्ठान होते हैं।
  • अमावस्या तिथियां: प्रत्येक मास की अमावस्या को यहाँ तान्त्रिक साधना और विशेष निशा पूजा का विधान है।

यात्रा मार्गदर्शिका (कैसे पहुंचें)

वायु मार्ग (By Air): निकटतम हवाई अड्डा नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, दमदम (Kolkata Airport) है, जो मंदिर से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हवाई अड्डे से कैब या मेट्रो के माध्यम से आसानी से कालीघाट पहुँचा जा सकता है।

रेल मार्ग (By Rail): कोलकाता के प्रमुख रेलवे स्टेशन हावड़ा जंक्शन (Howrah) और सियालदह जंक्शन (Sealdah) हैं। हावड़ा से दूरी लगभग 10 किमी और सियालदह से लगभग 7 किमी है। यहाँ से टैक्सी, बस और लोकल ट्रेनों की सुविधा उपलब्ध है।

सड़क मार्ग (By Road): कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से देश के सभी प्रमुख शहरों से बेहतरीन ढंग से जुड़ा हुआ है। पश्चिम बंगाल परिवहन निगम (WBTC) और निजी बसें नियमित रूप से यहाँ के लिए चलती हैं।

आवास एवं तीर्थयात्री सुविधाएं

कोलकाता महानगर होने के कारण यहाँ सभी श्रेणियों के होटल, लॉज और विश्राम गृह प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय सेवा समितियों द्वारा संचालित धर्मशालाएं भी किफायती दरों पर मिल जाती हैं। मंदिर परिसर के आसपास शुद्ध शाकाहारी बंगाली और उत्तर भारतीय भोजनालय उपलब्ध हैं।

यात्रियों के लिए विशेष नियम और सुझाव

भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे मंदिर परिसर में अपनी व्यक्तिगत वस्तुओं का ध्यान रखें। गर्भगृह के भीतर अत्यधिक भीड़ होने के कारण कतारबद्ध होकर ही आगे बढ़ें। पारंपरिक वस्त्र पहनना उचित रहता है।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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