पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री सालासर बालाजी मंदिर, चूरू (राजस्थान)

203 दर्शनार्थी
सालासर, राजस्थान
प्रकाशित: 01 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
हनुमान जी (दाढ़ी-मूंछ वाले बालाजी)
दर्शन समय सारिणी
प्रातः 04:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक (विशेष अवसरों पर 24 घंटे खुला रहता है)
नित्य आरती समय
मंगला आरती: प्रातः 04:00 बजे | बाल भोग: सुबह 08:00 बजे | राजभोग आरती: दोपहर 12:00 बजे | संध्या आरती: सायं 07:30 बजे | शयन आरती: रात्रि 10:00 बजे
स्थान / नगर
सालासर, राजस्थान
आराध्य देव
हनुमान जी (दाढ़ी-मूंछ वाले बालाजी)
दर्शन समय
प्रातः 04:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक (विशेष अवसरों पर 24 घंटे खुला रहता है)
आरती समय
मंगला आरती: प्रातः 04:00 बजे | बाल भोग: सुबह 08:00 बजे | राजभोग आरती: दोपहर 12:00 बजे | संध्या आरती: सायं 07:30 बजे | शयन आरती: रात्रि 10:00 बजे
स्थान / धाम
श्री सालासर बालाजी मंदिर, सालासर, तहसील सुजानगढ़, जिला चूरू, राजस्थान - 331506
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श्री सालासर बालाजी मंदिर: एक परिचय

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के चूरू जिले में स्थित श्री सालासर बालाजी मंदिर भगवान हनुमान के देश के सबसे जाग्रत और चमत्कारी धामों में गिना जाता है। यह विश्व का इकलौता ऐसा मंदिर है जहाँ हनुमान जी बाल रूप में दाढ़ी और मूंछों से सुसज्जित हैं। यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु की झोली भर जाती है और संकटमोचन स्वयं अपने भक्तों के सभी दुखों को हर लेते हैं। प्रतिवर्ष यहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु देश के कोने-cone से पदयात्रा करके पहुँचते हैं और बालाजी महाराज के चरणों में अपनी हाजिरी लगाते हैं।

पौराणिक इतिहास और प्रकटीकरण की कथा

सालासर बालाजी के प्रकटीकरण से जुड़ी कहानी अत्यंत अद्भुत और चमत्कारी है। संवत 1811 (सन् 1754) की श्रावण शुक्ल नवमी को नागौर जिले के असोटिया गाँव में एक किसान अपने खेत की जुताई कर रहा था। अचानक उसका हल किसी कठोर वस्तु से टकराया। जब उसने उस स्थान की खुदाई की, तो वहाँ से हनुमान जी की एक पाषाण मूर्ति प्रकट हुई। वह मूर्ति ज़मीन से निकलते समय थोड़ी खंडित हो गई थी, जिसे किसान की पत्नी ने बड़े प्रेम और श्रद्धा से साफ किया।

उसी रात, असोटिया के जागीरदार को स्वप्न में बालाजी महाराज ने दर्शन दिए और आदेश दिया कि इस मूर्ति को एक गाड़ी में रखकर बिना किसी दिशा-निर्देशक के छोड़ दिया जाए। बैलगाड़ी जहाँ भी रुक जाए, वहीं इस विग्रह को स्थापित कर दिया जाए। बैलगाड़ी चलते-चलते सालासर गाँव पहुँची और वहीं रुक गई। उस समय सालासर में मोहनदास महाराज तपस्या कर रहे थे। उन्होंने दिव्य दृष्टि से पहचान लिया कि यह वही सिद्ध विग्रह है। तदुपरांत, सालासर में ही इस पावन मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। मोहनदास महाराज की समाधि भी मंदिर परिसर के पास ही स्थित है, जो भक्तों के लिए उतनी ही पूजनीय है।

अद्भुत वास्तुकला और गर्भगृह

सालासर बालाजी मंदिर की वास्तुकला राजस्थानी और नागर शैली का अनूठा संगम है। मंदिर का निर्माण मुख्य रूप से श्वेत संगमरमर (White Marble) से किया गया है, जो इसकी भव्यता और दिव्यता को चार चांद लगाता है।

