३८+ पावन त्यौहार विक्रम संवत २०८३ शास्त्रसम्मत मुहूर्त व विधियां

सनातन त्यौहार एवं पर्व निर्देशिका २०२६

समस्त हिंदू व्रत, पावन पर्वों एवं उत्सवों की तिथिवार प्रामाणिक सूची, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व शास्त्रोक्त महत्व।

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Hindu ११४
१३ मई २०२६, बुधवार

अपरा एकादशी 2026 - Apara Ekadashi 2026: व्रत, तिथि एवं महत्व

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी का कठोर व्रत, भगवान विष्णु को समर्पित | Strict fast dedicated to Lord Vishnu for cleansing sin...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu १२५
१४ मई २०२६, गुरुवार

Guru Pradosh Vrat 2026 – गुरु प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष) 14 मई, गुरुवार: भगवान शिव की संध्या आराधना

प्रदोष व्रत – कृष्ण पक्ष त्रयोदशी। गुरुवार के दिन शिव पूजन से बाधाओं का नाश, मनोकामना सिद्धि और गुरु ग्रह की कृपा। ...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu २४७
१५ मई २०२६, शुक्रवार

Vrishabha Sankranti 2026: सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश (15 May Friday) | Masik Shivratri

सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश का पर्व, मासिक शिवरात्रि का संयोग | Sun's transit into Taurus (Vrishabha Rashi), coin...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu २४२
१६ मई २०२६, शनिवार

Jyeshtha Amavasya 2026 | Vat Savitri Vrat | Shani Jayanti | ज्येष्ठ अमावस्या 2026

वट सावित्री व्रत, शनि जयंती और अमावस्या का त्रिवेणी संगम | Sacred confluence of New Moon, Vat Savitri fasting for h...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu ६०६
२५ मई २०२६, सोमवार

गंगा दशहरा 2026: ज्येष्ठ शुक्ल दशमी | Ganga Dussehra 2026: Jyeshtha Shukla Dashami

पवित्र गंगा का धरती पर अवतरण दिवस | Celebrating the descent of the sacred Ganges to Earth....

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu १०८
२७ मई २०२६, बुधवार

पद्मिनी एकादशी 2026: Padmini Ekadashi – Jyeshtha Shukla Ekadashi Vrat for Prosperity & Karma Removal

भगवान विष्णु को समर्पित पद्मिनी एकादशी का पवन व्रत | Sacred fast dedicated to Lord Vishnu that brings prosperity an...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu १००
२८ मई २०२६, गुरुवार

प्रदोष व्रत 2026 - Pradosh Vrat May 2026: शुक्ल प्रदोष, गुरुवार के दिन शिव कृपा

त्रयोदशी तिथि को सायंकाल भगवान शिव की विशेष आराधना का व्रत | Special twilight worship of Lord Shiva on Trayodashi, ...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu १८५
३१ मई २०२६, रविवार

Jyeshtha Adhika Purnima 2026: अधिक मास की पूर्णिमा (31 May Sunday) | सत्यनारायण व्रत एवं स्नान दान

अधिक ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा - पूर्णिमा व्रत, सत्यनारायण पूजा एवं पवित्र स्नान का विशेष दिन | Full Moon in Adhik Jy...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu ३६४
२८ अगस्त २०२६, शुक्रवार

रक्षा बंधन 2026

भाई-बहन के प्यार का पर्व | Festival of brother-sister love....

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu ३८०
०४ सितम्बर २०२६, शुक्रवार

जन्माष्टमी 2026

भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव | Birth celebration of Lord Krishna....

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu ४७०
१४ सितम्बर २०२६, सोमवार

गणेश चतुर्थी 2026

भगवान गणेश का आगमन | Arrival of Lord Ganesha....

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
Hindu २३३
१० अक्टूबर २०२६, शनिवार

नवरात्रि 2026

माँ दुर्गा की उपासना का पर्व | Festival worshipping Goddess Durga....

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि

सनातन पर्व परंपरा एवं वैदिक काल-गणना का विज्ञान

सनातन हिंदू परंपरा में प्रत्येक पर्व और त्यौहार केवल सामाजिक उत्सव नहीं हैं, बल्कि वे सूर्य, चंद्रमा, नक्षत्रों और ऋतु संक्रमण के गहन खगोलीय सामंजस्य पर आधारित आध्यात्मिक विज्ञान हैं। वैदिक काल से ही हमारे ऋषियों ने मानव जीवन को प्रकृति के साथ लयबद्ध करने हेतु इन पावन पर्वों का निर्धारण किया है।

१. उदया तिथि एवं काल-व्यापिनी तिथि का शास्त्रीय नियम

धर्मसिंधु एवं निर्णयसिंधु ग्रंथों के अनुसार, हिंदू धर्म में पर्वों का निर्णय मुख्य रूप से दो प्रमुख आधारों पर होता है:

  • उदया तिथि (Udaya Tithi): जिस तिथि में सूर्योदय होता है, दिनभर सामान्यतः उसी तिथि का प्रभाव माना जाता है (जैसे रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी व्रत, दशहरा)।
  • काल-विशिष्ट व्यापिनी तिथि (Kala Vyapini): कुछ पर्व विशिष्ट प्रहर में मनाए जाते हैं—जैसे दीपावली का लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त उपरांत) में, महाशिवरात्रि का रुद्राभिषेक निशीथ काल (मध्यरात्रि) में, और करवा चौथ का पारण चंद्रोदय काल में। ऐसे में उस विशिष्ट काल में उपस्थित तिथि को ही ग्रहण किया जाता है।

२. लूनी-सोलर (Lunisolar) समन्वय और अधिकमास

सौर वर्ष ३६५.२४२ दिन का और चंद्र वर्ष ३५४.३६ दिन का होता है। प्रतिवर्ष आने वाले लगभग ११ दिनों के अंतर को संतुलित करने हेतु प्रत्येक ३२ माह १६ दिन (लगभग ३ वर्ष) में चंद्र वर्ष में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे 'अधिकमास' या 'पुरुषोत्तम मास' कहा जाता है। इसी वैज्ञानिक सामंजस्य के कारण हिंदू त्यौहार हमेशा अपनी प्राकृतिक ऋतुओं के अनुसार ही आते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ: यह सामग्री वैदिक पंचांग, पुराणों एवं प्रतिष्ठित सनातन धर्मग्रंथों के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा शोधपरक रूप से तैयार की गई है।
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