पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

गंगोत्री धाम मंदिर, उत्तरकाशी (उत्तराखंड)

100 दर्शनार्थी
गंगोत्री, उत्तराखंड
प्रकाशित: 30 Sep 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
देवी गंगा
दर्शन समय सारिणी
सुबह 06:00 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक और शाम 04:00 बजे से रात 08:00 बजे तक
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 06:00 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:45 PM | शयन आरती: 08:00 PM
स्थान / नगर
गंगोत्री, उत्तराखंड
आराध्य देव
देवी गंगा
दर्शन समय
सुबह 06:00 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक और शाम 04:00 बजे से रात 08:00 बजे तक
आरती समय
मंगला आरती: 06:00 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 07:45 PM | शयन आरती: 08:00 PM
स्थान / धाम
गंगोत्री मंदिर, जिला उत्तरकाशी, उत्तराखंड - 249135
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गंगोत्री धाम: एक परिचय

गंगोत्री धाम हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। यह स्थान देवी गंगा के अवतरण का प्रतीक माना जाता है। समुद्र तल से 3,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर भागीरथी नदी के तट पर स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा भगीरथ ने इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप देवी गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं।

ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि

स्कंद पुराण और अन्य धर्मग्रंथों के अनुसार, गंगोत्री का महत्व अद्वितीय है। कहा जाता है कि गंगा का वास्तविक उद्गम 'गोमुख' है, जो गंगोत्री से लगभग 19 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वर्तमान मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में गोरखा कमांडर अमर सिंह थापा द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर सफेद ग्रेनाइट पत्थरों से बना है और इसकी भव्यता देखते ही बनती है।

वास्तुकला और गर्भगृह

गंगोत्री मंदिर की वास्तुकला 'नागर शैली' का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर का शिखर लगभग 20 फीट ऊंचा है। गर्भगृह में देवी गंगा की चांदी की मूर्ति स्थापित है, जिसे अत्यंत श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। मंदिर के परिसर में देवी यमुना, सरस्वती, अन्नपूर्णा और भगवान शिव के छोटे मंदिर भी स्थित हैं।

दैनिक अनुष्ठान और आरती

गंगोत्री मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। संध्या आरती के समय गंगा नदी का दृश्य अत्यंत अलौकिक होता है। भक्तगण गंगा के शीतल जल में डुबकी लगाकर अपने पापों से मुक्ति की कामना करते हैं।

अनुष्ठान समय
मंगला आरती 06:00 AM
भोग आरती 12:00 PM
संध्या आरती 07:45 PM
शयन आरती 08:00 PM

प्रमुख उत्सव

गंगोत्री धाम में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर मंदिर के कपाट खुलते हैं और दीपावली के दिन भाई दूज पर कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान मंदिर को फूलों से भव्य रूप से सजाया जाता है।

यात्रा गाइड

हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है। यहाँ से टैक्सी द्वारा उत्तरकाशी होते हुए गंगोत्री पहुंचा जा सकता है।

रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है।

सड़क मार्ग: ऋषिकेश से गंगोत्री के लिए नियमित बसें और निजी वाहन उपलब्ध हैं।

आवास और सुविधाएं

गंगोत्री में मंदिर समिति द्वारा संचालित धर्मशालाएं और निजी होटल उपलब्ध हैं। तीर्थयात्रियों के लिए निःशुल्क भोजन (अन्नक्षेत्र) की व्यवस्था भी विभिन्न ट्रस्टों द्वारा की जाती है।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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