पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

श्री चितई गोलू देवता मंदिर, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)

23 दर्शनार्थी
चितई, उत्तराखंड
प्रकाशित: 26 Oct 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
गोलू देवता (न्याय के देवता)
दर्शन समय सारिणी
सुबह 06:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक (दैनिक)
नित्य आरती समय
प्रातः आरती: 07:00 AM | संध्या आरती: 07:30 PM
स्थान / नगर
चितई, उत्तराखंड
आराध्य देव
गोलू देवता (न्याय के देवता)
दर्शन समय
सुबह 06:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक (दैनिक)
आरती समय
प्रातः आरती: 07:00 AM | संध्या आरती: 07:30 PM
स्थान / धाम
चितई गोलू देवता मंदिर, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मार्ग, चितई, उत्तराखंड 263601
अक्षर आकार:
पठन थीम:

श्री चितई गोलू देवता मंदिर: न्याय के अधिष्ठाता का पावन धाम

उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में अल्मोड़ा से लगभग 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित 'चितई गोलू देवता मंदिर' न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह आस्था और न्याय का एक जीवंत केंद्र है। गोलू देवता को भगवान शिव का अवतार माना जाता है, जिन्हें कुमाऊं क्षेत्र में 'न्याय के देवता' (God of Justice) के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं, हजारों घंटियों और भक्तों द्वारा लिखित अर्जियों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।

पौराणिक पृष्ठभूमि और इतिहास

लोक मान्यताओं के अनुसार, गोलू देवता कत्यूरी राजाओं के वंशज थे। उन्हें 'ग्लू' या 'गोलज्यू' के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि वे अत्यंत न्यायप्रिय थे और अपनी प्रजा के दुखों को दूर करने के लिए सदैव तत्पर रहते थे। एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब वे युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए, तो उनका सिर चितई नामक स्थान पर गिरा, जिसके कारण यहाँ उनका मुख्य मंदिर स्थापित हुआ। भक्त मानते हैं कि आज भी गोलू देवता उन लोगों को न्याय दिलाते हैं जो सच्चे मन से अपनी व्यथा उनके सामने रखते हैं।

स्थापत्य कला और मंदिर परिसर

मंदिर की वास्तुकला पारंपरिक पहाड़ी शैली में है। मंदिर का गर्भगृह अत्यंत शांत और ऊर्जावान है। मंदिर परिसर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ लटकी हुई लाखों पीतल की घंटियाँ हैं। ये घंटियाँ उन भक्तों द्वारा अर्पित की जाती हैं जिनकी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। मंदिर के चारों ओर का वातावरण देवदार के वृक्षों से घिरा है, जो इसे एक अलौकिक शांति प्रदान करता है। यहाँ की दीवारों पर भक्तों द्वारा लिखे गए स्टाम्प पेपर और अर्जियां देखी जा सकती हैं, जिनमें वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए देवता से प्रार्थना करते हैं।

पूजा पद्धति और विशेष अनुष्ठान

चितई गोलू देवता मंदिर में पूजा की विधि अत्यंत सरल किंतु प्रभावशाली है। भक्त यहाँ अपनी समस्याओं को एक कागज या स्टाम्प पेपर पर लिखकर लाते हैं और उसे मंदिर में अर्पित करते हैं। माना जाता है कि गोलू देवता उस अर्जी को पढ़ते हैं और भक्त को न्याय दिलाते हैं। यहाँ कोई विशेष आडंबर नहीं है, केवल अटूट विश्वास ही प्रधान है।

प्रमुख उत्सव और मेले

मंदिर में वर्ष भर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन नवरात्रि और विशेष त्योहारों पर यहाँ भारी भीड़ होती है। यहाँ आयोजित होने वाले मेलों में स्थानीय संस्कृति और लोक संगीत की झलक देखने को मिलती है।

यात्रा गाइड (कैसे पहुंचें)

  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर (Pantnagar) है, जो लगभग 125 किमी दूर है।
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम (Kathgodam) है, जहाँ से अल्मोड़ा के लिए टैक्सी या बस आसानी से उपलब्ध है।
  • सड़क मार्ग: अल्मोड़ा शहर से चितई के लिए स्थानीय बसें और निजी टैक्सी सेवाएँ नियमित रूप से चलती हैं।

आवास और सुविधाएं

मंदिर के आसपास कई निजी गेस्ट हाउस और धर्मशालाएं उपलब्ध हैं। अल्मोड़ा शहर में ठहरने के लिए उत्तम होटल और रिसॉर्ट्स की सुविधा है। मंदिर परिसर में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है और भक्तों के लिए दर्शन की सुगम व्यवस्था है।

तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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