पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री बद्रीनाथ धाम मंदिर, चमोली (उत्तराखंड)

69 दर्शनार्थी
बद्रीनाथ, उत्तराखंड
प्रकाशित: 30 Sep 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
भगवान बद्रीनारायण (विष्णु)
दर्शन समय सारिणी
सुबह 04:30 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक और शाम 04:00 बजे से रात्रि 09:00 बजे तक
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 04:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM | शयन आरती: 09:00 PM
स्थान / नगर
बद्रीनाथ, उत्तराखंड
आराध्य देव
भगवान बद्रीनारायण (विष्णु)
दर्शन समय
सुबह 04:30 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक और शाम 04:00 बजे से रात्रि 09:00 बजे तक
आरती समय
मंगला आरती: 04:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:00 PM | शयन आरती: 09:00 PM
स्थान / धाम
बद्रीनाथ धाम, चमोली जिला, उत्तराखंड - 246422
अक्षर आकार:
पठन थीम:

श्री बद्रीनाथ धाम: हिमालय का आध्यात्मिक केंद्र

उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित श्री बद्रीनाथ धाम न केवल चार धामों में से एक है, बल्कि यह भगवान विष्णु के 108 दिव्य देशों में से सबसे प्रमुख माना जाता है। यह मंदिर समुद्र तल से 3,133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जो नर और नारायण पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित है।

पौराणिक पृष्ठभूमि और स्थापना

स्कंद पुराण के अनुसार, बद्रीनाथ धाम की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में की थी। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने यहाँ तपस्या की थी और देवी लक्ष्मी ने 'बद्री' (बेर) का रूप धारण कर उन्हें धूप और गर्मी से बचाने के लिए छाया प्रदान की थी, इसीलिए इसे 'बद्रीनाथ' कहा जाता है।

वास्तुकला और गर्भगृह

बद्रीनाथ मंदिर की वास्तुकला 'शंकुधारी' शैली (नगरा शैली का एक रूप) है। मंदिर का मुख्य द्वार 'सिंह द्वार' कहलाता है। गर्भगृह में भगवान बद्रीनारायण की एक मीटर लंबी शालिग्राम शिला की प्रतिमा है, जिसमें वे ध्यान मुद्रा में विराजमान हैं। मंदिर के गर्भगृह के ऊपर स्वर्ण मंडित शिखर है, जो दूर से ही भक्तों को आकर्षित करता है।

दैनिक अनुष्ठान और दर्शन

मंदिर के कपाट सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण बंद कर दिए जाते हैं (अक्टूबर/नवंबर से अप्रैल/मई तक)। कपाट खुलने के बाद, प्रतिदिन भगवान का अभिषेक, श्रृंगार और भोग आरती की जाती है। 'तप्त कुंड' में स्नान करना बद्रीनाथ यात्रा का एक अनिवार्य हिस्सा माना जाता है, जिसका जल प्राकृतिक रूप से गर्म रहता है।

प्रमुख उत्सव

  • बद्रीनाथ कपाट उद्घाटन: वसंत पंचमी के बाद शुभ मुहूर्त में।
  • माता मूर्ति का मेला: बद्रीनाथ की माता की स्मृति में आयोजित।
  • जन्माष्टमी: भगवान विष्णु के अवतार के रूप में विशेष पूजा।

यात्रा मार्ग

साधन विवरण
हवाई मार्ग निकटतम हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है। वहां से सड़क मार्ग द्वारा बद्रीनाथ तक पहुँचा जा सकता है।
रेल मार्ग निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश और हरिद्वार हैं।
सड़क मार्ग ऋषिकेश से बद्रीनाथ के लिए नियमित बसें और टैक्सी उपलब्ध हैं।
तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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