पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री खाटू श्याम जी मंदिर, सीकर (राजस्थान)

87 दर्शनार्थी
खाटू, राजस्थान
प्रकाशित: 30 Sep 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
बर्बरीक (श्री कृष्ण रूप)
दर्शन समय सारिणी
सुबह 05:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक (दैनिक)
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 05:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM | शयन आरती: 09:30 PM
स्थान / नगर
खाटू, राजस्थान
आराध्य देव
बर्बरीक (श्री कृष्ण रूप)
दर्शन समय
सुबह 05:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक (दैनिक)
आरती समय
मंगला आरती: 05:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM | शयन आरती: 09:30 PM
स्थान / धाम
खाटू श्याम जी मंदिर, खाटू, जिला- सीकर, राजस्थान - 332602
अक्षर आकार:
पठन थीम:

श्री खाटू श्याम जी: आस्था का महाकेंद्र

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम जी का मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह करोड़ों भक्तों की अटूट आस्था का प्रतीक है। महाभारत काल के वीर योद्धा बर्बरीक को कलयुग में 'श्याम' के रूप में पूजा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं उन्हें वरदान दिया था कि कलयुग में वे उनके नाम से पूजे जाएंगे।

पौराणिक पृष्ठभूमि और इतिहास

महाभारत के युद्ध के दौरान, बर्बरीक ने अपनी माता को वचन दिया था कि वह युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देंगे। उनकी अपार शक्ति को देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का वेश धारण किया और उनसे उनका 'शीर्ष' दान में मांग लिया। बर्बरीक के इस महान बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें कलयुग में अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया। कालांतर में, खाटू गांव में एक गाय के थन से स्वतः दुग्ध अभिषेक होने पर खुदाई की गई, जहाँ से यह दिव्य शीश प्रकट हुआ।

शीश के दानी की जय हो, हारे के सहारे की जय हो।

वास्तुकला और गर्भगृह

मंदिर का निर्माण मुख्य रूप से संगमरमर और पत्थरों से हुआ है। मंदिर का शिखर अत्यंत भव्य है। गर्भगृह में श्याम बाबा का शीश सुसज्जित है, जिसे अत्यंत सुंदर आभूषणों और पुष्पों से सजाया जाता है। मंदिर परिसर में 'श्याम कुंड' स्थित है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसी कुंड से बर्बरीक का शीश प्रकट हुआ था।

दर्शन और अनुष्ठान

मंदिर में दर्शन की व्यवस्था अत्यंत सुव्यवस्थित है। भक्तों को कतार में लगकर बाबा के दर्शन करने होते हैं। विशेष अवसरों पर 'निशान' (ध्वज) चढ़ाने की परंपरा है, जिसे भक्त पैदल यात्रा करके लाते हैं।

प्रमुख उत्सव

उत्सव महत्व
लक्खी मेला फाल्गुन मास का सबसे बड़ा आकर्षण
होली विशेष सजावट और उत्सव
जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव
एकादशी विशेष पूजा और दर्शन

यात्रा और ठहरने की व्यवस्था

निकटतम रेलवे स्टेशन 'रिंगस जंक्शन' है, जहाँ से मंदिर लगभग 17 किमी दूर है। जयपुर हवाई अड्डा निकटतम है। मंदिर के आसपास अनेक धर्मशालाएं और निजी होटल उपलब्ध हैं।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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