पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई (महाराष्ट्र)

210 दर्शनार्थी
मुंबई, महाराष्ट्र
प्रकाशित: 30 Sep 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
भगवान सिद्धिविनायक गणेश
दर्शन समय सारिणी
सुबह 05:30 बजे से रात्रि 09:50 बजे तक
नित्य आरती समय
काकड़ आरती: 05:30 AM | दोपहर भोग: 12:15 PM | संध्या आरती: 07:30 PM | शयन आरती: 09:50 PM
स्थान / नगर
मुंबई, महाराष्ट्र
आराध्य देव
भगवान सिद्धिविनायक गणेश
दर्शन समय
सुबह 05:30 बजे से रात्रि 09:50 बजे तक
आरती समय
काकड़ आरती: 05:30 AM | दोपहर भोग: 12:15 PM | संध्या आरती: 07:30 PM | शयन आरती: 09:50 PM
स्थान / धाम
एस.के. बोले मार्ग, प्रभादेवी, मुंबई, महाराष्ट्र 400028
अक्षर आकार:
पठन थीम:

श्री सिद्धिविनायक मंदिर: एक परिचय

मुंबई की व्यस्त जीवनशैली के बीच स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर आस्था का एक ऐसा केंद्र है, जहाँ लाखों भक्त अपनी मुरादें लेकर आते हैं। यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें 'विघ्नहर्ता' कहा जाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और स्थापना

इस मंदिर का निर्माण 19 नवंबर 1801 को लक्ष्मण विथु पाटिल और देउबाई पाटिल द्वारा किया गया था। किंवदंती है कि देउबाई नि:संतान थीं और उन्होंने भगवान गणेश से प्रार्थना की थी कि वे अन्य नि:संतान महिलाओं की इच्छा पूरी करें। तब से, इस मंदिर को 'नवसाचा गणपति' (मनोकामना पूरी करने वाले गणेश) के रूप में जाना जाता है।

वास्तुकला और गर्भगृह

मूल मंदिर एक छोटा सा ढांचा था, लेकिन आज यह एक भव्य बहुमंजिला इमारत है। गर्भगृह में भगवान गणेश की प्रतिमा काले पत्थर से बनी है, जो ढाई फीट ऊंची है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि गणेश जी की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है, जिसे 'सिद्धिविनायक' स्वरूप माना जाता है। उनके दोनों ओर रिद्धि और सिद्धि की प्रतिमाएं विराजमान हैं।

दैनिक अनुष्ठान और दर्शन

ॐ गं गणपतये नमः

मंदिर में प्रतिदिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा की जाती है। भक्तगण अपनी श्रद्धा के अनुसार अभिषेक और पूजा बुक कर सकते हैं। मंदिर का वातावरण अत्यंत शांत और ऊर्जावान है, जो भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।

प्रमुख उत्सव

उत्सव का नाम महत्व
गणेश चतुर्थी अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है
अंगारकी चतुर्थी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है

यात्रा और सुविधाएं

मंदिर मुंबई के प्रभादेवी इलाके में स्थित है। यहाँ तक पहुँचने के लिए लोकल ट्रेन (दादर स्टेशन) सबसे सुलभ साधन है। मंदिर परिसर में भक्तों के लिए जूता घर, सामान रखने की सुविधा और निःशुल्क प्रसाद की व्यवस्था है।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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