पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, खंडवा (मध्य प्रदेश)

196 दर्शनार्थी
ओंकारेश्वर, मध्य प्रदेश
प्रकाशित: 30 Sep 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
भगवान शिव (ओंकारेश्वर)
दर्शन समय सारिणी
सुबह 05:00 बजे से रात्रि 09:30 बजे तक (दैनिक)
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 05:00 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM | शयन आरती: 09:30 PM
स्थान / नगर
ओंकारेश्वर, मध्य प्रदेश
आराध्य देव
भगवान शिव (ओंकारेश्वर)
दर्शन समय
सुबह 05:00 बजे से रात्रि 09:30 बजे तक (दैनिक)
आरती समय
मंगला आरती: 05:00 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM | शयन आरती: 09:30 PM
स्थान / धाम
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, मांधाता द्वीप, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश - 450554
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पठन थीम:

श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: एक परिचय

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से चौथा है। यह मंदिर मांधाता नामक द्वीप पर स्थित है, जो नर्मदा और कावेरी नदियों के संगम पर बना है। इस द्वीप का आकार पवित्र 'ॐ' अक्षर जैसा है, जिसके कारण इसे ओंकारेश्वर कहा जाता है।

पौराणिक महत्व और इतिहास

स्कंद पुराण के अनुसार, विंध्य पर्वत ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया और वहां दो रूपों में प्रकट हुए - ओंकारेश्वर और अमलेश्वर। यह स्थान न केवल एक ज्योतिर्लिंग है, बल्कि सिद्ध क्षेत्र भी माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से, इस मंदिर का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है और मराठा काल में इसका जीर्णोद्धार किया गया था।

वास्तुकला की भव्यता

मंदिर की वास्तुकला नागर शैली और द्रविड़ शैली का अद्भुत मिश्रण है। मंदिर का शिखर पांच मंजिला है, जिसे 'सभा मंडप' के नाम से जाना जाता है। गर्भगृह में स्थित ज्योतिर्लिंग स्वयंभू है और इसे नर्मदा नदी के पत्थरों से निर्मित माना जाता है। मंदिर के खंभों पर की गई नक्काशी मध्यकालीन भारतीय वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।

दैनिक पूजा और अनुष्ठान

ओंकारेश्वर में प्रतिदिन पांच बार आरती होती है। भक्त यहां 'नर्मदा स्नान' के बाद ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक करते हैं। विशेष रूप से 'शयन आरती' का दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है, जब भगवान को विश्राम के लिए ले जाया जाता है।

प्रमुख उत्सव

  • महाशिवरात्रि: इस दिन मंदिर में लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ती है और विशेष अभिषेक किया जाता है।
  • कार्तिक पूर्णिमा: नर्मदा स्नान और दीपदान का विशेष महत्व है।
  • सावन मास: पूरे सावन महीने में शिव भक्तों का तांता लगा रहता है।

यात्रा गाइड

साधन विवरण
हवाई मार्ग निकटतम हवाई अड्डा इंदौर (देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट) है, जो लगभग 80 किमी दूर है।
रेल मार्ग ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन मुख्य स्टेशन है, जो इंदौर-खंडवा लाइन पर स्थित है।
सड़क मार्ग इंदौर, उज्जैन और खंडवा से नियमित बसें और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं।

आवास और सुविधाएं

मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित कई धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, निजी होटल भी उचित दरों पर मिल जाते हैं। मंदिर के पास 'अन्नक्षेत्र' में भक्तों के लिए निःशुल्क भोजन की व्यवस्था भी रहती है।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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