पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री माता वैष्णो देवी मंदिर, कटरा (जम्मू-कश्मीर)

152 दर्शनार्थी
कटरा, जम्मू और कश्मीर
प्रकाशित: 30 Sep 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
मां वैष्णो देवी (महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती)
दर्शन समय सारिणी
मंदिर 24x7 खुला रहता है (दैनिक)
नित्य आरती समय
मंगला आरती: सुबह 06:00 बजे | संध्या आरती: शाम 07:00 बजे
स्थान / नगर
कटरा, जम्मू और कश्मीर
आराध्य देव
मां वैष्णो देवी (महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती)
दर्शन समय
मंदिर 24x7 खुला रहता है (दैनिक)
आरती समय
मंगला आरती: सुबह 06:00 बजे | संध्या आरती: शाम 07:00 बजे
स्थान / धाम
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड, कटरा, जिला रियासी, जम्मू और कश्मीर - 182301
अक्षर आकार:
पठन थीम:

श्री माता वैष्णो देवी: एक दिव्य तीर्थ यात्रा

त्रिकुटा पर्वत की गोद में स्थित माता वैष्णो देवी का पावन धाम न केवल भारत का, बल्कि विश्व के सबसे महत्वपूर्ण शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ माँ भगवती तीन पिंडियों के रूप में विराजमान हैं, जो महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का प्रतीक हैं।

पौराणिक पृष्ठभूमि और इतिहास

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ वैष्णो देवी का जन्म त्रेता युग में हुआ था। उन्होंने धर्म की रक्षा और राक्षसों के संहार के लिए अवतार लिया। मान्यता है कि भैरवनाथ से बचने के लिए माँ ने इस गुफा में शरण ली थी और अंत में भैरवनाथ का वध कर उसे मोक्ष प्रदान किया। आज भी भक्त 'भैरव घाटी' के दर्शन के बिना यात्रा पूर्ण नहीं मानते।

वास्तुकला और गुफा का स्वरूप

माता का मुख्य गर्भगृह एक प्राकृतिक गुफा है। गुफा के भीतर तीन दिव्य पिंडियाँ हैं। वर्तमान में, श्राइन बोर्ड ने दर्शन के लिए नई गुफाओं का निर्माण किया है ताकि लाखों श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन प्राप्त हो सकें।

प्रमुख उत्सव और पर्व

  • नवरात्रि: वर्ष में दो बार आने वाली शारदीय और चैत्र नवरात्रि यहाँ भव्य रूप से मनाई जाती है।
  • अखंड ज्योति: गुफा में जलने वाली अखंड ज्योति भक्तों के लिए श्रद्धा का केंद्र है।

यात्रा और परिवहन

साधन विवरण
हवाई मार्ग निकटतम हवाई अड्डा जम्मू (IXJ) है, जो कटरा से लगभग 50 किमी दूर है।
रेल मार्ग कटरा रेलवे स्टेशन (SVDK) मुख्य केंद्र है, जो भारत के प्रमुख शहरों से जुड़ा है।
सड़क मार्ग कटरा जम्मू से राष्ट्रीय राजमार्ग NH-44 के माध्यम से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

आवास और सुविधाएं

श्राइन बोर्ड द्वारा कटरा और भवन पर विभिन्न धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। 'भोजन प्रसाद' के लिए बोर्ड द्वारा संचालित भोजनालयों में शुद्ध और सात्विक भोजन उचित मूल्य पर मिलता है।

जय माता दी!

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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