  • गर्भगृह (Sanctum Sanctorum): गर्भगृह में हनुमान जी की मुखाकृति वाली सुसज्जित मूर्ति स्थापित है। विग्रह में हनुमान जी के मुख पर दिव्य दाढ़ी और मूंछें सुशोभित हैं, जो उनकी वीरता, परिपक्वता और तेजोमय स्वरूप का प्रतीक हैं। मूर्ति के आसपास चांदी के कलात्मक कार्य किए गए हैं।
  • सभा मंडप: मंदिर का मुख्य सभा मंडप बहुत विशाल है, जहाँ एक साथ हज़ारों श्रद्धालु बैठकर भजन-कीर्तन और हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं। मंडप की दीवारों और स्तंभों पर रामायण के प्रसंगों को सुंदर नक्काशी और चित्रों के माध्यम से उकेरा गया है।
  • शिखर: मंदिर का मुख्य शिखर अत्यंत ऊँचा और भव्य है, जिस पर स्वर्ण कलश और विशाल ध्वज लहराता रहता है।

दैनिक दर्शन एवं आरती का समय

मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए वर्ष के 365 दिन खुले रहते हैं। दैनिक दिनचर्या और विशेष अनुष्ठानों का समय इस प्रकार है:

आरती / दर्शन का समय समय (ग्रीष्म ऋतु) समय (शीत ऋतु)
मंगला आरती प्रातः 04:00 बजे प्रातः 04:30 बजे
बाल भोग प्रातः 08:00 बजे प्रातः 08:30 बजे
राजभोग आरती दोपहर 12:00 बजे दोपहर 12:30 बजे
संध्या आरती सायं 07:00 बजे सायं 07:30 बजे
शयन आरती रात्रि 10:00 बजे रात्रि 09:30 बजे

प्रमुख उत्सव और मेले

सालासर बालाजी धाम में साल भर धार्मिक अनुष्ठान चलते रहते हैं, लेकिन चैत्र पूर्णिमा और आश्विन पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले वार्षिक मेलों का विशेष महत्व है।

  • चैत्र पूर्णिमा मेला: इस अवसर पर राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से लाखों पदयात्री (संघ) सालासर पहुँचते हैं। पूरा कस्बा भगमय और राममय हो जाता है।
  • आश्विन पूर्णिमा मेला: शरद पूर्णिमा के पावन पर्व पर यहाँ भव्य उत्सव मनाया जाता है। बालाजी महाराज का विशेष शृंगार किया जाता है और छप्पन भोग का प्रसाद अर्पित किया जाता है।
  • हनुमान जयंती: वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को हनुमान जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन विशेष हवन, सुंदरकांड पाठ और विशाल भंडारे का आयोजन होता है।

कैसे पहुँचें सालासर बालाजी (Travel Guide)

सालासर राजस्थान के प्रमुख सड़क मार्गों से भली-भांति जुड़ा हुआ है। देश के किसी भी कोने से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है:

  1. हवाई मार्ग (By Air): निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जयपुर (Jaipur International Airport) है, जो सालासर से लगभग 170 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके अलावा बीकानेर हवाई अड्डा भी लगभग 160 किमी दूर है। एयरपोर्ट से टैक्सी या बस द्वारा आसानी से सालासर पहुँचा जा सकता है।
  2. रेल मार्ग (By Rail): निकटतम रेलवे स्टेशन सुजानगढ़ (25 किमी), रतनगढ़ (50 किमी) और सीकर (55 किमी) हैं। इन स्टेशनों से दिल्ली, जयपुर, बीकानेर और जोधपुर के लिए नियमित ट्रेनें चलती हैं।
  3. सड़क मार्ग (By Road): सालासर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-65 और NH-52) के माध्यम से जयपुर, सीकर, चूरू, नागौर और बीकानेर से जुड़ा हुआ है। राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम (RSRTC) और निजी लग्जरी बसें जयपुर, दिल्ली और सीकर से सालासर के लिए 24 घंटे उपलब्ध हैं।

आवास और यात्री सुविधाएं (Accommodation & Facilities)

सालासर आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए मंदिर ट्रस्ट और निजी संस्थाओं द्वारा बेहतरीन प्रबंध किए गए हैं:

  • धर्मशालाएं: मंदिर ट्रस्ट और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा संचालित दर्जनों आधुनिक धर्मशालाएं और विश्राम गृह उपलब्ध हैं, जहाँ बहुत कम शुल्क या निःशुल्क कमरे मिल जाते हैं।
  • भोजनशाला (Annakshetra): श्री सालासर बालाजी मंदिर समिति द्वारा संचालित निःशुल्क अन्नक्षेत्र में श्रद्धालुओं को भरपेट शुद्ध सात्विक भोजन प्रसादम कराया जाता है।
  • अन्य सुविधाएं: मंदिर परिसर के आसपास जूता घर, क्लॉक रूम (लॉकर सुविधा), मेडिकल सहायता और पेयजल के पर्याप्त इंतजाम हैं।
तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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